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  "type": "article",
  "title": "दही टमाटर की तरी में बेसन पाटौड़ी रोल्स, पारंपरिक गट्टे की सब्जी को मिला नया रूप",
  "summary": "राजस्थान के गट्टे और महाराष्ट्र की पाटौड़ी को मिलाकर तैयार किए गए बेसन पाटौड़ी रोल्स रोजमर्रा के खाने में बेहतरीन स्वाद जोड़ते हैं।",
  "content": "रोजाना एक जैसा खाना खाकर ऊब चुके लोगों के लिए रसोई में मौजूद साधारण बेसन से एक अनोखा और जायकेदार व्यंजन बनाया जा सकता है। राजस्थान की मशहूर गट्टे की सब्जी का स्वाद अधिकतर घरों में पसंद किया जाता है, परंतु जब इसमें महाराष्ट्र की लोकप्रिय पाटौड़ी का तड़का लग जाता है तो यह पूरी तरह एक नया रूप ले लेती है। शेफ और कंटेंट क्रिएटर ऐश्वर्या ने इन दो अलग-अलग खानपान शैलियों के संगम से बेसन गट्टा पाटौड़ी रोल्स तैयार किए हैं। इस व्यंजन में बेसन की पतली बेली गई शीट पर भुने नारियल, मूंगफली और सुगंधित खड़े मसालों की चटपटी भरावन लगाई जाती है। इसके बाद रोल्स को भाप में पकाकर दही और टमाटर से तैयार गाढ़ी, तीखी ग्रेवी में पकाया जाता है। साधारण सामग्री से बनने के बावजूद इसका स्वाद किसी दावत के मुख्य व्यंजन जैसा समृद्ध लगता है।\n\nपारंपरिक गट्टे से किस तरह भिन्न है यह व्यंजन\nआमतौर पर बनने वाले राजस्थानी गट्टे और इस खास पाटौड़ी रेसिपी की तकनीक में बड़ा अंतर है। पारंपरिक गट्टे में बेसन के आटे को बेलनाकार रूप देकर सीधे उबलते पानी में पकाया जाता है। इसके विपरीत, यहां बेसन की एक बहुत महीन और चिकनी शीट बेली जाती है। इस शीट के ऊपर सूखा, दरदरा पिसा हुआ सुगंधित मसाला एकसार फैलाया जाता है और फिर उसे सावधानीपूर्वक लपेटकर रोल तैयार किया जाता है। इन रोल्स को पानी में उबालने के बजाय भाप में पकाया जाता है। भाप से पकने के कारण बेसन का आकार बना रहता है और अंदर मौजूद मूंगफली व नारियल की भरावन बाहर नहीं बिखरती। स्टफिंग तैयार करते समय नारियल और मूंगफली के साथ साबुत धनिया, जीरा तथा सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि लहसुन और हरी मिर्च इसके तीखेपन को बढ़ाते हैं। मसाले को महीन पाउडर बनाने के बजाय दरदरा पीसने से खाते समय मुंह में बहुत बढ़िया कुरकुरापन महसूस होता है।\n\nचटपटी स्टफिंग बनाने का सही तरीका\nइस व्यंजन की जान इसकी आंतरिक भरावन है, जिसे धीमी आंच पर तैयार किया जाता है। सबसे पहले एक बर्तन अथवा पैन को मध्यम आंच पर गर्म करें। इसमें सूखा नारियल, कच्ची मूंगफली, साबुत जीरा, सौंफ और साबुत धनिया के दाने डालें। इन सभी को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उनसे सोंधी महक न आने लगे। भूनते समय ध्यान रखें कि नारियल और मूंगफली जलने न पाएं, क्योंकि जरा सा भी जलने पर स्वाद कड़वा हो सकता है। जब मसाले हल्के भुन जाएं तो गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा सामान्य तापमान पर आने दें। इसके बाद इसमें ताजा हरी मिर्च और लहसुन की कलियां मिलाएं। इस पूरे मिश्रण को मिक्सी के जार में डालकर दरदरा पीस लें। हल्का भुना हुआ यह दरदरा मसाला ही रोल्स को अनूठा जायका प्रदान करता है।