# कोलकाता के मशहूर जायके का लुत्फ अब घर पर, जानिए रसेदार आलू के साथ कुरकुरी क्लब कचौड़ी बनाने का तरीका

> दाल, सूजी और हींग के अनूठे मिश्रण से बनने वाली छोटी और खस्ता क्लब कचौड़ी को तीखी रसेदार आलू की सब्जी के साथ परोसकर कोलकाता के स्ट्रीट फूड का स्वाद घर बैठे पाया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/kolkata-ke-mashahura-jayake-ka-lutpha-aba-ghara-para-janie-rasedara-alu-ke-satha-kurakuri-club-kachori-banane-ka-tarika-34486 · **Language:** Hindi
**Tags:** क्लब कचौड़ी रेसिपी, कोलकाता स्ट्रीट फूड, आलू कचौड़ी, उड़द दाल कचौड़ी, नाश्ता रेसिपी, रसेदार आलू की सब्जी, स्ट्रीट फूड रेसिपी

रोजमर्रा के भोजन में नियमित दाल, रोटी या चावल खाते-खाते जब जुबान कुछ तीखा और जायकेदार मांगती है, तब स्ट्रीट फूड की याद आना स्वाभाविक है। बाहर जाकर खाने के बजाय यदि रसोई में ही बाजार जैसा चटपटा पकवान तैयार कर लिया जाए, तो पूरे परिवार के खाने का आनंद कई गुना बढ़ जाता है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता का लोकप्रिय स्ट्रीट फूड क्लब कचौड़ी ऐसा ही एक खास विकल्प है। यह सामान्य भरवां कचौड़ियों की तुलना में आकार में छोटी, बेहद कुरकुरी और अनोखे मसालेदार स्वाद से भरपूर होती है।

पारंपरिक कचौड़ियों में जहां अंदर भरावन भरा जाता है, वहीं क्लब कचौड़ी को तैयार करने का तरीका बिल्कुल जुदा है। इसके आटे में ही उड़द दाल, सूजी और तेज खुशबू वाली हींग को सीधे गूंथ दिया जाता है। इसे हमेशा एक खास तीखी, खट्टी और रसेदार आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है। लंच या डिनर की थाली को एक नया रंग-रूप देने के लिए यह आसान विधि बेहद मददगार साबित हो सकती है।

## क्लब कचौड़ी की बनावट और स्वाद का राज
आकार के मामले में क्लब कचौड़ी सामान्य पूरी से भी छोटी होती है और इसे बेलकर गर्म तेल में तला जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके आटे में मिलाई जाने वाली भीगी और दरदरी पिसी उड़द दाल तथा हींग है। उड़द दाल का दरदरापन कचौड़ी को एक दानेदार और अनोखी बनावट देता है, जबकि सूजी इसे लंबे समय तक खस्ता बनाए रखती है।

इसे कभी भी सूखी या अकेले नहीं खाया जाता, बल्कि इसके साथ बनने वाली रसेदार आलू की सब्जी ही इसके स्वाद को मुकम्मल बनाती है। सब्जी में पड़ने वाला पंचफोरन तड़का, अदरक, हरी मिर्च और खट्टे-मीठे मसाले कचौड़ी के कुरकुरेपन के साथ मिलकर मुंह में घुलने वाला स्वाद पैदा करते हैं।

## कचौड़ी और सब्जी के लिए जरूरी सामग्री
इस स्वादिष्ट व्यंजन को सही अनुपात में बनाने के लिए सामग्री का उचित माप होना जरूरी है। कचौड़ी का आटा लगाने के लिए 1 कप मैदा, आधा कप गेहूं का आटा, 2 बड़े चम्मच सूजी, एक चौथाई कप पहले से भीगी और दरदरी पिसी हुई उड़द दाल, एक चौथाई छोटा चम्मच हींग, आधा छोटा चम्मच अजवाइन और स्वादानुसार नमक की आवश्यकता होगी। आटे में मोयन देने के लिए 2 बड़े चम्मच तेल या घी और कचौड़ियों को तलने के लिए कढ़ाई भर तेल अलग से रखें।

