बालकनी के गमले में गेंदा नहीं दे रहा फूल, तो इस तरह कराएं कलियों की भरमार गेंदे के पौधे पर कलियों और फूलों की भारी पैदावार के लिए धूप, जल निकासी वाली मिट्टी, नियंत्रित सिंचाई और समय पर डेड हेडिंग बेहद जरूरी है। घर के आंगन या बालकनी में लगा गेंदे का पौधा जब चटक पीले और नारंगी रंगों से लद जाता है, तो पूरे परिसर की रौनक बदल जाती है। अक्सर कई बागवानों की यह आम शिकायत होती है कि पौधे में हरी-भरी पत्तियां तो खूब निकल रही हैं, लेकिन या तो कलियां बनती ही नहीं या फिर खिलने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। सिर्फ नियम से पानी डालते रहने भर से पौधे में फूलों की बहार नहीं आ सकती। गेंदे के पौधे को भरपूर कलियों से भरने के लिए सही मात्रा में धूप, पौष्टिक व भुरभुरी मिट्टी, नपी-तुली सिंचाई और संतुलित पोषण का तालमेल बिठाना जरूरी होता है। बागवानी विशेषज्ञ तरुण चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल के जरिए गेंदे की सटीक देखभाल और उसे फूलों से लादने के व्यावहारिक तरीके साझा किए हैं। धूप और प्रकाश की सही जरूरत गेंदा मूल रूप से धूप पसंद करने वाला पौधा है। यदि इसे पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी न मिले, तो इसकी पूरी ऊर्जा केवल डालियों और पत्तियों को लंबा करने में खर्च हो जाती है। विशेषज्ञ के अनुसार पौधे को रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप मिलनी चाहिए। यदि गमले को किसी छायादार बरामदे या छज्जे के नीचे रख दिया जाए, तो पौधा हरा तो रहेगा मगर उसमें कलियां बेहद कम आएंगी। इसलिए गमले का स्थान ऐसा चुनें जहां सुबह से दोपहर तक अच्छी और तेज धूप लगातार आती रहे। गमले का चुनाव और मिट्टी का सही मिश्रण गेंदे के सामान्य पौधे के लिए 8 से 10 इंच का गमला बिल्कुल उपयुक्त माना जाता है। यदि पौधा संकर किस्म का है या उसका फैलाव अधिक है, तो 12 से 14 इंच का बड़ा कंटेनर लेना ज्यादा बेहतर रहता है। गमले के चयन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उसके पेंदे में जल निकासी के लिए उचित छेद होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी तुरंत बह जाए। पौधे की जड़ों के स्वस्थ विकास के लिए भारी और चिकनी मिट्टी से बचना चाहिए। इसके लिए एक खास मिश्रण तैयार करना फायदेमंद रहता है, जिसमें साधारण बगीचे की मिट्टी के साथ वर्मी कंपोस्ट, कोकोपीट, नीम खाद और थोड़ी मोटी रेत मिलाई जाती है। इस संयोजन से मिट्टी हल्की और भुरभुरी बनी रहती है, जड़ों तक हवा का संचार सुचारू रहता है और सिंचाई का पानी रुकने के बजाय आसानी से छनकर निकल जाता है। सिंचाई में संतुलन और सावधानियां गेंदे को जरूरत से ज्यादा पानी देना उसकी सेहत बिगाड़ सकता है। लगातार गीली रहने वाली मिट्टी में जड़ों के सड़ने का खतरा बना रहता है। इसलिए गमले में पानी तभी डालें जब मिट्टी की ऊपरी परत छूने पर सूखी महसूस हो। मौसम के हिसाब से भी पानी की आवश्यकता बदलती रहती है। सर्दियों के ठंडे महीनों में वाष्पीकरण धीमा होने के कारण पानी की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि गर्मियों के शुष्क मौसम में मिट्टी जल्दी सूखती है और अधिक पानी मांगती है। डेड हेडिंग और शुरुआती पिंचिंग से बढ़ाएं शाखाएं पौधे को कलियों से भरने के लिए डेड हेडिंग सबसे असरदार तकनीक है। जब भी कोई पुराना फूल मुरझाने या सूखने लगे, तो उसे तुरंत कैंची से काटकर पौधे से अलग कर देना चाहिए। जब तक सूखा फूल पौधे पर लगा रहेगा, पौधा अपनी ताकत बीज पकाने में लगाता रहेगा। सूखे फूलों को हटाते ही पौधे की बची हुई ऊर्जा नई शाखाएं और नई कलियां बनाने में स्थानांतरित हो जाती है। यदि पौधा अभी छोटा और कच्चा है, तो उसकी शुरुआती कुछ कलियों को चुटकी से हटा देना चाहिए। इससे पौधा ऊपर की ओर सीधा भागने के बजाय नीचे से घना और झाड़ीदार बनता है। हालांकि, यदि आपको अगले मौसम के लिए बीज सुरक्षित रखने हैं, तो कुछ चुनिंदा स्वस्थ फूलों को पौधे पर ही पूरी तरह सूखने और पकने देना चाहिए। खाद देने का सही समय और पोषक तत्व गेंदे की मिट्टी में हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर खुरपी से हल्की गुड़ाई करनी चाहिए और उसमें वर्मी कंपोस्ट मिलाना चाहिए। फूलों की संख्या और उनका आकार बढ़ाने के लिए पोटाश युक्त खाद का उपयोग भी काफी असरदार साबित होता है। खाद देते समय उसकी सही मात्रा का ध्यान रखना अनिवार्य है। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि खाद डालने के तुरंत बाद गमले को पानी से पूरी तरह न भरें। खाद देने और नियमित सिंचाई के बीच संतुलन बनाए रखना ही पौधे को स्वस्थ रखता है। मौसम के अनुसार सालभर की देखभाल गेंदे की जरूरतें हर मौसम में बदलती हैं। गर्मियों के दिनों में जब दोपहर का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाए, तो पौधे को झुलसाने वाली लू और तीखी धूप से थोड़ी देर के लिए बचाना चाहिए। मानसून के दौरान सबसे बड़ी चुनौती गमले में पानी का ठहराव रोकना होती है, क्योंकि जलभराव से फंगस लगने का डर रहता है। सितंबर और अक्टूबर के महीने नए पौधे लगाने और तैयार करने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इस दौरान तैयार किए गए पौधे नवंबर और दिसंबर के महीनों में मौसम अनुकूल होते ही शानदार तरीके से खिल उठते हैं। थोड़ी धूप, समय पर छंटाई और नियंत्रित सिंचाई अपनाकर किसी भी गमले को फूलों से गुलजार किया जा सकता है। इसका आप पर असर गेंदे के पौधे से भरपूर फूल लेने के लिए बागवानों को अपनी दैनिक देखभाल के तौर-तरीकों में तुरंत कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। • धूप का स्थान: गमले को ऐसी खुली जगह पर रखें जहां रोजाना 6 से 8 घंटे सीधी धूप मिलती हो। यदि पौधा छाया में रहेगा, तो उसमें केवल पत्तियां बढ़ेंगी और कलियां नहीं आएंगी। • सिंचाई का नियम: गमले में पानी तभी डालें जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी दिखे। जरूरत से ज्यादा पानी देने से पौधे की जड़ें सड़ सकती हैं और कलियां समय से पहले गिर सकती हैं। • मिट्टी की भुरभुरी संरचना: सामान्य मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट, कोकोपीट और मोटी रेत मिलाकर जल