भारत के इन छह शानदार जल स्रोतों और झीलों से सजाएं अपना अगला वेकेशन, यादगार बन जाएगा सफर छुट्टियों में प्राकृतिक नजारों के बीच समय बिताना चाहते हैं, तो भारत की ये छह बेहतरीन झीलें आपके सफर को यादगार बना सकती हैं। लद्दाख से लेकर केरल तक फैली इन झीलों में हर जगह एक अलग माहौल और नजारा देखने को मिलता है। यात्रा के दौरान केवल एक स्थान से दूसरे स्थान पर भागते रहना ही सब कुछ नहीं होता है। कई बार किसी शांत जल स्रोत के किनारे बैठकर सुबह की पहली किरण देखना, ठंडी हवा का अहसास करना और सामने खड़े ऊंचे पहाड़ों को निहारना ही पूरे भ्रमण का सबसे सुखद हिस्सा बन जाता है। भारत के विभिन्न हिस्सों में फैली झीलें पर्यटकों को ऐसे ही अनूठे और मनमोहक नजारों से रूबरू कराती हैं। देश के अलग-अलग कोनों में स्थित इन झीलों के पास कहीं बंजर और विशाल पर्वत श्रृंखलाएं नजर आती हैं, तो कहीं चारों तरफ घना हरा भरा परिवेश दिखाई देता है। कुछ स्थानों पर पारंपरिक नाविकों की सैर का आनंद लिया जा सकता है, तो कुछ के बीचोंबीच खड़े ऐतिहासिक महल इसकी भव्यता में चार चांद लगाते हैं। लद्दाख की ठंडी वादियों से लेकर केरल के दक्षिणी छोर तक, हर जल निकाय का अपना एक विशेष मिजाज और प्राकृतिक सौंदर्य है। इसलिए अपनी छुट्टियों की योजना बनाते समय केवल किसी आकर्षक तस्वीर को देखकर ही अंतिम फैसला न करें, बल्कि अपनी व्यक्तिगत पसंद और सहूलियत का भी पूरा ध्यान रखें। यदि आपको घुमावदार पहाड़ी रास्तों पर सफर करना पसंद है, परिवार के साथ किसी शांत जगह पर आराम के पल बिताने हैं, या फिर किसी शहर की सैर के साथ नौका विहार का आनंद लेना है, तो अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार ही गंतव्य का चयन करें। देश के ये छह प्रमुख जल निकाय आपको अपनी पसंद के अनुकूल एक बेहतरीन और यादगार यात्रा की योजना बनाने में पूरी मदद कर सकते हैं। पैंगोंग त्सो झील का नीला जल और विशाल पर्वत लद्दाख क्षेत्र में स्थित पैंगोंग त्सो झील का विहंगम दृश्य देखते ही पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है। दूर-दूर तक फैला हुआ पानी और उसके ठीक पीछे खड़े भूरे रंग के ऊंचे पहाड़ इस स्थान को एक विशिष्ट पहचान देते हैं। सूरज की रोशनी और आसमान में बादलों की स्थिति के अनुसार इस पानी के रंग में भी लगातार बदलाव दिखाई देता है। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने वाली इस खारे पानी की झील का भौगोलिक विस्तार भारत की सीमा से आगे चीन के नियंत्रण वाले भूभाग तक जाता है। यहां आने वाले सैलानियों के लिए मुख्य आकर्षण यहां का प्राकृतिक परिवेश और शांत वातावरण है। डल झील की तरह यहां पर पारंपरिक शिकारे या फिर बड़े हाउसबोट की सुविधा मिलने की उम्मीद लेकर बिल्कुल न आएं। इस दुर्गम इलाके की यात्रा पर निकलने से पहले रास्तों की स्थिति, मौजूदा मौसम और वहां जाने के लिए आवश्यक अनुमति से जुड़े सभी नियमों की आधिकारिक माध्यमों से पूरी जांच कर लें। डल झील में शिकारे की धीमी और मनमोहक सैर जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के बीचोंबीच स्थित डल झील अपने रंग-बिरंगे शिकारों और लकड़ी की बेहतरीन नक्काशी वाले हाउसबोट के कारण देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। पानी की सतह पर तैरती हुई नावें और पृष्ठभूमि में खड़े बर्फीले पहाड़ इस जगह के सौंदर्य को और अधिक बढ़ा देते हैं। यदि आप अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा विराम लेकर आराम के पल बिताना चाहते हैं, तो शिकारे की सैर के लिए पर्याप्त समय जरूर निकालें। इस झील की सैर करने के साथ-साथ आप आसपास स्थित ऐतिहासिक निशात बाग और शालीमार बाग जैसे प्रसिद्ध मुगलकालीन बगीचों को भी अपनी यात्रा सूची