बेटी राहा की परवरिश पर आलिया भट्ट ने मांगी सलाह, सद्गुरु बोले चिंतित रहने वाले नहीं बन सकते अच्छे माता-पिता चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री आलिया भट्ट ने बेटी राहा की परवरिश और सही फैसलों को लेकर सवाल पूछा, जिस पर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने माता-पिता के मानसिक संतुलन और गैर-जरूरी तनाव को लेकर अहम बात कही। संतान के जन्म के बाद माता-पिता के मन में यह उलझन अक्सर उठती है कि वे अपने बच्चे की देखरेख सही तरीके से कर पा रहे हैं या नहीं। बच्चे के खान-पान, भविष्य और रोजमर्रा के फैसलों को लेकर लगातार परेशान रहना कई परिवारों की आम आदत बन जाता है। इसी विषय को लेकर अभिनेत्री आलिया भट्ट ने भी अपनी बेटी राहा कपूर की परवरिश से जुड़ा सवाल चेन्नई में आयोजित एक सार्वजनिक बातचीत के दौरान आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के सामने रखा। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि अभिभावक यह कैसे तय करें कि वे अपनी संतान के लिए पर्याप्त और बेहतर काम कर रहे हैं। चिंता को जिम्मेदारी समझने की भूल पर सद्गुरु की दो टूक आलिया भट्ट की इस उलझन को सुनने के बाद सद्गुरु ने बेहद सीधे और हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की, जिस पर वहां मौजूद श्रोता हंस पड़े। सद्गुरु ने स्पष्ट किया कि एक चिंतित माता-पिता कभी भी अच्छे माता-पिता नहीं हो सकते। उनका यह दृष्टिकोण इस बात को रेखांकित करता है कि जब माता-पिता हर समय किसी न किसी अंदेशे में घिरे रहते हैं, तो उसका असर सीधे तौर पर घर के माहौल और बच्चे की मानसिक स्थिति पर पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि परिवार बच्चे की हर छोटी बात, जैसे उसने पूरा भोजन किया या नहीं, उसकी पढ़ाई कैसी चल रही है, आगे चलकर वह क्या मुकाम हासिल करेगा, या अनजाने में उनसे कोई चूक तो नहीं हो रही, को लेकर निरंतर घबराहट में जीते हैं। सद्गुरु के अनुसार, लगातार तनाव में रहने को जिम्मेदारी का नाम नहीं दिया जा सकता। वास्तविक जिम्मेदारी निभाने का अर्थ यह है कि अभिभावक खुद मानसिक रूप से स्थिर और संतुलित रहें, ताकि वे बच्चे को शांत और सकारात्मक परिवेश दे सकें। सार्वजनिक जीवन और मातृत्व के बीच आलिया भट्ट का अनुभव चेन्नई के इस कार्यक्रम में आलिया भट्ट की बातचीत से यह बात सामने आई कि परवरिश की यह चिंता केवल सामान्य परिवारों तक सीमित नहीं है। एक प्रसिद्ध अभिनेत्री होने के बावजूद वह भी अपनी बेटी राहा के लिए उचित निर्णय लेने को लेकर वैसा ही सोचती हैं जैसा कोई भी सामान्य मां सोचती है। राहा कपूर के दुनिया में आने के बाद से आलिया भट्ट अक्सर मातृत्व से जुड़े अपने अनुभवों की चर्चा करती रही हैं, हालांकि वे अपनी बेटी की तस्वीरों और व्यक्तिगत पलों को सार्वजनिक नजरों से दूर रखने के मामले में काफी सतर्कता भी बरतती हैं। भीतरी संतुलन और गैर-जरूरी तनाव से बचाव उसी सत्र के दौरान सामने आई एक अन्य चर्चा में सद्गुरु ने व्यक्ति के आंतरिक संतुलन पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपनी भावनात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए यह दृष्टिकोण रखा कि व्यक्ति को खुद को अनावश्यक दबाव और मानसिक खिंचाव में डालने