सर्दियों में बच्चों को ऐसे खिलाएं सरसों का साग, पालक-बथुआ और मक्के की रोटी से बनाएं परफेक्ट देसी थाली सर्दियों के मौसम में सरसों का साग और मक्के की रोटी का मेल हर किसी को पसंद आता है। बच्चों को इसका तीखापन कम लगे, इसके लिए पालक और बथुआ मिलाकर इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। ठंड के दिनों में गरमागरम सरसों का साग और मक्के की रोटी की महक घर के डाइनिंग टेबल पर आते ही सबका मन खुश कर जाता है। हालांकि बच्चों के मामले में माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि तीखे स्वाद वाला यह पारंपरिक व्यंजन बच्चों को भाएगा या नहीं। सरसों के पत्तों की तेज तासीर और तीखापन कई बार छोटे बच्चों को पहली बार में आकर्षित नहीं करता है। इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान यह है कि साग बनाते समय उसमें पालक, बथुआ और मेथी के पत्तों को संतुलित मात्रा में मिला दिया जाए। ऊपर से मक्खन की एक परत और साथ में बाजरे या मक्के की ताजी गरम रोटी इस भोजन को एक संपूर्ण और लजीज देसी दावत में बदल देती है। जब इसे सही विधि से पकाया जाता है, तो यह साधारण दोपहर या रात के भोजन को भी किसी उत्सव जैसा खास बना देता है। साग के लिए सही पत्तों का चुनाव और तैयारी एक स्वादिष्ट और पौष्टिक साग तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजी सरसों, पालक, बथुआ और मेथी की हरी पत्तियां बाजार से चुनकर लानी चाहिए। इन सभी साग के पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना बहुत जरूरी है ताकि उनमें जमी धूल और मिट्टी पूरी तरह निकल जाए। धोने के बाद इनके मोटे डंठल अलग कर लें और पत्तियों को बारीक टुकड़ों में काट लें। केवल सरसों से भी यह व्यंजन तैयार किया जा सकता है, लेकिन पालक और बथुआ मिलाने से इसकी बनावट में एक खास नरमी और मलाईदारपन आ जाता है। वहीं मेथी के इस्तेमाल से इसमें एक बेहतरीन खुशबू और हल्का कसैलापन जुड़ता है जो स्वाद को संतुलित करता है। बच्चों के लिए बनाते समय सरसों के अनुपात को थोड़ा कम रखा जा सकता है और पालक की मात्रा बढ़ाई जा सकती है ताकि इसका तीखापन कम हो जाए। कुकर में उबालने और मथने की प्रक्रिया कटे हुए पत्तों को प्रेशर कुकर में डालें और उसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी तथा नमक मिला लें। कुकर को अच्छी तरह बंद करके मध्यम आंच पर दो से तीन सीटियों तक पकने दें। इसके बाद गैस की आंच बंद कर दें और कुकर का दबाव अपने आप बाहर आने दें। जब पत्ते पूरी तरह नरम हो जाएं, तो पारंपरिक मथनी या लकड़ी के मैशर की सहायता से इसे हल्का सा घोट लें। इस मिश्रण को मिक्सी में पीसकर पूरी तरह बारीक पेस्ट बनाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। हल्की खुरदरी और मोटी बनावट रहने पर साग का असली घरेलू स्वाद और आनंद बरकरार रहता है. तड़का लगाने और मसालों का इस्तेमाल एक अलग कढ़ाई में शुद्ध देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा, सूखी लाल मिर्च, बारीक कटी हरी मिर्च, कुटा हुआ अदरक-लहसुन और चुटकी भर हींग का छौंक लगाएं। जब मसालों से सोंधी महक आने लगे, तो उसमें बारीक कटा हुआ प्याज और टमाटर डालकर अच्छी तरह भून लें। इसके बाद कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और थोड़ा सा धनिया पाउडर मिलाएं। जब मसाला पूरी तरह पक जाए और घी किनारों से अलग दिखने लगे, तो इसमें उबला हुआ साग उड़ेल दें। अब इस पूरे मिश्रण को धीमी आंच पर दस से बारह मिनट तक पकने दें। साग को अधिक गाढ़ा और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें मक्के का आटा मिलाया जा सकता है, जिसे गांठें बनने से रोकने के लिए धीरे-धीरे छिड़कना चाहिए। धीमी आंच पर पकने से