# ऋषिकेश की स्वच्छता पर मंडराता खतरा: पर्यटकों की लापरवाही से बिगड़ रही है शहर की सूरत

> ऋषिकेश में पर्यटन के दौरान फैल रही प्लास्टिक की गंदगी ने पर्यावरण और गंगा की पवित्रता के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-07-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/rishikesha-ki-svachchhata-para-mndarata-khatara-paryatakon-ki-laparavahi-se-bigara-rahi-hai-shahara-ki-surata-rishikesh-6064 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऋषिकेश, स्वच्छता, गंगा प्रदूषण, पर्यटन, उत्तराखंड, पर्यावरण

योग नगरी के नाम से मशहूर उत्तराखंड का ऋषिकेश अपनी नैसर्गिक सुंदरता, शांत गंगा घाटों और साहसिक गतिविधियों के कारण पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। प्रतिवर्ष यहां लाखों की संख्या में सैलानी सुकून की तलाश में आते हैं, तो कई लोग रिवर राफ्टिंग और अन्य रोमांचक खेलों का आनंद लेने पहुंचते हैं। ये पर्यटक यहां से अपने साथ सुखद यादें तो ले जाते हैं, मगर दुर्भाग्यवश वे अपने पीछे कचरे का एक बड़ा अंबार छोड़ जाते हैं। पर्यटन का मौसम बीत जाने के बाद, ऋषिकेश के प्रमुख घाटों और नदी के किनारों की स्थिति काफी दयनीय हो जाती है।

## पर्यटन के नाम पर फैलती गंदगी
गंगा किनारे के इलाकों में प्लास्टिक की खाली बोतलें, स्नैक्स के रैपर, डिस्पोजेबल कप और खाने की प्लेटें बिखरी हुई नजर आती हैं। यह स्थिति न केवल ऋषिकेश की प्राकृतिक सुंदरता पर एक काला धब्बा है, बल्कि पर्यावरण के साथ-साथ गंगा की स्वच्छता के लिए भी एक बड़ा संकट बन चुकी है। ऋषिकेश केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि यह आस्था और संस्कृति का भी केंद्र है। यहां के मंदिरों की शांति, पहाड़ों के बीच से गुजरती पवित्र गंगा और घाटों पर होने वाली आरती देश-विदेश के लोगों को मंत्रमुग्ध कर देती है। स्थानीय लोगों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से होटल, कैफे, कैंपिंग और राफ्टिंग जैसे पर्यटन आधारित व्यवसायों पर टिकी है।

## जिम्मेदारी का अभाव
अखिलेश पांडेय जैसे स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या तब शुरू होती है जब पर्यटक अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं। अक्सर लोग गंगा के किनारे बैठकर भोजन करते हैं और उपयोग के बाद बचा हुआ कचरा वहीं छोड़ देते हैं। यह जमा हुआ कचरा जब बारिश के दौरान बहकर सीधे गंगा में प्रवेश करता है, तो इससे जल प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। स्थानीय प्रशासन और सफाई कर्मियों को पर्यटन सीजन के समापन के बाद इस कचरे को हटाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। हालांकि कई स्वयंसेवी संस्थाएं नियमित रूप से सफाई अभियान चलाती हैं, लेकिन पर्यटकों के सहयोग के बिना स्थिति में सुधार लाना कठिन है।

## पर्यावरण पर दीर्घकालिक असर
प्लास्टिक कचरा सिर्फ देखने में ही बुरा नहीं लगता, बल्कि यह लंबे समय तक मिट्टी और पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। प्लास्टिक के कई उत्पाद ऐसे हैं जो सालों तक नष्ट नहीं होते, जिससे आसपास के जीव-जंतुओं के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है। यदि गंगा जैसी पवित्र नदी में प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ मिलते रहे, तो यह नदी के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकता है। अतः पर्यटकों को यह समझना होगा कि एक स्वच्छ और सुंदर ऋषिकेश को बनाए रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति का कर्तव्य है जो इस अद्भुत जगह की यात्रा करने आता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** प्रमुख पर्यटन स्थलों पर कचरा फैलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान होता है, बल्कि वहां के स्थानीय पर्यटन उद्योग की छवि भी खराब होती है।

**ऋषिकेश में:** पर्यटकों को गंगा के तटों पर कचरा फेंकने से बचना चाहिए और अपने साथ लाए प्लास्टिक कचरे को हमेशा कूड़ेदान में ही डालना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. ऋषिकेश में प्रदूषण का मुख्य कारण क्या है?
ऋषिकेश में पर्यटकों द्वारा छोड़ी गई प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, डिस्पोजेबल कप और खाने के रैपर प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।

### 2. पर्यटन सीजन खत्म होने पर क्या समस्या होती है?
सीजन खत्म होने पर घाटों और नदी किनारों पर भारी मात्रा में कचरा जमा हो जाता है, जिसे साफ करने के लिए सफाई कर्मियों को काफी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।

### 3. प्लास्टिक कचरा गंगा को कैसे प्रभावित करता है?
बारिश के दौरान घाटों पर जमा हुआ प्लास्टिक बहकर गंगा में मिल जाता है, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता है और नदी का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।

### 4. क्या सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी है?
नहीं, एक साफ-सुथरा पर्यटन स्थल बनाए रखने के लिए पर्यटकों की भागीदारी प्रशासन के बराबर ही महत्वपूर्ण है।

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