# गणेश जी को सबसे पहले क्यों पूजा जाता है? कार्तिकेय के साथ हुई उस पौराणिक होड़ की कहानी

> गणेश चतुर्थी के मौके पर जानिए वह पौराणिक कथा, जिसकी वजह से गणेश जी को सबसे पहले पूजा जाता है और उन्हें 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है.

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/ganesh-ji-ko-sabase-pahale-kyon-puja-jata-hai-kartikeya-ke-satha-hui-usa-pauranika-hora-ki-kahani-28203 · **Language:** Hindi
**Tags:** गणेश चतुर्थी, विघ्नहर्ता, भगवान गणेश, गणेश कथा, कार्तिकेय, मंगलमूर्ति

गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही घर-घर में गणपति बप्पा की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि किसी भी पूजा, शादी-ब्याह या नए काम से पहले सबसे पहले गणेश जी को ही क्यों याद किया जाता है, और आखिर उन्हें ‘विघ्नहर्ता’ की उपाधि कैसे मिली? इसके पीछे एक दिलचस्प पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो सदियों से लोगों की आस्था का हिस्सा बनी हुई है.

## ‘विघ्नहर्ता’ नाम का असली मतलब
संस्कृत में ‘विघ्न’ शब्द का मतलब होता है रुकावट या अड़चन, जबकि ‘हर्ता’ का मतलब है उसे हटाने वाला. इन दोनों शब्दों को जोड़ने पर बनता है ‘विघ्नहर्ता’, यानी बाधाओं को दूर करने वाला. मान्यता है कि गणेश जी बुद्धि, ज्ञान और शुभता के देवता हैं, इसलिए उनकी आराधना करने से भक्तों को अपने रास्ते की रुकावटें पार करने की हिम्मत और सही सोच मिलती है.

## कार्तिकेय के साथ हुई वह मशहूर होड़
पुराणों में एक कथा प्रचलित है कि भगवान शिव और माता पार्वती के दो पुत्र, गणेश और कार्तिकेय, के बीच एक बार यह विवाद खड़ा हो गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. इस उलझन को सुलझाने के लिए दोनों के सामने एक शर्त रखी गई, जो भी सबसे पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर लौटेगा, उसे ही विजेता माना जाएगा. कार्तिकेय बिना देर किए अपने वाहन मोर पर सवार होकर पूरी पृथ्वी नापने निकल पड़े.

## माता-पिता की परिक्रमा से मिली जीत
दूसरी तरफ गणेश जी ने अलग रास्ता चुना. उन्होंने दुनिया घूमने के बजाय अपने माता-पिता, यानी भगवान शिव और माता पार्वती, की तीन बार परिक्रमा कर ली. जब उनसे इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि जब माता-पिता के चरणों में ही पूरी दुनिया समाई है, तो अलग से धरती नापने की क्या जरूरत. गणेश जी की इस समझदारी और तर्क से प्रभावित होकर उन्हें ही विजेता घोषित कर दिया गया. इसी घटना के बाद से यह परंपरा बनी कि हर शुभ काम की शुरुआत में सबसे पहले गणेश जी की ही पूजा की जाएगी.

## शादी से लेकर व्यापार तक, हर जगह पहला निमंत्रण गणेश जी को क्यों
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गणेश जी बुद्धि और सही दिशा में सोचने की शक्ति देते हैं, और किसी भी नए काम में सही निर्णय लेने की क्षमता का होना बेहद जरूरी माना जाता है. यही वजह है कि शादी-विवाह, गृह-प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान, व्यापार की शुरुआत या किसी भी अन्य शुभ मौके पर सबसे पहले गणेश जी का आह्वान किया जाता है. भक्तों का मानना है कि उनकी पूजा से रास्ते की अड़चनें दूर होती हैं और सफलता का रास्ता आसान बनता है. इसी वजह से लोग उन्हें प्यार से ‘विघ्नहर्ता’ यानी बाधाएं हरने वाला और ‘मंगलमूर्ति’ यानी शुभता की मूरत कहकर पुकारते हैं.

