# व्रत में बिना टूटे कैसे तैयार करें कुट्टू की मुलायम रोटियां, जानिए आटा पकाने की अचूक तकनीक

> कुट्टू के आटे में प्राकृतिक ग्लूटेन न होने के कारण अक्सर रोटियां बेलते वक्त बिखर जाती हैं। गर्म पानी में आटा पकाकर गूंथने की खास विधि से आप आसानी से बेहद नरम और गोल रोटियां तैयार कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/kuttu-ki-roti-recipe-navratri-vrat-soft-buckwheat-flatbreads-47881 · **Language:** Hindi
**Tags:** कुट्टू की रोटी, व्रत का खाना, फलाहारी रेसिपी, नवरात्रि स्पेशल, कुट्टू का आटा, मुलायम रोटी बनाने का तरीका

नवरात्रि अथवा अन्य उपवास के दिनों में फलाहारी भोजन तैयार करते समय अधिकांश लोगों को कुट्टू की रोटियां बनाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। आम तौर पर देखा जाता है कि आटा गूंथने के बाद जब चकले पर रोटी बेलने का प्रयास किया जाता है, तो किनारे फटने लगते हैं या फिर तवे पर डालते ही रोटी बिखर जाती है। इस परेशानी का मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि सामान्य गेहूं के आटे में मिलने वाला लचीला ग्लूटेन कुट्टू में पूरी तरह अनुपस्थित होता है। गेहूं का ग्लूटेन आटे में लोच और खिंचाव पैदा करता है, जिससे वह आपस में चिपका रहता है। बिना ग्लूटेन वाले आटे को बांधने के लिए पारंपरिक तरीके से हटकर विशेष तकनीक अपनानी पड़ती है। यदि आप भी इस समस्या से परेशान रहते हैं, तो पानी को गर्म करके उसमें आटा पकाने वाली आसान विधि अपना सकते हैं। इस तरीके से तैयार आटा बेहद मुलायम हो जाता है और रोटियां बिना टूटे बहुत आसानी से बेल ली जाती हैं।

## रोटी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री और माप
इस विशेष फलाहारी रेसिपी को बनाने के लिए बुनियादी सामग्रियों का सही अनुपात में होना बेहद जरूरी है। इसके लिए आपको मुख्य रूप से कुट्टू का आटा, 2 कप पीने का साफ पानी, स्वादानुसार सेंधा नमक, एक छोटा चम्मच शुद्ध देसी घी और बेलने के लिए थोड़ा अतिरिक्त सूखा कुट्टू का आटा चाहिए होगा। सामग्री का चयन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उपवास के नियमों के अनुकूल ही शुद्ध चीजें इस्तेमाल की जाएं। बाजार से आटा खरीदते समय पैकेट पर लिखे विवरण और निर्देशों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए ताकि शुद्धता बनी रहे।

## गर्म पानी में आटा पकाने की बुनियादी विधि
कुट्टू की रोटी को लचीला बनाने का सबसे असरदार तरीका आटे को गर्म पानी के साथ पकाना है। इसके लिए सबसे पहले एक गहरे बर्तन में 2 कप पानी डालकर गैस पर गर्म होने के लिए रख दें। जब पानी थोड़ा गर्म होने लगे, तब उसमें स्वादानुसार सेंधा नमक और एक छोटा चम्मच देसी घी मिला दें। घी मिलाने से आटे में आवश्यक चिकनाई आ जाती है। जैसे ही पानी में पहला उबाल आए, तुरंत गैस को बंद कर दें। उबलते पानी में कुट्टू का आटा धीरे-धीरे डालें और किसी चम्मच या कलछी की सहायता से लगातार चलाते रहें। इससे आटा पानी को अच्छी तरह सोख लेता है और उसमें किसी भी प्रकार की गांठें नहीं पड़ती हैं। जब यह गाढ़ा मिश्रण बन जाए, तो बर्तन पर ढक्कन लगाकर करीब 5 मिनट के लिए छोड़ दें ताकि भाप में आटा पूरी तरह सेट हो जाए।

