# सहारनपुर के कंपनी बाग में बना बटरफ्लाई पार्क बना आकर्षण का केंद्र, 40 प्रजातियों की तितलियों का बना नया आशियाना

> सहारनपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस उद्यान में चार एकड़ में फैला बटरफ्लाई पार्क तितलियों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता का एक बड़ा केंद्र बन चुका है.

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/saharanpur-ke-company-garden-men-bana-bataraphlai-parka-bana-akarshana-ka-kendra-40-prajatiyon-ki-titaliyon-ka-bana-naya-ashiyana-33640 · **Language:** Hindi
**Tags:** सहारनपुर, बटरफ्लाई पार्क, कंपनी बाग, तितली संरक्षण, पर्यटन, पर्यावरण

प्रकृति प्रेमियों और बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में एक बेहद शांत और खूबसूरत ठिकाना तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक कंपनी गार्डन में विकसित तितली पार्क इन दिनों लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है. सुबह की सैर पर निकलने वाले नागरिक हों या शाम के वक्त सुकून तलाशते परिवार, हर कोई इस खास पार्क में कुछ पल बिताने और उड़ती हुई रंगीन तितलियों को करीब से देखने पहुंच रहा है.

## संरक्षण के इरादे से रखी गई थी नींव
पर्यावरण में तितलियों की कम होती तादाद और उनके अस्तित्व पर मंडराते संकट को देखते हुए इस अनूठी परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई थी. नेताजी सुभाषचंद्र बोस उद्यान यानी कंपनी बाग परिसर में इस तितली पार्क का उद्घाटन 26 जनवरी 2020 को किया गया था. उस समय सहारनपुर के तत्कालीन कमिश्नर संजय कुमार ने इसे जनता को समर्पित किया था. इस पूरे प्रयास का प्राथमिक मकसद तितलियों की विभिन्न नस्लों को फलने-फूलने का सुरक्षित दायरा देना और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना था.

## चार एकड़ में फैला प्राकृतिक पर्यावास
यह तितली पार्क उद्यान विभाग के लगभग चार एकड़ भूभाग पर तैयार किया गया है. इस पूरे प्रोजेक्ट को सहारनपुर विकास प्राधिकरण और उद्यान विकास समिति के साझा प्रयासों से धरातल पर उतारा गया है. पार्क का पूरा बुनियादी ढांचा इस तकनीक और बारीकी से डिजाइन किया गया है, जिससे तितलियों को उनकी प्राकृतिक जरूरतों के हिसाब से सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिल सके.

## 15 हजार से ज्यादा पौधों से सजा जीवनचक्र
पार्क के अंदर करीब 40 किस्म की तितलियों की वंशवृद्धि और पोषण के लिए विशेष वनस्पति लगाई गई है. इनके पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखते हुए 86 अलग-अलग किस्मों के कुल 15,590 होस्ट और नेक्टर पौधे रोपे गए हैं. ये खास पौधे तितलियों के अंडों से लेकर कैटरपिलर और वयस्क बनने तक के सफर में जरूरी भोजन और पराग मुहैया कराते हैं, जिससे उनका कुनबा प्राकृतिक रूप से बढ़ता रहे.

## जागरूकता और घटती आबादी की चिंता
पार्क केवल सैर-सपाटे का स्थान नहीं है, बल्कि यहां आने वाले आगंतुकों को तितलियों के जीवनचक्र और उनके पर्यावरणीय महत्व की विस्तृत जानकारी भी मिलती है. पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में तितलियां अत्यंत अहम भूमिका निभाती हैं. चिंताजनक पहलू यह है कि बीते तकरीबन 40 वर्षों के दौरान तितलियों की प्रजातियों में करीब 40 फीसदी तक की भारी कमी दर्ज की गई है. प्राकृतिक आवासों के विनाश, बढ़ते प्रदूषण और खेती में कीटनाशक दवाओं के अंधाधुंध छिड़काव ने इस खूबसूरत जीव पर गहरा नकारात्मक असर डाला है. ऐसे कठिन दौर में यह पार्क संरक्षण का व्यावहारिक उदाहरण बनकर प्रकृति की रक्षा का संदेश दे रहा है.

## इसका आप पर असर
सहारनपुर का यह तितली पार्क शहरवासियों को प्रकृति के करीब लाने और तितलियों के घटते कुनबे को बचाने के लिए एक शांत और शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराता है.

