# रटने की पढ़ाई को पीछे छोड़ते ये पांच शिक्षक, जिन्होंने यूट्यूब पर बदल दी सीखने की परिभाषा

> दृष्टि आईएएस के डॉ. विकास दिव्यकीर्ति से लेकर फिजिक्स वाला के अलख पांडे तक, जानिए वे पांच शिक्षक कौन हैं जिन्होंने डिजिटल माध्यम से पढ़ाई करने और समझने का तरीका बदल दिया.

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/ratane-ki-parhai-ko-pichhe-chhorate-ye-pancha-shikshaka-jinhonne-yutyuba-para-badala-di-sikhane-ki-paribhasha-28051 · **Language:** Hindi
**Tags:** विकास दिव्यकीर्ति, एचसी वर्मा, खान सर, अलख पांडे, मणिकांत सिंह, फिजिक्स वाला, यूट्यूब शिक्षक, ऑनलाइन शिक्षा

इंटरनेट और यूट्यूब ने पिछले कुछ सालों में भारत में पढ़ाई करने और पढ़ाने, दोनों के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. कोचिंग सेंटर की चारदीवारी से निकलकर अब कई शिक्षक सीधे मोबाइल स्क्रीन के जरिए करोड़ों छात्रों तक पहुंच रहे हैं. इनमें से कुछ नाम ऐसे हैं जिन्होंने न सिर्फ अपने विषय को आसान बनाया, बल्कि छात्रों की सोचने और समझने की पूरी प्रक्रिया को ही बदल डाला. आइए जानते हैं ऐसे पांच शिक्षकों के बारे में जिन्होंने अपनी अलग शैली से डिजिटल दौर में पढ़ाई की नई परिभाषा गढ़ी.

## डॉ. विकास दिव्यकीर्ति: तर्क और गहराई से पढ़ाने वाले शिक्षक
दृष्टि आईएएस के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति को आज देश में किसी परिचय की जरूरत नहीं है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर चुके डॉ. दिव्यकीर्ति पहले सिविल सेवा में भी रह चुके हैं, लेकिन उनकी असली पहचान एक ऐसे शिक्षक की है जो सबसे कठिन विषय को भी गंभीर तर्क और ठहराव के साथ समझा देते हैं. वे इतिहास, राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र जैसे विषयों को किताबी दायरे से निकालकर आज के हालात से जोड़ते हैं, ताकि छात्र सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि विषय को सच में समझने के लिए पढ़ें. उनकी पढ़ाने की शैली छात्रों में रटने की आदत की जगह मौलिक सोच, गहरी समझ और निष्पक्ष नजरिया विकसित करती है, जिससे वे परीक्षा हॉल के बाहर भी आत्मविश्वास से आगे बढ़ पाते हैं. यही वजह है कि देश भर के प्रतियोगी परीक्षार्थी उन्हें केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक मानते हैं.

## प्रो. एचसी वर्मा: भौतिकी को आम जिंदगी से जोड़ने वाले वैज्ञानिक
भौतिकी की दुनिया में प्रोफेसर हरीश चंद्र वर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. आईआईटी कानपुर में लंबे समय तक पढ़ा चुके प्रो. वर्मा परंपरागत कोचिंग के तरीके से नहीं जुड़े, लेकिन यूट्यूब पर उनके व्याख्यान और पॉडकास्ट विज्ञान के छात्रों के लिए किसी मील के पत्थर से कम नहीं हैं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने भौतिकी को भारी-भरकम फॉर्मूलों की कैद से निकालकर साइकिल के पहिये या पंखे की रफ्तार जैसे रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाना शुरू किया. उनकी लिखी किताब कॉन्सेप्ट्स ऑफ फिजिक्स दशकों से आईआईटी-जेईई की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए लगभग किसी पवित्र ग्रंथ जैसा दर्जा रखती है. प्रो. वर्मा की शैली छात्र को रटाने के बजाय यह सोचने पर मजबूर करती है कि कोई घटना क्यों और कैसे घटती है, और यही सोच उन्हें विषय से डरने की बजाय उससे जुड़ाव महसूस कराती है. अपनी सादगी और विज्ञान को हर बच्चे तक पहुंचाने के जुनून की वजह से वे आज भी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं.