## गुनगुने आटे को सही तरीके से गूंथना
पांच मिनट बाद जब आटा भाप में अच्छी तरह फूल जाए, तब इस मिश्रण को किसी बड़ी परात या फैली हुई थाली में निकाल लें। यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि मिश्रण को बिल्कुल ठंडा न होने दें, बल्कि जब वह हल्का गर्म रहे और हाथों से छूने लायक हो, तभी उसे गूंथना शुरू करें। अपने हाथों की हथेलियों पर थोड़ा सा देसी घी लगा लें और आटे को अच्छी तरह मसलते हुए एकसार करें। यदि आपको आटा थोड़ा सूखा या कड़ा महसूस हो, तो बहुत मामूली मात्रा में पानी के छींटे मार सकते हैं। एक बार में ज्यादा पानी डालने की गलती न करें, क्योंकि इससे मिश्रण चिपचिपा हो जाएगा और उसे संभालना असंभव हो जाएगा। जब आटा एकदम चिकना और लचीला बन जाए, तो उसे कपड़े या ढक्कन से ढककर अलग रख दें।

## बेलने की तकनीक और प्लास्टिक शीट का प्रयोग
तैयार मुलायम आटे से एक समान आकार की छोटी-छोटी लोइयां काट लें। चकले पर थोड़ा सा सूखा कुट्टू का आटा छिड़कें ताकि लोई चिपके नहीं। लोई को चकले पर रखकर बहुत हल्के हाथों से बेलन चलाएं। ज्यादा दबाव डालने से रोटी तुरंत टूट सकती है। अगर आटा चकले पर पकड़ने लगे, तो ऊपर से थोड़ा और सूखा आटा बुरक सकते हैं। कुट्टू की रोटी को गेहूं की रोटी की तरह जरूरत से ज्यादा पतला करने का प्रयास न करें। यदि बेलते समय किनारे हल्के चटकने लगें, तो अपनी उंगलियों से किनारों को दबाकर गोल आकार दे दें। जो लोग पहली बार इसे बना रहे हैं, वे दो साफ प्लास्टिक शीट के बीच लोई रखकर हल्के हाथ से बेल सकते हैं, जिससे रोटी आसानी से बिना चिपके पूरी गोल बन जाती है।

## तवे पर सेंकने की सही प्रक्रिया और परोसने का तरीका
गैस पर तवे को मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म करें। बेली हुई रोटी को बहुत सावधानी से उठाकर गर्म तवे पर फैलाएं। जब रोटी की निचली सतह पर हल्के भूरे निशान दिखाई देने लगें, तब उसे चिमटे या पलटे से पलट दें। दूसरी तरफ भी कुछ देर तक पकने दें और आवश्यकता पड़ने पर दोबारा पलटें। रोटी को अच्छी तरह पकाने के लिए किसी साफ सूती कपड़े या सपाट पलटे से किनारों को हल्का दबा सकते हैं। यह ध्यान रखें कि कुट्टू की रोटी सामान्य गेहूं की रोटी की तरह पूरी तरह फूले, यह आवश्यक नहीं है। दोनों तरफ से अच्छी तरह सिक जाने के बाद इसे तवे से उतार लें। इसके ऊपर शुद्ध देसी घी लगाएं और गरमा-गरम परोसें। उपवास के दिनों में यह रोटी फलाहारी आलू की सब्जी, ताजे दही या अपनी पसंद के किसी भी फलाहारी व्यंजन के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है।

## कुट्टू का आटा संभालते समय जरूरी सावधानियां
कुट्टू के आटे के साथ काम करते समय पानी का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। यदि आटे में पानी कम रह गया, तो लोई बनाते समय दरारें पड़ेंगी और बेलते ही वह टूट जाएगी। इसके विपरीत, यदि पानी अधिक हो गया तो आटा गीला होकर हाथों और चकले से बुरी तरह चिपकने लगेगा। इसलिए पानी और सूखे आटे का संतुलन हमेशा सावधानीपूर्वक बनाएं। इसके अलावा, लोइयों को लंबे समय तक हवा में खुला न छोड़ें, क्योंकि कुट्टू का आटा बहुत तेजी से सूखता है और ऊपरी परत सख्त होने पर रोटी फट जाती है। हमेशा आटे को ढककर रखें और जरूरत के अनुसार ही लोई बाहर निकालें।

