नेपाल आपदा पीड़ितों की मदद के लिए ईशा फाउंडेशन ने दिए 1 करोड़ रुपये, सद्गुरु ने 5 देशों के साझा हिमालयन बोर्ड की उठाई मांग नेपाल में आई विनाशकारी आपदा के बीच ईशा फाउंडेशन ने 1 करोड़ रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की है। सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने इसके साथ ही पर्यावरण सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर एक संयुक्त हिमालयन बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव रखा है। नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र को भीषण तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इस मानवीय संकट के समय आध्यात्मिक गुरु और वैश्विक मानवतावादी सद्गुरु जग्गी वासुदेव के संगठन ईशा फाउंडेशन ने राहत कार्यों के लिए बड़ी पहल की है। ईशा फाउंडेशन की तरफ से नेपाल राहत कोष में 1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का आधिकारिक ऐलान किया गया है। काठमांडू में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान इस मदद की घोषणा की गई। वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ सद्गुरु ने इस संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान भी प्रस्तावित किया है। उन्होंने हिमालयी सीमाओं से सटे पांचों पड़ोसी देशों भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और भूटान को एकजुट होकर एक संयुक्त क्षेत्रीय तंत्र विकसित करने का आग्रह किया है। लापता तीर्थयात्रियों की तलाश और राहत अभियान इस प्राकृतिक विभीषिका के कारण अब तक 900 लोगों की जान जाने की आधिकारिक पुष्टि की जा चुकी है, जबकि हजारों की संख्या में लोग अब भी मलबे और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लापता हैं। लापता लोगों की इस विशाल संख्या में ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम से जुड़े सदस्य भी शामिल हैं। संस्था के अनुसार ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा पर गए 77 श्रद्धालु आपदा के समय चीन सीमा के पास स्थित गिरोंग इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद थे और तब से उनसे संपर्क नहीं हो सका है। इसके अलावा नेपाल के भीतर राहत और समन्वय कार्यों में जुटे ईशा फाउंडेशन के 3 स्वयंसेवक भी इस आपदा के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं, लेकिन भौगोलिक कठिनाइयों के कारण राहत कार्यों में भारी रुकावटें आ रही हैं। सीमाओं से परे साझा हिमालयन बोर्ड का गठन काठमांडू में आपदा प्रभावितों की एकजुटता में आयोजित कार्यक्रम में सद्गुरु ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाएं किसी देश की राजनीतिक सीमाओं या राष्ट्रीय झंडों का अंतर नहीं समझती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे हिमालयी बेल्ट को एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में देखा जाना चाहिए। सद्गुरु ने प्रस्ताव रखा कि भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलकर एक साझा 5 देशीय हिमालयन बोर्ड की स्थापना तुरंत करनी चाहिए। उनके अनुसार भले ही इन देशों की राजनीतिक प्रणालियां, सरकारें और भाषाएं अलग हों, लेकिन एक ही पर्वत श्रृंखला साझा करने के कारण इनकी पर्यावरणीय चुनौतियां एक जैसी हैं। अगर नीतियां और परामर्श साझा नहीं होंगे तो भविष्य में ऐसी तबाही को रोकना किसी भी देश के लिए अकेले संभव नहीं होगा। 4000 फीट की ऊंचाई से गिरा ग्लेशियर इस विनाशकारी घटना के तकनीकी और भौतिक स्वरूप पर बात करते हुए सद्गुरु ने आपदा की भयावहता को रेखांकित किया। लगभग 4,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई से विशाल ग्लेशियर का तीन-चौथाई हिस्सा अचानक टूटकर नीचे आ गिरा, जिससे भीषण जलप्रलय और भूस्खलन की स्थिति पैदा हो गई। इतनी ऊंचाई से इतने बड़े बर्फीले द्रव्यमान का गिरना एक ऐसी अप्रत्याशित घटना थी जिसका पहले से सटीक अनुमान लगाना किसी भी वैज्ञानिक या प्रशासनिक एजेंसी के लिए मुमकिन नहीं था। सद्गुरु ने कहा कि नेपाल जैसे भौगोलिक रूप से सीमित और संसाधनों की कमी से जूझ रहे राष्ट्र के लिए इतने बड़े पैमाने की कुदरती मार से अकेले निपटना पूरी तरह असंभव है। इसलिए सभी पड़ोसी देशों को इसे पूरे हिमालयी क्षेत्र की साझी जिम्मेदारी मानना होगा। जीवन की नश्वरता और अंधविश्वास से दूरी कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद प्रसिद्ध अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सद्गुरु से इस भीषण मानवीय त्रासदी से मिलने वाले जीवन के सबक पर चर्चा