{
  "type": "article",
  "title": "एंड्रयू टेट और चर्चित इन्फ्लुएंसर्स ने युवाओं के गुस्से को कैसे बनाया अरबों डॉलर का धंधा, रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे",
  "summary": "डिजिटल सुरक्षा संगठन रिसेट टेक और इक्विमुंडो के एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि पुरुषों का ऑनलाइन मैनोसफेयर नेटवर्क कोई वैचारिक आंदोलन नहीं बल्कि अरबों डॉलर की व्यावसायिक ग्रिफ्ट इकोनॉमी है।",
  "content": "माता-पिता, शिक्षकों और मीडिया विश्लेषकों के बीच लंबे समय से यह चिंता का विषय रहा है कि युवा पुरुषों की सोच किस दिशा में जा रही है। डिजिटल स्पेस में राजनीतिक कट्टरता, महिलाओं के प्रति अमर्यादित भाषा, जोखिम भरे क्रिप्टोकरेंसी निवेश और ऑनलाइन सट्टेबाज़ी की ओर युवाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है। 2024 के चुनाव में युवा पुरुषों का वोट डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में गया, जहां जीओपी के अभियान में आक्रामक पुरुषत्व के प्रतीकों को काफी उभारकर पेश किया गया था। हालांकि, राष्ट्रपति के रूप में उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान भी जेन ज़ेड पुरुषों की नाराजगी कम नहीं हुई है और आंकड़ों के अनुसार उनके प्रति इस वर्ग का समर्थन तेजी से घट रहा है।\n\nऑर्गेनिक आंदोलन नहीं, बल्कि अरबों डॉलर का पिरमिड तंत्र\nआमतौर पर यह माना जाता रहा है कि युवा पुरुष सांस्कृतिक संघर्षों के बीच ऑनलाइन मंचों पर एकजुट होकर 'मैनोसफेयर' नाम के एक दक्षिणपंथी वैचारिक आंदोलन का निर्माण कर रहे हैं। लेकिन डिजिटल सुरक्षा संगठन रिसेट टेक और गैर-लाभकारी संस्था इक्विमुंडो की 153 पन्नों की शोध रिपोर्ट \"द ग्रिफ्ट इकोनॉमी: हाउ यंग मेन आर बीइंग सोल्ड फेक बिलॉन्गिंग एंड फेक वेल्थ ऑनलाइन\" एक बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। इस विस्तृत अध्ययन के अनुसार, डिजिटल स्पेस में पुरुषों को रेड-पिल्ड बनाने की प्रक्रिया किसी सामाजिक या राजनीतिक क्रांति का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक बहुस्तरीय पिरमिड स्कीम की तरह काम करने वाला व्यावसायिक मॉडल है।\n\nशोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान डिजिटल परिदृश्य में 'मस्कुलिनिटी' या पुरुषत्व को एक बिकने वाली सामग्री बना दिया गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर इसे खास तरीके से क्यूरेट किया जाता है और वित्तीय लाभ कमाने के लिए युवाओं को इसके दायरे में खींचा जाता है। अध्ययन के मुताबिक, युवाओं को एल्गोरिदम के जरिए सशुल्क कम्युनिटीज, अनियंत्रित सप्लीमेंट्स, फर्जी क्रिप्टो योजनाओं और महंगे 'कोचिंग' प्रोग्राम्स की तरफ धकेला जाता है, जिससे मिलकर यह अरबों डॉलर का उद्योग खड़ा हुआ है।\n\nडेटिंग और फिटनेस सलाह से शुरू होता है ग्रिफ्ट का सफर\nइस कमर्शियल नेटवर्क में युवाओं को फंसाने की प्रक्रिया बेहद सुनियोजित होती है। सबसे पहले, जब कोई युवा इंटरनेट पर डेटिंग, फिटनेस या पर्सनल फाइनेंस जैसी प्राथमिक जरूरतों के लिए सलाह खोजता है, तो उसे आकर्षक और प्रेरक सेल्फ-हेल्प कंटेंट दिखाया जाता है। इसके बाद नेटवर्क के ऑपरेटर युवाओं की व्यक्तिगत कमजोरियों और हताशा की पहचान करते हैं। उन हताशाओं की वजह के तौर पर एक भ्रामक और शिकायत-आधारित नैरेटिव परोसा जाता है।