रसेदार आलू की सब्जी तैयार करने के लिए 4 उबले और हाथ से फोड़े हुए आलू, 2 कद्दूकस किए हुए टमाटर, 1 छोटा चम्मच कद्दूकस किया अदरक और 2 बारीक कटी हरी मिर्च लें। पारंपरिक तड़के के लिए राई, सौंफ, कलौंजी और जीरा निकाल लें। मसालों में हींग, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, अमचूर, कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और काला नमक स्वाद के हिसाब से तैयार रखें। सब्जी की सजावट और महक के लिए अंत में डालने हेतु बारीक कटा ताजा हरा धनिया भी साथ रखें।

## आटा गूंथने और रसेदार सब्जी पकाने का तरीका
सबसे पहले एक गहरे परात या बर्तन में मैदा, गेहूं का आटा और सूजी को एक साथ छान लें। इसके बाद इसमें दरदरी पिसी उड़द दाल, हींग, अजवाइन, नमक और 2 बड़े चम्मच तेल या घी का मोयन डालकर हथेलियों से अच्छी तरह रगड़ते हुए मिला लें। जब मोयन आटे में समान रूप से मिल जाए, तब थोड़ा-थोड़ा पानी छिड़कते हुए एक सख्त आटा गूंथकर तैयार करें। गूंथे हुए आटे को किसी साफ गीले या सूखे कपड़े से ढंककर लगभग 15 मिनट के लिए एक तरफ रख दें ताकि सूजी और दाल अच्छी तरह फूल जाएं।

जब तक आटा आराम कर रहा है, तब तक आलू की सब्जी तैयार कर लें। एक कढ़ाई में मध्यम आंच पर थोड़ा तेल गर्म करें। तेल गर्म होते ही उसमें राई, सौंफ, कलौंजी, जीरा और हींग डालकर चटकने दें। जब मसालों से खुशबू आने लगे, तब कद्दूकस किया अदरक, कटी हरी मिर्च और कद्दूकस किए टमाटर डालकर लगभग 2 मिनट तक अच्छी तरह भूनें।

टमाटर जब तेल छोड़ने लगें और नरम पड़ जाएं, तब उसमें हल्दी, धनिया पाउडर, कश्मीरी लाल मिर्च, अमचूर और काला नमक मिलाएं। मसालों को धीमी आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उनसे बढ़िया महक न आने लगे। इसके बाद मैश किए हुए उबले आलू डालकर मसाले के साथ 1 मिनट तक अच्छी तरह लपेटते हुए चलाएं। अब कढ़ाई में लगभग 2 कप पानी डालें और ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर 7 से 8 मिनट तक उबलने दें। जब तरी गाढ़ी और लजीज नजर आने लगे, तो गैस बंद कर दें और ऊपर से ताजा कटा हरा धनिया छिड़क दें।

## कचौड़ी बेलने, तलने और परोसने की विधि
अब कचौड़ी के आटे को एक बार फिर हल्का मसल लें और उसमें से छोटी-छोटी लोइयां तोड़ लें। इन लोइयों को सामान्य पूरी से थोड़ा छोटा और हल्का मोटा बेलें। कढ़ाई में तलने के लिए तेल को अच्छी तरह तेज गर्म करें और उसमें एक-एक करके कचौड़ियां डालें।

कचौड़ी डालते ही कड़छी से हल्का-हल्का दबाएं ताकि वह पूरी तरह फूल जाए। दोनों तरफ पलटते हुए तब तक तलें जब तक कि कचौड़ी का रंग सुनहरा न हो जाए और वह बाहर से पूरी तरह कुरकुरी न दिखने लगे। गरमा-गरम फूली हुई क्लब कचौड़ियों को तुरंत प्लेट में निकालें और तैयार की गई चटपटी रसेदार आलू की सब्जी के साथ परोसें। स्वाद बढ़ाने के लिए साथ में ताजा हरा धनिया और मनपसंद हरी या मीठी चटनी भी रखी जा सकती है।

## परफेक्ट कुरकुरापन बनाए रखने के जरूरी टिप्स
क्लब कचौड़ी को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है

- आटे को कभी भी नरम या गीला न गूंथें, कचौड़ी का आटा हमेशा सख्त होना चाहिए।
- आटे में मोयन सही मात्रा में डालें और उसे आटे के कण-कण में अच्छी तरह मिलाएं, इससे कचौड़ी भीतर से खस्ता बनती है।
- कचौड़ी तलने के लिए तेल का तापमान संतुलित रखें; तेल पहले अच्छा गर्म होना चाहिए, लेकिन कचौड़ी डालते ही आंच को मध्यम कर लें ताकि कचौड़ी अंदर तक सिके और बाहर से कुरकुरी बने।