## इसका आप पर असर
उपवास के दौरान बिना टूटे मुलायम कुट्टू की रोटी बनाने की यह विधि आपके भोजन पकाने के अनुभव को पूरी तरह बदल देती है।

- **रसोई में समय की बचत:** आटा पहले से पका लेने से रोटियां बेलते वक्त बार-बार टूटती नहीं हैं। इससे व्रत का भोजन तैयार करने में लगने वाला समय और मेहनत काफी कम हो जाती है।
- **भोजन की बेहतर बनावट:** गर्म पानी और घी का इस्तेमाल करने से रोटियां ठंडी होने के बाद भी सख्त नहीं पड़ती हैं। इसका मतलब है कि आप दिन भर के उपवास के लिए नरम और खाने में सुपाच्य रोटियां आसानी से तैयार कर सकते हैं।
- **शुरुआती रसोइयों के लिए आसानी:** प्लास्टिक शीट का इस्तेमाल करके कोई भी पहली बार में गोल रोटी बना सकता है। इससे आटा चकले पर चिपकने या फटने का डर पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
- **शुद्धता की गारंटी:** घर पर सही विधि से रोटियां पकाने से बाजार के मिलावटी फलाहारी उत्पादों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे व्रत के नियमों का कड़ाई से पालन होता है और पाचन भी दुरुस्त रहता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कुट्टू के आटे से रोटियां बनाते समय उनके टूटने और फटने के पीछे रासायनिक और भौतिक कारण जिम्मेदार होते हैं।

- **ग्लूटेन का अभाव:** गेहूं के विपरीत कुट्टू एक अनाज नहीं बल्कि फल का बीज है, जिसमें प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन प्रोटीन बिल्कुल नहीं पाया जाता। यही कारण है कि ठंडे पानी से गूंथने पर इसमें कोई लोच या खिंचाव नहीं बन पाता।
- **स्टार्च का जिलेटिनाइजेशन:** जब कुट्टू के आटे को उबलते पानी में मिलाया जाता है, तो उसका स्टार्च तुरंत नमी सोखकर फूल जाता है और प्राकृतिक गोंद की तरह काम करने लगता है। इसी प्रक्रिया की वजह से आटा आपस में अच्छी तरह बंध जाता है।
- **नमी का तेजी से उड़ना:** कुट्टू का आटा हवा के संपर्क में आते ही बहुत जल्दी सूखने लगता है, जिससे लोइयों की ऊपरी परत चटक जाती है। यदि लोई को खुला छोड़ दिया जाए तो बेलते समय वह किनारों से तुरंत बिखरने लगती है।

## सवाल-जवाब

### 1. कुट्टू की रोटी बेलते समय किनारों से क्यों टूटने लगती है?
कुट्टू के आटे में गेहूं की तरह प्राकृतिक ग्लूटेन नहीं होता है, जिससे आटे में खिंचाव नहीं बन पाता और वह बेलते समय फटने लगता है।

### 2. आटा पकाने के लिए पानी में क्या मिलाया जाता है?
उबलते पानी में स्वादानुसार सेंधा नमक और एक छोटा चम्मच देसी घी मिलाया जाता है ताकि आटे में नमी और चिकनाई बनी रहे।

### 3. उबलते पानी में आटा डालने के बाद बर्तन को कितने समय तक ढककर रखना चाहिए?
मिश्रण गाढ़ा होने के बाद बर्तन को ढक्कन से ढककर लगभग 5 मिनट के लिए भाप में पकने देना चाहिए।

### 4. यदि आटा चकले पर चिपकने लगे तो क्या करना चाहिए?
चकले पर थोड़ा सूखा कुट्टू का आटा छिड़कें या फिर लोई को दो साफ प्लास्टिक शीट के बीच रखकर हल्के हाथों से बेलें।

### 5. कुट्टू की रोटी को किन चीजों के साथ परोसा जा सकता है?
इसे गरमा-गरम देसी घी लगाकर फलाहारी आलू की सब्जी, ताजा दही या अपनी पसंद के अन्य व्रत वाले व्यंजनों के साथ परोसा जाता है।

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