# बिना हरी सब्जियों के ऐसे बनाएं पारंपरिक मारवाड़ी मंगोड़ी करी, दही और मसालों का लाजवाब मेल

> किचन में जब ताजी सब्जियां खत्म हो जाएं, तो मूंग दाल की मंगोड़ी, दही और टमाटर की मदद से यह तीखी-चटपटी मारवाड़ी करी मिनटों में तैयार की जा सकती है.

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/bina-hari-sabjiyon-ke-aise-banaen-parnparika-maravari-mangodi-kari-dahi-aura-masalon-ka-lajavaba-mela-35845 · **Language:** Hindi
**Tags:** मंगोड़ी की सब्जी, मारवाड़ी रेसिपी, मूंग दाल मंगोड़ी, दही वाली ग्रेवी, राजस्थानी खाना, वेजिटेरियन रेसिपी

रसोई में कभी-कभार ऐसा मौका आ ही जाता है जब फ्रिज में हरी सब्जियां खत्म हो जाती हैं और दोपहर या रात के भोजन के लिए कोई सरल समाधान खोजना पड़ता है. ऐसी स्थिति में मूंग दाल की सूखी मंगोड़ी एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है. मारवाड़ी भोजन परंपरा में सूखी दाल की बड़ियों को गाढ़े मसालों और खट्टी दही के साथ पकाने का चलन बेहद पुराना है. इस पारंपरिक डिश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें किसी विदेशी या दुर्लभ सामग्री की आवश्यकता नहीं होती. पेंट्री में रखी सामान्य चीजों जैसे टमाटर, फेंटे हुए ताजे दही और रोजमर्रा के पिसे मसालों से यह बेहद स्वादिष्ट बनकर तैयार हो जाती है. यदि आपको ग्रेवी में हल्का खट्टापन और तीखा स्वाद पसंद है, तो यह पारंपरिक व्यंजन आपकी नियमित थाली का हिस्सा बन सकता है.

## आवश्यक सामग्री का सटीक नाप
इस मारवाड़ी डिश को पकाने के लिए सबसे पहले एक कप अच्छी गुणवत्ता वाली मूंग दाल की मंगोड़ी ले लें. छौंक और तलने के कार्य के लिए आपको दो बड़े चम्मच देसी घी अथवा शुद्ध कुकिंग ऑयल की आवश्यकता होगी. तड़के के बुनियादी मसालों में एक छोटी चम्मच साबुत जीरा और एक चुटकी तीव्र सुगंध वाली हींग शामिल करें. ग्रेवी का आधार तैयार करने के लिए एक कप बारीक कटे हुए टमाटर या घर पर पिसी हुई टमाटर प्यूरी लें. इसके साथ ही स्वाद बढ़ाने के लिए एक छोटी चम्मच अदरक और तीखी हरी मिर्च का ताजा कुटा हुआ पेस्ट अपने पास रखें.

सूखे पिसे मसालों की सूची में आधा छोटा चम्मच पिसी हल्दी, एक छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर और एक छोटा चम्मच सूखा धनिया पाउडर शामिल करें. नमक का उपयोग आप अपनी व्यक्तिगत पसंद और स्वाद के अनुसार कर सकते हैं. तरी को संतुलित खटास और मखमली गाढ़ापन प्रदान करने के लिए दो बड़े चम्मच अच्छी तरह फेंटा हुआ दही नाप कर रख लें. खुशबूदार तड़के के समापन के लिए एक चौथाई छोटी चम्मच पिसा गरम मसाला और बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया अलग से रख लें.

## मंगोड़ी को भूनने की सही विधि
सब्जी पकाने की शुरुआत बड़ियों को भूनने से होती है. गैस पर एक भारी तले वाली कड़ाही चढ़ाएं और उसमें एक बड़ा चम्मच घी या तेल डालकर गरम करें. अब आंच को मध्यम कर दें और उसमें एक कप मंगोड़ी डालें. इन बड़ियों को कलछी से लगातार चलाते हुए तब तक सेकें जब तक कि इनका रंग हर तरफ से हल्का बादामी या सुनहरा न दिखने लगे. लगातार चलाने से मंगोड़ी किसी एक तरफ से जलती नहीं है और अंदर तक कुरकुरी हो जाती है. जब ये सुनहरी हो जाएं, तो इन्हें कड़ाही से निकालकर एक अलग प्लेट में ठंडा होने के लिए रख दें.

