{
  "type": "article",
  "title": "पारंपरिक देसी स्वाद और सादगी पर टिका है नरेंद्र मोदी का खानपान, जानिए कौन से व्यंजन हैं उनकी दिनचर्या का हिस्सा",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बेहद व्यस्त दिनचर्या में सादा शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं। सहजन पराठे, मखाने से लेकर बाजरा भाखरी और काले चावल तक, उनके खानपान में पारंपरिक भारतीय पोषण झलकता है।",
  "content": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी बेहद व्यस्त कार्यशैली और अनुशासित दिनचर्या के लिए पहचाने जाते हैं। उनके दैनिक जीवन में शारीरिक सक्रियता के साथ उनके खानपान की सादगी अक्सर चर्चा का विषय बनती है। हालांकि, उन्होंने विभिन्न सार्वजनिक अवसरों पर स्वयं यह स्पष्ट किया है कि वे किसी बंधी-बंधाई सख्त डाइट योजना का पालन नहीं करते हैं। वर्ष 2026 में 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के दौरान छात्रों से संवाद करते हुए उन्होंने साझा किया था कि वे पूर्णतः शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं और जो भी सात्विक आहार सुलभ हो, उसी के अनुसार अपनी खुराक तय करते रहे हैं। अपने शुरुआती दिनों का स्मरण करते हुए उन्होंने यह भी बताया था कि वे कई बार स्वयं अपने लिए खिचड़ी तैयार करते थे।\n\nसार्वजनिक बयानों और विभिन्न वार्ताओं में ऐसे कई पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों का संदर्भ सामने आता रहा है, जो उनके खानपान की आदतों से जुड़े हैं। इन पौष्टिक विकल्पों में मखाना, मोटे अनाज यानी मिलेट्स, मोरिंगा पराठा और दाल-चावल की खिचड़ी प्रमुखता से शामिल हैं। इन सभी व्यंजनों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये भारतीय रसोई का सदियों से अभिन्न हिस्सा रहे हैं और पोषण के लिहाज़ से अत्यंत समृद्ध माने जाते हैं।\n\nभागलपुर में मखाने को बताया था सुपरफूड\nदैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री में मखाना प्रमुखता से उभरता है। बिहार के भागलपुर में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान नरेंद्र मोदी ने उल्लेख किया था कि वे वर्ष के कम से कम 300 दिन मखाना खाते हैं। उन्होंने मखाने को एक असाधारण 'सुपरफूड' का दर्जा देते हुए बिहार के मखाना उत्पादक किसानों की कड़ी मेहनत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके बढ़ते बाजार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया था। आमतौर पर लोग मखाने को एक हल्के और सुपाच्य स्नैक के तौर पर उपयोग करते हैं। इसे धीमी आंच पर हल्का भूनकर खाना अत्यंत लोकप्रिय तरीका है। पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें प्रोटीन के साथ कई आवश्यक खनिज तत्व मौजूद होते हैं, फिर भी किसी भी अन्य खाद्य की तरह इसे सीमित और संतुलित मात्रा में ही आहार में शामिल करना श्रेयस्कर रहता है।\n\nसहजन की पत्तियों से तैयार मोरिंगा पराठा\nमोरिंगा यानी सहजन की हरी पत्तियों से बनने वाला पराठा नरेंद्र मोदी के पसंदीदा व्यंजनों में सबसे चर्चित माना जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया मंचों पर भी इस पारंपरिक व्यंजन के प्रति अपने विशेष लगाव को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया था। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार सहजन की पत्तियों में प्रचुर मात्रा में फाइबर, विभिन्न विटामिन्स और सक्रिय एंटीऑक्सीडेंट यौगिक विद्यमान होते हैं। इसी कारण से भारतीय खानपान परंपरा में सहजन को एक बेहद गुणकारी हरी पत्तेदार सब्जी के तौर पर अपनाया जाता रहा है, जो स्वाद के साथ सेहत का बेहतरीन संतुलन प्रदान करती है।\n\nसुपाच्य और सादा आहार है खिचड़ी\nभारतीय घरों में खिचड़ी को सबसे सहज, हल्का और पेट के लिए मुफीद भोजन माना जाता है। वर्ष 2026 के अपने वक्तव्य में नरेंद्र मोदी ने बताया था कि जीवन के आरंभिक दौर में जब वे विभिन्न परिवारों और स्थानों पर रहते थे, तब जो भी शाकाहारी भोजन उपलब्ध होता था, उसे सहज भाव से स्वीकार करते थे। उसी दौर में वे कई बार स्वयं खिचड़ी पकाया करते थे। पारंपरिक रूप से दाल और चावल का यह सम्मिश्रण शरीर को आवश्यक कार्बोहाइड्रेट और सुपाच्य प्रोटीन की संतुलित खुराक प्रदान करता है। इसमें मौसमी हरी सब्जियां मिलाकर इसके पोषण स्तर को और अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है।