\n\nबेसन का डो तैयार करना और रोल बनाना\nस्टफिंग तैयार होने के बाद बेसन का आटा गूंथने की बारी आती है। एक गहरे बर्तन में पर्याप्त मात्रा में बेसन छानकर निकालें। इसमें आवश्यकतानुसार नमक, थोड़ी सी हल्दी और लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इसके बाद जरा सा तेल अथवा पानी धीरे-धीरे डालते हुए आटा गूंथ लें। ध्यान रखें कि यह आटा न तो बहुत कड़ा होना चाहिए और न ही अत्यधिक गीला, बल्कि पूरी के आटे जैसा लचीला और चिकना होना चाहिए। डो को हाथों से मसलकर पूरी तरह एकसार कर लें। अब इस गूंथे हुए आटे की एक बड़ी लोई बनाएं और चकले पर बेलन की सहायता से बहुत पतला बेल लें। चारों किनारों को चाकू से काटकर शीट को चौकोर रूप दें। तैयार किया गया नारियल और मूंगफली का सूखा मसाला इस चौकोर शीट पर फैलाएं। इसके बाद शीट को एक किनारे से धीरे-धीरे दबाते हुए कसकर रोल करें और चाकू से छोटे-छोटे बराबर टुकड़ों में काट लें।\n\nरोल्स को भाप में पकाने की तकनीक\nकाटे गए बेसन के रोल्स को सीधे ग्रेवी में नहीं डाला जाता, बल्कि पहले भाप में पकाना अनिवार्य होता है। इसके लिए स्टीमर अथवा इडली मेकर की जाली वाली प्लेट पर हल्का सा तेल लगाकर रोल्स को व्यवस्थित रूप से रखें। इन्हें मध्यम आंच पर लगभग 4 से 5 मिनट तक भाप में पकने दें। भाप की गर्मी से बेसन अच्छी तरह बंध जाता है और अंदर की भरावन सुरक्षित हो जाती है। यदि इन्हें सीधे ग्रेवी में डाल दिया जाए तो गर्म रस में जाकर रोल्स के बिखरने का खतरा रहता है। 4 से 5 मिनट पकने के बाद गैस बंद करें और रोल्स को जाली से बाहर निकाल लें। इन्हें कड़ाही में डालने से पहले थोड़ी देर ठंडा होने दें, जिससे ये पूरी तरह स्थिर और सख्त हो जाएं।\n\nदही और टमाटर की मसालेदार ग्रेवी तैयार करना\nरोल्स के ठंडा होने के दौरान ग्रेवी की तैयारी शुरू की जा सकती है। एक कड़ाही में तेल गर्म करें और उसमें साबुत जीरा चटकाएं। इसके बाद बारीक कटा हुआ प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें। प्याज भुन जाने पर अदरक और लहसुन का पेस्ट डालें और तब तक पकाएं जब तक उनका कच्चापन समाप्त न हो जाए। एक अलग कटोरी में ताजा दही लें और उसमें हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर तथा धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह फेंट लें। इस दही वाले मिश्रण को कड़ाही में डालते समय आंच धीमी रखें और चम्मच को लगातार चलाते रहें, ताकि दही फटने न पाए। जब दही मसालों के साथ अच्छी तरह मिल जाए और किनारों से तेल छोड़ने लगे, तब इसमें पिसे हुए टमाटर की प्यूरी डालें। ग्रेवी को अपनी पसंद की गाढ़ी बनावट देने के लिए आवश्यकतानुसार पानी मिलाएं और धीमी आंच पर उबलने दें। अंत में गरम मसाला और ताजा कटा हरा धनिया डालकर ग्रेवी को सुगंधित बनाएं।\n\nआखिरी चरण में रोल्स को तरी में पकाना\nजब दही और टमाटर की तरी पूरी तरह पक जाए और उसमें तेज उबाल आने लगे, तब भाप में पकाए गए बेसन के रोल्स को एक-एक करके सावधानी से कड़ाही में छोड़ें। कड़ाही को बहुत जोर से चलाने के बजाय हल्के हाथों से हिलाएं ताकि रोल्स टूटने न पाएं। धीमी आंच पर इन्हें केवल 2 से 3 मिनट तक तरी के साथ पकने दें, जिससे तरी का तीखा और खट्टा रस रोल्स के भीतर तक समा जाए। अधिक देर तक पकाने से रोल्स गलकर बिखर सकते हैं। पकने