चावल और गेहूं के आटे के मेल से बनाएं छत्तीसगढ़िया मूली पराठा, सुबह के नाश्ते में मिलेगा नया स्वाद सर्दियों के मौसम में सादे गेहूं के मूली पराठे से अलग स्वाद पाने के लिए छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक विधि अपनाई जा सकती है। इसमें चावल का आटा, कद्दूकस मूली, टमाटर, प्याज और देसी मसालों को मिलाकर स्वादिष्ट और कुरकुरा नाश्ता तैयार किया जाता है। शीत ऋतु की दस्तक के साथ ही बाजारों में सफेद ताजी मूली की भरमार दिखने लगती है। भारतीय रसोई में कभी इसकी चटपटी भुजिया बनती है तो कभी गरमा-गरम पराठे की महक पूरे घर में फैल जाती है। यदि आप पारंपरिक गेहूं के मूली पराठे खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ अनूठा स्वाद चखना चाहते हैं, तो मध्य भारत के छत्तीसगढ़ी खानपान का यह देसी नुस्खा एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। आमतौर पर पराठे केवल गेहूं के आटे से गूंथे जाते हैं, मगर इस क्षेत्रीय विधि में चावल के आटे की खास भूमिका होती है। जब चावल का आटा ताजी कद्दूकस की हुई मूली, रसीले टमाटर, तीखी हरी मिर्च, लहसुन और सुगंधित घरेलू मसालों के साथ मिलता है, तो पराठे का स्वाद और बनावट दोनों पूरी तरह बदल जाते हैं। इसे तैयार करने में न तो बहुत पेचीदा तकनीक लगती है और न ही बहुत ज्यादा वक्त खर्च होता है। सुबह के नाश्ते से लेकर शाम को चाय की चुस्कियों के साथ यह देसी व्यंजन परिवार के खाने में एक ताजगी भरा बदलाव ला देता है। चावल और गेहूं के आटे का अनूठा मेल सामान्य तौर पर बनने वाले मूली पराठे में गेहूं की लोई के भीतर मूली का मसाला भरकर बेला जाता है, जिसमें अक्सर पराठा फटने या गीला होने की समस्या आती है। छत्तीसगढ़ की इस खास शैली में तरीका एकदम अलग और सरल रखा जाता है। यहां चावल के आटे और गेहूं के आटे को एक निश्चित अनुपात में आपस में मिलाया जाता है। चावल का आटा पराठे को बाहर से एक खास कुरकुरापन और देसी बनावट देता है, जबकि गेहूं का आटा इसमें जरूरी लचीलापन और नरमी बनाए रखता है। मूली के कुदरती रस के साथ जब चावल के आटे का सोंधापन मिलता है, तो हर कौर में पारंपरिक ग्रामीण रसोई का गहरा स्वाद महसूस होता है। जरूरी सामग्री का सही नाप और तैयारी इस लजीज पराठे को तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद बुनियादी चीजों की ही जरूरत होती है। सबसे पहले दो कप चावल का आटा और एक कप गेहूं का आटा ले लें। सब्जियों और मसालों के तौर पर ताजी मूली, बारीक कटा टमाटर, तीखी हरी मिर्च, बारीक कटा लहसुन और प्याज की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही स्वाद को गहरा करने के लिए मेथी पाउडर, स्वादानुसार नमक और भुना जीरा पाउडर रखें। पराठों को तवे पर अच्छी तरह सेंकने के लिए थोड़ा कुकिंग ऑयल भी पास में रख लें। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें सामग्री का अनुपात पूरी तरह लचीला है। यदि किसी को लहसुन का तीखापन या हरी मिर्च की चटपटी तेजी ज्यादा पसंद हो, तो वह अपनी व्यक्तिगत पसंद और परिवार की जरूरत के मुताबिक इनकी मात्रा आसानी से बढ़ा या घटा सकता है। मसालों और सब्जियों को आटे में मिलाने का तरीका तैयारी की शुरुआत एक चौड़े और गहरे बर्तन से करें। बर्तन में दो कप चावल का आटा और एक कप गेहूं का आटा डालकर दोनों को अच्छी तरह आपस में मिला लें। अब इस सूखे आटे के मिश्रण में बारीक कटे हुए टमाटर, हरी कटी मिर्च, कुटा या बारीक कटा लहसुन और बारीक प्याज डालें। इसके तुरंत बाद मेथी पाउडर, जीरा पाउडर और नमक डालकर सूखे मिश्रण को हाथों से अच्छी तरह चलाएं। इन सभी सूखी चीजों और मसालों को मिलाकर कुछ मिनटों के लिए ऐसे ही छोड़ दें, ताकि मसालों की महक और स्वाद आटे के हर कण में पूरी तरह समा जाए। इस बीच ताजी मूली को पानी से अच्छी तरह धोकर उसका छिलका साफ कर लें और कद्दूकस की मदद से बारीक लच्छे निकाल लें। अब कद्दूकस की गई इस मूली को सीधे आटे और मसाले वाले मिश्रण में डाल दें। यहां एक खास बात का ध्यान रखना जरूरी है कि मूली में प्राकृतिक रूप से काफी पानी मौजूद होता है। जब मूली नमक और आटे के संपर्क में आती है, तो वह नमी छोड़ती है। इसलिए शुरुआत में ही बहुत ज्यादा पानी डालने की गलती बिल्कुल न करें। पहले मूली के लच्छों को बिना पानी डाले आटे में हाथों से खूब अच्छी तरह मसलकर मिलाएं। इसके बाद जब जरूरत महसूस हो, तभी थोड़ा-थोड़ा करके पानी का छिड़काव करें और आटा गूंथें। तैयार आटा न तो बहुत सख्त होना चाहिए और न ही इतना ढीला कि उसे तवे पर फैलाते समय आकार बिगड़ जाए। जब आटा सही रूप में बंध जाए, तो उसे कुछ देर सेट होने के लिए ढककर रख दें। धीमी आंच पर कुरकुरा सेंकने का नियम आटा जब थोड़ा सेट हो जाए, तब गैस पर तवा रखकर उसे अच्छी तरह गर्म होने दें। तैयार आटे में से सामान्य आकार की लोई तोड़ें और हथेलियों की मदद से उसे पराठे का सुंदर गोल आकार दें। अब इसे गर्म तवे पर सावधानी से रखें। पराठे को सेंकते समय आंच का तालमेल बहुत अहम होता है। गैस की आंच को मध्यम से धीमी रखें ताकि चावल का आटा अंदर तक अच्छी तरह पक जाए और कच्चापन न रहे। दोनों सतहों पर थोड़ा-थोड़ा तेल लगाएं और कलछी से हल्का-हल्का दबाते हुए उलट-पुलट कर पकाएं। तेज आंच पर पकाने से पराठा बाहर से जल्दी जल सकता है और अंदर से कच्चा रह सकता है। जब पराठे की दोनों सतहों पर सुनहरे भूरे चित्ते उभर आएं और किनारों से सोंधी खुशबू आने लगे, तब इसे तवे से उतार लें। इसी क्रम को दोहराते हुए बाकी आटे से भी गरमा-गरम पराठे तैयार कर लें। परोसने के बेहतरीन विकल्प छत्तीसगढ़िया अंदाज में तैयार यह पौष्टिक मूली पराठा कई तरह से परोसा जा सकता है। सुबह के समय इसे गरमा-गरम कड़क चाय के साथ खाना बेहद तृप्त करने वाला अनुभव होता है। इसके अलावा दोपहर या रात के भोजन में इसे ताजे फेंटे हुए गाढ़े दही, पुदीना या धनिए की तीखी चटनी, या अपनी पसंदीदा रसेदार या सूखी सब्जी के साथ थाली में सजाया जा सकता है। अगर घर में अचानक मेहमान आ जाएं, तो रोजमर्रा के सादे गेहूं के पराठों के स्थान पर यह प्रांतीय रेसिपी परोसकर आप भोजन की मेज पर एक अनोखा और यादगार स्वाद जोड़ सकते हैं। इसका आप पर असर सर्दियों के खानपान में यह प्रांतीय रेसिपी शामिल करने से रोजमर्रा के नाश्ते में स्वाद और पोषण