## मसालेदार टमाटर की ग्रेवी तैयार करना
उसी कड़ाही में बचा हुआ एक बड़ा चम्मच घी या तेल डालें और गर्म होने दें. तेल गरम होते ही उसमें जीरा डालें और उसके चटकने का इंतजार करें. जीरा भुन जाने पर तुरंत हींग और अदरक-हरी मिर्च का पेस्ट डाल दें और कुछ सेकंड के लिए खुशबू आने तक भूनें. इसके फौरन बाद कड़ाही में कटे हुए टमाटर या प्यूरी शामिल करें. टमाटरों को तब तक पकाएं जब तक वे पूरी तरह नरम न हो जाएं.

टमाटर के गलते ही उसमें हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर मिला दें. आंच को बिल्कुल धीमा रखें ताकि सूखे मसाले कड़ाही के तले में चिपककर जलें नहीं. इस मसाले को तब तक लगातार भूनते रहें जब तक कि टमाटर पूरी तरह गल न जाएं और मसाला गाढ़ा और एकसार न हो जाए. अगर आपको लगे कि मसाला कड़ाही के तले पर लग रहा है, तो उसमें दो घूंट पानी मिला सकते हैं ताकि मसाले अच्छी तरह पककर तेल छोड़ दें.

## दही मिलाने का सुरक्षित तरीका और तरी का निर्माण
इस रेसिपी का सबसे नाजुक मोड़ दही मिलाने का होता है. गैस की आंच को बिल्कुल मंदा कर दें. अब दो बड़े चम्मच फेंटे हुए दही को एक हाथ से धीरे-धीरे मसाले में गिराएं और दूसरे हाथ से कलछी को लगातार तेज गति से घुमाते रहें. दही को सीधे तेज गर्म कड़ाही में बिना चलाए डालने से वह तुरंत फट जाता है और ग्रेवी दानेदार हो जाती है. धीमी आंच पर लगातार चलाते रहने से दही मसाले के साथ घुलकर एकसार क्रीमी टेक्सचर बना लेता है.

जब दही मसाले के साथ पूरी तरह समाहित हो जाए, तब इसमें आवश्यकतानुसार सादा पानी मिलाएं. यहां यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि मूंग दाल की मंगोड़ी पकने के दौरान भारी मात्रा में पानी सोखती है. इसलिए इस समय ग्रेवी को अपनी अंतिम जरूरत से थोड़ा ज्यादा पतला रखें ताकि उबलने के बाद यह बहुत ज्यादा सूखी या जरूरत से ज्यादा गाढ़ी न बन जाए.

## मंगोड़ी को पकाना और अंतिम रूप देना
जब तरी में हल्का उबाल आने लगे, तो पहले से भूनकर रखी गई मंगोड़ी को कड़ाही में डाल दें और सब चीजों को आपस में मिला लें. अब कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और आंच को मध्यम से धीमा रखकर कुछ मिनट तक पकने दें. भाप में पकने से मंगोड़ी अंदर तक रस सोख लेगी और पूरी तरह मुलायम हो जाएगी. बीच में ढक्कन हटाकर एक-दो बार सब्जी को चलाएं और यदि बड़ियों ने सारा पानी सोख लिया हो, तो थोड़ा गर्म पानी और डाल दें.

जब मंगोड़ी चम्मच से दबाने पर आसानी से टूटने लगे और तरी आपके मनपसंद गाढ़ेपन पर पहुंच जाए, तब इसमें चौथाई छोटी चम्मच गरम मसाला छिड़कें. गैस का चूल्हा बंद कर दें और ऊपर से ताजा हरा धनिया डालकर सब्जी को मिला लें. यह सब्जी गरम-गरम फुल्के, तिकोने पराठे या उबले हुए चावल के साथ परोसने पर लाजवाब स्वाद देती है. यदि आपको हल्की तरी पसंद है तो पानी की मात्रा बढ़ाएं, अन्यथा गाढ़े मसाले वाली यह सब्जी सभी को बहुत भाती है.

## इसका आप पर असर
यह त्वरित और पारंपरिक रेसिपी उन दिनों में समय और पैसे की बचत करती है जब घर पर कोई हरी सब्जी उपलब्ध न हो.