में शामिल कर सकते हैं। यदि आपका इरादा किसी हाउसबोट के अंदर रात गुजारने का है, तो बुकिंग से पहले वहां उपलब्ध कमरों, खानपान की व्यवस्था और मुख्य किनारे तक आने-जाने के साधनों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। शिकारे की यात्रा का किराया और घूमने की कुल अवधि पहले ही तय कर लेने से किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सकता है। पिछोला झील के पानी में तैरते ऐतिहासिक महल राजस्थान के ऐतिहासिक शहर उदयपुर में स्थित पिछोला झील उन पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है जो प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ प्राचीन वास्तुकला को भी देखना पसंद करते हैं। इस विशाल झील के बीचोंबीच बने हुए लेक पैलेस और जगमंदिर यहां के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय आकर्षण हैं। पानी की सतह के बीच उभरी हुई प्राचीन इमारतें और झील के तट पर बसा पूरा शहर मिलकर एक अद्भुत और शाही माहौल तैयार करते हैं। शाम के समय इस जल निकाय के आसपास कुछ वक्त बिताकर ढलते सूरज में बदलती हुई रोशनी के रंग देखना एक अलग ही अनुभव होता है। उदयपुर की यात्रा का कार्यक्रम तय करते समय पिछोला के दर्शन के साथ-साथ शहर के पुराने बाजारों और आसपास के अन्य ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी समय अवश्य निकालें। यदि आप इस पानी में नाव की सैर करने की सोच रहे हैं, तो टिकट काउंटर पर भुगतान करने से पहले मार्ग, तय समय और उसमें मिलने वाली अन्य सुविधाओं के बारे में पूरी पूछताछ जरूर कर लें। भीमताल की हरियाली में सुकून भरे पल उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल के पहाड़ी क्षेत्र में फैली भीमताल झील सैलानियों को घने जंगलों और हरियाली के बीच शांति से कुछ दिन बिताने का बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। इस झील के ठीक बीच में स्थित एक छोटा सा प्राकृतिक द्वीप इसके पूरे परिदृश्य को बेहद खास बना देता है। यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल नैनीताल से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, इसलिए कुमाऊँ की अपनी यात्रा के दौरान इसे आसानी से अपने प्लान का हिस्सा बनाया जा सकता है। यहां पहुंचने के बाद हर समय किसी न किसी गतिविधि में व्यस्त रहने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। झील के किनारे चुपचाप बैठना, आसपास की पगडंडियों पर टहलना और शांत पानी को निहारना ही अपने आप में एक बहुत अच्छा अनुभव साबित हो सकता है। यदि आप अपने परिवार के साथ यहां आ रहे हैं, तो एक ही दिन में बहुत सारे अलग-अलग स्थान देखने की जल्दीबाजी बिल्कुल न करें। किसी भी समय वहां कितनी भीड़ होगी, यह पूरी तरह से छुट्टियों के दिनों, मौसम की स्थिति और दिन के समय पर निर्भर करता है। चंद्रताल की यात्रा से पहले रखें पूरी तैयारी हिमाचल प्रदेश के दुर्गम लाहौल-स्पीति जिले में स्थित चंद्रताल एक बेहद खूबसूरत और ऊंचे पहाड़ों से घिरी हुई झील है। लगभग 4,300 मीटर की अत्यधिक ऊंचाई पर मौजूद यह जल स्रोत चंद्रताल वन्यजीव अभयारण्य का एक अहम हिस्सा माना जाता है। इसके आसपास फैला हुआ खुला और पथरीला पहाड़ी इलाका इसे शहरों के नजदीक बनी आम झीलों से बिल्कुल अलग और रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। इस कठिन इलाके में जाने का कार्यक्रम बनाते समय हमेशा रास्ते के लिए पर्याप्त दिनों का मार्जिन लेकर चलना चाहिए। घर से निकलने से पहले स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से सड़कों की स्थिति और मौसम के मिजाज की पूरी जानकारी लें तथा अपने ठहरने का प्रबंध पहले से पक्का करके रखें। इस तरह की पहाड़ी यात्राओं के दौरान