\n\nउदाहरण के लिए, रिसेट टेक के अध्ययन में एक्स प्लेटफॉर्म पर मौजूद एक सत्यापित बिजनेस अकाउंट का जिक्र किया गया है। इस अकाउंट ने आधिकारिक आर्थिक आंकड़ों का गलत विश्लेषण पेश करते हुए यह दावा किया कि युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी की दर से केवल पुरुष ही प्रभावित हो रहे हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, जब श्रम बाजार की प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक योग्यता की दौड़ को पुरुषों के खिलाफ एक संगठित साजिश के रूप में पेश किया जाता है, तो युवाओं की वास्तविक आर्थिक चिंताएं महिलाओं, आप्रवासियों और विदेशी श्रमिकों के प्रति नफरत और गुस्से में बदल जाती हैं।\n\nविक्टिमहुड से कमाई: क्लास, क्लब और संदिग्ध दवाइयां\nजब युवाओं के भीतर खुद के पीड़ित होने का अहसास गहरा हो जाता है और वे एक काल्पनिक साझा दुश्मन के खिलाफ लामबंद महसूस करने लगते हैं, तब यही डिजिटल इन्फ्लुएंसर्स उन्हें समाधान के नाम पर अपने उत्पाद बेचना शुरू करते हैं। यह समाधान किसी महंगे ऑनलाइन कोर्स, किसी एक्सक्लूसिव क्लब की मेंबरशिप या फिर ग्रे-मार्केट की गोलियों के रूप में हो सकता है।\n\nअध्ययन में विवादास्पद इन्फ्लुएंसर एंड्रयू टेट की कमाई के स्रोतों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एंड्रयू टेट केवल अपने सब्सक्रिप्शन-आधारित एजुकेशन प्लेटफॉर्म \"रियल वर्ल्ड\" से हर साल लगभग 184 मिलियन डॉलर की ग्रॉस रेवेन्यू कमाते हैं। इस प्लेटफॉर्म की मासिक फीस 99 डॉलर प्रति सदस्य है। रिसेट टेक और इक्विमुंडो ने इस तरह के मेंबरशिप मॉडल्स और कोर्स सिस्टम्स को बड़े पैमाने पर की जाने वाली धोखाधड़ी करार दिया है। उनका कहना है कि इस उद्योग के प्रमुख उत्पादों में रिसाइकल किया गया कंटेंट, एफिलिएट पिरमिड, जानबूझकर मुश्किल बनाई गई कैंसिल प्रक्रिया और फर्जी रिव्यू शामिल होते हैं। हालांकि, एंड्रयू टेट के वकील ने इस रिपोर्ट पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की है। गौरतलब है कि एंड्रयू टेट और उनके भाई ट्रिस्टन टेट ब्रिटेन में बलात्कार और मानव तस्करी के आरोपों में प्रत्यर्पण का सामना कर रहे हैं, जिन्हें पिछले महीने फ्लोरिडा में गिरफ्तार किया गया था, यद्यपि उनके वकीलों का कहना है कि वे निर्दोष हैं।\n\nशीर्ष स्ट्रीमर्स और पॉडकास्टर्स का विशाल वित्तीय साम्राज्य\nमैनोसफेयर के शीर्ष चेहरे विभिन्न माध्यमों से भारी कमाई कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एडिन रॉस जैसे टॉप-टियर स्ट्रीमर्स प्रति घंटा 30,000 डॉलर से 50,000 डॉलर तक की स्ट्रीमिंग रेवेन्यू हासिल करते हैं। उल्लेखनीय है कि एडिन रॉस के पास किक प्लेटफॉर्म में इक्विटी हिस्सेदारी भी है, जहां उनका लाइव कंटेंट प्रसारित होता है। इसी तरह, जो रोगन जैसे चर्चित चेहरों की स्पीकिंग फीस 200,000 डॉलर से अधिक होती है।\n\nशोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, इस क्षेत्र के प्रमुख क्रिएटर्स प्लेटफॉर्म पेआउट्स, स्पॉन्सरशिप्स, ऑनलाइन कोर्सेस, मेंबरशिप्स और स्पीकिंग फीस के जरिए हर साल 1 मिलियन डॉलर से 10 मिलियन डॉलर तक की कमाई कर रहे हैं। जब इस वित्तीय डेटा पर प्रतिक्रिया मांगी गई, तो जो रोगन के मैनेजर और एडिन रॉस की एंटरटेनमेंट कंपनी ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।