के तुरंत बाद आंच बंद कर दें और ऊपर से ताजा हरा धनिया बुरकें। इस तरह तैयार बेसन गट्टा पाटौड़ी रोल्स को गरमा-गरम फुल्के, चपाती या पराठे के साथ परोसा जा सकता है। यह साधारण सामग्री से तैयार होने वाली एक लाजवाब फ्यूजन सब्जी है जो सामान्य भोजन को भी खास बना देती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह अनोखी रेसिपी घर में मौजूद बुनियादी सामग्री का उपयोग करके दैनिक भोजन को नया स्वाद देने का आसान विकल्प देती है।\n\n• दैनिक बजट पर: घर में सब्जियां उपलब्ध न होने पर भी बेसन, मूंगफली और मसालों से एक स्वादिष्ट सब्जी तैयार की जा सकती है। इससे बाजार से अतिरिक्त महंगी सब्जियां खरीदने का खर्च बचता है।\n• खानपान में विविधता: सामान्य गट्टे की तुलना में भरावन वाली पाटौड़ी का स्वाद बच्चों और बड़ों दोनों को पसंद आता है। यह रोजमर्रा के उबाऊ खाने की जगह थाली में ताजगी लाती है।\n• तैयारी का समय: बेसन को भाप में पकाने में केवल 4 से 5 मिनट का समय लगता है। इसे पहले से स्टीम करके रखने पर व्यस्त दिनों में ग्रेवी बनाकर तुरंत परोसा जा सकता है।\n• स्वास्थ्य और पोषण: बेसन और मूंगफली का उपयोग शरीर को प्राकृतिक प्रोटीन और ऊर्जा प्रदान करता है। तली हुई सब्जियों के मुकाबले भाप में पके रोल्स पचने में आसान रहते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह रेसिपी पारंपरिक गट्टे को एक नया रूप देने और दो अलग-अलग राज्यों की खानपान शैलियों को मिलाने के विचार से विकसित की गई है।\n\n• गट्टे का नया स्वरूप: सामान्य गट्टे में केवल सादा बेसन का रोल उबाला जाता है, जिससे कई बार उसका स्वाद साधारण लगता है। बेसन की शीट में नारियल और मूंगफली भरकर उसे अधिक चटपटा बनाया गया है।\n• भाप में पकाने की तकनीक: पारंपरिक पाटौड़ी की तरह इसे भाप में पकाया जाता है ताकि भरावन बाहर न निकले। भाप से पकाने के कारण रोल ग्रेवी में जाकर अपनी बनावट बनाए रखते हैं।\n• संतुलित ग्रेवी का चुनाव: सूखे बेसन के रोल्स के साथ दही और टमाटर की खट्टी-तीखी ग्रेवी का चुनाव किया गया। यह तरी बेसन के सूखेपन को संतुलित कर व्यंजन को रसीला बनाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बेसन गट्टा पाटौड़ी रोल्स को कितनी देर तक भाप में पकाना चाहिए?\nतैयार रोल्स को स्टीमर या इडली मेकर की प्लेट पर रखकर करीब 4 से 5 मिनट तक भाप में पकाना चाहिए।\n\n2. रोल्स की स्टफिंग में कौन-कौन से मसाले डाले जाते हैं?\nइसकी स्टफिंग में सूखा नारियल, मूंगफली, जीरा, सौंफ, साबुत धनिया, हरी मिर्च और लहसुन का इस्तेमाल किया जाता है।\n\n3. रोल्स को ग्रेवी में डालते समय वे टूटे नहीं, इसके लिए क्या करें?\nरोल्स को भाप में पकाने के बाद थोड़ी देर ठंडा होने दें और ग्रेवी में डालने के बाद केवल 2 से 3 मिनट ही धीमी आंच पर पकाएं।\n\n4. ग्रेवी में दही डालते समय फटने से कैसे बचाएं?\nदही में मसाले फेंटकर कड़ाही में डालें, आंच धीमी रखें और कड़ाही में डालते समय चम्मच को लगातार चलाते रहें।",
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  "category": "ट्रेंड्स",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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