# उत्तराखंड की इस शांत और खूबसूरत जगह पर बिताएं सुकून भरे पल, नैनीताल की भीड़ से है बिल्कुल दूर

> उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित हरीशताल एक बेहद शांत और कम चर्चित पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, झील और हरियाली के लिए जाना जाता है।

**Type:** article · **Category:** यात्रा · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/travel/uttarakhand-ki-isa-shanta-aura-khubasurata-jagaha-para-bitaen-sukuna-bhare-pala-nainitala-ki-bhira-se-hai-bilkula-dura-27518 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरीशताल, नैनीताल, उत्तराखंड पर्यटन, ओखलकांडा, हल्द्वानी

नैनीताल की प्रसिद्ध नैनीझील, व्यस्त माल रोड और पर्यटकों की भारी भीड़ से तो ज्यादातर लोग वाकिफ हैं, लेकिन यदि आप पहाड़ों में किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जो शांत हो और जहां कम लोग आते हों, तो हरीशताल आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता से पूरी तरह भरपूर है। यहां की झील, ऊंचे पहाड़, घने जंगल और चारों तरफ फैली हरियाली मिलकर एक ऐसा अद्भुत वातावरण तैयार करती हैं, जहां शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल आसानी से बिताए जा सकते हैं।

हरीशताल पूरी तरह से पहाड़ों और सघन जंगलों के आंचल में बसा हुआ एक खूबसूरत स्थान है। यहां का शांत परिवेश और झील का प्राकृतिक सौंदर्य सैलानियों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है। विशेष तौर पर बारिश के मौसम में इस जगह की सुंदरता और भी अधिक बढ़ जाती है। पहाड़ों पर छाई आकर्षक हरियाली, बादलों का आना-जाना और झील के आसपास का खामोश माहौल इस स्थल को बेहद मनमोहक बना देता है। प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी का शौक रखने वालों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है।

इस खूबसूरत जगह तक पहुंचने के लिए यात्रियों को हल्द्वानी से होकर पहाड़ी रास्तों का सफर तय करना पड़ता है। यह इलाका हल्द्वानी से लगभग 75 किलोमीटर और काठगोदाम से करीब 69 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हल्द्वानी से हैड़ाखान रोड की तरफ आगे बढ़ते हुए इस क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है। इन घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने के दौरान रास्ते में दिखने वाले बदलते प्राकृतिक नजारे पूरे सफर को बेहद यादगार बना देते हैं। हालांकि, यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय रास्तों की स्थिति और मौसम के मिजाज की पूरी जानकारी अवश्य जुटा लेनी चाहिए।

हरीशताल की प्राकृतिक सुंदरता के अलावा इसके नजदीक स्थित लोहाखाम ताल भी पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण का केंद्र है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार यह झील अपने अनूठे दिल के आकार के लिए जानी जाती है। इसका मतलब यह है कि आप एक ही क्षेत्र में दो अलग-अलग प्राकृतिक झीलों के दीदार कर सकते हैं, जो पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचती हैं। झील के आसपास फैले हुए जंगल और पहाड़ी दृश्य इस संपूर्ण क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

हरीशताल की सबसे बड़ी खूबी यहां का बेहद शांत और नैसर्गिक वातावरण है। नैनीताल जैसे अत्यधिक लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों की तुलना में यहां पर्यटकों की आवाजाही काफी कम रहती है। यहां नजर घुमाने पर चारों तरफ केवल जंगल, खेत, पहाड़ और हरियाली ही दिखाई देती है। ऐसे में यदि आपका मन शहरी कोलाहल से दूर कुछ वक्त प्रकृति की गोद में बिताने का है, तो यह स्थान आपको एक अनोखा अनुभव दे सकता है। यहां पहुंचकर आप पहाड़ों की असली खामोशी को बेहद करीब से महसूस कर सकते हैं।

मानसून के सीजन में हरीशताल का सौंदर्य कई गुना निखर जाता है। बारिश होने के बाद पहाड़ों की हरियाली और अधिक गहरी हो जाती है तथा जंगलों के बीच से गुजरते बादलों की आवाजाही इस पूरे इलाके को जादुई रूप दे देती है। कई बार ऐसा होता है कि पहाड़ बादलों और घनी धुंध की चादर से ढके नजर आते हैं, जिससे यहां का परिवेश अत्यंत आकर्षक लगने लगता है। झील, जंगल और बादलों का यह संगम हर देखने वाले का मन मोह लेता है।

यह जगह केवल एक शांत झील देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति को बहुत करीब से अनुभव करने का अवसर भी देती है। यहां के आसपास मौजूद पहाड़ी रास्ते और जंगल ट्रैकिंग का शौक रखने वाले लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा झील, पहाड़, बादल और हरियाली उन लोगों के लिए खास मायने रखते हैं जिन्हें फोटोग्राफी करना या सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाना पसंद है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के इन खूबसूरत नजारों के बीच जमकर तस्वीरें खींचते हैं और पहाड़ी संस्कृति को करीब से देखते हैं।

चूंकि हरीशताल एक दूरस्थ पहाड़ी इलाका है, इसलिए यहां बड़े और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की तरह व्यावसायिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं और बहुत कम लोग इस जगह के बारे में जानते हैं। यहां आपको बड़े और पक्के होटल या बड़ी संख्या में होमस्टे जैसी आधुनिक सुविधाएं देखने को नहीं मिलेंगी, इसलिए यहां जाने वाले सैलानियों को अपनी इस यात्रा की तैयारी पहले से ही करके चलनी चाहिए। अपने साथ खाने-पीने की जरूरी चीजें, आवश्यक सामान और एक ठोस ट्रिप प्लान बनाकर जाना ही समझदारी होगी।

## इसका आप पर असर
उत्तराखंड के इस शांत और कम चर्चित पर्यटन स्थल पर यात्रा करने से पहले पर्यटकों को अपनी व्यवस्था खुद करनी होगी क्योंकि वहां व्यावसायिक सुविधाएं सीमित हैं।

- **उत्तराखंड में:** पर्यटकों को हल्द्वानी और काठगोदाम से निकलते समय खाने-पीने का सामान और यात्रा की पूरी योजना साथ रखनी चाहिए क्योंकि हरीशताल में पक्के होटल या होमस्टे की बड़ी सुविधा नहीं मिलती।
- **यात्रा सुरक्षा:** पहाड़ी रास्तों पर सफर करने से पहले स्थानीय रास्तों और मौसम की स्थिति की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए ताकि बारिश या अन्य मौसम बदलावों के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

## सवाल-जवाब

### 1. हरीशताल कहां स्थित है?
हरीशताल नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में स्थित है।

### 2. हरीशताल की दूरी हल्द्वानी से कितनी है?
हरीशताल हल्द्वानी से करीब 75 किलोमीटर दूर है।

### 3. हरीशताल काठगोदाम से कितनी दूर है?
यह काठगोदाम से लगभग 69 किलोमीटर दूर स्थित है।

### 4. लोहाखाम ताल की क्या विशेषता है?
लोहाखाम ताल अपनी अनूठी दिल के आकार की बनावट के लिए जानी जाती है।

### 5. हरीशताल जाने के लिए कौन सा मुख्य रास्ता है?
हल्द्वानी से हैड़ाखान रोड की ओर बढ़ते हुए इस क्षेत्र तक पहुंचा जा सकता है।

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