## गणेश जी के रूप में छिपे गहरे संकेत
गणेश जी की मूर्ति का हर हिस्सा एक खास सीख देता है. उनका बड़ा सिर बड़ी सोच और गहरी बुद्धि का प्रतीक माना जाता है, बड़े कान इशारा करते हैं कि हमें सुनने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, जबकि उनकी छोटी आंखें एकाग्रता और गहराई से देखने की सीख देती हैं. यही कारण है कि गणेश जी की पूजा भक्तों को सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और सही सोच का महत्व भी सिखाती है.

## इसका आप पर असर
यह कथा सीधे तौर पर आपकी जेब या रोजमर्रा के नियम नहीं बदलती, लेकिन गणेश चतुर्थी के दौरान पूजा-पाठ करने वाले लाखों परिवारों के लिए इसका व्यावहारिक असर जरूर है.

- **पूजा का सही क्रम:** अगर आप गणेश चतुर्थी पर घर में पूजा या किसी नए काम की शुरुआत कर रहे हैं, तो परंपरा के मुताबिक सबसे पहले गणेश जी का आह्वान करना चाहिए. इससे पूजा विधि-विधान के हिसाब से पूरी मानी जाती है.
- **शुभ मौकों की तैयारी:** शादी, गृह-प्रवेश या व्यापार शुरू करने वाले लोग अक्सर गणेश पूजा को सबसे पहले रखते हैं. यह जानकारी उन्हें अपने कार्यक्रम की रूपरेखा सही तरीके से तय करने में मदद कर सकती है.
- **बच्चों को कथा सुनाना:** त्योहार के दौरान परिवार अक्सर बच्चों को गणेश जी से जुड़ी कहानियां सुनाते हैं. यह कथा उन्हें बुद्धि और तर्क से जीत हासिल करने की सीख के साथ आसानी से समझाई जा सकती है.
- **मूर्ति और सजावट का चुनाव:** गणेश जी के बड़े सिर, कान और आंखों के प्रतीकात्मक अर्थ जानने के बाद भक्त मूर्ति स्थापना और सजावट के दौरान इन पहलुओं को और बेहतर ढंग से समझ पाते हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' क्यों कहा जाता है?
क्योंकि माना जाता है कि वे अपने भक्तों के जीवन से बाधाएं और रुकावटें दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है.

### 2. गणेश जी और कार्तिकेय के बीच किस बात पर विवाद हुआ था?
दोनों के बीच इस बात पर विवाद हुआ था कि उनमें से श्रेष्ठ कौन है, जिसे सुलझाने के लिए पूरी दुनिया का चक्कर लगाने की शर्त रखी गई.

### 3. कार्तिकेय दुनिया का चक्कर लगाने किस पर सवार होकर निकले थे?
कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर सवार होकर पूरी दुनिया की यात्रा पर निकले थे.

### 4. गणेश जी ने होड़ जीतने के लिए क्या तरीका अपनाया?
गणेश जी ने दुनिया घूमने के बजाय अपने माता-पिता, भगवान शिव और माता पार्वती, की तीन बार परिक्रमा की और कहा कि पूरी दुनिया उनके चरणों में समाई है.

### 5. गणेश जी को 'मंगलमूर्ति' क्यों कहा जाता है?
शुभता और मंगल कार्यों के प्रतीक होने की वजह से भक्त गणेश जी को प्यार से मंगलमूर्ति कहकर बुलाते हैं.

### 6. गणेश जी के बड़े सिर, कान और छोटी आंखों का क्या मतलब है?
बड़ा सिर बुद्धि और व्यापक सोच का, बड़े कान सुनने के महत्व का और छोटी आंखें एकाग्रता का प्रतीक मानी जाती हैं.

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