\n\nभाप में तैयार होने वाला गुजराती ढोकला\nगुजरात के खानपान से जुड़ा ढोकला भी उनके आहार संदर्भों में निरंतर देखा जाता रहा है। मुख्य रूप से बेसन के घोल से तैयार किया जाने वाला यह पारंपरिक व्यंजन भाप में पकाया जाता है। तले-भुने पकवानों और भारी स्नैक्स की तुलना में यह एक बेहद हल्का और सुरक्षित विकल्प साबित होता है। इसका मुलायम स्पंजी स्वरूप और न्यूनतम तेल का इस्तेमाल इसे स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता है। हालांकि इसे परोसते समय इस्तेमाल होने वाली मीठी चटनी, अतिरिक्त तेल या ऊपर से लगाए जाने वाले तड़के की मात्रा इसके कुल पोषण मूल्य को प्रभावित कर सकती है।\n\nश्रीखंड की मिठास और प्रोबायोटिक्स का लाभ\nश्रीखंड गुजरात और पश्चिमी भारत का एक प्रसिद्ध पारंपरिक मीठा व्यंजन है, जिसे मलमल के कपड़े में छाने हुए गाढ़े दही से तैयार किया जाता है। मुख्य घटक दही होने के कारण इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और प्रचुर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है। इसके अलावा दही में मौजूद प्राकृतिक लाभकारी बैक्टीरिया पाचन तंत्र और आंतों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गुणकारी माने जाते हैं। चूंकि इसे तैयार करते समय शर्करा यानी चीनी का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसका अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए और इसे संतुलित मात्रा में ही लेना उचित होता है। उत्सवों और विशेष अवसरों पर सीमित मात्रा में इसका स्वाद लेना मिठास और आनंद का अहसास कराता है।\n\nभाखरी दाल का संपूर्ण पोषण\nपारंपरिक गुजराती थाली का एक और महत्वपूर्ण घटक भाखरी और दाल का मेल है। इस व्यंजन में मोटे अनाज जैसे ज्वार या बाजरे के आटे से मोटी और कुरकुरी भाखरी बनाई जाती है और उसे पकी हुई गाढ़ी दाल के साथ परोसा जाता है। यह व्यंजन स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ शरीर को दीर्घकालिक ऊर्जा देता है। दाल से जहां प्रचुर मात्रा में प्रोटीन प्राप्त होता है, वहीं ज्वार और बाजरे की भाखरी से शरीर को जरूरी डाइटरी फाइबर, आयरन और सूक्ष्म पोषक तत्व हासिल होते हैं। यह संयोजन देसी स्वाद और समग्र शारीरिक स्वास्थ्य का एक उत्तम उदाहरण है।\n\nभारतीय एवोकाडो और काले चावल को प्रोत्साहन\nनरेंद्र मोदी ने 2 सितंबर को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा करते हुए जानकारी दी थी कि भारत में उगाया जाने वाला एवोकाडो अब घरेलू स्तर पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। उनके अनुसार, पहले तक इस फल के बारे में आम लोगों में बहुत कम जागरूकता थी और बाजार में इसकी मांग भी सीमित थी। लेकिन हाल के दिनों में यह फल भारतीय परिवारों की डाइनिंग टेबल तक पहुंच चुका है और स्वास्थ्य के प्रति सचेत उपभोक्ताओं तथा प्रीमियम खाद्य बाजार में इसकी स्वीकार्यता लगातार विस्तृत हो रही है।\n\nइसी क्रम में काले चावल यानी ब्लैक राइस को भी एक आधुनिक स्वास्थ्यवर्धक अनाज के रूप में व्यापक सराहना मिल रही है। नरेंद्र मोदी ने मणिपुर और ओडिशा के उन प्रगतिशील किसानों की खुले दिल से प्रशंसा की है जो ब्लैक राइस की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं। काले चावल का विशिष्ट गहरा रंग उसमें मौजूद एंथोसायनिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के कारण होता है। यह तत्व पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने, रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने और हृदय प्रणाली को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि यह विशिष्ट अनाज स्वाद और पोषण दोनों के मेल के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nइस रिपोर्ट में बताए गए पारंपरिक खाद्य पदार्थ आम पाठकों को अपनी दैनिक जीवनशैली में बिना महंगे सप्लीमेंट्स के सहजता से पोषण जोड़ने का व्यावहारिक मार्ग दिखाते हैं।