## मणिकांत सिंह: इतिहास और समाज को नए नजरिए से पढ़ाने वाले शिक्षक
स्टडी आईएएस के संस्थापक मणिकांत सिंह भले ही सोशल मीडिया रील्स में उतने चर्चित नाम न हों, लेकिन शिक्षक बिरादरी में उन्हें अक्सर गुरुओं का गुरु कहा जाता है. यूट्यूब पर उनके गहन विश्लेषण वाले लेक्चर को लाखों बार देखा जा चुका है. इतिहास की उनकी पकड़ और समाज को देखने की उनकी बारीक नजर ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है, और खुद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति भी उनकी इस विश्लेषणात्मक शैली की सराहना कर चुके हैं. मणिकांत सिंह का मानना है कि समाजशास्त्र को किसी एक तय ढांचे में बांधकर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि हर दौर और हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है. वे इतिहास को सिर्फ तारीखों की फेहरिस्त के तौर पर नहीं, बल्कि वर्तमान को समझने की एक खिड़की के तौर पर पढ़ाते हैं, ताकि छात्र भविष्य की दिशा को भी बेहतर ढंग से भांप सकें. उनकी यह दूरदर्शी शैली छात्रों में रटने की आदत खत्म कर एक स्वतंत्र और परिपक्व समझ विकसित करती है.

## खान सर: ठेठ अंदाज और हंसी-मजाक से पढ़ाई का डर मिटाने वाले शिक्षक
खान जीएस रिसर्च सेंटर के संस्थापक खान सर इन दिनों कुछ विवादों से भी घिरे रहे हैं, लेकिन हास्य और व्यंग्य की मदद से पढ़ाने का उनका अंदाज छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय है. देश के करोड़ों प्रतियोगी परीक्षार्थियों और युवाओं के बीच वे इसी अनोखी शैली की वजह से जाने जाते हैं. भूगोल, विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध जैसे जटिल विषयों को वे ठेठ देसी भाषा और रोजमर्रा के उदाहरणों में ढालकर चंद मिनटों में समझा देते हैं. खान सर की यही शैली छात्रों के मन से परीक्षा और असफलता का डर निकालकर उनमें विषय को गहराई से समझने की जिज्ञासा जगाती है, जिससे रटने के बजाय समझने की आदत विकसित होती है.

## अलख पांडे: कम फीस में बड़े सपनों को उड़ान देने वाले शिक्षक
फिजिक्स वाला कोचिंग संस्थान के संस्थापक अलख पांडे ने जेईई और नीट की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों के लिए शिक्षा को किफायती बनाकर इस क्षेत्र में लगभग एक क्रांति ला दी है. भौतिकी जैसे गणितीय और जटिल विषय को वे बेहद सरल, संवादात्मक और ऊर्जा से भरे अंदाज में पढ़ाते हैं, जिसमें किताबी फॉर्मूले व्यावहारिक उदाहरणों और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली बातचीत में बदल जाते हैं. अलख पांडे ने यह साबित किया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सिर्फ महंगे कोचिंग संस्थानों का ही हक नहीं है. देश के छोटे शहरों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले बच्चों को नाममात्र की फीस में विश्वस्तरीय पढ़ाई मुहैया कराकर उन्होंने लाखों छात्रों को अपने सपने पूरे करने और समय से आगे बढ़ने का हौसला दिया है.

## क्यों अहम है यह बदलाव
इन पांचों शिक्षकों की कहानी बताती है कि डिजिटल माध्यम ने पढ़ाई को सिर्फ आसान नहीं बनाया, बल्कि उसे लोकतांत्रिक भी बना दिया है. अब किसी बच्चे को सिर्फ इसलिए अच्छी पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ता कि वह किसी बड़े शहर में नहीं रहता या महंगी फीस नहीं भर सकता. चाहे इतिहास और राजनीति हो, भौतिकी हो या भूगोल, इन शिक्षकों ने अपने-अपने अंदाज में यह साबित किया है कि गंभीर विषय को भी सहज भाषा और तर्क के सहारे हर छात्र तक पहुंचाया जा सकता है.