\n\nइक्विमुंडो के संस्थापक और सीईओ गैरी बार्कर, जो लैंगिक समानता और सकारात्मक पुरुषत्व के पक्षधर हैं, का कहना है कि इस पूरे परिदृश्य को समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि कैसे शीर्ष पर बैठे लोग युवाओं के गुस्से का मौद्रिकरण कर रहे हैं। उनका मानना है कि युवाओं को बेवकूफ बनाया जा रहा है, जबकि उन्हें ऐसे उत्पादों और जानकारी की जरूरत है जो वास्तव में पारदर्शी हों और उनके साथ कोई धोखाधड़ी न करें।\n\nएल्गोरिदम की भूमिका और 'लुक्समैक्सिंग' का बढ़ता ट्रेंड\nडिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी इस प्रक्रिया में मुनाफा कमाते हैं। विवाद और संघर्ष पैदा करने वाले चरमपंथी विचारों को बढ़ावा देने के लिए एल्गोरिदम के जरिए इन्फ्लुएंसर्स को पुरस्कृत किया जाता है। रिसेट टेक ने 'लुक्समैक्सिंग' से जुड़े कंटेंट का क्रॉस-प्लेटफॉर्म विश्लेषण किया, जिसे किक streamer ब्रैडन पीटर्स (जिन्हें ऑनलाइन दुनिया में 'क्लैविक्युलर' के नाम से जाना जाता है) ने इस वर्ष काफी बढ़ावा दिया है।\n\nटिकटॉक, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 216 इन्फ्लुएंसर्स के विश्लेषण में पाया गया कि लुक्समैक्सिंग से जुड़े ऑपरेशन्स की कुल रीच 14.6 बिलियन व्यूज से अधिक हो चुकी थी। शोधकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि यह रीच ऑर्गेनिक या स्वाभाविक नहीं है, बल्कि प्लेटफॉर्म्स के रिकमेंडेशन आर्किटेक्चर का नतीजा है। रिपोर्ट में इसकी तुलना महिलाओं को निशाना बनाने वाले प्रो-ईटिंग-डिसऑर्डर कंटेंट से की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि प्लेटफॉर्म्स पर ईटिंग-डिसऑर्डर कंटेंट के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाया गया था, लेकिन पुरुषों की शारीरिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट के खिलाफ ऐसी कोई ठोस नीति लागू नहीं की गई है। मेटा, गूगल, टिकटॉक, एक्स और किक ने इस कंटेंट गाइडलाइंस पर पूछे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।\n\nविवादों से रीच और कमाई बढ़ाने का क्लैविक्युलर मॉडल\nविवादों के जरिए क्लिक्स और व्यूज बटोरने का खेल कैसे चलता है, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण क्लैविक्युलर के उभार में दिखता है। जनवरी 2026 में, मियामी में एक स्प्रइंटर वैन के भीतर ब्रैडन पीटर्स (क्लैविक्युलर), एंड्रयू टेट, ट्रिस्टन टेट, निक फुएंतेस और स्नीको ने एक लाइवस्ट्रीम की, जिसमें वे कान्ये वेस्ट के यहूदी-विरोधी गीत \"हेल हिटलर\" को सुन रहे थे। इस घटना के क्लिप्स अन्य प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैले और उनकी व्यापक निंदा हुई।\n\nइस विवाद के बाद एंड्रयू टेट जैसे स्थापित चेहरों की ऑडियंस पर कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन क्लैविक्युलर की व्यस्तता में अचानक जबरदस्त उछाल आया। घटना के दो सप्ताह के भीतर, एक्स पर उनकी पोस्ट्स को औसतन लगभग 3 मिलियन व्यूज मिलने लगे, जो लाइवस्ट्रीम से पहले महज 500,000 व्यूज के आसपास थे। व्यूज बढ़ने का सीधा मतलब था कि उनकी लुक्समैक्सिंग 'एकाडमी' के लिए नए ग्राहक मिलना, जहां सबसे सस्ते कोर्स की कीमत 49 डॉलर है और प्राइवेट कोचिंग की फीस 3,000 डॉलर तक जाती है।