\n\n• खानपान में बदलाव: पाठक अपनी थाली में तले-भुने स्नैक्स की जगह भुने हुए मखाने और सहजन की पत्तियों जैसे स्थानीय विकल्प शामिल कर सकते हैं। यह बदलाव बिना अधिक खर्च किए शरीर को उच्च फाइबर और जरूरी मिनरल्स उपलब्ध कराता है।\n• पारंपरिक मोटे अनाज: गेहूं के साधारण विकल्पों के साथ बाजरा या ज्वार की भाखरी और दाल का उपयोग दैनिक ऊर्जा स्तर को सुधारता है। पाचन और पोषण की दृष्टि से यह संयोजन दिनभर काम करने वाले कामकाजी लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है।\n• किसान और स्थानीय बाजार: उपभोक्ता स्तर पर काले चावल और भारतीय एवोकाडो की मांग बढ़ने से घरेलू किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। ग्राहक आयातित महंगे फलों के बजाय स्थानीय स्तर पर उगाई जा रही पौष्टिक उपज खरीद सकते हैं।\n• संतुलित मात्रा का ध्यान: श्रीखंड और ढोकला जैसे व्यंजनों का स्वाद लेते समय चीनी और तड़के में अतिरिक्त तेल की मात्रा को सीमित रखना आवश्यक है। इससे पारंपरिक व्यंजनों के स्वाद के साथ-साथ सेहत को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचता।\n\nऐसा क्यों हुआ\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खानपान की चर्चा इसलिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि वे बिना किसी विदेशी या आधुनिक डाइट ट्रेंड के पूरी तरह पारंपरिक भारतीय भोज्य पदार्थों पर निर्भर रहते हैं।\n\n• सादगी और उपलब्धता की पृष्ठभूमि: जीवन के शुरुआती वर्षों में व्यापक यात्राओं और सादगीपूर्ण जीवन के चलते उन्होंने हमेशा वही सात्विक भोजन स्वीकार किया जो सुलभ था। इसी अनुभव के कारण वे आज भी बिना किसी कठोर डाइट प्लान के साधारण शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देते हैं।\n• देसी सुपरफूड्स को बढ़ावा: सार्वजनिक मंचों से मखाना, सहजन, बाजरा और काले चावल जैसे उत्पादों का उल्लेख करके वे स्थानीय किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने का प्रयास करते हैं। इससे देश की पारंपरिक कृषि संपदा को वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिलती है।\n• पारंपरिक ज्ञान और पोषण का मेल: भाप में पके ढोकले, दही से बने श्रीखंड और दाल-चावल की खिचड़ी जैसे व्यंजन यह दर्शाते हैं कि भारतीय रसोई सदियों से पोषण संतुलन में सक्षम रही है। यह जीवनशैली आधुनिक व्यस्तता के बीच सुपाच्य और प्राकृतिक खानपान अपनाने की प्रेरणा देती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी खास सख्त डाइट प्लान का पालन करते हैं?\nनहीं, उन्होंने 2026 में 'परीक्षा पे चर्चा' के दौरान स्पष्ट किया था कि उनकी कोई तय डाइट नहीं है और वे सुलभ शाकाहारी भोजन ग्रहण करते हैं।\n\n2. नरेंद्र मोदी साल में कितने दिन मखाना खाते हैं?\nबिहार के भागलपुर में एक संबोधन के दौरान उन्होंने बताया था कि वे वर्ष में कम से कम 300 दिन मखाना खाते हैं।\n\n3. सहजन यानी मोरिंगा की पत्तियों का उपयोग किस तरह किया जाता है?\nनरेंद्र मोदी ने सहजन की पत्तियों से तैयार किए जाने वाले मोरिंगा पराठे के प्रति अपनी विशेष पसंद का उल्लेख किया था।\n\n4. काले चावल यानी ब्लैक राइस की क्या खासियत है?\nकाले चावल में एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो पाचन, हृदय स्वास्थ्य और ब्लड शुगर के संतुलन में सहायक माना जाता है।\n\n5. गुजराती ढोकला को सेहत के लिए हल्का विकल्प क्यों माना जाता है?\nबेसन से बनने वाला ढोकला भाप में पकाया जाता है और इसमें न्यूनतम तेल लगता है, जिससे यह तला-भुना स्नैक खाने से बेहतर विकल्प बनता है।\n\n6. भारतीय एवोकाडो को लेकर उन्होंने क्या जानकारी दी थी?\n2 सितंबर को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में उन्होंने बताया कि भारतीय एवोकाडो अब काफी लोकप्रिय हो रहा है और डाइनिंग टेबल पर जगह बना रहा है।",
  "url": "https://trendkia.com/trends/parnparika-desi-svada-aura-sadagi-para-tika-hai-narendra-modi-ka-khanapana-janie-kauna-se-vynjana-hain-unaki-dinacharya-ka-hissa-34297",
  "category": "ट्रेंड्स",
  "publishedAt": "2026-09-19",
  "tags": [
    "नरेंद्र मोदी",
    "खानपान",
    "मखाना",
    "मोरिंगा पराठा",
    "काले चावल",
    "गुजराती व्यंजन",
    "स्वस्थ आहार"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}