## इसका आप पर असर
इन शिक्षकों की सफलता का सबसे बड़ा असर सीधे उन छात्रों पर पड़ता है जो महंगी कोचिंग नहीं ले सकते, क्योंकि अब गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई मोबाइल पर बेहद कम फीस या मुफ्त में उपलब्ध है.

- **छोटे शहरों के छात्रों को फायदा:** अलख पांडे जैसे शिक्षकों की वजह से जेईई और नीट की तैयारी अब छोटे शहरों और कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले बच्चों के लिए भी नाममात्र की फीस में संभव हो गई है. जिन परिवारों के लिए बड़े शहरों की कोचिंग फीस चुकाना मुश्किल था, वे अब घर बैठे यूट्यूब पर वैसी ही पढ़ाई पा सकते हैं.
- **यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए दिशा:** डॉ. विकास दिव्यकीर्ति और मणिकांत सिंह जैसे शिक्षकों के लेक्चर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वालों को इतिहास, राजनीति और समाजशास्त्र गहराई से समझने का मुफ्त जरिया देते हैं, जिससे महंगी टेस्ट सीरीज या नोट्स पर निर्भरता कम होती है.
- **विज्ञान से डर कम होगा:** प्रो. एचसी वर्मा की किताब और लेक्चर साइंस स्ट्रीम के छात्रों को भौतिकी रटने की बजाय समझने का तरीका सिखाते हैं, जिससे परीक्षा के साथ आगे की पढ़ाई में भी मदद मिलती है.
- **सरल भाषा में जटिल मुद्दे:** खान सर की शैली से उन छात्रों को फायदा होता है जिन्हें किताबी भाषा में भूगोल और अंतरराष्ट्रीय मामले समझने में दिक्कत होती है, क्योंकि वे यही विषय ठेठ हिंदी में आसानी से समझा देते हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. विकास दिव्यकीर्ति किस संस्थान के संस्थापक हैं?
वे दृष्टि आईएएस के संस्थापक हैं.

### 2. प्रो. एचसी वर्मा किस आईआईटी से जुड़े रहे हैं?
वे आईआईटी कानपुर के पूर्व प्रोफेसर रहे हैं.

### 3. प्रो. एचसी वर्मा की मशहूर किताब का नाम क्या है?
उनकी किताब का नाम कॉन्सेप्ट्स ऑफ फिजिक्स है, जो आईआईटी-जेईई अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय है.

### 4. मणिकांत सिंह किस कोचिंग संस्थान के संस्थापक हैं?
वे स्टडी आईएएस के संस्थापक हैं.

### 5. खान सर किस संस्थान से जुड़े हैं?
वे खान जीएस रिसर्च सेंटर के संस्थापक हैं.

### 6. अलख पांडे किस कोचिंग संस्थान के संस्थापक हैं और वे किन छात्रों को पढ़ाते हैं?
वे फिजिक्स वाला के संस्थापक हैं और जेईई-नीट की तैयारी करने वाले छात्रों को किफायती फीस में पढ़ाते हैं.

## प्रेरणा और सबक
- **विषय को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ें:** प्रो. एचसी वर्मा साइकिल के पहिये और पंखे जैसी आम चीजों से भौतिकी समझाते हैं, जो दिखाता है कि जटिल विषय भी सरल उदाहरणों से सिखाया जा सकता है.
- **भाषा को बाधा न बनने दें:** खान सर ने साबित किया कि ठेठ देसी भाषा में भी सबसे जटिल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दे समझाए जा सकते हैं.
- **सुलभता को प्राथमिकता दें:** अलख पांडे ने नाममात्र की फीस में विश्वस्तरीय शिक्षा देकर दिखाया कि गुणवत्ता और किफायत साथ चल सकते हैं.
- **गहराई से सोचने की आदत डालें:** मणिकांत सिंह और डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की शैली बताती है कि रटने की बजाय तर्क और विश्लेषण से पढ़ी गई बात लंबे समय तक याद रहती है.

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._