- **सहारनपुर में:** स्थानीय नागरिकों और परिवारों को वीकेंड तथा सुबह-शाम टहलने के लिए एक हरा-भरा प्राकृतिक स्थान मिलता है. यहां बच्चे और बड़े किताबों से बाहर निकलकर सीधे पर्यावरण संरक्षण और तितलियों की जैव विविधता को देख-समझ सकते हैं.
- **भारत में:** देश भर के शहरी पार्कों और नगर निकायों के लिए यह पार्क एक बेहतरीन संरक्षण मॉडल पेश करता है. अन्य शहर भी अपने पार्कों में होस्ट और नेक्टर पौधे लगाकर घटते परागणकारी जीवों को बचाने की पहल कर सकते हैं.
- **पर्यावरण जागरूकता:** पार्क में आने वाले लोगों को फसलों में अत्यधिक कीटनाशकों के नुकसान और बढ़ते प्रदूषण के जैविक दुष्प्रभावों की ठोस जानकारी मिलती है. यह समझ आम लोगों को अपने घरों के बगीचों में भी रासायनिक दवाओं का कम इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करती है.
- **पारिस्थितिक संतुलन:** पार्क में 15,590 से अधिक पौधों का रोपण शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने और सूक्ष्म पर्यावास को सुरक्षित रखने में मदद करता है. इससे 40 प्रजातियों की तितलियों को बिना किसी मानवीय रुकावट के अपनी आबादी बढ़ाने की सुरक्षित जगह मिलती है.

## ऐसा क्यों हुआ
पिछले चार दशकों में तितलियों की आबादी में आई भारी गिरावट और उनके प्राकृतिक पर्यावास के तेजी से खत्म होने के कारण इस पार्क की स्थापना की गई थी. प्रदूषण और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने इनके जीवनचक्र को गंभीर रूप से बाधित किया था.

- **तितलियों की घटती संख्या:** बीते 40 वर्षों में तितलियों की प्रजातियों में करीब 40 फीसदी तक की भारी गिरावट देखी गई है. इस तेजी से खत्म हो रहे कुनबे को बचाने के लिए एक सुरक्षित और नियंत्रित वातावरण तैयार करना बेहद जरूरी हो गया था.
- **कीटनाशकों और प्रदूषण का प्रकोप:** फसलों पर होने वाले अंधाधुंध रासायनिक छिड़काव और पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण ने तितलियों के अंडों और लार्वा को भारी नुकसान पहुंचाया है. प्रकृति में हो रहे इस असंतुलन को रोकने के लिए विशेष पौधों वाले पार्क की जरूरत महसूस हुई.
- **प्रशासनिक पहल और सहयोग:** सहारनपुर विकास प्राधिकरण और उद्यान विकास समिति ने उद्यान विभाग की चार एकड़ जमीन पर इस परियोजना को लागू करने का फैसला किया. 26 जनवरी 2020 को तत्कालीन कमिश्नर संजय कुमार द्वारा इसे औपचारिक रूप से शुरू किया गया था.
- **जीवनचक्र के अनुकूल पौधों का रोपण:** तितलियां तभी जीवित रह सकती हैं जब उन्हें अंडे देने और भोजन के लिए सही पौधे मिलें. इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के तहत पार्क में 86 प्रकार के कुल 15,590 होस्ट और नेक्टर पौधे लगाए गए ताकि 40 प्रजातियों का संरक्षण हो सके.

## सवाल-जवाब

### 1. सहारनपुर में तितली पार्क कहां स्थित है?
यह तितली पार्क सहारनपुर शहर के मध्य में स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस उद्यान यानी कंपनी बाग परिसर में बना हुआ है.

### 2. इस तितली पार्क की शुरुआत कब हुई थी और इसका लोकार्पण किसने किया था?
इस पार्क की शुरुआत 26 जनवरी 2020 को हुई थी, और इसका लोकार्पण सहारनपुर के तत्कालीन कमिश्नर संजय कुमार ने किया था.

### 3. यह तितली पार्क कितने बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है?
यह पार्क उद्यान विभाग के लगभग चार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है.

### 4. पार्क में तितलियों की कितनी प्रजातियों के संरक्षण की व्यवस्था है?
पार्क में तितलियों की लगभग 40 प्रजातियों के संरक्षण और पोषण के लिए अनुकूल व्यवस्था की गई है.

### 5. पार्क में कुल कितने और किस प्रकार के पौधे लगाए गए हैं?
पार्क में 86 विभिन्न किस्मों के कुल 15,590 होस्ट और नेक्टर पौधे रोपे गए हैं.

### 6. पिछले 40 वर्षों में तितलियों की प्रजातियों में कितनी गिरावट आई है?
पर्यावरण में मानवीय हस्तक्षेप, प्रदूषण और कीटनाशकों के छिड़काव के कारण पिछले 40 वर्षों में तितलियों की प्रजातियों में लगभग 40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.

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