\n\nयुवा वयस्कों में सपोर्ट सिस्टम की कमी और भावी दिशा\nगैरी बार्कर के अनुसार, कम उम्र के बच्चों को माता-पिता और कानूनों के जरिए इस ग्रिफ्ट पाइपलाइन से बचाया जा सकता है, लेकिन 18 से 29 वर्ष के युवा वयस्कों के पास ऐसा कोई सुरक्षा चक्र मौजूद नहीं है। समाज यह मानकर चलता है कि इस उम्र के लोग खुद सही और गलत का फैसला कर सकते हैं, जिसके कारण सबसे ज्यादा ट्रैफिक उत्पन्न करने वाला यह वर्ग सुरक्षा से वंचित रह जाता है।\n\n2024 के बाद आयोजित फोकस ग्रुप्स में रिसेट टेक ने पाया कि युवा पुरुषों में समाचार स्रोतों को लेकर जागरूकता की भारी कमी थी। वे द जो रोगन एक्सपीरियंस जैसे पॉडकास्ट को पूरी तरह से निष्पक्ष मानते थे और उनका यह भी मानना था कि महिलाएं ही केवल इको-चेंबर में फंसी हैं, जबकि वे स्वयं तटस्थ स्रोतों से जानकारी ले रहे हैं। बार्कर का कहना है कि युवाओं में आलोचनात्मक सोच विकसित करना जरूरी है ताकि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए परोसी जा रही भ्रामक सामग्री को पहचान सकें और इन शोषणकारी ऑनलाइन कम्युनिटीज का पर्दाफाश कर सकें।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों पर प्रभाव:\n\n• भारत में: डिजिटल स्पेस में बढ़ रहे फर्जी ऑनलाइन कोर्सेस, सट्टेबाज़ी और अनियंत्रित सप्लीमेंट्स के विज्ञापनों से युवाओं को वित्तीय और मानसिक नुकसान का खतरा रहता है।\n• वैश्विक स्तर पर: सोशल मीडिया एल्गोरिदम के कारण युवाओं के इको-चेंबर में फंसने और फर्जी लाइफ-कोचिंग व क्रिप्टो स्कीम्स में पैसे गंवाने के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रिसेट टेक और इक्विमुंडो की रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष क्या है?\nरिपोर्ट में बताया गया है कि ऑनलाइन मैनोसफेयर नेटवर्क कोई वैचारिक आंदोलन नहीं बल्कि युवाओं के गुस्से और हताशा से कमाई करने वाला अरबों डॉलर का व्यावसायिक तंत्र है।\n\n2. एंड्रयू टेट अपने एजुकेशन प्लेटफॉर्म से कितनी कमाई करते हैं?\nअध्ययन के अनुसार एंड्रयू टेट अपने सब्सक्रिप्शन-आधारित प्लेटफॉर्म 'रियल वर्ल्ड' से सालाना लगभग 184 मिलियन डॉलर की ग्रॉस रेवेन्यू कमाते हैं।\n\n3. लुक्समैक्सिंग क्या है और इसकी रीच कितनी पाई गई?\nलुक्समैक्सिंग पुरुषों के शारीरिक रूप को बदलने से जुड़ा ट्रेंड है, जिसकी रीच 216 इन्फ्लुएंसर्स के माध्यम से 14.6 बिलियन व्यूज से अधिक दर्ज की गई।\n\n4. 18 से 29 वर्ष के युवा इस ग्रिफ्ट के शिकार ज्यादा क्यों होते हैं?\nइस आयु वर्ग के लिए बच्चों की तरह कोई कानून या अभिभावकीय सुरक्षा तंत्र नहीं होता, और समाज यह मान लेता है कि वे डिजिटल मीडिया को खुद समझ सकते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/trends/andrew-tate-aura-charchita-inphluensarsa-ne-yuvaon-ke-gusse-ko-kaise-banaya-arabon-dolara-ka-dhndha-riporta-men-sanasanikheja-khul-14757",
  "category": "ट्रेंड्स",
  "publishedAt": "2026-08-07",
  "tags": [
    "मैनोसफेयर",
    "एंड्रयू टेट",
    "जो रोगन",
    "रिसेट टेक",
    "इक्विमुंडो",
    "डिजिटल सुरक्षा",
    "एडिन रॉस",
    "सोशल मीडिया"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}