# उत्तराखंड के रनथल खड़क ट्रैक पर मिलेगा रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम

> उत्तराखंड के बागेश्वर और पिथौरागढ़ की सीमा पर स्थित रनथल खड़क ट्रैक अपनी मनमोहक सुंदरता, घने जंगलों और बर्फ से ढकी चोटियों के लिए एडवेंचर प्रेमियों की पहली पसंद बन रहा है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-07-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/uttarakhand-ke-runthal-kharak-traika-para-milega-romancha-aura-prakritika-sundarata-ka-anokha-sngama-5766 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तराखंड पर्यटन, रनथल खड़क ट्रैक, बागेश्वर, हिमालयन ट्रेकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, कुमाऊं हिमालय

उत्तराखंड के कुमाऊं हिमालय क्षेत्र में स्थित रनथल खड़क ट्रैक प्रकृति प्रेमियों और साहसिक खेलों के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन गंतव्य के रूप में उभर रहा है। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों की सीमाओं के निकट स्थित यह दुर्गम क्षेत्र अपने सुरम्य जंगलों, हरे-भरे बुग्यालों और हिमालय की गगनचुंबी पर्वत श्रृंखलाओं के कारण पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित कर रहा है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में ट्रैकर्स पहाड़ों की अनछुए सौंदर्य को करीब से महसूस करने और प्रकृति के बीच समय बिताने के लिए पहुंचते हैं।

## गोगिना गांव से शुरू होता है रोमांचक सफर
इस पूरे ट्रैक का मुख्य पड़ाव और बेस कैंप बागेश्वर जिले का गोगिना गांव है, जहां से इस यात्रा का शुभारंभ होता है। स्थानीय होमस्टे संचालक धीरज कोरंगा के अनुसार, गोगिना से आगे बढ़ने पर ट्रैकर्स को सबसे पहले रामगंगा नदी को पार करना पड़ता है। इसके बाद यह मार्ग प्रसिद्ध नामिक गांव, बाजिमानियन खारक और थल टोक जैसे प्राकृतिक पड़ावों से होते हुए सीधे रनथल टॉप तक पहुंचता है। पूरे सफर के दौरान बुरांस, ओक और देवदार के घने जंगल यात्रियों को अपनी ठंडी छांव प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे जंगली फूलों से सजे मैदान और फैले हुए खुले बुग्याल इस ट्रैक के आकर्षण में चार चांद लगा देते हैं। वन्यजीवों और पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह मार्ग काफी खास है, क्योंकि रास्ते में कई दुर्लभ हिमालयी पक्षी और जंगली जीव देखने को मिल सकते हैं।

## 12,887 फीट की ऊंचाई से हिमालय का भव्य नजारा
समुद्र तल से लगभग 12,887 फीट की विशाल ऊंचाई पर बसा रनथल टॉप इस ट्रेक का सबसे ऊंचा बिंदु है। यहां पहुंचने के बाद ट्रैकर्स की सारी थकान उस समय मिट जाती है जब उनके सामने नंदा देवी, पंचाचूली और नंदा कोट जैसी प्रमुख हिमालयी चोटियों का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय जब सूरज की किरणें बर्फ से लदी इन पर्वत चोटियों पर पड़ती हैं, तो यहां का नजारा बेहद मनमोहक और अलौकिक हो जाता है। इस खूबसूरत पल को अपनी यादों में संजोने के लिए दूर-दूर से लोग इस शांत स्थल पर खिंचे चले आते हैं।

## यात्रा की अवधि, कठिनाई और सबसे उपयुक्त समय
लगभग 35 से 40 किलोमीटर लंबे इस पूरे ट्रैक को पूरा करने के लिए सामान्यतः 6 से 7 दिनों का समय लगता है। इसे एक मध्यम श्रेणी का ट्रैक माना गया है, जिसके कारण यात्रा में भाग लेने वाले लोगों का शारीरिक रूप से तंदुरुस्त होना बेहद जरूरी है। जो लोग पहली बार ट्रैकिंग करने का मन बना रहे हैं, वे भी किसी अनुभवी गाइड की देखरेख में इस यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर सकते हैं। इस ट्रैक पर जाने के लिए अप्रैल से जून और फिर मानसून के बाद सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे आदर्श माना जाता है। हालांकि, जुलाई और अगस्त के मानसून सीजन में भी कई लोग यहां जाते हैं, लेकिन इस दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। लगातार होने वाली मानसूनी बारिश के कारण पहाड़ी पगडंडियां फिसलन भरी हो जाती हैं और क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा भी बना रहता है।

## सुरक्षा सावधानियां और आवश्यक तैयारियां
यदि आप मानसून के दौरान इस ट्रैक पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो आपके पास वाटरप्रूफ जैकेट, रेनकोट, मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग जूते, अतिरिक्त गर्म कपड़े, टॉर्च, फर्स्ट एड किट और पर्याप्त मात्रा में खाद्य सामग्री का होना अनिवार्य है। यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन या वन विभाग से मार्ग की ताजा स्थिति की जानकारी ले लें और मौसम के पूर्वानुमान पर पैनी नजर रखें। अकेले यात्रा करने के बजाय स्थानीय गाइड को साथ रखना सुरक्षा के लिहाज से सबसे उत्तम और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। पूरी तैयारी और सही मार्गदर्शन के साथ किया गया यह सफर आपके जीवन का सबसे यादगार अनुभव साबित हो सकता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत भर में:** ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए यह एक बेहतरीन और कम भीड़भाड़ वाला नया हिमालयी विकल्प प्रस्तुत करता है।
- **उत्तराखंड में:** बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में स्थानीय होमस्टे व्यवसाय और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. रनथल खड़क ट्रैक की कुल लंबाई कितनी है और इसे पूरा करने में कितना समय लगता है?
यह ट्रैक लगभग 35 से 40 किलोमीटर लंबा है, जिसे पूरा करने में सामान्य तौर पर 6 से 7 दिनों का समय लगता है।

### 2. रनथल खड़क ट्रैक का बेस कैंप कहां स्थित है?
इस खूबसूरत ट्रैक का मुख्य बेस कैंप उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित गोगिना गांव है।

### 3. रनथल टॉप की समुद्र तल से ऊंचाई कितनी है?
रनथल टॉप समुद्र तल से लगभग 12,887 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जहां से बर्फ से ढकी चोटियां दिखाई देती हैं।

### 4. इस ट्रैक से हिमालय की कौन-कौन सी चोटियां दिखाई देती हैं?
इस ट्रैक के शीर्ष पर पहुंचने पर नंदा देवी, पंचाचूली और नंदा कोट जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं।

### 5. रनथल खड़क ट्रैक पर जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
इस यात्रा के लिए अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर तक का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम अनुकूल रहता है।

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