की। मनीषा कोइराला के सवाल का जवाब देते हुए सद्गुरु ने कहा कि यह घटना हर इंसान को जीवन की क्षणभंगुरता और उसकी नश्वरता की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि इंसान को अपनी मृत्यु का बोध रखने के लिए किसी आपदा का इंतजार नहीं करना चाहिए। जीवन के हर पल में अपनी नश्वरता का सचेत अहसास व्यक्ति को बुद्धिमत्तापूर्ण निर्णय लेने और जीवन को सही दिशा में जीने के लिए प्रेरित करता है। इसके साथ ही सद्गुरु ने लोगों से अपील की कि वे इस त्रासदी को किसी दैवीय प्रकोप, धार्मिक रहस्य या अदृश्य शक्तियों का खेल न बताएं। उन्होंने तर्क दिया कि भौतिक घटनाओं को दार्शनिक या रहस्यमयी रंग देने से आपदा झेल रहे पीड़ितों का दुख कम होने के बजाय उनका अपमान होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुदरती आपदाएं पूरी तरह भौतिक और वैज्ञानिक नियमों से संचालित होती हैं, जिनका अध्यात्म से कोई सीधा लेना-देना नहीं होता। मृतकों के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान की घोषणा आपदा में अकाल मृत्यु का शिकार हुए सैकड़ों लोगों की आत्मिक शांति के लिए सद्गुरु ने एक विशेष आध्यात्मिक अनुष्ठान कराने का फैसला लिया है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित ईशा योग केंद्र में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए काल भैरव कर्म का आयोजन किया जाएगा। यह एक विशेष पारंपरिक अनुष्ठान है जो अकस्मात या प्राकृतिक दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की सुगम आत्मिक यात्रा के लिए संपन्न किया जाता है। काठमांडू में एकजुटता संदेश के साथ सद्गुरु ने दुनिया भर के समाज और पड़ोसी देशों की सरकारों से अपील की कि वे तात्कालिक राहत कार्यों से आगे बढ़कर हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाएं। इसका आप पर असर नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और सद्गुरु द्वारा 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि की घोषणा दक्षिण एशियाई देशों में प्राकृतिक आपदा प्रबंधन और आपसी सहयोग की जरूरत को उजागर करती है। • भारत में: भारत की सीमाओं से सटे इलाकों में ग्लेशियर टूटने और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को देखते हुए राहत एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा और आवाजाही के लिए नए दिशा-निर्देश लागू हो सकते हैं। • नेपाल में: नेपाल में 1 करोड़ रुपये की राहत राशि से आपदा प्रभावित परिवारों को खाद्य सामग्री, अस्थायी आश्रय और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। मलबे में दबे 900 से अधिक मृतकों के परिजनों और लापता लोगों के परिवारों तक खोज अभियान तेज किया जाएगा। • तीर्थयात्रियों के लिए: कैलाश मानसरोवर और हिमालयी यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा परामर्श जारी किए गए हैं। गिरोंग क्षेत्र में फंसे 77 तीर्थयात्रियों के परिवारों को विदेश मंत्रालय और राहत दलों से लगातार जानकारी मिल रही है। • पर्यावरण नीतियों पर: भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान के बीच साझा हिमालयन बोर्ड बनने से भविष्य में ग्लेशियर की निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणाली को बेहतर बनाया जा सकेगा। सवाल-जवाब 1. नेपाल आपदा राहत कोष में ईशा फाउंडेशन ने कितनी राशि देने की घोषणा की है? ईशा फाउंडेशन की ओर से नेपाल में आपदा प्रभावितों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया गया है। 2. सद्गुरु ने किन 5 देशों को मिलाकर हिमालयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा है? सद्गुरु ने भारत, पाकिस्तान, चीन, नेपाल और भूटान को मिलाकर एक संयुक्त 5 देशीय हिमालयन बोर्ड बनाने की वकालत की है। 3. इस आपदा में ईशा फाउंडेशन के कितने सदस्य या तीर्थयात्री लापता हैं? ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा के 77 श्रद्धालु गिरोंग इमिग्रेशन सेंटर के पास से लापता हैं, जबकि नेपाल में मौजूद ईशा फाउंडेशन के 3 स्वयंसेवक भी लापता हैं। 4. आपदा में अब तक कितने लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है? अधिकारियों द्वारा आपदा में अब तक 900 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की जा चुकी है, जबकि हजारों लोग लापता हैं। 5. मृतकों की शांति के लिए सद्गुरु ने किस धार्मिक अनुष्ठान की घोषणा की है? तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए 'काल भैरव कर्म' अनुष्ठान किया जाएगा। 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