उत्तराखंड के घने जंगलों में छिपी है वो रहस्यमयी झील, जहां आज तक कोई नाप नहीं सका पानी की गहराई नैनीताल के घने जंगलों में छिपी परी ताल झील अपनी अनसुलझी गहराई और पूर्णिमा की रात परियों के नहाने की मान्यता के लिए मशहूर है, यहां पहुंचने के लिए चाफी गांव से 3 से 5 किलोमीटर का रोमांचक ट्रेक करना पड़ता है. उत्तराखंड का नैनीताल भले ही अपनी झीलों की वजह से 'लेक डिस्ट्रिक्ट' कहलाता हो, लेकिन घने जंगलों के भीतर एक ऐसी झील भी छिपी है जिसका नाम बहुत कम पर्यटकों ने सुना होगा. इस झील का नाम है परी ताल, और यह अपनी प्राकृतिक खूबसूरती से ज्यादा उन लोककथाओं के लिए मशहूर है जो सदियों से यहां के गांवों में सुनाई जाती रही हैं. ऊंचे पहाड़ों और घने पेड़ों के बीच बसी यह जगह रोमांच और सुकून दोनों का भरपूर अनुभव देती है, यही वजह है कि इसे नैनीताल की सबसे छिपी हुई और दिलचस्प जगहों में गिना जाता है. पूर्णिमा की रात परियां आती हैं नहाने परी ताल का नाम एक पुरानी लोकमान्यता से जुड़ा है. गांव वालों का मानना है कि जब भी पूर्णिमा की चांदनी रात होती है, इस झील पर परियां उतरती हैं और वहां स्नान करती हैं. इसी विश्वास की वजह से झील को परी ताल नाम मिला. आज भी आसपास के गांवों के लोग इस मान्यता को गंभीरता से लेते हैं, इसलिए पूर्णिमा के दिन वे न तो झील के पास जाना पसंद करते हैं और न ही उसमें नहाते हैं. सालों पुरानी यह कहानी अब तक जिंदा है और यही रहस्य पर्यटकों को यहां तक खींच लाता है. चाफी गांव से शुरू होता है मुश्किल पैदल रास्ता परी ताल कोई ऐसी जगह नहीं है जहां गाड़ी से सीधे पहुंचा जा सके. यहां आने के लिए पहले नैनीताल से भीमताल-धानाचूली सड़क मार्ग पकड़ना होता है, जो चाफी गांव तक ले जाता है. इसके बाद असली सफर शुरू होता है, करीब 3 से 5 किलोमीटर का पैदल ट्रेक, जो घने जंगलों, फिसलन भरी चट्टानों और बीच में पड़ने वाली एक नदी को पार करते हुए आगे बढ़ता है. यह रास्ता आसान नहीं कहा जा सकता, लेकिन जो लोग प्रकृति और एडवेंचर के शौकीन हैं, उनके लिए यह ट्रेक किसी यादगार अनुभव से कम नहीं है. जंगल के बीच खड़ा है ब्रिटिशकालीन पुल इसी ट्रेक के रास्ते में एक पुराना पुल भी मिलता है, जो ब्रिटिश जमाने का बताया जाता है. पत्थर और लोहे से बना यह पुल आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है और उस दौर की याद दिलाता है. घने जंगलों के बीच बना यह ऐतिहासिक पुल पूरे ट्रेक को और भी खास बना देता है, यही कारण है कि यहां पहुंचने वाले ज्यादातर पर्यटक इस पुल पर रुककर तस्वीरें खींचना नहीं भूलते. आज तक कोई नहीं जान पाया पानी की असली गहराई परी ताल को लेकर सबसे बड़ा रहस्य इसकी गहराई है. गांव वालों का कहना है कि अब तक कोई भी इंसान इस झील की असली गहराई का पता नहीं लगा पाया है. शांत दिखने वाली इसकी सतह के नीचे आखिर क्या छिपा है, यह सवाल आज भी जवाब की तलाश में है. यही अनसुलझा रहस्य परी ताल को बाकी झीलों से अलग बनाता है और इसे रोमांच व जिज्ञासा का केंद्र बना देता है. हर साल हादसे की मान्यता, नहाने से परहेज परी ताल से जुड़ी एक और मान्यता भी काफी चर्चित है, यहां हर साल कोई न कोई हादसा या मौत होती है. हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी यह लोककथा गांव वालों के बीच आज भी उतनी ही मानी जाती है. यही वजह है कि स्थानीय लोग खुद भी इस झील में नहाने या गहरे पानी में उतरने से