# खरगे के बयान पर भाजपा का सियासी पलटवार, नेताओं ने गानों और नारों से बनाया चुनावी माहौल

> कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के विवादित बयान के बाद भाजपा नेताओं ने नारों और गीतों के जरिए नया राजनीतिक अभियान छेड़ दिया है। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और सांसद मनोज तिवारी ने भजनों व गानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जोरदार बचाव किया।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/kharge-ke-bayana-para-bjp-ka-siyasi-palatavara-netaon-ne-ganon-aura-naron-se-banaya-chunavi-mahaula-56271 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, मल्लिकार्जुन खरगे, अर्जुन राम मेघवाल, मनोज तिवारी, प्रवेश साहिब सिंह, हर्ष संघवी, भाजपा, कांग्रेस

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने विपक्षी बयानों का जवाब देने के लिए संगीत और जोशीले नारों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा पार्टी के एक मंच से की गई तीखी टिप्पणी के बाद यह सियासी टकराव गहरा गया। खरगे के बयान पर पलटवार करते हुए सत्ताधारी दल के प्रमुख चेहरे अब सार्वजनिक आयोजनों और इंटरनेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार तीसरे कार्यकाल और उनके नेतृत्व की मजबूती को रेखांकित कर रहे हैं। इस पूरे अभियान का केंद्र बिंदु यह संदेश देना है कि देश की बागडोर संभालने वाला शीर्ष नेतृत्व मजबूती से अपने स्थान पर बना हुआ है।

## हारमोनियम की धुन पर केंद्रीय मंत्री का सुरम्य संदेश
इस सियासी मुहिम में बहती हवा के बीच 72 वर्षीय केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का एक नया अंदाज सामने आया। उन्होंने मंगलवार को एक्स पर एक खास वीडियो साझा किया, जिसमें वह पारंपरिक हारमोनियम बजाते नजर आ रहे हैं। मेघवाल ने शास्त्रीय भजन की लय में गाते हुए उन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधा जिन्होंने जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता गंवा दी है। उन्होंने अपनी पंक्तियों के जरिए यह बात कही कि जिन्होंने अपनी साख खो दी है, जाने की बारी उनकी है।

अपने इस संगीतमय संदेश में केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी पहलों की एक लंबी सूची को सुरों में पिरोया। उन्होंने आम जनजीवन को प्रभावित करने वाली मुफ्त राशन वितरण व्यवस्था, उज्ज्वला गैस सिलेंडर योजना, पक्के आवास निर्माण, सड़कों के बुनियादी ढांचे, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जरूरी जीवनरक्षक दवाइयों, पाइप से पेयजल आपूर्ति और स्वच्छ भारत अभियान जैसी प्रमुख योजनाओं का विशेष उल्लेख किया। मेघवाल का यह प्रयास सीधे तौर पर सरकारी उपलब्धियों को जनता की स्मृति में ताजा करने का एक अनोखा माध्यम बन गया।

## दीवाली मिलन समारोह में जुगलबंदी और तीखे तंज
दूसरी तरफ राजधानी दिल्ली में आयोजित एक प्री-दिवाली पार्टी के दौरान भी इसी नारे की गूंज सुनाई दी। दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के आवास पर आयोजित इस उत्सव में भाजपा सांसद और जाने-माने भोजपुरी गायक-अभिनेता मनोज तिवारी ने समां बांधा। तिवारी ने माइक थामकर यह सुर छेड़ा कि हर दिल से यही आवाज निकलेगी कि देश का शीर्ष नेतृत्व कहीं जाने वाला नहीं है। इस महफिल में पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता और दिल्ली के मंत्री भी पूरे जोश के साथ शामिल हुए।

गायन के सिलसिले के दौरान राजनीतिक व्यंग्य और तीखे तीर भी चले। जब मनोज तिवारी ने विपक्ष पर चुटकी लेते हुए पंक्तियां शुरू कीं, तो मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने भी सुर मिलाया। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि जो लोग उल्टी बात करेंगे, उनके हिस्से इटली का सफर ही आएगा। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों ने सीधे तौर पर गांधी परिवार पर किए गए कटाक्ष के रूप में देखा। इसके तुरंत बाद चर्चा को भविष्य की राजनीति पर केंद्रित करते हुए प्रवेश साहिब सिंह ने वर्ष 2029 के आम चुनावों का जिक्र किया और भरोसा जताया कि देश की जनता एक बार फिर कमल के निशान पर भरोसा जताएगी।

## गुजरात की धरती से जनता का सीधा जुड़ाव
यह नारा केवल दिल्ली के सियासी गलियारों या सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जमीन पर भी इसका बड़ा असर देखा गया। पिछले शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात दौरे पर पहुंचे थे, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह जीवन के अंतिम क्षण तक देश की जनता की सेवा में समर्पित रहेंगे। बनासकांठा जिले में आयोजित एक विशाल रोड शो के दौरान सड़क के दोनों किनारों पर खड़े नागरिक बड़े-बड़े पोस्टर और तख्तियां लेकर पहुंचे थे, जिन पर यह संदेश साफ तौर पर लिखा हुआ था।

प्रधानमंत्री के औपचारिक कार्यक्रम से पहले गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने जनसभा को संबोधित किया। संघवी ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के 140 करोड़ नागरिकों का अपार स्नेह और विश्वास हासिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता के बयान के विरोध में जनता खुद आगे आकर यह नारा बुलंद कर रही है। उपमुख्यमंत्री के मुताबिक, यह आवाज केवल बनासकांठा के किसी एक इलाके की नहीं है, बल्कि कश्मीर की वादियों से लेकर कन्याकुमारी के छोर तक पूरे देश में गूंज रही है।

