# नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट के गाला डिनर में छाया हिमालयी गुच्छी मशरूम, जानिए क्यों है यह इतना खास और महंगा

> नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वीं ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के लिए एक भव्य गाला डिनर परोसा गया, जिसमें 50,000 रुपये प्रति किलो तक बिकने वाले दुर्लभ हिमालयी गुच्छी मशरूम की खास डिश मुख्य आकर्षण रही।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/new-delhi-men-brics-samita-ke-gala-dinara-men-chhaya-himalayan-guchchhi-masharuma-janie-kyon-hai-yaha-itana-khasa-aura-mahnga-31838 · **Language:** Hindi
**Tags:** ब्रिक्स समिट, गाला डिनर, हिमालयी गुच्छी, गुच्छी मार्मिक, मोरल मशरूम, भारत मंडपम, भारतीय व्यंजन

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 18वीं ब्रिक्स समिट के अवसर पर शनिवार को विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के स्वागत में एक विशेष गाला डिनर का आयोजन किया गया। 12 और 13 सितंबर तक चले इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पहुंचे दुनिया भर के नेताओं के सामने भारतीय खानपान की समृद्ध और विविध संस्कृति को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस भव्य भोज के मेनू में देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल किया गया था, लेकिन पूरी शाम सबसे ज्यादा चर्चा जिस व्यंजन की रही, वह था हिमालयी मोरल मशरूम से तैयार किया गया 'गुच्छी मार्मिक'। यह डिश अपनी विशिष्टता, दुर्लभता और अत्यधिक कीमत के कारण आकर्षण का केंद्र बनी रही।

## गाला डिनर का खास आकर्षण: 'गुच्छी मार्मिक'
वैश्विक नेताओं के लिए तैयार किए गए इस विशेष मेनू में 'गुच्छी मार्मिक' को एक प्रीमियम व्यंजन के रूप में शामिल किया गया था। इस पकवान की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इसे पकाने की अनूठी विधि है। इसमें दुर्लभ हिमालयी गुच्छी के साथ शतावरी, असली केसर, मीठी किशमिश और उच्च गुणवत्ता वाले मामरा बादाम का संयोजन किया गया था। इन शाही सामग्रियों के मेल ने इसे रात के खाने का सबसे खास और प्रीमियम व्यंजन बना दिया। यह डिश न केवल स्वाद में अनोखी थी बल्कि इसमें इस्तेमाल होने वाला मशरूम भारतीय पर्वतीय क्षेत्रों का एक बेहद कीमती उपहार माना जाता है।

## हिमालय के जंगलों की खोज: क्या है गुच्छी मशरूम?
गुच्छी एक विशेष प्रकार का जंगली मोरल मशरूम है जो वानस्पतिक रूप से मोर्चेला प्रजाति से संबंधित है। यह किसी खेत में सामान्य रूप से उगाई जाने वाली फसल नहीं है, बल्कि भारत के हिमालयी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के घने प्राकृतिक जंगलों में स्वतः उगती है। इसकी शारीरिक संरचना बेहद अनोखी होती है, जिसकी ऊपरी टोपी जालीदार या मधुमक्खी के शहद के छत्ते जैसी दिखाई देती है। आम मशरूम की तुलना में यह कई गुना अधिक मूल्यवान और दुर्लभ है क्योंकि इसे व्यावसायिक पैमाने पर उगाना अभी तक संभव नहीं हो सका है।

## क्यों होती है इसकी कीमत 50,000 रुपये प्रति किलो तक?
गुच्छी मशरूम के अत्यधिक महंगे होने के पीछे कई प्राकृतिक और व्यावहारिक कारण हैं। पर्वतीय इलाकों के ग्रामीण और स्थानीय लोग जंगलों में भटककर एक-एक मशरूम को अपने हाथों से चुनते हैं। यह मशरूम वर्ष के एक बेहद सीमित मौसम में ही उगता है और इसे खतरनाक तथा दुर्गम पहाड़ी रास्तों से खोजना बहुत अधिक मेहनत और समय की मांग करता है। बाजार में इसकी दरें गुणवत्ता, ग्रेड और उपलब्धता के आधार पर तय होती हैं। वर्ष 2026 के बाजार आंकड़ों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली सूखी गुच्छी की कीमत 25,000 रुपये से लेकर 40,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहती है। वहीं, सबसे उत्कृष्ट और प्रीमियम श्रेणी की गुच्छी का मूल्य 30,000 रुपये से 50,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता है।

## पोषक तत्वों का खजाना और स्वास्थ्य लाभ
स्वाद और मूल्य के अलावा हिमालयी मोरल मशरूम अपने अद्वितीय स्वास्थ्यवर्धक गुणों के लिए भी जाना जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, आहार फाइबर, विटामिन डी और कई आवश्यक खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में अत्यधिक मददगार सिद्ध होता है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रूप से कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित और कम करने वाले तत्व मौजूद होते हैं। इसके नियमित और संतुलित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत होती है, पाचन तंत्र में सुधार आता है और शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या दूर करने में मदद मिलती है।