से बचना चाहिए। जब कोई व्यक्ति भीतर से शांत और व्यवस्थित होता है, तो वह परिवार और बाहर के जीवन में बिना घबराए सही कदम उठा पाता है। बच्चे को पालने के दौरान भी यह भीतरी स्थिरता सबसे अधिक उपयोगी साबित होती है। इसका आप पर असर यह बातचीत माता-पिता को अपनी रोजमर्रा की आदतों और गैर-जरूरी मानसिक तनाव की समीक्षा करने का व्यावहारिक अवसर देती है। • मानसिक शांति: बच्चों के सामने घबराहट और निरंतर चिंता व्यक्त करने से बचने की जरूरत है। इससे घर में तनाव घटता है और बच्चे का स्वभाव अधिक शांत व सुरक्षित बनता है। • जिम्मेदारी का दायरा: जरूरी देखभाल और बेवजह के डर के बीच का फर्क समझना होगा। हर समय भविष्य का डर पालने के बजाय वर्तमान की व्यावहारिक जरूरतों पर ध्यान देना बेहतर रहता है। • पारिवारिक संवाद: माता-पिता आपस में अपनी चिंताओं को खुलकर साझा करके तनाव कम कर सकते हैं। साझा फैसलों से बच्चे के पालन में किसी एक व्यक्ति पर मानसिक दबाव नहीं पड़ता। • अभिभावकों की दिनचर्या: बच्चों की देखभाल के साथ माता-पिता को अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी समय निकालना चाहिए। शांत मन से लिए गए फैसले बच्चे की परवरिश में अधिक फलदायी होते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह चर्चा चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तब शुरू हुई जब अभिनेत्री आलिया भट्ट ने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के सामने बच्चों के पालन-पोषण का वास्तविक सवाल रखा। • आलिया भट्ट का सवाल: अभिनेत्री ने यह जानने की इच्छा जताई कि अभिभावक कैसे समझें कि वे अपनी संतान के लिए सही और पर्याप्त प्रयास कर रहे हैं। इस सवाल ने कई अभिभावकों की आम दुविधा को सामने ला दिया। • सद्गुरु का नजरिया: सद्गुरु ने इस बात पर जोर दिया कि चिंता कभी भी जिम्मेदारी का विकल्प नहीं हो सकती और परेशान रहने वाले माता-पिता बच्चे को सही दिशा नहीं दे पाते। इस स्पष्ट उत्तर ने लोगों को अपनी मानसिकता पर सोचने का मौका दिया। • सोशल मीडिया पर प्रसार: कार्यक्रम की यह बातचीत सामने आने के बाद इंटरनेट पर अभिभावकों की मानसिक सेहत और पेरेंटिंग के तरीकों पर विस्तृत विमर्श शुरू हो गया। सवाल-जवाब 1. चेन्नई के कार्यक्रम में आलिया भट्ट ने सद्गुरु से क्या पूछा था? आलिया भट्ट ने पूछा था कि माता-पिता यह कैसे समझें कि वे अपने बच्चे की परवरिश में सही और अच्छा कर रहे हैं। 2. आलिया के सवाल पर सद्गुरु का क्या जवाब था? सद्गुरु ने कहा कि एक चिंतित माता-पिता कभी अच्छे माता-पिता नहीं हो सकते, इसलिए व्यर्थ तनाव से बचना जरूरी है। 3. सद्गुरु के अनुसार पेरेंटिंग में जिम्मेदारी और चिंता का क्या अंतर है? सद्गुरु के अनुसार हर समय तनाव में रहने को जिम्मेदारी नहीं कहा जा सकता, बल्कि बच्चे की देखभाल के दौरान खुद शांत रहना आवश्यक है। 4. आलिया भट्ट अपनी बेटी की तस्वीरों को लेकर क्या रुख अपनाती हैं? आलिया भट्ट अपनी बेटी राहा कपूर की तस्वीरों और निजी पलों को लेकर काफी सावधानी बरतती हैं। https://trendkia.com/trends/beti-raha-ki-paravarisha-para-alia-bhatt-ne-mangi-salaha-sadhguru-bole-chintita-rahane-vale-nahin-bana-sakate-achchhe-mata-pita-37518 TrendKia — Har trend, sabse pehle.