शरद पूर्णिमा पर ताजमहल का दीदार और 'चमकी' का अद्भुत नजारा, जानिए पूरी व्यवस्था शरद पूर्णिमा के मौके पर आगरा के ताजमहल का रात्रि दर्शन शुरू हो गया है। इस खास रात में संगमरमर पर जब चांदनी पड़ती है, तो इसे स्थानीय भाषा में 'चमकी' कहा जाता है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले शरद पूर्णिमा के पावन पर्व का इस वर्ष विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित ऐतिहासिक ताजमहल को निहारने के लिए देश और दुनिया भर से बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं। सफेद संगमरमर से तैयार यह भव्य स्मारक पूर्णिमा की दूधिया चांदनी में बेहद मनमोहक नजर आता है, जिससे हर साल इस रात पर्यटकों में एक अलग ही उत्सुकता बनी रहती है। आसमान में चमकता पूरा चंद्रमा और धार्मिक मान्यताओं का मेल इस रात को और भी खास बना देता है। रात्रि दर्शन के लिए टिकटों की पूरी बुकिंग ताजमहल के पूर्णिमा के मौके पर महीने में पांच दिन होने वाले रात्रि दर्शन की शुरुआत 24 अक्टूबर यानी आज से हो चुकी है और यह क्रम 28 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान हर दिन आधे-आधे घंटे के कुल आठ स्लॉट तय किए गए हैं, जिसमें पर्यटक रात 8 बजे से लेकर मध्यरात्रि तक ताजमहल का दीदार कर सकेंगे। शरद पूर्णिमा के दिन यानी 25 अक्टूबर को जब दूधिया चांदनी ताजमहल के पत्थरों पर पड़ेगी, तो एक बेहद अलौकिक दृश्य देखने को मिलेगा। इस विशेष दिन को लेकर पर्यटकों में भारी क्रेज है और 25 अक्टूबर की सभी टिकटें काफी पहले ही बुक हो चुकी हैं। इसके अलावा 24 और 26 अक्टूबर की भी सभी 1200 टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग पूरी हो चुकी है। सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए हर एक स्लॉट में अधिकतम 50 पर्यटकों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। आस्था, नियम और खूबसूरती का अनूठा संगम पूर्णिमा की चांदनी रात में पर्यटक ताजमहल की शानदार वास्तुकला और उसकी चमक को बेहद करीब से देख पाते हैं। उच्चतम न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही ताजमहल को हर महीने पूर्णिमा के दिन, उससे दो दिन पहले और दो दिन बाद यानी कुल पांच दिनों के लिए खोला जाता है। जिन लोगों को शरद पूर्णिमा की रात ताजमहल के अंदर जाकर दीदार करने का टिकट नहीं मिल पाया है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम भी किए हैं। ऐसे पर्यटक मेहताब बाग स्थित ताज व्यू प्वाइंट से रात के समय चांदनी में जगमगाते ताजमहल के दीदार कर सकते हैं। क्या होती है ताज की 'चमकी'? शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है और उसकी चांदनी अन्य रातों की तुलना में अत्यधिक सफेद तथा तेज होती है। जब यह ठंडी और तेज रोशनी ताजमहल के सफेद संगमरमर और उसमें जड़े गए कीमती पत्थरों पर पड़ती है, तो पूरा मकबरा हीरों की तरह जगमगाने लगता है। स्थानीय लोग और पर्यटक इसी जादुई और खूबसूरत दृश्य को 'चमकी' के नाम से पुकारते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा हर महीने पूर्णिमा के आसपास के पांच दिनों में रात 8 बजे से 12 बजे तक यह रात्रि दर्शन कराया जाता है। शरद पूर्णिमा के समय मौसम और वातावरण सबसे साफ तथा निर्मल होता है, जिस वजह से ताजमहल का आकर्षण और निखार कई गुना बढ़ जाता है। शरद पूर्णिमा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अपनी बेजोड़ वास्तुकला और सफेद संगमरमर के कारण दुनियाभर में मशहूर ताजमहल पर जब चंद्रमा की किरणें बिखरती हैं, तो यह इतिहास, प्रेम और सौंदर्य का अनूठा संगम प्रतीत होता है। हालांकि इस रात्रि दर्शन का पूरा संचालन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तय नियमों, समय और तारीखों के अंतर्गत ही होता है। दूसरी ओर, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी सभी सोलह कलाओं से पूरी तरह परिपूर्ण होता है। धार्मिक परंपराओं में इस विशेष रात्रि की चांदनी को अमृत के समान गुणकारी माना गया है। कई घरों में इस अवसर पर खीर बनाकर उसे खुले आसमान के नीचे रखा जाता है और अगले दिन सुबह उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस पावन पर्व को रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। वैष्णव परंपरा में इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की महारास लीला का बहुत बड़ा महत्व है, जबकि देश के कई हिस्सों में इस रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस रात्रि मां लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं और जो भक्त जागकर उनकी आराधना करते हैं, उन पर उनकी विशेष कृपा बरसती है। इसका आप पर असर शरद पूर्णिमा के अवसर पर ताजमहल के रात्रि दर्शन और 'चमकी' के इस विशेष आयोजन का पर्यटकों और स्थानीय व्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। • भारत में: देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों को ऐतिहासिक स्मारकों के रात्रि दर्शन के लिए नियमों और एडवांस बुकिंग की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना पड़ता है। इससे सप्ताहांत और त्योहारों के दौरान पर्यटन स्थलों पर टिकटों की भारी मांग और प्रबंधन प्रणालियों की महत्ता उजागर होती है। • आगरा में: स्थानीय स्तर पर होटल कारोबारियों, टूर गाइडों और परिवहन चालकों को पर्यटकों की भारी आमद से अच्छा व्यापारिक लाभ मिलता है। हालांकि टिकटिंग की सीमित क्षमता के कारण जिन लोगों को प्रवेश नहीं मिलता, उन्हें ताज व्यू प्वाइंट जैसे वैकल्पिक स्थानों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ शरद पूर्णिमा पर ताजमहल की विशेष चमक और रात्रि दर्शन की यह व्यवस्था खगोलीय स्थितियों और प्रशासनिक नियमों के तहत तय की जाती है। • खगोलीय स्थिति: इस विशेष रात्रि को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे अधिक निकट होता है, जिससे उसकी चांदनी अत्यधिक तेज और सफेद दिखाई देती है। जब यह तीव्र प्रकाश सफेद संगमरमर पर गिरता है, तो प्राकृतिक रूप से ताज जगमगाने लगता है। • न्यायालय के निर्देश: उच्चतम न्यायालय के तय किए गए नियमों के अनुसार ही ताजमहल को हर महीने पूर्णिमा और उसके आसपास के कुल पांच दिनों के लिए रात में खोला जाता है। • संरक्षण और सुरक्षा: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा भीड़ नियंत्रण और संगमरमर की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन केवल सीमित स्लॉट और तय टिकटों की संख्या निर्धारित की जाती है। सवाल-जवाब 1. शरद पूर्णिमा पर ताजमहल का रात्रि दर्शन कब से कब तक चलेगा? ताजमहल का रात्रि दर्शन 24 अक्टूबर से शुरू होकर 28 अक्टूबर तक चलेगा। 2. ताजमहल में हर दिन कितने स्लॉट और कितने पर्यटकों को प्रवेश मिलता है? हर दिन आधे-आधे घंटे के आठ स्लॉट होते हैं और एक स्लॉट में अधिकतम 50 पर्यटकों को प्रवेश दिया जाता है। 3. ताज की 'चमकी' किसे कहा जाता है? शरद पूर्णिमा की तेज चांदनी जब सफेद संगमरमर पर पड़ती है, जिससे ताज हीरों जैसा चमकता है, उस दृश्य को चमकी कहा जाता है। 4. यदि टिकट न मिले तो पर्यटक कहां से ताजमहल देख सकते हैं? टिकट न मिलने पर पर्यटक मेहताब बाग स्थित ताज व्यू प्वाइंट से चांदनी रात में ताजमहल देख सकते हैं। 5. किन दिनों के लिए ताजमहल का रात्रि दर्शन अनुमति देता है? सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार एएसआई हर महीने पूर्णिमा के दिन और उसके दो दिन पहले व दो दिन बाद तक रात्रि दर्शन की अनुमति देता है। https://trendkia.com/travel/sharada-purnima-para-tajamahala-ka-didara-aura-chamki-ka-adbhuta-najara-janie-puri-vyavastha-51270 TrendKia — Har trend, sabse pehle.