निकासी सुनिश्चित करें। भारी मिट्टी में पानी ठहरने से पौधे की सेहत तेजी से बिगड़ने लगती है। • डेड हेडिंग की नियमित आदत: मुरझाए और सूखे फूलों को पौधे से तुरंत काटकर अलग करते रहें। इससे पौधे की ऊर्जा बीज बनाने के बजाय नई कलियां और शाखाएं निकालने में लगेगी। • पोषण और गुड़ाई: हर 15 से 20 दिन में हल्की गुड़ाई करके वर्मी कंपोस्ट और पोटाश युक्त खाद डालें। खाद डालते ही गमले को पानी से पूरी तरह न भरें, बल्कि नमी का संतुलन बनाए रखें। ऐसा क्यों हुआ गेंदे के पौधे में भरपूर वानस्पतिक बढ़वार होने के बावजूद फूलों की कमी आमतौर पर गलत देखभाल और असंतुलित वातावरण के कारण होती है। • धूप की भारी कमी: छायादार जगह पर रखने से पौधे को प्रकाश संश्लेषण के जरिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती। इसके चलते पौधा कलियां विकसित करने के बजाय केवल तने और पत्तियां बढ़ाता रहता है। • अत्यधिक सिंचाई और भारी मिट्टी: गमले में जल निकासी ठीक न होने या बार-बार पानी देने से जड़ें घुटने लगती हैं। जड़ों के कमजोर पड़ते ही पौधे में पोषक तत्वों को सोखने की क्षमता घट जाती है। • पुराने सूखे फूलों का न हटना: जब मुरझाए फूलों को पौधे पर ही छोड़ दिया जाता है, तो पौधा अपने प्राकृतिक जीवन चक्र के तहत बीज पकाने में जुट जाता है। इससे नई कलियों के निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह थम जाती है। • पोषक तत्वों का असंतुलन: मिट्टी में पोटाश की कमी और नाइट्रोजन की अधिकता से पत्तियां तो तेजी से लहलहाती हैं, लेकिन कलियों की संख्या बेहद सीमित रह जाती है। सवाल-जवाब 1. गेंदे के पौधे को रोजाना कितने घंटे धूप की आवश्यकता होती है? गेंदे के पौधे को अच्छी तरह फूलने के लिए रोजाना कम से कम 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहिए। 2. गेंदे के पौधे के लिए गमले का आकार कितना होना चाहिए? सामान्य गेंदे के लिए 8 से 10 इंच का गमला पर्याप्त होता है, जबकि बड़े पौधों के लिए 12 से 14 इंच का गमला उपयुक्त रहता है। 3. डेड हेडिंग क्या है और यह फूलों के लिए क्यों जरूरी है? मुरझाए और सूखे फूलों को पौधे से काटना डेड हेडिंग कहलाता है, जिससे पौधा बीज बनाने के बजाय नई कलियां तैयार करने में ऊर्जा लगाता है। 4. गेंदे के पौधे की मिट्टी तैयार करते समय किन चीजों को मिलाना चाहिए? सामान्य बगीचे की मिट्टी के साथ वर्मी कंपोस्ट, कोकोपीट, नीम खाद और थोड़ी मोटी रेत मिलाने से मिट्टी भुरभुरी और जल निकासी वाली बनती है। 5. गेंदे के पौधे में खाद कितने दिनों के अंतराल पर देनी चाहिए? हर 15 से 20 दिन में हल्की गुड़ाई करके वर्मी कंपोस्ट और पोटाश युक्त खाद देना फायदेमंद रहता है। 6. गेंदे के पौधे में भारी फ्लावरिंग के लिए कौन सा मौसम सबसे अच्छा होता है? सितंबर-अक्टूबर में तैयार किए गए पौधे नवंबर और दिसंबर के अनुकूल मौसम में सबसे ज्यादा और अच्छे फूल देते हैं। https://trendkia.com/trends/balakani-ke-gamale-men-marigold-nahin-de-raha-phula-to-isa-taraha-karaen-kaliyon-ki-bharamara-35837 TrendKia — Har trend, sabse pehle.