बचते हैं, और पर्यटकों को भी यही सलाह देते हैं कि वे यहां सावधानी बरतें. शिलाजीत वाली काली चट्टानों की मान्यता परी ताल के आसपास कई जगहों पर काली चट्टानें भी नजर आती हैं. स्थानीय लोग इन्हें शिलाजीत युक्त चट्टानें मानते हैं, और शिलाजीत को औषधीय गुणों से भरपूर पदार्थ माना जाता है. इन चट्टानों की वैज्ञानिक पुष्टि एक अलग विषय है, लेकिन स्थानीय मान्यताओं ने इन्हें भी एक खास पहचान दे दी है, जिसकी वजह से पर्यटक इन्हें भी उत्सुकता से देखते हैं. झरने ने बढ़ाई इस जगह की खूबसूरती झील के बिल्कुल पास से बहता एक सुंदर झरना इस पूरी जगह की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है. साफ पानी, घने जंगल और चारों तरफ फैली पहाड़ों की हरियाली मिलकर ऐसा नजारा बनाते हैं कि हर पर्यटक कुछ देर के लिए ठहर जाता है. फोटोग्राफी और प्रकृति के शौकीनों के लिए यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं लगती, यही वजह है कि गर्मियों के मौसम में यहां अच्छी खासी भीड़ देखने को मिलती है, और इंटरनेट पर भी इस जगह के कई वीडियो और तस्वीरें मौजूद हैं. अगर भीड़भाड़ से दूर किसी शांत और अनोखी जगह की तलाश है, तो परी ताल एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. यहां तक पहुंचने का रोमांचक ट्रेक, सदियों पुरानी लोककथाएं और अनछुआ प्राकृतिक सौंदर्य इसे आम पर्यटन स्थलों से अलग बनाते हैं. हालांकि यहां पहुंचने के लिए थोड़ी मेहनत जरूर करनी पड़ती है, लेकिन मंजिल पर पहुंचते ही नजारा दिल छू लेता है. बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है, यहां जाएं तो पानी में उतरने से बचें. इसका आप पर असर • भारत में: ऑफबीट ट्रेकिंग जगहों की तलाश करने वालों के लिए परी ताल एक नया विकल्प बन सकता है, लेकिन यहां जाने पर पानी में उतरने से बचना जरूरी है. • नैनीताल में: इस कम पहचानी गई जगह की चर्चा बढ़ने से चाफी गांव और आसपास के इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही और स्थानीय रोजगार को फायदा मिल सकता है. सवाल-जवाब 1. परी ताल कहां स्थित है? यह उत्तराखंड के नैनीताल जिले में, भीमताल-धानाचूली मार्ग पर चाफी गांव के पास घने जंगलों के बीच स्थित है. 2. इस झील का नाम परी ताल क्यों पड़ा? मान्यता है कि हर पूर्णिमा की रात परियां यहां उतरकर स्नान करती हैं, इसी वजह से इसका नाम परी ताल पड़ा. 3. परी ताल तक पहुंचने में कितना ट्रेक करना पड़ता है? चाफी गांव से करीब 3 से 5 किलोमीटर का पैदल ट्रेक करना पड़ता है, जो घने जंगलों, फिसलन भरी चट्टानों और एक नदी को पार करते हुए गुजरता है. 4. परी ताल की गहराई को लेकर क्या रहस्य है? स्थानीय लोगों के मुताबिक आज तक कोई भी इस झील की असली गहराई का पता नहीं लगा पाया है. 5. क्या परी ताल में नहाना सुरक्षित है? स्थानीय मान्यता है कि यहां हर साल एक हादसा या मौत होती है, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, फिर भी पानी में उतरने से बचने की सलाह दी जाती है. 6. परी ताल के आसपास मिलने वाली काली चट्टानों की क्या खासियत है? स्थानीय लोग इन्हें शिलाजीत युक्त चट्टानें मानते हैं, जिन्हें औषधीय गुणों वाला पदार्थ माना जाता है. https://trendkia.com/travel/uttarakhand-ke-ghane-jngalon-men-chhipi-hai-vo-rahasyamayi-jhila-jahan-aja-taka-koi-napa-nahin-saka-pani-ki-gaharai-8111 TrendKia — Har trend, sabse pehle.