बिना बिजली और बल्ब के रोशन हो रहे हैं घर, पानी की बोतल का यह नायाब जुगाड़ दुनिया भर में छाया प्लास्टिक की बोतल और पानी से तैयार होने वाला मोजर लैंप दिन के समय कमरों को रोशन करने का एक अनूठा और किफायती तरीका है। ब्राजील से शुरू हुई यह तकनीक आज दुनिया के 30 से अधिक देशों में अपनाई जा रही है। दिन के वक्त भी अगर घर के किसी हिस्से में अंधेरा रहता है और मजबूरी में बल्ब ऑन करना पड़ता है, तो एक साधारण प्लास्टिक की बोतल इस समस्या का बेहद असरदार और दिलचस्प समाधान बन सकती है। पहली नजर में यह बात थोड़ी हैरानी भरी लग सकती है, लेकिन साफ पानी से भरी हुई एक पारदर्शी बोतल को छत में फिट करके सूरज की तेज रोशनी को सीधे घर के भीतर पहुंचाया जा सकता है। लाइटिंग की दुनिया में इस अनोखी तकनीक को मोजर लैंप के नाम से जाना जाता है और इसका पूरा विचार ब्राजील के रहने वाले मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर की सोच से उपजा था। शुरुआती दौर में जब यह आइडिया सामने आया, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह इतना लोकप्रिय हो जाएगा। लेकिन इसकी बेहद कम लागत, आसानी से उपलब्ध सामग्री और बिजली की बिल्कुल भी जरूरत न पड़ने की खूबी ने इसे दुनिया भर में लोकप्रिय बना दिया। आज के समय में यह अनोखी तरकीब दुनिया के 30 से ज्यादा देशों तक पहुंच चुकी है। खासकर उन घरों और इलाकों में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है जहां मकान पास-पास बने हैं, खिड़कियां कम हैं या फिर दिन के वक्त भी पर्याप्त प्राकृतिक धूप अंदर नहीं आ पाती है। हालांकि इस जुगाड़ को अपनी छत पर स्थापित करने से पहले छत की मजबूती और पानी की लीकेज से सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है। कैसे काम करती है पानी से भरी बोतल की यह तकनीक मोजर लैंप को तैयार करने की प्रक्रिया काफी सरल होती है। इसमें एक साफ-सुथरी पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल ली जाती है और उसे पूरी तरह साफ पानी से भर दिया जाता है। इस बोतल को छत के बीच इस तरह सेट किया जाता है कि उसका कुछ हिस्सा छत के ऊपर आसमान की तरफ खुला रहे और बाकी का हिस्सा कमरे के अंदर लटकता रहे। जब आसमान से सूरज की तेज किरणें इस पानी से भरी बोतल पर पड़ती हैं, तो पानी प्रकाश को अलग-अलग दिशाओं में रिफ्रैक्ट और स्कैटर करने का काम करता है, जिससे वह रोशनी पूरे कमरे में बिखर जाती है। यह समझना भी जरूरी है कि अकेली बोतल खुद से कोई रोशनी पैदा नहीं करती है, बल्कि यह बाहर मौजूद प्राकृतिक धूप को कैच करके उसे कमरे के भीतर के कोने-कोने तक पहुंचाने का माध्यम बनती है। पानी और पारदर्शी प्लास्टिक मिलकर सनलाइट को इस तरह फैलाते हैं कि कमरे का वह हिस्सा दिन के वक्त किसी ट्यूबलाइट की तरह जगमगाने लगता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे बेहद किफायती और असरदार डेलाइटिंग सॉल्यूशन के रूप में देखते हैं, जो बिना एक भी यूनिट बिजली खर्च किए घर को रोशन कर देता है। ब्राजील से शुरू होकर दुनिया के 30 से ज्यादा देशों तक पहुंचा सफर इस पूरी तकनीक की शुरुआत ब्राजील से हुई थी, जहां स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती और ऊर्जा की समस्याओं से जूझ रहे मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर ने इस सरल उपाय को सबसे पहले विकसित किया था। उनके इस नायाब विचार को बाद में लीटर ऑफ लाइट जैसे कई सामाजिक अभियानों का साथ मिला। इन संगठनों ने इसी बोतल आधारित प्रकाश तकनीक को दुनिया भर के कम आय वाले और गरीब समुदायों तक पहुंचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि इसके लिए किसी भी प्रकार के महंगे सोलर पैनल, बैटरियों या जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कोई आवश्यकता नहीं होती है। केवल एक कबाड़ समझकर फेंकी जाने वाली पारदर्शी बोतल, थोड़ा सा पानी और छत में उसकी सही फिटिंग ही काफी बड़ा बदलाव ला सकती है। यही कारण है कि इस