का एक नया विकल्प मिलता है। • खानपान की विविधता: पारंपरिक गेहूं के पराठों की जगह चावल और गेहूं के आटे का यह मेल नाश्ते में हल्कापन लाता है। इससे रोज एक जैसा नाश्ता खाने की ऊब दूर होती है और सर्दियों में नई रेसिपी आजमाने का अवसर मिलता है। • बनाने में आसानी: मूली भरकर बेलने के बजाय सभी चीजों को आटे में ही मिलाकर गूंथा जाता है। इससे पराठा फटने या बेलते समय गीला होने की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिल जाता है। • बजट और उपलब्धता: इस व्यंजन में केवल सर्दियों में आसानी से मिलने वाली ताजी मूली और घर में मौजूद बुनियादी मसालों का उपयोग होता है। किसी भी अतिरिक्त या महंगे सामान के बिना कम खर्च में पौष्टिक नाश्ता तैयार किया जा सकता है। • स्वाद में अनुकूलन: लहसुन, प्याज और हरी मिर्च का अनुपात पूरी तरह अपनी पसंद के अनुसार बदला जा सकता है। बच्चे हों या बुजुर्ग, हर सदस्य के स्वाद के मुताबिक तीखापन नियंत्रित करना आसान रहता है। ऐसा क्यों हुआ पारंपरिक भरवां मूली पराठे को बेलते समय फटने और अतिरिक्त नमी की आम दिक्कतों को दूर करने के लिए यह अनूठा देसी तरीका तैयार किया गया है। • मूली की स्वाभाविक नमी: मूली में नमक मिलते ही पानी छूटने लगता है, जिससे सामान्य भरवां पराठे अक्सर बेलते वक्त गीले होकर फट जाते हैं। कद्दूकस मूली को सीधे आटे में मिलाकर गूंथने से उसकी नमी ही आटा तैयार करने के काम आ जाती है। • चावल के आटे का गुण: चावल का आटा नमी को अच्छी तरह थामने के साथ सिकने पर बाहरी सतह को कुरकुरा बनाता है। गेहूं के आटे का लचीलापन इसे टूटने से रोकता है और दोनों का संतुलन सही बनावट देता है। • क्षेत्रीय खानपान परंपरा: छत्तीसगढ़ी भोजन संस्कृति में चावल और चावल के आटे का उपयोग मुख्य रूप से किया जाता है। स्थानीय सब्जियों और उपलब्ध मसालों को आटे में मिलाकर सीधे तवे पर सेंकना वहां की पारंपरिक घरेलू शैली रही है। सवाल-जवाब 1. छत्तीसगढ़िया मूली पराठे में किन आटों का इस्तेमाल किया जाता है? इस पराठे को बनाने के लिए दो कप चावल का आटा और एक कप गेहूं का आटा आपस में मिलाया जाता है। 2. आटा गूंथते समय शुरुआत में पानी कम डालने की सलाह क्यों दी जाती है? ताजी कद्दूकस की हुई मूली में पहले से काफी प्राकृतिक पानी होता है, इसलिए शुरुआत में पानी ज्यादा डालने से आटा बहुत गीला हो सकता है। 3. इस पराठे में कौन-कौन से मसाले और सब्जियां मिलाई जाती हैं? इसमें कद्दूकस मूली के साथ टमाटर, हरी मिर्च, लहसुन, प्याज, मेथी पाउडर, जीरा पाउडर और नमक मिलाया जाता है। 4. पराठे को किस आंच पर सेंकना चाहिए? पराठे को मध्यम से धीमी आंच पर तेल लगाकर सेंकना चाहिए ताकि वह अंदर तक पक जाए और बाहर से जले नहीं। 5. यह मूली पराठा किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है? इसे सुबह की चाय, ताजे दही, चटनी या अपनी किसी पसंदीदा सब्जी के साथ परोसा जा सकता है। https://trendkia.com/trends/chavala-aura-gehun-ke-ate-ke-mela-se-banaen-chhattisgarhi-muli-paratha-subaha-ke-nashte-men-milega-naya-svada-38063 TrendKia — Har trend, sabse pehle.