बिना टमाटर और क्रीम के घर पर तैयार करें खुशबूदार हिमाचली मुरुग करी दही, दूध और खड़े मसालों के मेल से तैयार होने वाली इस खास पहाड़ी रेसिपी में टमाटर की खटास की जरूरत नहीं पड़ती। धीमी आंच पर पकी यह डिश सादे भात या रोटी के साथ बेहद लजीज लगती है। उत्तर भारत की आम करी शैलियों में अक्सर टमाटर की तीखी खटास या काजू के गाढ़े घोल की प्रधानता देखने को मिलती है, परंतु पहाड़ों की रसोई में जायके की परिभाषा काफी अलग और सौम्य होती है। हिमाचल के पारंपरिक रंधावे में खट्टेपन और तरी के गाढ़ेपन का आधार पूरी तरह सादे दही और ताजा दूध पर टिका होता है। इसमें सौंफ की मीठी महक, दालचीनी की तीखी मिठास और लौंग-इलायची का संयोजन तरी को एक खास सुवास प्रदान करता है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें न तो टमाटर की प्यूरी मिलाई जाती है और न ही बाजार की मलाई या क्रीम की दरकार होती है। सरसों के तेल में सोंधी भुनाई और धीमी आंच पर तैयार किया गया यह व्यंजन साधारण भोजन को भी खास बना देता है। तैयारी और जरूरी सामग्री का माप दो व्यक्तियों के भोजन के लिए लगभग 400 ग्राम ताजा चिकन के पीस उपयुक्त रहते हैं। चिकन के सभी टुकड़ों का आकार यथासंभव एक जैसा रखें ताकि आंच पर वे एकसमान गति से गल सकें। इस मात्रा के लिए एक मध्यम साइज का प्याज बारीक कतर लें। साथ में आधा इंच छिला हुआ अदरक, दो से तीन लहसुन की छिली कलियां और तीन से चार हरी मिर्च अलग रख लें। चिकनाई के लिए कुल दो बड़े चम्मच शुद्ध सरसों का तेल पर्याप्त होगा। मसालेदार घोल और सुवास के लिए खड़े मसालों का सही संतुलन जरूरी है। इसके तहत दो से तीन साबुत लौंग, दो छोटी हरी इलायची, आधा इंच लंबी दालचीनी की छाल, एक चौथाई छोटा चम्मच साबुत धनिया और एक चौथाई छोटा चम्मच सौंफ निकाल लें। तरी का आधार रचने के लिए एक चौथाई कप ताजा दही और एक चौथाई कप सादा दूध कटोरी में निकालें। सूखे पिसे मसालों में एक छोटा चम्मच पिसी हल्दी, आधा छोटा चम्मच कुटी लाल मिर्च, स्वादानुसार सादा नमक और गार्निशिंग हेतु ताजा हरा धनिया एकत्र करें। टुकड़ों पर प्राथमिक लेप लगाना मांस पकाने से पहले टुकड़ों को हल्के मसालों से कोट करना आवश्यक है। साफ किए हुए चिकन के टुकड़ों पर एक चुटकी नमक और हल्दी का थोड़ा हिस्सा छिड़कें। यदि आपको तीखापन पसंद हो, तो साथ में मामूली मात्रा में पिसी काली मिर्च भी मिलाई जा सकती है। हाथों से इन मसालों को हर टुकड़े पर अच्छी तरह मल दें ताकि पतली परत जम जाए। हल्दी की पूरी मात्रा अभी न लगाएं, क्योंकि अतिरिक्त हल्दी बाद में तरी भूनते समय काम आएगी। अत्यधिक हल्दी एक ही बार में लगाने से मांस में कड़वाहट आ सकती है। लेप लगे टुकड़ों को बर्तन में ढककर कुछ देर के लिए फ्रिज के भीतर रख दें, ताकि जब तक आप तरी की बुनियादी सामग्री भूनें, तब तक मांस के भीतर नमक का रस बैठ जाए। साबुत मसालों और प्याज की भुनाई भारी तले की कड़ाही में सरसों के तेल की आधी मात्रा डालकर धुआं उठने तक गरम करें, फिर गैस को थोड़ा धीमा कर लें। इस गरम तेल में दालचीनी, लौंग, छोटी इलायची, साबुत धनिया और सौंफ के दाने छोड़ें। इन खड़े मसालों को मंद आंच पर कलछी से हिलाते हुए सेकें ताकि उनकी कुदरती खुशबू तेल के कण-कण में समा जाए। ध्यान रखें कि मसालों का रंग काला न पड़े, क्योंकि अधिक जलने पर पूरी तरी का स्वाद तीखा और कड़वा हो जाएगा। जैसे ही मसालों से भीनी महक आने लगे, कड़ाही में कटी हुई प्याज डालकर करछुल से चलाएं। प्याज को तब तक चलाएं जब तक वह मुलायम होकर पारदर्शी न