लद्दाख के चेकपोस्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान भड़की पर्यटक, उमर अब्दुल्ला बोले नया जानते नहीं मेरा बाप कौन है लद्दाख के कारगिल में वीवीआईपी मूवमेंट के चलते रास्ते में रोके जाने पर एक पर्यटक लड़की सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गई, जिस पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी इलाके में बने एक सुरक्षा चेकपोस्ट पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही रोके जाने के बाद एक महिला पर्यटक के जोरदार हंगामे का मामला सामने आया है। कारगिल क्षेत्र के मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर हुई इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर काफी तेजी से प्रसारित हो रहा है। सुरक्षा अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए उस पर्यटक ने बार-बार स्वयं को नई पीढ़ी का प्रतिनिधि बताते हुए इस तरह के इंतजार को पूरी तरह अनुचित ठहराया। वहां मौजूद अन्य यात्रियों को भी उसने अपनी गाड़ियों में लौट जाने और विरोध दर्ज कराने का आग्रह किया। इस घटनाक्रम का संज्ञान लेते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया के जरिए इस व्यवहार की आलोचना की है और इसे विशिष्टता दर्शाने वाली पुरानी मानसिकता का आधुनिक रूप करार दिया है। मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर पर्यटकों का हंगामा और नारेबाजी यह पूरा मामला लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित मिनिमार्ग सुरक्षा पोस्ट का है, जहां कई पर्यटक वाहन कतारों में खड़े दिखाई दे रहे थे। वीडियो क्लिप में दिखाई दे रहा है कि सुरक्षाकर्मियों द्वारा आगे जाने से रोके जाने पर एक युवती काफी उग्र हो गई। उसने वहां तैनात कर्मियों के समक्ष खुलकर अपनी असहमति दर्ज कराई और बार-बार यह दोहराती नजर आई कि उसकी पीढ़ी इस प्रकार की अव्यवस्था और देरी को सहन नहीं करेगी। अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए उसने आसपास खड़े अन्य यात्रियों को भी संबोधित किया और उनसे कहा कि यदि लंबे समय तक इसी तरह रुकना पड़ता है तो सभी को अपनी गाड़ियां मोड़कर वापस चले जाना चाहिए। चेकपोस्ट पर बनी इस स्थिति के दौरान वहां मौजूद कुछ अन्य यात्रियों ने भी उस युवती की बातों का समर्थन किया और उसका उत्साहवर्धन करते दिखे। महिला का कहना था कि लद्दाख आने वाले लोग भारी खर्च करके यात्रा पर निकलते हैं, इसलिए वे बुनियादी सुविधाओं के अभाव या बिना पूर्व सूचना के घंटों तक रास्ते में फंसे रहने की स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकते। उसने यह दावा भी किया कि पूर्व में इस प्रकार की आवाजाही संबंधी बंदिशों का सामना केवल घाटी के निवासियों को करना पड़ता था, परंतु अब बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी इसी तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी इस वायरल घटनाक्रम पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना दृष्टिकोण साझा किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने आधिकारिक हैंडल से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने लिखा कि किसी भी छोटी बात पर नई पीढ़ी का हवाला देकर धौंस जमाना पुरानी सामंती मानसिकता जैसी बात बन गया है। उनका मानना था कि जरा सी असुविधा होने पर अपनी पहचान को हथियार की तरह इस्तेमाल करना इस वर्ग की छवि को नुकसान पहुंचाता है। अब्दुल्ला ने अपने संदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि इस प्रकार का आचरण समाज में बनी सकारात्मक धारणा को धूमिल करने का सबसे आसान जरिया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जनहित और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं के सामने इस तरह का अहंकार दिखाना उचित नहीं है। मौसम में बदलाव के कारण सड़क मार्ग से वीवीआईपी आवाजाही सुरक्षा सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना 25 जुलाई की है, जब जोजिला और गुमरी मार्ग पर उच्च स्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। उस दिन देश के रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख का उस क्षेत्र में दौरा प्रस्तावित था। निर्धारित योजना के अंतर्गत दोनों उच्च अधिकारियों को हवाई मार्ग से गंतव्य तक पहुंचना था, परंतु प्रतिकूल मौसम और धुंध के कारण अंतिम समय में हवाई यात्रा को रद्द करना पड़ा। इसके पश्चात अधिकारियों के काफिले को गुमरी से कारगिल तक सड़क मार्ग से ले जाने का निर्णय लिया गया। सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सड़क मार्ग पर सामान्य यातायात को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। इसी कारण मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर गाड़ियों का जमावड़ा हो गया और पर्यटकों को अपनी यात्रा रोकनी पड़ी। उग्र हुई महिला पर्यटक का दावा था कि यात्रियों को लगभग 5 घंटे तक चेकपोस्ट पर रोक कर रखा गया था, जिससे परेशान होकर उसने सुरक्षाकर्मियों के सामने विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा प्राथमिकताओं और यात्री सुविधा पर बंटी जनराय वीडियो व्यापक रूप से सामने आने के बाद आम जनता और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच इस विषय पर दो अलग-अलग पक्ष उभरकर सामने आए हैं। एक वर्ग का मानना है कि दूर-दराज के इलाकों में लंबी दूरी तय करने वाले पर्यटकों के समय और सुविधा का ध्यान रखा जाना आवश्यक है। उनका तर्क है कि यदि किसी कारण से सड़क मार्ग कई घंटों के लिए बंद किया जाता है, तो यात्रियों को इसकी पूर्व सूचना दी जानी चाहिए ताकि वे बीच रास्ते में असहाय स्थिति में न फंसे। दूसरी ओर, विशेषज्ञों और सुरक्षा व्यवस्था का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य नेतृत्व और देश के रक्षा मंत्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। ऐसे संवेदनशील मार्गों पर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है। इस पक्ष के अनुसार, राष्ट्रहित और सुरक्षा कारणों से लगाई गई अस्थायी बंदिशों के दौरान नागरिकों और पर्यटकों से सहयोग की अपेक्षा की जाती है। इसका आप पर असर • भारत में: सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में यात्रा करने वाले पर्यटकों को वीवीआईपी या सैन्य आवाजाही के दौरान यातायात पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। • लद्दाख में: जोजिला और कारगिल मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को मौसम खराब होने पर अचानक सुरक्षा पाबंदियों और मार्ग परिवर्तन के लिए तैयार रहना चाहिए। सवाल-जवाब 1. लद्दाख के चेकपोस्ट पर यह घटना कब और कहां हुई? यह घटना 25 जुलाई को लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित मिनिमार्ग चेकपोस्ट पर हुई। 2. पर्यटकों की गाड़ियां किस वजह से रोकी गई थीं? रक्षा मंत्री और सेना प्रमुख की सड़क मार्ग से आवाजाही के कारण सुरक्षा व्यवस्था के तहत यातायात रोका गया था। 3. वीवीआईपी यात्रा की योजना में बदलाव क्यों किया गया? खराब मौसम के कारण हवाई यात्रा रद्द करनी पड़ी और अधिकारियों को गुमरी से कारगिल सड़क मार्ग से जाना पड़ा। 4. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर क्या कहा? उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बात-बात पर अपनी पीढ़ी का हवाला देकर धौंस जमाना पुरानी मानसिकता की तरह छवि को नुकसान पहुंचाता है। https://trendkia.com/trends/laddakha-ke-chekaposta-para-suraksha-jancha-ke-daurana-bharaki-paryataka-omar-abdullah-bole-naya-janate-nahin-mera-bapa-kauna-hai-18441 TrendKia — Har trend, sabse pehle.