# कोंकण का पारंपरिक नाश्ता घावन, बिना झंझट घर पर बनाएं यह नरम और जालीदार व्यंजन

> महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र का प्रसिद्ध नाश्ता घावन चावल से बनता है। यह दिखने में डोसे जैसा होता है और अपनी नरमी व जालीदार बनावट के लिए जाना जाता है।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-11-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/konkana-ka-parnparika-nashta-ghavana-bina-jhnjhata-ghara-para-banaen-yaha-narama-aura-jalidara-vynjana-58012 · **Language:** Hindi
**Tags:** घावन रेसिपी, महाराष्ट्रीयन नाश्ता, कोंकण डिश, चावल का नाश्ता, ब्रेकफास्ट रेसिपी

सुबह के नाश्ते में कुछ ऐसा तैयार करना हो जिसमें ज्यादा तामझाम न हो और जो खाने में भी स्वादिष्ट लगे, तो घावन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। महाराष्ट्र के कोंकण इलाके का यह पारंपरिक व्यंजन देखने में पतले डोसे की तरह नजर आता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी नरम बनावट और इसकी सतह पर उभरने वाली बारीक जालियां हैं। इसे बनाने के लिए मुख्य रूप से केवल कच्चे चावल, नमक, पानी और तवे पर लगाने के लिए थोड़े से तेल की जरूरत पड़ती है। इस रेसिपी में न तो किसी तरह की भरावन तैयार करनी होती है और न ही ढेरों मसालों को भूनने का झंझट उठाना पड़ता है। हालांकि, कम सामग्री वाली इस डिश में घोल का सही टेक्सचर और तवे का तापमान बहुत मायने रखता है। यदि घोल ज्यादा गाढ़ा होगा तो घावन मोटा बन सकता है और अगर तवा ठीक से गर्म नहीं हुआ तो उसे तवे पर फैलाना मुश्किल हो जाएगा। यदि चावल पहले से ही भिगोकर रख लिए जाएं, तो सुबह के वक्त इन्हें पीसकर नाश्ता तैयार करना बेहद आसान हो जाता है। इसे नारियल की चटनी, अपनी पसंद की किसी भी सब्जी या करी के साथ गर्मागर्म परोसा जा सकता है।

## घावन के लिए जरूरी सामग्री और तैयारी
इस आसान रेसिपी को बनाने के लिए 330 ग्राम कच्चे चावल लें। इसके साथ ही स्वाद के अनुसार नमक, जरूरत के मुताबिक पानी और तवे पर लगाने के लिए थोड़ा सा तेल अपने पास रखें। चावल की इस तय मात्रा से कितने घावन बनकर तैयार होंगे, यह पूरी तरह से उनके आकार और मोटाई पर निर्भर करता है। शुरुआत करने वालों के लिए छोटे आकार के घावन बनाना ज्यादा आसान रहता है। इससे घोल को तवे पर फैलाने और पकने के बाद उसे सुरक्षित उठाने का सही तरीका समझ में आ जाता है। सभी जरूरी सामग्री निकालते समय चावल भिगोने के लिए एक बर्तन, एक मिक्सर जार, घोल तैयार करने के लिए एक गहरा कटोरा और एक अच्छी कलछी भी पहले से तैयार रखनी चाहिए।

## चावल को भिगोने का सही तरीका
इस नाश्ते को बनाने की शुरुआत करते समय सबसे पहले चावल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लेना चाहिए। इसके बाद इन्हें पर्याप्त पानी में करीब पांच घंटे के लिए भिगोकर रखना जरूरी होता है। लंबे समय तक भिगोने की वजह से चावल अच्छी तरह नरम हो जाते हैं, जिससे उन्हें मिक्सर में बारीक पीसना बहुत आसान हो जाता है। यदि अगली सुबह घावन बनाने की योजना हो, तो चावल को भिगोने का समय उसी हिसाब से पहले ही तय कर लेना चाहिए। इस पूरी रेसिपी में तैयारी और पकाने का कुल समय करीब 30 मिनट बताया गया है, लेकिन चावल को भिगोने के पांच घंटे का समय इसमें अलग से जोड़ा जाना चाहिए। इसलिए इसे बिना किसी पूर्व तैयारी के एकदम से झटपट बनने वाला नाश्ता मानकर शुरू नहीं करना चाहिए।