दिखने लगे। इसके तुरंत बाद छिली लहसुन की कलियां, अदरक का टुकड़ा और हरी मिर्च के टुकड़े भी कड़ाही में शामिल कर दें। मसाला मिश्रण को पीसकर पेस्ट तैयार करना प्याज, अदरक और लहसुन के मिश्रण को मध्यम आंच पर तब तक भूनते रहें जब तक कि उनका कच्चापन पूरी तरह गायब न हो जाए और प्याज के किनारों पर हल्का सुनहरा रंग न उभर आए। इसके बाद चूल्हा तुरंत बंद कर दें। गरम भुने मसाले को कभी भी सीधे मिक्सी के जार में न भरें, क्योंकि भाप के दबाव से ढक्कन खुलने और जलने की आशंका रहती है। मसाले को थाली या पंखे की हवा में पूरी तरह सामान्य तापमान पर आने दें। ठंडा होने के बाद इसे मिक्सर में डालें और बेहद बारीक पीस लें। यदि मिश्रण पीसने में सूखा लगे, तो सिर्फ एक-दो घूंट पानी मिलाया जा सकता है, किंतु अधिक पानी न डालें क्योंकि इस पेस्ट को तेल में दोबारा अच्छी तरह सेंकना होता है। खड़े मसालों का महीन पिस जाना ही इस तरी की बनावट को मखमली बनाता है। पेस्ट की दोबारा सिकाई और दही-दूध का मेल उसी कड़ाही को फिर से गैस पर चढ़ाएं और बचा हुआ एक चम्मच सरसों का तेल डालकर गरम करें। अब पिसा हुआ मसाला पेस्ट इसमें पलट दें। साथ ही बची हुई हल्दी और लाल मिर्च पाउडर भी मिला दें। धीमी से मध्यम लौ पर पेस्ट को लगातार चलाते हुए भूनें ताकि वह कड़ाही के पेंदे पर न चिपके। यदि मसाला सूखता हुआ दिखे, तो मामूली पानी छिड़क सकते हैं। जब मसाले से तेल के सूक्ष्म कण अलग होने लगें, तब आंच को सबसे धीमी स्थिति पर ले आएं। दही को मिलाने से पहले एक कटोरी में चम्मच अथवा मथानी की मदद से पूरी तरह फेंट लें ताकि उसमें कोई गांठ या थक्का शेष न रहे। फटे हुए दही की तरी देखने और चखने दोनों में खराब लगती है। अब कड़ाही को चाहें तो कुछ पलों के लिए चूल्हे से नीचे उतार लें या आंच न्यूनतम कर दें। फेंटा हुआ दही धीरे-धीरे धार बनाकर डालें और दूसरी तरफ कलछी तेजी से घुमाते रहें। इसके तुरंत बाद दूध भी डाल दें और दोनों को मसाले के साथ एकसार मिला लें। तेज आंच पर सीधे ठंडा दही डालने से वह फट जाता है, इसलिए यहां धीरज रखना आवश्यक है। जब दूध और दही अच्छी तरह घुलमिल जाएं, तब कड़ाही को मंद आंच पर खदकने दें। धीमी आंच पर मांस को पकाना मखमली गाढ़ी तरी में पहले से मैरीनेट करके रखे हुए चिकन के टुकड़े डालें। कलछी से हल्के हाथों से चलाएं ताकि हर बोटी पर मसालेदार ग्रेवी का लेप चढ़ जाए। इसके बाद कड़ाही पर ढक्कन लगा दें और आंच को धीमा-मध्यम रखें। बीच-बीच में ढक्कन हटाकर कलछी चलाएं ताकि नीचे से मसाला जले नहीं। यदि आपको तरी अधिक सूखी लगे, तो आवश्यकतानुसार थोड़ा गुनगुना पानी मिलाया जा सकता है। साधारणतया 15 से 20 मिनट के भीतर चिकन पकने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। हालांकि, हड्डियों वाले टुकड़ों और उनके आकार के अनुसार समय कम या ज्यादा हो सकता है। यह कभी न समझें कि केवल तरी के गाढ़े होने का अर्थ मांस का पकना है; मांस के रेशे नर्म होकर हड्डी छोड़ने लगें, तभी उसे पूरी तरह तैयार माना जाना चाहिए। अंतिम स्पर्श और परोसने का तरीका जब मांस पूरी तरह गल जाए, तब करी के गाढ़ेपन और नमक की अंतिम जांच करें। यदि तरी बहुत गाढ़ी लगे, तो थोड़ा सा खौलता पानी डालकर एक उबाल ले लें। इसके विपरीत यदि तरी अधिक पतली हो, तो ढक्कन हटाकर मध्यम आंच पर दो-तीन मिनट पकाकर सुखा लें। सबसे अंत में बारीक कटा हरा धनिया ऊपर से बुरकें और बर्नर बंद कर दें। पकाने के तुरंत बाद परोसने के बजाय कड़ाही को तीन-चार मिनट ढका रहने दें, जिससे मसालों का सत्व