## शोध केंद्र में युवाओं का उत्साह और दिल्ली में जनसंपर्क
बनासकांठा यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) का अवलोकन करने पहुंचे थे। वहां जब वह स्थानीय युवाओं के साथ तस्वीरें खिंचवा रहे थे, तभी भीड़ में से किसी एक व्यक्ति ने केवल नाम पुकारा और बाकी युवाओं ने एक सुर में नारा पूरा कर दिया। इस सहज जनप्रतिक्रिया को देखकर प्रधानमंत्री मुस्कुराए और बिना किसी औपचारिक भाषण के आगे बढ़ गए।

इस जमीनी मुहिम को दिल्ली में भी दोहराया गया, जहां रविवार को दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा आम नागरिकों के साथ सड़कों पर इसी नारे को बुलंद करते हुए दिखाई दिए थे। विपक्षी दलों के बयानों को सीधे लोक कल्याण और जनता के विश्वास से जोड़कर भाजपा नेता इसे एक व्यापक जन अभियान का रूप देने में जुटे हैं। संगीत, भजन और तात्कालिक नारों के सहारे लड़ी जा रही यह नई सियासी लड़ाई अब इंटरनेट से लेकर चौराहों तक चर्चा का विषय बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
इस सियासी घटनाक्रम से आम नागरिक और मतदाता सीधे तौर पर राजनीतिक दलों के प्रचार के बदलते तौर-तरीकों को समझ सकते हैं।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** राजनीतिक दल अब कड़वे व्यक्तिगत बयानों का मुकाबला पारंपरिक भजनों, गीतों और सोशल मीडिया वीडियो के जरिए कर रहे हैं। इससे आने वाले चुनावों में डिजिटल प्रचार और लोक-संस्कृति पर आधारित संदेशों की हिस्सेदारी और बढ़ेगी।
- **मतदाताओं के लिए:** दोनों प्रमुख दल जनता के बुनियादी मुद्दों, मुफ्त राशन, पक्के मकान और बुनियादी सुविधाओं को अपनी राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रहे हैं। इससे नागरिकों को यह परखने का मौका मिलता है कि योजनाएं जमीन पर कितनी कारगर साबित हो रही हैं।
- **गुजरात में:** बनासकांठा और आसपास के क्षेत्रों में रैलियों और नए केंद्रों के दौरे से स्थानीय लोगों का ध्यान विकास परियोजनाओं और पशुपालन संबंधी योजनाओं पर केंद्रित हुआ है। इससे क्षेत्र के युवाओं और किसानों के लिए सरकारी पहलों की जानकारी बढ़ी है।
- **दिल्ली-एनसीआर में:** स्थानीय नेताओं और मंत्रियों द्वारा त्योहारों के आयोजनों को जनसंपर्क में बदलने से जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में राजधानी की राजनीति में ऐसे आयोजनों का प्रभाव देखने को मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा राजनीतिक विवाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक तीखे बयान के बाद शुरू हुआ, जिसने सत्ताधारी दल को आक्रामक रुख अपनाने का मौका दे दिया।

- **खरगे का विवादास्पद बयान:** पार्टी के एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए नेतृत्व के हटने की बात कही थी। उनके इस बयान को भाजपा ने प्रधानमंत्री के प्रति व्यक्तिगत और अमर्यादित हमला माना।
- **भाजपा की संगठित रणनीति:** विपक्ष के तीखे हमलों को चुनावी अवसर में बदलने के लिए भाजपा ने नारों और गीतों का सहारा लिया। नेताओं ने इस बयान को सीधे 140 करोड़ नागरिकों के समर्थन और कल्याणकारी नीतियों से जोड़ दिया।
- **आगामी चुनावी तैयारी:** पार्टी नेता अभी से 2029 के चुनावों और प्रधानमंत्री के तीसरे कार्यकाल की मजबूती को जनता के सामने स्थापित करना चाहते हैं। भजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए यह संदेश मतदाताओं तक सीधे पहुंचाया जा रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. भाजपा नेताओं ने 'कहीं नहीं जाएंगे मोदी' अभियान क्यों शुरू किया?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री पर दिए गए तीखे बयान के विरोध में भाजपा नेताओं ने यह नारा और अभियान शुरू किया।

### 2. केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने गाने में किन योजनाओं का जिक्र किया?
उन्होंने मुफ्त राशन, गैस सिलेंडर, पक्के आवास, सड़क, बिजली, दवाइयों, पानी और स्वच्छ भारत अभियान जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख किया।

### 3. मनोज तिवारी और प्रवेश साहिब सिंह ने किस कार्यक्रम में गाना गाया?
उन्होंने दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के घर आयोजित प्री-दिवाली पार्टी में यह गाना गाया।

### 4. गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री के रोड शो के दौरान क्या हुआ था?
रोड शो के दौरान कई लोग 'मोदी कहीं नहीं जाएगा' लिखे पोस्टर लेकर खड़े थे और युवाओं ने भी यह नारा बुलंद किया।

### 5. उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस नारे के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि खरगे की टिप्पणी के जवाब में जनता खुद यह नारा लगा रही है और यह बनासकांठा से लेकर कश्मीर और कन्याकुमारी तक गूंज रहा है।

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