भीगे हुए चावल का सारा पानी निकालकर उन्हें मिक्सर जार के अंदर डाल देना चाहिए। पीसने की शुरुआत करते वक्त उसमें थोड़ा सा साफ पानी मिलाना सही रहता है। इसके बाद जरूरत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा पानी और बढ़ाते जाएं ताकि चावल का एक चिकना पेस्ट तैयार हो सके। एक साथ बहुत सारा पानी डाल देने पर चावल के कुछ दाने ठीक तरह से नहीं पिस पाते हैं। अपनी उंगलियों के बीच थोड़ा सा पेस्ट लेकर यह जांचा जा सकता है कि उसमें कोई मोटे कण बाकी तो नहीं रह गए हैं। यदि मिश्रण में दरदरापन महसूस हो तो उसे एक बार फिर से पीस लेना चाहिए। यदि घर का मिक्सर छोटा है तो चावल को दो बार में पीसना ज्यादा बेहतर विकल्प रहेगा।

## पतला घोल और जालीदार बनावट का राज
पिसे हुए चावल के इस पेस्ट को एक गहरे बर्तन में निकाल लें और उसमें स्वादानुसार नमक मिलाएं। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालते जाएं और एक बहने वाला पतला घोल तैयार कर लें। इसे किसी सामान्य मोटे डोसे के घोल की तरह गाढ़ा बिल्कुल भी नहीं रखना है। कलछी से नीचे गिराने पर यह घोल आसानी से बह जाना चाहिए, हालांकि एक साथ बहुत ज्यादा पानी भी नहीं मिलाना चाहिए। सुरक्षा की दृष्टि से पहले एक छोटा घावन बनाकर उसकी जांच कर लेनी चाहिए। यदि वह घावन बहुत मोटा बन रहा है तो घोल में थोड़ा और पानी मिलाया जा सकता है। इसके विपरीत, यदि घावन बहुत कमजोर होकर उठाते वक्त ही बिखरने लगे, तो इसका मतलब है कि घोल जरूरत से ज्यादा पतला हो चुका है। इस पारंपरिक विधि में घोल को खमीर यानी फर्मेंट करने के लिए घंटों रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

## तवे का तापमान और तेल का इस्तेमाल
एक नॉनस्टिक तवे को गैस के ऊपर रखकर अच्छी तरह गर्म करें और फिर उसकी सतह पर तेल की एक बहुत ही पतली परत लगा दें। यदि तवे पर तेल की मात्रा ज्यादा हो जाएगी तो घोल एक जगह टिकने के बजाय इधर-उधर फिसलने लगेगा। दूसरी तरफ, यदि तवा पर्याप्त रूप से गर्म नहीं हुआ तो घावन उस पर चिपक सकता है और उसकी खूबसूरत जालियां भी ठीक से नहीं बन पाएंगी। पकाने की शुरुआत हमेशा मध्यम से तेज आंच पर करनी चाहिए और घोल तवे पर डालने के बाद जरूरत के मुताबिक आंच को कम कर देना चाहिए। तवे पर बनने वाला पहला घावन ही आपको वहां की गर्मी का सही अंदाजा दे देगा। उसके बाद बाकी के घावन तैयार करते समय आंच को संभालना और नियंत्रित करना काफी आसान हो जाता है।

## तवे पर घोल फैलाने की सही तकनीक
तवे पर घोल डालने से ठीक पहले उसे कलछी से अच्छी तरह चला लेना जरूरी होता है, क्योंकि चावल का भारी हिस्सा अक्सर बर्तन के नीचे बैठ जाता है। अब कलछी में घोल भरकर उसे तवे के बाहरी किनारों से गिराते हुए बीच की तरफ लाना चाहिए। जहां कहीं भी कोई बड़ा हिस्सा खाली रह जाए, वहां थोड़ा सा और घोल टपका दिया जाना चाहिए। इसे मोटे डोसे की तरह कलछी से गोल-गोल घुमाकर फैलाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। यह पतला घोल गर्म सतह पर अपने आप फैल जाता है और उस पर छोटी-छोटी जालियां स्वतः ही बनने लगती हैं। हर बार नया घावन डालने से पहले घोल को चलाना बिल्कुल न भूलें, अन्यथा आपके पहले और आखिरी घावन की मोटाई में अंतर आ सकता है.