विचार ने भौगोलिक सीमाओं को पार किया और अलग-अलग देशों ने अपनी स्थानीय जरूरतों और मौसम के हिसाब से इस तरीके को अपना लिया। आज 30 से अधिक देशों में झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर ग्रामीण इलाकों के कच्चे-पक्के मकानों तक में इस रोशनी के जुगाड़ को देखा जा सकता है। इस देसी जुगाड़ नुस्खे की खासियत और जरूरी सावधानियां इस अनोखी तकनीक की सबसे बड़ी खूबी इसकी न्यूनतम लागत है। घरों में बेकार पड़ी पुरानी प्लास्टिक की पेट बोतल को फेंकने के बजाय इस तरह के रचनात्मक कार्यों में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दिन के समय कमरे के भीतर प्राकृतिक रोशनी भरपूर मात्रा में मिलने से कई तरह की परिस्थितियों में बिजली के बल्ब जलाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है, जिससे बिजली के बिल पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। हालांकि, हर सिक्के के दो पहलू होते हैं और यह जुगाड़ हर मकान के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं माना जा सकता है। पक्की या कच्ची छत में छेद करना भवन की संरचना को प्रभावित कर सकता है। यदि छत पर बोतल लगाते वक्त सीलिंग या वाटरप्रूफिंग ठीक ढंग से नहीं की गई, तो बरसात के मौसम में छत से पानी टपकने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसके अलावा, बोतल लगाने से पहले इस बात का भी पूरा ख्याल रखना पड़ता है कि पानी लंबे समय तक गंदा न हो, क्योंकि बोतल के भीतर धूल या शैवाल जम जाने से प्रकाश के फैलने की क्षमता काफी कम हो जाती है और कमरे में रोशनी ठीक से नहीं पहुंच पाती है। इसका आप पर असर इस अनोखी तकनीक के उपयोग से घरों के भीतर दिन के वक्त प्राकृतिक रोशनी बढ़ जाती है, जिससे बिजली की खपत और मासिक बिल में कमी आ सकती है। • भारत में: घनी बस्तियों और कम रोशनी वाले मकानों में रहने वाले लोग बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपने कमरों को दिन में रोशन रख सकते हैं। • स्थापना संबंधी ध्यान: छत पर बोतल लगाते समय वाटरप्रूफिंग का पूरा ध्यान रखना जरूरी है ताकि बारिश के मौसम में पानी घर के अंदर न टपके। • नियमित रखरखाव: बोतल के पानी को समय-समय पर साफ रखना आवश्यक है ताकि गंदगी या शैवाल जमने से रोशनी में रुकावट न आए। • लागत लाभ: बेकार पड़ी प्लास्टिक बोतलों का उपयोग होने के कारण इस पूरी प्रक्रिया में शून्य या नगण्य खर्च आता है। ऐसा क्यों हुआ यह तरीका बिजली की कमी और प्राकृतिक रोशनी की अनुपलब्धता का एक सरल भौतिक समाधान है। पानी के अपवर्तन गुण के कारण यह विधि काम करती है। • सीमित संसाधन: ब्राजील में बिजली की अस्थिरता और महंगे बिजली उपकरणों तक पहुंच न होने के कारण इस सरल विचार का जन्म हुआ। • ऑप्टिकल रिफ्रैक्शन: जब सूर्य की किरणें पानी से गुजरती हैं, तो पानी प्रकाश की किरणों को फैलाकर चारों तरफ बिखेर देता है। • सामुदायिक प्रसार: लीटर of Light जैसे अभियानों ने इस किफायती विचार को कम आय वाले देशों तक पहुंचाया। सवाल-जवाब 1. मोजर लैंप क्या है? मोजर लैंप पानी और पारदर्शी प्लास्टिक की बोतल से बनने वाला एक उपकरण है जो सूरज की रोशनी को कम र के भीतर फैलाता है। 2. इस तकनीक का आविष्कार किसने किया था? इस विचार की शुरुआत ब्राजील के मैकेनिक अल्फ्रेडो मोजर ने की थी। 3. क्या यह बोतल खुद कोई रोशनी पैदा करती है? नहीं, यह बोतल खुद रोशनी नहीं बनाती बल्कि बाहर की प्राकृतिक धूप को फैलाकर कमरे के अंदर पहुंचाती है। 4. यह तकनीक कितने देशों तक पहुंच चुकी है? यह पानी की बोतल वाली तरकीब वर्तमान में दुनिया के 30 से अधिक देशों में अपनाई जा चुकी है। 5. इसे लगाते समय किस मुख्य बात का ध्यान रखना चाहिए? छत पर लीकेज रोकने के लिए वाटरप्रूफिंग और बोतल के पानी को साफ रखना सबसे जरूरी है। https://trendkia.com/trends/illuminating-homes-without-electricity-the-water-bottle-trick-reaches-over-30-countries-30883 TrendKia — Har trend, sabse pehle.