# रोडवेज ने नाथद्वारा-पथमेड़ा रूट पर उतारी नई बस, जालोर-भीनमाल होते हुए पूरा टाइम टेबल जानें

> राजस्थान रोडवेज ने नाथद्वारा और पथमेड़ा के बीच नई सीधी बस सेवा शुरू की है, जिससे जालोर, भीनमाल, रानीवाड़ा और सांचौर होते हुए श्रद्धालुओं का सफर अब आसान हो जाएगा।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-07-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/rodaveja-ne-nathdwara-pathmeda-ruta-para-utari-nai-basa-jalore-bhinmal-hote-hue-pura-taima-tebala-janen-8200 · **Language:** Hindi
**Tags:** नाथद्वारा बस सेवा, पथमेड़ा रोडवेज, जालोर रोडवेज, राजस्थान रोडवेज बस, श्रद्धालु यात्रा, धार्मिक पर्यटन

राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) ने नाथद्वारा और पथमेड़ा के बीच सीधी बस सेवा शुरू कर दी है, जिससे इन दोनों प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं का सफर अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। जालोर, भीनमाल, रानीवाड़ा और सांचौर जैसे इलाकों से गुजरने वाली यह बस रोजाना दोनों दिशाओं में चलेगी।

## लंबे समय से थी मांग, अब मिली मंजूरी
नाथद्वारा-पथमेड़ा रूट पर नियमित बस सेवा शुरू करने की मांग काफी समय से उठ रही थी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की इस मांग को देखते हुए रोडवेज प्रबंध निदेशक प्रमोद पुरुषोत्तम शर्मा ने नई बस सेवा को स्वीकृति दे दी। भीनमाल रोडवेज बस स्टैंड प्रभारी कल्पेश जैन के मुताबिक, यह बस अब हर दिन दोनों तरफ से संचालित होगी, जिसका सीधा फायदा जालोर, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिलेगा।

## पथमेड़ा से नाथद्वारा तक का पूरा शेड्यूल
पथमेड़ा से यह बस रोजाना सुबह 8 बजे रवाना होगी। रास्ते में यह सुबह 8:30 बजे सांचौर, 9:30 बजे रानीवाड़ा, 10:30 बजे भीनमाल, दोपहर 12:30 बजे जालोर, दोपहर 2 बजे फालना, 3 बजे देसूरी और शाम 4 बजे गोमती पहुंचेगी। इसके बाद बस शाम 5 बजे अपने अंतिम पड़ाव नाथद्वारा पहुंच जाएगी।

## नाथद्वारा से पथमेड़ा तक का पूरा शेड्यूल
दूसरी तरफ, नाथद्वारा से यह बस रोजाना सुबह 7 बजे रवाना होगी। यह सुबह 8 बजे गोमती, 9 बजे देसूरी, 11 बजे फालना, दोपहर 12:30 बजे जालोर, दोपहर 2:30 बजे भीनमाल, 3:30 बजे रानीवाड़ा और शाम 4:30 बजे सांचौर पहुंचेगी। इसके बाद शाम 5 बजे बस पथमेड़ा पहुंच जाएगी।

## श्रद्धालुओं को मिलेगी सबसे बड़ी राहत
कल्पेश जैन के अनुसार, इस नई बस सेवा का सबसे ज्यादा फायदा उन श्रद्धालुओं को होगा जो नाथद्वारा और पथमेड़ा के धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं। अब तक यात्रियों को रास्ते में बीच-बीच में बस बदलनी पड़ती थी या फिर निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय भी ज्यादा लगता था और खर्च भी बढ़ जाता था। अब एक ही बस से यात्री सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

## धार्मिक पर्यटन और स्थानीय यात्रियों को भी फायदा
इस नई बस सेवा से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही रास्ते में पड़ने वाले फालना, देसूरी और गोमती जैसे कस्बों और आसपास के गांवों के लोगों के लिए भी आवागमन पहले से आसान हो जाएगा। नियमित बस सेवा शुरू होने से यात्रियों का समय बचेगा और उन्हें सुरक्षित, सस्ता तथा सुविधाजनक परिवहन साधन मिल सकेगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** नाथद्वारा और पथमेड़ा जैसे धार्मिक स्थलों पर दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को अब बस बदलने या निजी वाहन की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रा का खर्च और समय दोनों बचेंगे।
- **जालोर में:** जालोर, भीनमाल, रानीवाड़ा और सांचौर के स्थानीय लोगों को रोजाना सीधी बस मिलने से नाथद्वारा और पथमेड़ा तक आना-जाना अब पहले से काफी आसान और सस्ता हो जाएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. नाथद्वारा-पथमेड़ा बस सेवा किसने शुरू की?
राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) ने यह नई बस सेवा शुरू की है, जिसे प्रबंध निदेशक प्रमोद पुरुषोत्तम शर्मा ने मंजूरी दी।

### 2. यह बस रोजाना कितने बजे रवाना होती है?
पथमेड़ा से बस सुबह 8 बजे और नाथद्वारा से सुबह 7 बजे रवाना होती है।

### 3. यह बस किन-किन शहरों से होकर गुजरेगी?
यह बस सांचौर, रानीवाड़ा, भीनमाल, जालोर, फालना, देसूरी और गोमती से होकर गुजरेगी।

### 4. पथमेड़ा से चलने वाली बस नाथद्वारा कब पहुंचेगी?
पथमेड़ा से सुबह 8 बजे चलने वाली बस शाम 5 बजे नाथद्वारा पहुंचेगी।

### 5. नाथद्वारा से चलने वाली बस पथमेड़ा कब पहुंचेगी?
नाथद्वारा से सुबह 7 बजे रवाना होकर यह बस शाम 5 बजे पथमेड़ा पहुंचेगी।

### 6. इस बस सेवा से सबसे ज्यादा फायदा किसे होगा?
भीनमाल रोडवेज बस स्टैंड प्रभारी कल्पेश जैन के मुताबिक, इसका सबसे बड़ा फायदा नाथद्वारा और पथमेड़ा के दर्शन के लिए यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को मिलेगा।

### 7. पहले यात्रियों को इस रूट पर क्या दिक्कत होती थी?
पहले यात्रियों को रास्ते में बीच-बीच में बस बदलनी पड़ती थी या निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता था, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते थे।

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