## पकाने का सही समय और तरीका
तवे पर घोल डालने के बाद आंच को मध्यम या अपनी जरूरत के अनुसार थोड़ा धीमा रखना चाहिए। ऊपरी सतह का सारा गीलापन खत्म होने दें और किनारों के खुद-ब-खुद तवे से अलग होने का इंतजार करें। यदि जरूरत महसूस हो तो तवे को कुछ देर के लिए ढककर भी पकाया जा सकता है। यदि आप घावन को बहुत जल्दी उठाने की कोशिश करेंगे तो वह बीच से फट सकता है। यह पतला घावन आमतौर पर सिर्फ एक ही तरफ से पकाया जाता है। जब इसका ऊपरी हिस्सा भी अच्छी तरह पक जाए, तो एक चपटे पलटे की मदद से इसके किनारों को धीरे-धीरे छुड़ाकर बाहर निकाल लेना चाहिए। इसे बहुत ज्यादा भूरा होने तक नहीं सेकना चाहिए ताकि इसकी असली नरमी बरकरार रहे।

## चटनी और करी के साथ परोसने का अंदाज
तैयार किए गए घावन को हल्का सा मोड़कर एक प्लेट में रखें और गर्मागर्म ही खाने के लिए परोसें। ताजे नारियल की चटनी के साथ इस सादा घावन का स्वाद बहुत अच्छा लगता है। यदि आप चाहें तो इसके साथ आलू की सूखी सब्जी या अपनी पसंद की कोई भी करी भी रख सकते हैं। तवे से तुरंत उतरे हुए घावन को एक के ऊपर एक रखने से वे आपस में चिपक सकते हैं, इसलिए परोसने से पहले उनकी भाप थोड़ी निकल जाने दें। सभी घावन बनाते समय घोल के गाढ़ेपन पर लगातार नजर बनाए रखें। जरूरत पड़ने पर उसमें थोड़ा सा पानी मिला लें और हर बार तवे पर नया घोल डालने से पहले उसे कलछी से एक बार जरूर चला लें।

## इसका आप पर असर
यह नाश्ता सुबह की भागदौड़ में आसानी से तैयार किया जा सकता है और सेहत के लिहाज से भी हल्का रहता है।

- **भारत में:** यह पारंपरिक डिश कोंकण शैली के खानपान को अपने घर तक लाने का एक आसान माध्यम बनती है। इसके सेवन से भारी मैदे या बेसन के विकल्पों की तुलना में हल्का और सुपाच्य नाश्ता मिलता है।
- **महाराष्ट्र में:** कोंकण क्षेत्र और पूरे राज्य के लोगों के लिए यह पुरानी पारंपरिक रसोई शैली को जीवंत करने का एक सरल तरीका है। इसे नारियल चटनी या करी के साथ आसानी से रोजमर्रा के मेनू में शामिल किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक व्यंजनों में कम सामग्री और सही तकनीकी संतुलन के कारण यह नाश्ता बिना किसी झंझट के तैयार हो जाता है।

- **तैयारी का तरीका:** चावल को पाँच घंटे भिगोने से वे नरम हो जाते हैं और मिक्सी में बिना किसी गांठ के बारीक पिस जाते हैं।
- **घोल का संतुलन:** घोल को पतला रखने से गर्म तवे पर अपने आप जालियां बनती हैं और डोसे जैसा भारीपन नहीं आता।
- **आंच का नियंत्रण:** मध्यम आंच पर पकाने से घावन तवे पर चिपकता नहीं है और अपनी सही नरमी बनाए रखता है।

## सवाल-जवाब

### 1. घावन बनाने के लिए मुख्य रूप से किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है?
इसके लिए मुख्य रूप से 330 ग्राम कच्चे चावल, स्वाद के अनुसार नमक, पानी और तवे पर लगाने के लिए थोड़ा तेल चाहिए।

### 2. चावल को पीसने से पहले कितने घंटे भिगोना जरूरी है?
चावल को अच्छी तरह नरम करने के लिए करीब पाँच घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखना आवश्यक है।

### 3. क्या इस घोल को खमीर उठाने के लिए रखना पड़ता है?
नहीं, इस पारंपरिक विधि में घोल को खमीर उठाने के लिए घंटों रखने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

### 4. घावन को तवे पर कैसे फैलाना चाहिए?
कलछी में घोल भरकर उसे तवे के बाहरी किनारों से गिराते हुए बीच की तरफ लाना चाहिए, इसे गोल घुमाने की जरूरत नहीं होती।

### 5. इस व्यंजन को किसके साथ परोसा जा सकता है?
इसे ताजी नारियल की चटनी, आलू की सूखी सब्जी या अपनी पसंद की किसी भी करी के साथ गर्मागर्म परोसा जा सकता है।

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