## भारतीय व्यंजनों का विविध और भव्य मेनू
ब्रिक्स समिट के इस डिनर में केवल गुच्छी मार्मिक ही नहीं, बल्कि भारत के हर कोने के जायके को शामिल किया गया था। मेहमानों की थाली में खंडवी मिलेफ्यू, खुम्ब गलौटी, मखमली पनीर लबाबदार, पौष्टिक मिलेट पुलाव, दक्षिण भारतीय थक्काली बेले सारू, बीटरूट रायता और विभिन्न प्रकार की पारंपरिक भारतीय रोटियां परोसी गईं। मीठे के शौकीनों के लिए विशेष रूप से शहतूत फिरनी और पुरानी दिल्ली की मशहूर फ्रूट क्रीम के साथ गरमा-गरम जलेबी का प्रबंध किया गया था। इस तरह भारत ने अपने खानपान के माध्यम से दुनिया भर से आए दिग्गजों के सामने देश की विविधता में एकता और समृद्ध पाक कला का सफल प्रदर्शन किया।

## इसका आप पर असर
वैश्विक मंचों पर भारत के दुर्लभ और पारंपरिक व्यंजनों की प्रस्तुति से देश के कृषि और पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ स्वस्थ खानपान को नई पहचान मिल रही है।

- **पर्वतीय समुदायों पर प्रभाव:** हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण संग्रहकर्ताओं को दुर्लभ गुच्छी मशरूम की बढ़ती वैश्विक मांग से बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाले परिवारों की मौसमी आय में सुधार हो सकता है।
- **मिलेट्स और सुपरफूड को बढ़ावा:** ब्रिक्स डिनर में मोटे अनाज यानी मिलेट्स को शामिल किए जाने से आम भारतीय उपभोक्ताओं में इसके प्रति जागरूकता बढ़ेगी। उपभोक्ता अपने दैनिक आहार में मिलेट्स को शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
- **स्वास्थ्य और पोषण:** हिमालयी गुच्छी जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के औषधीय गुणों की जानकारी मिलने से लोग जैविक आहार की ओर अधिक आकर्षित होंगे। इससे कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
- **भारतीय पाक कला का प्रचार:** अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन देश के संस्कृति और पर्यटन उद्योग को मजबूती प्रदान करता है। इससे दुनिया भर में भारतीय व्यंजन और खानपान के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
ब्रिक्स समिट के दौरान गाला डिनर के मेनू में हिमालयी गुच्छी मशरूम को शामिल करने के पीछे भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को दर्शाने का उद्देश्य था।

- **विशिष्टता और दुर्लभता:** गुच्छी मशरूम का व्यावसायिक उत्पादन संभव न होने के कारण यह केवल हिमालय के जंगलों में ही हाथ से चुना जाता है। यही कारण है कि इसे किसी भी शाही या कूटनीतिक दावत के लिए अत्यंत प्रतिष्ठित माना जाता है।
- **वैश्विक मंच पर भारतीय स्वाद:** भारत सरकार ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के माध्यम से दुनिया भर से आए नेताओं को भारत के कोने-कोने के अनूठे स्वाद से परिचित कराने की योजना बनाई थी।
- **स्वास्थ्यवर्धक गुण:** प्रोटीन, विटामिन डी और एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होने के कारण यह व्यंजन न केवल स्वादिष्ट है बल्कि अतिथियों के लिए अत्यंत पौष्टिक भी सिद्ध होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. 'गुच्छी मार्मिक' क्या है और इसे कैसे बनाया जाता है?
'गुच्छी मार्मिक' हिमालयी मोरल मशरूम से तैयार एक विशेष व्यंजन है, जिसमें शतावरी, केसर, किशमिश और मामरा बादाम मिलाए जाते हैं। इसे ब्रिक्स गाला डिनर में परोसा गया था।

### 2. गुच्छी मशरूम इतना महंगा क्यों होता है?
गुच्छी की व्यावसायिक खेती नहीं की जा सकती और इसे हिमालय के जंगलों से हाथ से चुनना पड़ता है। सीमित मौसम और कठिन प्रक्रिया के कारण सूखी गुच्छी की कीमत 50,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है।

### 3. भारत में गुच्छी मशरूम कहाँ पाया जाता है?
यह मशरूम हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के प्राकृतिक और घने पर्वतीय जंगलों में स्वतः उगता है।

### 4. गुच्छी मशरूम खाने से स्वास्थ्य को क्या फायदे मिलते हैं?
इसमें प्रोटीन, फाइबर और विटामिन डी प्रचुर मात्रा में होते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने, इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और एनीमिया दूर करने में मददगार है।

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