मच्छरों के आतंक से राहत दिलाएगा यह घरेलू दीपक, नींबू के छिलके और नीम से करें मिनटों में तैयार बदलते मौसम में शाम के समय घर में मच्छरों की समस्या बढ़ जाती है। रसोई में मौजूद नींबू, नीम के पत्ते, कपूर, लौंग और दालचीनी की मदद से एक असरदार देसी रिपेलेंट दिया बनाकर मच्छरों को दूर रखा जा सकता है। मौसम में बदलाव आते ही शाम ढलते ही घर के कोनों, बालकनी और खिड़कियों के आसपास मच्छरों का जमावड़ा शुरू हो जाता है। इनकी भनभनाहट और काटने से न केवल घर का सुकून छिन जाता है, बल्कि कई तरह की मौसमी बीमारियों का डर भी सताने लगता है। बाजार में मच्छरों से निपटने के लिए तमाम तरह के केमिकल स्प्रे, जहरीले धुएं वाली कॉइल और लिक्विड रिपेलेंट आसानी से मिल जाते हैं। इसके बावजूद बहुत से परिवार सांस और एलर्जी जैसी समस्याओं से बचने के लिए केमिकल से दूर रहकर कुदरती और घरेलू नुस्खों को तरजीह देते हैं। इसी कड़ी में सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही आसान और प्राकृतिक उपाय खूब पसंद किया जा रहा है, जिसे इंटरनेट पर्सनैलिटी पूनम देवनानी ने एक वीडियो के जरिए साझा किया है। इस देसी तरीके में इस्तेमाल की गई सभी सामग्रियां हमारी रसोई या आसपास बड़ी सरलता से मिल जाती हैं। इसमें नींबू के छिलके को दिए का आधार बनाकर नीम, कपूर, लौंग और दालचीनी के मिश्रण से एक खास रिपेलेंट दिया तैयार किया जाता है। दीपक बनाने के लिए जरूरी सामग्रियां इस प्राकृतिक रिपेलेंट दिए को घर पर बनाने के लिए किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके लिए आपको चाहिए एक ताजा नींबू, कुछ नीम की सूखी या ताजी पत्तियां, दीपक के लिए साधारण रुई, थोड़ा सा नीम का तेल या उसकी जगह सरसों का तेल, 2 से 3 कपूर की टिकियां, 5 से 6 साबुत लौंग और दालचीनी का एक छोटा टुकड़ा। सभी चीजों को साफ-सुथरा रखें ताकि दिया ठीक तरह से जल सके। नींबू के छिलके से इस तरह तैयार करें दिए का बेस दिए को आकार देने के लिए सबसे पहले एक नींबू को ठीक बीच से दो बराबर हिस्सों में काट लें। इसका सारा रस किसी कटोरी में निचोड़कर अलग रख लें ताकि वह बाद में काम आ सके। अब एक चम्मच के पिछले हिस्से या किनारे की मदद से छिलके के अंदर चिपके हुए गूदे को पूरी सावधानी से निकाल दें। जब छिलके का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह साफ हो जाए, तो वह एक छोटे प्याले या दिए के आकार में बदल जाएगा। यही साफ छिलका इस नुस्खे में दिए का मजबूत आधार बनता है। इसके बाद कुछ नीम की पत्तियों को अच्छी तरह सुखाकर हाथों से हल्का सा क्रश या चूरा कर लें। इस चूरे को नींबू के खाली किए गए छिलके के भीतर फैला दें। अब रुई की मदद से एक छोटी और मजबूत बाती तैयार करें और उसे नीम की पत्तियों के ठीक बीचों-बीच स्थापित कर दें। तेल, कपूर और मसालों का संतुलन बाती को टिकाने के बाद उस पर धीरे-धीरे थोड़ा नीम का तेल डालें। अगर घर में नीम का तेल मौजूद न हो, तो नुस्खे के मुताबिक साधारण सरसों के तेल का इस्तेमाल भी पूरी तरह किया जा सकता है। इसके बाद कपूर की टिकियों के छोटे-छोटे टुकड़े करके उन्हें बाती के चारों तरफ करीने से सजा दें। साथ ही 5 से 6 लौंग और दालचीनी के टुकड़े को खलबट्टे में हल्का सा दरदरा कूट लें। इस तैयार दरदरे चूर्ण को बाती के इर्द-गिर्द डाल दें। यहां इस बात का विशेष ध्यान रखें कि छिलके में सामग्री बहुत ज्यादा ऊपर तक न भरें, जिससे तेल बाहर न छलके। अगर बाती सूखी लगे, तो ऊपर से थोड़ा और तेल डालकर उसे अच्छी तरह तर कर लें ताकि लौ लंबे समय तक जलती रहे। इस्तेमाल का तरीका और सुरक्षा से जुड़ी सावधानियां जब यह देसी दिया बनकर पूरी तरह तैयार हो जाए, तो इसे घर के उन हिस्सों में रखें जहां शाम होते ही मच्छरों की हलचल सबसे ज्यादा देखी जाती है। अगर घर के अलग-अलग