रास्ते में किसी भी प्रकार की देरी होने की संभावनाओं को हमेशा ध्यान में रखकर चलना समझदारी होती है। झील के पर्यावरण और शांति को बनाए रखें तथा फोटोग्राफी के लिए ऐसे प्रतिबंधित रास्तों पर जाने से बचें जहां जाने के लिए स्थानीय प्रशासन ने सख्त मनाही की हो। वेम्बनाड झील में केरल के बैकवॉटर का जीवन दक्षिण भारत के राज्य केरल में स्थित वेम्बनाड झील का परिवेश उत्तर भारत की पर्वतीय झीलों से पूरी तरह भिन्न और अनोखा है। यहां पानी के अंतहीन रास्ते, हरे-भरे तट और स्थानीय निवासियों की नावों से जुड़ी हुई दैनिक जीवन शैली देखने को मिलती है। कुमारकोम और उसके आसपास फैले हुए बैकवॉटर क्षेत्र इस पूरी झील की यात्रा को पर्यटकों के लिए बेहद खास बना देते हैं। आप अपनी व्यक्तिगत रुचि और समय के अनुसार कुछ घंटों की छोटी नौका यात्रा या फिर किसी सुसज्जित हाउसबोट में रात बिताने का विकल्प चुन सकते हैं। किसी भी प्रकार की बुकिंग फाइनल करने से पहले यह जरूर स्पष्ट कर लें कि आपकी नाव किस तय रास्ते पर जाएगी, कितनी देर तक पानी में घूमेगी और खाने-पीने में क्या विकल्प मिलेंगे। केवल इंटरनेट पर मौजूद तस्वीरें देखकर निर्णय लेने के बजाय कमरों की स्थिति, साफ-सफाई के मानकों और अन्य जरूरी सुविधाओं की जमीनी जानकारी अवश्य लें। इससे आप अपने तय बजट और व्यक्तिगत जरूरतों के मुताबिक सबसे सही और आरामदायक विकल्प का चुनाव कर पाएंगे। अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर बनाएं टूर प्लान इन छह प्रमुख झीलों में से किसी एक का चयन करते समय सबसे पहले अपने पास उपलब्ध कुल दिनों और अपनी पसंद की छुट्टियों के स्वरूप पर विचार करें। पैंगोंग और चंद्रताल जाने के लिए आपको कठिन पहाड़ी रास्तों और लंबी तैयारियों की आवश्यकता होगी। पिछोला झील को आप अपने उदयपुर शहर के भ्रमण कार्यक्रम के साथ बहुत आसानी से जोड़ सकते हैं। डल झील में पारंपरिक शिकारे और हाउसबोट मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं, जबकि वेम्बनाड में बैकवॉटर की सैर करना एक बिल्कुल ही अलग और शांत अनुभव प्रदान करता है। इसके विपरीत, भीमताल में आप जल निकाय के आसपास बिना किसी जल्दबाजी के आराम से सुकून भरे दिन बिताने की योजना तैयार कर सकते हैं। आप देश के जिस भी हिस्से में घूमने जाएं, वहां स्थानीय नियमों का पालन करें। इसका आप पर असर भारत की इन प्रमुख झीलों की यात्रा करने से पहले मौसम, रास्तों और स्थानीय व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी होना आपके सफर को सुरक्षित और सुगम बना सकता है। • यात्रा की तैयारी: पैंगोंग और चंद्रताल जैसे ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जाने से पहले सड़क मार्ग खुलने और मौसम की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूर कर लें। इससे रास्ते में किसी भी प्रकार की अनहोनी या असुविधा से बचा जा सकता है। • बजट प्रबंधन: डल झील और वेम्बनाड में हाउसबोट या शिकारे की बुकिंग करने से पहले किराए, अवधि और भोजन की सुविधाओं की पहले से स्पष्ट बात कर लें ताकि अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके। • स्थानीय मौसम: भीमताल और उदयपुर जैसी जगहों पर छुट्टियों के मौसम में भारी भीड़ हो सकती है, इसलिए अपने ठहरने के विकल्प पहले से बुक करके रखना समझदारी होगी। • प्राकृतिक संरक्षण: चंद्रताल जैसे संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में यात्रा करते समय स्थानीय प्रशासन के नियमों का सख्ती से पालन करें और वहां शांति बनाए रखें। https://trendkia.com/trends/bharat-ke-in-chhe-shandaar-jal-sroton-aur-jheelon-se-sajayein-apna-agla-vacation-yaadgar-ban-jayega-safar-58041 TrendKia — Har trend, sabse pehle.