## इसका आप पर असर
यह आसान घरेलू विधि रेस्तरां या स्ट्रीट फूड पर निर्भर हुए बिना रसोई में ही पारंपरिक क्षेत्रीय स्वाद तैयार करने की सुविधा देती है।

- **घरेलू बचत:** बाहर के नाश्ते या स्ट्रीट वेंडर पर खर्च किए बिना घर की बुनियादी सामग्री से पूरे परिवार के लिए लजीज पकवान तैयार हो जाता है। इससे भोजन का खर्च घटता है और गुणवत्ता सुनिश्चित रहती है।
- **स्वास्थ्य और स्वच्छता:** बाहर के बासी या बार-बार उबाले गए तेल के मुकाबले घर पर ताजे तेल में तलने से सेहत को नुकसान नहीं पहुंचता। पेट की समस्याओं और पाचन संबंधी जोखिमों से बचा जा सकता है।
- **खानपान में विविधता:** रोज के नियमित दाल-चावल और सादी रोटी के रूटीन से हटकर नाश्ते या दोपहर के खाने में एक नया जायका मिलता है। खास मौकों या सप्ताहांत पर यह पूरे परिवार के लिए एक खास मेनू बन सकता है।
- **तैयारी में आसानी:** सामान्य भरवां कचौड़ी के मुकाबले इसे बेलना और तलना काफी तेज और सरल होता है क्योंकि दाल आटे में ही गूंथी जाती है। कम समय में बिना फटने के डर के कई कचौड़ियां एक साथ बनाई जा सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
क्लब कचौड़ी का अनोखा स्वाद और कुरकुरापन इसकी खास सामग्री और बनाने की पारंपरिक तकनीक के तालमेल पर आधारित है।

- **आटे में दाल का इस्तेमाल:** सामान्य कचौड़ी में भरावन अलग से डाला जाता है, जबकि इसमें भीगी उड़द दाल को आटे में ही गूंथा जाता है। इससे कचौड़ी फटती नहीं है और हर निवाले में दाल व हींग का समान स्वाद मिलता है।
- **सूजी का क्रंच:** आटे में मिलाई गई सूजी कचौड़ी की बाहरी परत को अतिरिक्त कुरकुरापन देती है। इसके कारण कचौड़ी तलने के काफी देर बाद भी पचकती नहीं है और खस्ता बनी रहती है।
- **पंचफोरन और खटाई का मेल:** इसकी साथी आलू की सब्जी में राई, सौंफ, कलौंजी, जीरा और अमचूर का प्रयोग किया जाता है। यह तीखा-खट्टा स्वाद कचौड़ी के दाल वाले भारीपन को संतुलित कर एक संपूर्ण स्ट्रीट फूड अनुभव देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्लब कचौड़ी सामान्य कचौड़ी से कैसे अलग होती है?
यह आकार में छोटी होती है और इसमें भरावन अलग से भरने के बजाय उड़द दाल और हींग को सीधे आटे में ही गूंथकर तला जाता है।

### 2. कचौड़ी के आटे में सूजी क्यों मिलाई जाती है?
आटे में दो चम्मच सूजी मिलाने से कचौड़ी की बाहरी परत बेहद कुरकुरी बनती है और वह तलने के बाद जल्दी नरम नहीं पड़ती।

### 3. आलू की रसेदार सब्जी में कौन-से साबुत मसाले तड़के में डाले जाते हैं?
सब्जी के तड़के के लिए गर्म तेल में राई, सौंफ, कलौंजी, जीरा और हींग का इस्तेमाल किया जाता है।

### 4. कचौड़ी को तलते समय तेल का तापमान कैसा होना चाहिए?
कचौड़ी डालने से पहले तेल अच्छा गर्म होना चाहिए, लेकिन डालने के बाद आंच को जरूरत के हिसाब से संतुलित रखें ताकि वह भीतर तक पक सके।

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