मांस में रम जाए। इस सुगंधित करी को उबले हुए सादे चावलों के साथ परोसना सबसे उत्तम माना जाता है, जिससे खड़े मसालों की महक साफ महसूस होती है। इसके अलावा गरमागरम तवा रोटी या मक्खन लगी नान के साथ भी इसका आनंद उठाया जा सकता है। इसका आप पर असर घर पर बिना भारी क्रीम या टमाटर का उपयोग किए एक हल्की और स्वादिष्ट चिकन करी तैयार की जा सकती है। • खान-पान के शौकीनों के लिए: यह पारंपरिक तरीका सामान्य चिकन करी से बिल्कुल अलग एक अनोखा स्वाद देता है। इसमें तीखे टमाटरों की जगह दही और दूध की हल्की ग्रेवी का इस्तेमाल होता है जिससे पेट पर भारीपन नहीं होता। • रसोई के बजट पर असर: बाजार की महंगी क्रीम या काजू का पेस्ट खरीदे बिना भी गाढ़ी तरी बनाई जा सकती है। घर में उपलब्ध बुनियादी मसालों, दूध और दही से ही शानदार स्वाद प्राप्त हो जाता है। • पकाने की तकनीक: दही को तरी में मिलाते समय तापमान का संतुलन साधना सबसे जरूरी सीख है। आंच धीमी रखकर और दही को पहले से फेंटकर मिलाने से तरी के फटने का डर खत्म हो जाता है। • मौसम और खान-पान: ठंड और सुहावने मौसम में खड़े मसालों की गर्माहट शरीर के लिए बेहद अनुकूल होती है। इस व्यंजन को दोपहर या रात के भोजन में सादे भात के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ हिमाचली व्यंजनों में स्थानीय रूप से उपलब्ध सीमित सामग्रियों और पहाड़ी ठंड के अनुकूल तासीर वाले मसालों का सदियों से इस्तेमाल होता आया है। इस करी की रचना भी उसी जरूरत और रसोइया ज्ञान से उपजी है। • डेयरी और खड़े मसालों का संयोजन: पहाड़ी इलाकों में टमाटर हर मौसम में सहज उपलब्ध नहीं होते थे, इसलिए खटास और ग्रेवी के लिए घर का ताजा दही और दूध अपनाया गया। सौंफ, दालचीनी और इलायची की स्वाभाविक तासीर पाचन में मदद करती है और ठंड में शरीर को ऊर्जा देती है। • सरसों के तेल और भुनाई का महत्व: सरसों का तेल तीखापन और गर्माहट देता है जो ठंडे मौसम के खान-पान का अभिन्न हिस्सा है। प्याज, लहसुन और खड़े मसालों को पहले भूनकर पीसने से तेल में उनका रस पूरी तरह घुल जाता है। • धीमी आंच पर पकाने का नियम: ठंडे दही को यदि उबलते मसाले में सीधे मिला दिया जाए तो दूधिया प्रोटीन टूट जाता है और पानी अलग हो जाता है। इसी वैज्ञानिक कारण से आंच धीमी करके और दही को फेंटकर मिलाने की परंपरा चली आ रही है। सवाल-जवाब 1. इस चिकन करी में कौन-से खड़े मसाले डाले जाते हैं? इस रेसिपी में दो से तीन लौंग, दो छोटी हरी इलायची, आधा इंच दालचीनी, एक चौथाई छोटा चम्मच साबुत धनिया और एक चौथाई छोटा चम्मच सौंफ का इस्तेमाल होता है। 2. क्या इस रेसिपी में टमाटर या मलाई की जरूरत होती है? नहीं, इस हिमाचली रेसिपी में टमाटर, काजू या बाजार की क्रीम का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया जाता। 3. तरी में दही डालते समय फटने से कैसे बचाएं? दही को पहले अच्छी तरह फेंट लें और कड़ाही की आंच को बिल्कुल धीमा करके या गैस से उतारकर लगातार चलाते हुए मिलाएं। 4. 400 ग्राम चिकन पकाने में लगभग कितना समय लगता है? धीमी से मध्यम आंच पर ढककर पकाने में चिकन को गलने के लिए आमतौर पर 15 से 20 मिनट का समय लगता है। 5. इस करी को किस चीज के साथ परोसना सबसे अच्छा रहता है? इसे गरमागरम सादे उबले चावल, सादी तवा रोटी या बटर नान के साथ परोसना सबसे स्वादिष्ट लगता है। https://trendkia.com/trends/bina-tamatara-aura-krima-ke-ghara-para-taiyara-karen-khushabudara-himachali-muruga-kari-54478 TrendKia — Har trend, sabse pehle.