- **किचन बजट:** महंगी मौसमी सब्जियों पर निर्भर रहे बिना यह डिश घर में रखी मूंग दाल बड़ियों और बुनियादी मसालों से कम खर्च में तैयार हो जाती है. यह परिवारों को आपातकालीन दिनों में भी पौष्टिक भोजन पकाने का आसान उपाय देती है.
- **समय की बचत:** सब्जी काटने या छीलने में समय गंवाए बिना यह ग्रेवी लगभग 15 से 20 मिनट में बनकर तैयार हो जाती है. व्यस्त कामकाजी दिनों में यह दोपहर अथवा रात के भोजन के लिए त्वरित समाधान है.
- **भंडारण और उपयोग:** सूखी मंगोड़ी महीनों तक खराब नहीं होती और इसे एयरटाइट डिब्बे में हमेशा तैयार रखा जा सकता है. जब भी बाजार से सब्जी लाने का समय न मिले, आप तुरंत यह डिश पका सकते हैं.
- **स्वाद और विविधता:** दही और टमाटर की खटास के साथ प्रोटीन से भरपूर मूंग दाल बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आती है. इसे रोटी, पराठे या चावल किसी भी मुख्य भोजन के साथ परोसा जा सकता है.

## ऐसा क्यों हुआ
सूखे इलाकों में ताजी हरी सब्जियों की मौसमी कमी के चलते पारंपरिक रूप से मंगोड़ी जैसी सूखी बड़ियां तैयार करने की संस्कृति विकसित हुई. यह तरीका भोजन की पौष्टिकता को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और बिना ताजी उपज के स्वादिष्ट खाना पकाने के लिए अपनाया गया.

- **सूखे मौसम की आवश्यकता:** राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पानी की कमी के कारण साल भर हरी सब्जियां उगना कठिन होता था. इसलिए दालों को पीसकर और धूप में सुखाकर मंगोड़ी बनाई जाती थी ताकि विषम परिस्थितियों में भी भोजन मिलता रहे.
- **दही और मसालों का संतुलन:** मंगोड़ी में खुद की कोई ताजी नमी नहीं होती, इसलिए इसे पकाने के लिए दही और टमाटर की खट्टी ग्रेवी का इस्तेमाल किया जाता है. दही ग्रेवी को प्राकृतिक चिकनाई और खट्टापन देता है, जो बड़ियों के सूखेपन को संतुलित करता है.
- **प्रोटीन की पूर्ति:** मांस या प्रचुर हरी सब्जियों के अभाव में दालों की बड़ियां भोजन में प्रोटीन का प्रमुख स्रोत बनती हैं. यह परंपरा आज भी भारतीय घरों में आपातकालीन और पौष्टिक भोजन के रूप में निरंतर जारी है.

## सवाल-जवाब

### 1. इस सब्जी को बनाने के लिए कितनी मंगोड़ी चाहिए?
इस रेसिपी में एक कप मूंग दाल की मंगोड़ी का उपयोग किया जाता है.

### 2. मंगोड़ी को भूनते समय क्या ध्यान रखना चाहिए?
मंगोड़ी को घी या तेल में धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए हल्का सुनहरा होने तक भूनना चाहिए ताकि वह जले नहीं.

### 3. ग्रेवी में दही डालते समय फटने से कैसे बचाएं?
गैस की आंच धीमी कर दें और अच्छी तरह फेंटे हुए दही को धीरे-धीरे डालते हुए कलछी से लगातार चलाते रहें.

### 4. मंगोड़ी पकने के बाद ग्रेवी गाढ़ी क्यों हो जाती है?
मूंग दाल की सूखी मंगोड़ी उबलते समय काफी मात्रा में पानी सोखती है, इसलिए शुरुआत में तरी को थोड़ा पतला रखना चाहिए.

### 5. इस सब्जी में खटास के लिए किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
ग्रेवी को खट्टा और स्वादिष्ट बनाने के लिए एक कप कटे टमाटर या प्यूरी और दो बड़े चम्मच फेंटा हुआ दही डाला जाता है.

### 6. यह सब्जी किन चीजों के साथ सबसे अच्छी लगती है?
इसे गरम फुल्के, पराठे या सादे उबले चावल के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है.

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