कमरों या कोनों में मच्छर आ रहे हों, तो एक साथ ढेरों दिए जलाने की बजाय जरूरत के हिसाब से अलग-अलग समय पर इनका उपयोग करें। इस नुस्खे में शामिल नीम, कपूर, लौंग और दालचीनी जब तेल के साथ जलते हैं, तो इनसे निकलने वाली हल्की तीखी प्राकृतिक महक मच्छरों को बिल्कुल रास नहीं आती और वे आसपास के दायरे से दूर भागने लगते हैं। दिया जलाते समय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें और इसे हमेशा किसी ऐसी खुली और समतल जगह पर रखें, जिसके आसपास पर्दे, कागज या कोई अन्य ज्वलनशील वस्तु बिल्कुल न हो। इसका आप पर असर इस आसान और बिना केमिकल वाले नुस्खे का सीधा असर आपके घरेलू बजट, स्वास्थ्य और शाम के सुकून पर पड़ता है। • सेहत पर असर: बाजार के केमिकल स्प्रे और कॉइल के जहरीले धुएं से होने वाली खांसी और सांस की दिक्कतों से परिवार बचता है। नीम और कपूर की सौम्य महक घर के वातावरण को बिना किसी जहरीले असर के सुरक्षित रखती है। • घरेलू खर्च में बचत: महंगे केमिकल लिक्विड रिफिल और स्प्रे पर हर महीने होने वाले खर्च में कमी आती है। रसोई में मौजूद नींबू, तेल और मसालों से यह दिया महज कुछ रुपयों में बनकर तैयार हो जाता है। • मौसम के बदलाव में राहत: बदलते मौसम में शाम ढलते ही खिड़कियों और बालकनी के पास होने वाले मच्छरों के हमले से आसानी से बचा जा सकता है। इसे शाम के वक्त सही जगह जलाकर कमरे को मच्छरों से मुक्त रखा जा सकता है। • सुरक्षा और सावधानी: केमिकल कॉइल के मुकाबले यह नुस्खा प्राकृतिक है, लेकिन जलते दिए को सुरक्षित जगह रखना जरूरी है। घर के पर्दे, कागज और ज्वलनशील चीजों से दूर रखकर ही इसका सुरक्षित फायदा उठाया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ बदलते मौसम में शाम के समय मच्छरों की आमद तेज होने और बाजारू केमिकल के दुष्प्रभावों के चलते लोग इस प्राकृतिक तरीके को अपना रहे हैं। • मौसम का प्रभाव: मौसम में बदलाव आते ही तापमान और नमी कीटों और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देती है। शाम होते ही तापमान में हल्की ठंडक होने पर मच्छर घरों के गर्म और सुरक्षित कोनों में शरण लेने पहुंचते हैं। • केमिकल से दूरी: लगातार रासायनिक लिक्विड और कॉइल के संपर्क में रहने से कई लोगों को गले में जलन और सिरदर्द की शिकायत होती है। इसी वजह से लोग घर में मौजूद सुरक्षित वानस्पतिक विकल्पों की तलाश करते हैं। • प्राकृतिक गंध का प्रभाव: नीम, कपूर, लौंग और दालचीनी के सक्रिय तत्वों की तीखी गंध मच्छरों की सूंघने और रास्ता खोजने की क्षमता को बाधित कर देती है। जब यह मिश्रण गर्म होता है, तो इसकी महक मच्छरों को उस जगह से दूर हटने पर मजबूर करती है। सवाल-जवाब 1. इस मच्छर भगाने वाले दिए को बनाने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है? इसके लिए एक नींबू, नीम की कुछ सूखी पत्तियां, रुई, नीम का तेल या सरसों का तेल, 2 से 3 कपूर, 5 से 6 लौंग और दालचीनी का एक छोटा टुकड़ा चाहिए। 2. अगर घर में नीम का तेल न हो तो क्या इस्तेमाल करें? यदि नीम का तेल उपलब्ध नहीं है, तो नुस्खे के अनुसार उसकी जगह साधारण सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। 3. यह घरेलू उपाय किसने साझा किया है? यह घरेलू नुस्खा इंटरनेट पर्सनैलिटी पूनम देवनानी द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में बताया गया है। 4. इस दिए को घर में किस जगह और कैसे रखना चाहिए? दिए को मच्छरों की आवाजाही वाले क्षेत्रों जैसे बालकनी या खिड़की के पास किसी खुली, सुरक्षित और अज्वलनशील सतह पर रखना चाहिए। https://trendkia.com/trends/machchharon-ke-atnka-se-rahata-dilaega-yaha-gharelu-dipaka-lemon-ke-chhilake-aura-neem-se-karen-minaton-men-taiyara-40728 TrendKia — Har trend, sabse pehle.