मसालों का स्वाद गहराई तक समा जाता है और अंत में ऊपर से थोड़ा मक्खन डालकर इसे परोसा जाता है। बच्चों की पसंद के अनुसार बदलाव यदि घर के छोटे बच्चे सरसों के तीखेपन या कड़वे स्वाद से कतराते हैं, तो पालक और बथुआ की मात्रा में इजाफा करना सबसे कारगर उपाय है। छौंक लगाते समय हरी मिर्च की संख्या कम रखें और परोसते वक्त ऊपर से बटर या मक्खन जरूर डालें। इसके साथ मक्के की गरमागरम नरम रोटियां और थोड़ा सा ताजा दही रखने से यह थाली बच्चों को बहुत आकर्षित करती है। मुलायम मक्के की रोटी बनाने की विधि मक्के का आटा ग गूंथते समय अक्सर लोगों को इसे संभालने में परेशानी का सामना करना पड़ता है क्योंकि यह गेहूं के आटे की तरह लचीला और खिंचाव वाला नहीं होता है। इसके लिए एक गहरे बर्तन में मक्के का आटा और नमक लें और गुनगुने पानी की मदद से इसे धीरे-धीरे गूंधकर एक नरम डो तैयार करें। आटे की छोटी-छोटी लोई बनाकर उसे दो बटर पेपर शीट के बीच में रखें। अब हथेली से हल्का थपथपाते हुए या बेलन की सहायता से इसे गोल आकार में बेल लें। तैयार हुई रोटी को सावधानी से गरम तवे पर डालें और दोनों तरफ से अच्छी तरह सेक लें। यदि पारंपरिक मिट्टी के तवे का इस्तेमाल किया जाए तो इसकी खुशबू और सोंधापन कई गुना बढ़ जाता है, और चाहें तो अंत में इसे खुली आंच पर भी सेंक सकते हैं। इसका आप पर असर सर्दियों के इस पारंपरिक व्यंजन को घर पर तैयार करने से आपके मासिक घरेलू बजट पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ता है क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली हरी सब्जियां स्थानीय बाजारों में किफायती दामों पर मिलती हैं। • सामग्री की लागत: सर्दियों के सीजन में ताजी सरसों, पालक और बथुआ स्थानीय मंडियों में बेहद कम दामों पर उपलब्ध होते हैं, जिससे यह भोजन हर परिवार के बजट में आसानी से फिट बैठता है। • पारिवारिक पोषण: हरी पत्तेदार सब्जियों से भरपूर यह पारंपरिक थाली बच्चों और बड़ों दोनों को सर्दियों के मौसम में आवश्यक आयरन, विटामिन और ऊर्जा प्रदान करती है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के महीनों में सरसों, पालक और बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों की बंपर पैदावार होती है, जिसके कारण पारंपरिक रूप से इस मौसम में इस व्यंजन को खाने का चलन सदियों से चला आ रहा है। • मौसमी उपलब्धता: ठंड के मौसम में प्रकृति हरी पत्तेदार सब्जियों की बंपर फसल देती है, जो शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करती हैं। • पारंपरिक स्वाद का मेल: मक्के की तासीर गर्म होती है और तीखे सरसों के साग के साथ इसका मेल पाचन के लिहाज से भी सर्दियों में बेहद उपयुक्त माना जाता है। सवाल-जवाब 1. सरसों के साग का तीखापन बच्चों के लिए कैसे कम करें? साग में सरसों की मात्रा थोड़ी कम करके पालक और बथुआ की मात्रा बढ़ा दें, जिससे इसका तीखापन कम हो जाता है। 2. मक्के का आटा गूंथते समय किस तरह के पानी का इस्तेमाल करना चाहिए? मक्के का आटा गूंथने के लिए हमेशा गुनगुने पानी का उपयोग करना चाहिए ताकि यह आसानी से बंध जाए। 3. क्या मक्के की रोटी बेलते समय बटर पेपर का उपयोग किया जा सकता है? हां, दो बटर पेपर शीट के बीच लोि रखकर बेलने से मक्के की रोटी आसानी से गोल आकार में तैयार हो जाती है। 4. साग को स्वादिष्ट बनाने के लिए अंत में क्या मिलाया जाता है? साग को अधिक स्वादिष्ट और गाढ़ा बनाने के लिए अंत में थोड़ा सा मक्के का आटा और ऊपर से मक्खन मिलाया जाता है। https://trendkia.com/trends/sardiyon-men-bachchon-ko-aise-khilaen-sarson-ka-saag-palaka-bathua-aura-makki-ki-roti-se-banaen-paraphekta-desi-thali-39028 TrendKia — Har trend, sabse pehle.