तेलंगाना का अनूठा मत्स्यगिरी मंदिर, जहां मछली के रूप में होती है भगवान नरसिम्हा की पूजा तेलंगाना के यदाद्रि भुवनगिरि जिले में स्थित श्री मत्स्यगिरी लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर अपने अनूठे रूप और मान्यताओं के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से कुछ ही दूरी पर स्थित श्री मत्स्यगिरी लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच खासे आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह प्राचीन धार्मिक स्थल यदाद्रि भुवनगिरि जिले के वालिगोंडा मंडल के अंतर्गत आने वाले वेमुलाकोंडा गांव में एक ऊंची और विशाल पहाड़ी की चोटी पर सुशोभित है। इस मंदिर की सबसे अनोखी और खास बात यह है कि यहां भगवान नरसिम्हा की पूजा किसी मूर्ति के रूप में नहीं, बल्कि मछली के रूप में की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि यहां भगवान ने स्वयं अपने प्रकटीकरण दिए थे। मुख्य मंदिर के ठीक अलावा इस पावन परिसर में माता आंडाल और भगवान हनुमान के मंदिर भी स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा पहाड़ी की चोटी पर ही हनुमान जी की एक भव्य और विशाल सफेद प्रतिमा भी बनाई गई है जो दूर से ही आने वाले यात्रियों का ध्यान खींच लेती है। रहस्यमयी नामाला गुंडम कुंड और विशेष मछलियां इस धार्मिक परिसर के भीतर एक प्राकृतिक जल कुंड भी स्थित है जिसे स्थानीय लोग नामाला गुंडम के नाम से पुकारते हैं। इस पवित्र कुंड को लेकर पूरे क्षेत्र के लोगों में अगाध और गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं का ऐसा पक्का विश्वास है कि इस कुंड में तैरने वाली मछलियों के सिर के ऊपरी हिस्से पर प्राकृतिक रूप से भगवान विष्णु के प्रसिद्ध तिलक जैसी आकृतियां बनी हुई हैं। स्थानीय परंपराओं के अनुसार इन मछलियों को अपने हाथों से दाना खिलाना बहुत अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। हालांकि दूसरी तरफ जानकारों और जीव विशेषज्ञों का यह तर्क रहता है कि जलीय जीवों के शरीर पर दिखने वाली ये रेखाएं असल में प्राकृतिक शारीरिक संरचना का ही एक हिस्सा होती हैं, जिसे भक्त अपनी अनन्य धार्मिक भावना और आस्था के कारण भगवान का आशीर्वाद या रूप मान लेते हैं। शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता का संगम एक ऊंची पहाड़ी पर अपनी जगह बनाए होने के कारण इस खूबसूरत स्थल का प्राकृतिक सौंदर्य भी देखते ही बनता है और आगंतुकों का मन मोह लेता है। मंदिर तक ऊपर चढ़ने और पहुंचने के लिए पहाड़ी पर ही एक घुमावदार मार्ग का निर्माण किया गया है, जिसके रास्ते से आसपास के दूर-दूर तक फैले हरे-भरे खेत और ग्रामीण इलाकों के मनोरम दृश्य आसानी से दिखाई देते हैं। यहां का शांत वातावरण और बेहद आध्यात्मिक परिवेश वीकेंड के दिनों में हैदराबाद और इसके आसपास के अन्य जिलों से आने वाले सैलानियों और परिवारों को अपनी ओर खींचता है, जो यहां दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। आवागमन और यातायात के लिहाज से देखा जाए तो यह प्रसिद्ध मंदिर भुवनगिरि शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हैदराबाद-वारंगल राष्ट्रीय राजमार्ग के रास्ते से यहां सड़क मार्ग के जरिए बेहद आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस तरह धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सुंदरता का यह अद्भुत संगम आज तेलंगाना राज्य के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में अपनी एक अलग ही पहचान स्थापित कर रहा है। इसका आप पर असर भारत में: यह स्थल देश की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देता है। तेलंगाना में: हैदराबाद के आसपास के स्थानीय पर्यटकों और वीकेंड पर घूमने वालों के लिए यह एक बेहतरीन और शांत पर्यटन विकल्प है। सवाल-जवाब 1. श्री मत्स्यगिरी लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी मंदिर कहाँ स्थित है? यह मंदिर तेलंगाना के यदाद्रि भुवनगिरि जिले के वालिगोंडा मंडल के अंतर्गत वेमुलाकोंडा गांव में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। 2. मत्स्यगिरी मंदिर की मुख्य विशेषता क्या है? इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान नरसिम्हा की पूजा मछली के रूप में की जाती है। 3. नामाला गुंडम क्या है? यह मंदिर परिसर में स्थित एक प्राकृतिक जल कुंड है, जिसकी मछलियों के सिर पर भगवान विष्णु के तिलक जैसी आकृतियां माने जाने की मान्यता है। 4. मंदिर तक कैसे पहुँचा जा सकता है? यह मंदिर भुवनगिरि शहर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है और हैदराबाद-वारंगल राष्ट्रीय राजमार्ग के माध्यम से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। https://trendkia.com/travel/telangana-ka-anotha-matsyagiri-mandir-jahan-machli-ke-roop-mein-hoti-hai-bhagwan-narsimha-ki-pooja-21769 TrendKia — Har trend, sabse pehle.