# सोनिया गांधी की किताब में अरहर दाल का जिक्र, घर पर ऐसे तैयार करें देसी घी और लहसुन के तड़के वाली स्वादिष्ट रेसिपी

> सोनिया गांधी की आने वाली किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ में पारिवारिक खानपान की यादों के बीच अरहर दाल का जिक्र किया गया है। घर पर इस सरल और पौष्टिक दाल को आसानी से कैसे तैयार किया जा सकता है, आइए इसकी पूरी विधि जानते हैं।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-11-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/sonia-gandhi-ki-kitaba-men-arhar-dal-ka-jikra-ghara-para-aise-taiyara-karen-desi-ghi-aura-lahasuna-ke-tarake-vali-svadishta-recipe-57623 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोनिया गांधी, अरहर दाल, दाल रेसिपी, होम मेड रेसिपी, भारतीय भोजन, किताब, पारंपरिक खाना

कुछ व्यंजन अपने अनोखे मसालों के लिए जाने जाते हैं, तो कुछ रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा बनकर जिंदगी से गहराई से जुड़ जाते हैं। अरहर की दाल भी ऐसा ही एक भोजन है, जिसे चाहे चावल के साथ खाएं या फिर गर्म फुल्के के साथ, इसका सादा और सधा हुआ स्वाद पूरे खाने को अपना बना लेता है। सोनिया गांधी की आगामी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ से सामने आई खानपान की यादों में इस दाल का भी विशेष उल्लेख मिलता है। प्रकाशक द्वारा साझा की गई कुछ खास झलकियों के अनुसार, परिवार के खाने में चावल, फुल्के, विभिन्न सब्जियों के साथ-साथ मटन, मछली या चिकन के साथ अरहर की दाल हर दिन शामिल होती थी। इसी घरेलू और पारंपरिक स्वाद को अपनी रसोई में दोबारा उतारने के लिए किसी भी तरह की जटिल सामग्री या भारी मसालों की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

यदि दाल बिल्कुल सही तरीके से गल जाए और उसके ऊपर शुद्ध घी, जीरा और लहसुन का बढ़िया तड़का लगा दिया जाए, तो एक बेहद साधारण खाना भी किसी शाही दावत से कम स्वादिष्ट नहीं बनता है। यहाँ नीचे एक बहुत ही सरल घरेलू तरीका दिया जा रहा है जिसकी मदद से आप आसानी से अरहर दाल बना सकते हैं, और इसे अपने परिवार की पसंद या स्वाद के अनुसार थोड़ा बहुत बदल भी सकते हैं।

## किताब में खाने की यादें और घरेलू रसोई का नाता
किताब से जुड़ी शुरुआती खबरों में सोनिया गांधी के भारतीय खानपान और व्यंजनों से पहली बार परिचय का भी जिक्र किया गया है। राजीव गांधी के साथ रहते हुए उन्होंने शुरुआती दौर के भारतीय व्यंजनों में तंदूरी चिकन का स्वाद चखा था। समय बीतने के साथ-साथ उनके जीवन में परिवार की रोज की साधारण थाली भी एक अहम हिस्सा बन गई। हालांकि, सामने आए शुरुआती अंशों में अरहर दाल की पूरी सामग्री या उसे पकाने की विस्तृत विधि नहीं दी गई है। इसलिए इस घरेलू रेसिपी को सीधे तौर पर सोनिया गांधी की अपनी गुप्त रेसिपी नहीं कहा जा सकता है, बल्कि इसे किताब में दिए गए दाल के उस खास संदर्भ से जोड़कर घर पर ही आसानी से तैयार किया जा सकता है।

## चार लोगों के लिए आवश्यक सामग्री की सूची
करीब चार सदस्यों वाले परिवार के लिए लगभग एक कप अरहर दाल लें, जिसे आम बोलचाल में तुअर दाल भी कहा जाता है। इसके साथ ही एक मध्यम आकार का टमाटर, चार से पांच लहसुन की कलियां, आधा इंच अदरक का टुकड़ा और एक हरी मिर्च पास में रखें। मसालों के रूप में आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, एक छोटा चम्मच जीरा, स्वादानुसार नमक और थोड़ी सी लाल मिर्च की जरूरत होगी। तड़का लगाने के लिए एक से दो बड़े चम्मच शुद्ध घी ले सकते हैं। आखिर में गार्निशिंग के लिए थोड़ा सा ताजा हरा धनिया अलग रख लें। यदि आप लहसुन का सेवन नहीं करते हैं, तो उसे पूरी तरह छोड़कर केवल जीरे और चुटकी भर हींग का सौम्य तड़का भी लगाया जा सकता है।

## दाल पकाने की शुरुआती तैयारी
सबसे पहले अरहर दाल को अच्छी तरह बीन लें ताकि उसमें कोई कंकड़ न रहे, और फिर साफ पानी से इसे दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे लगभग 20 से 30 मिनट के लिए पानी में भिगोकर रख देना बेहतर रहता है। ऐसा करने से दाल को उबालने और पकने में बहुत आसानी हो जाती है। यदि आप इसे भिगोना भूल भी गए हैं, तब भी दाल को सीधे बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में पकने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है। अच्छी तरह धोने के बाद इसका सारा अतिरिक्त पानी निकाल दें। इसी बीच टमाटर को बारीक टुकड़ों में काट लें, अदरक को कद्दूकस कर लें और लहसुन की कलियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर पूरी तैयारी के साथ पास रख लें।

## प्रेशर कुकर में दाल को अच्छी तरह से गलाएं
अब कुकर में धुली हुई दाल डालें और शुरुआत के लिए लगभग तीन कप पानी मिला दें। पानी की यह मात्रा आपके कुकर के आकार और दाल की प्रवृत्ति के हिसाब से थोड़ी बहुत बदल सकती है। इसमें थोड़ी सी हल्दी और स्वादानुसार नमक डालकर कुकर का ढक्कन अच्छी तरह बंद कर दें। कुकर की क्षमता और उसकी सुरक्षा के सभी निर्देशों का पूरा ध्यान रखते हुए इसे पकाएं। केवल तय की गई सीटियों की गिनती करके ही दाल तैयार हो गई है ऐसा न मान लें। गैस बंद करने के बाद कुकर का प्रेशर अपने आप पूरी तरह निकलने दें। ढक्कन खोलकर दाल को कछी से दबाकर देखें, यदि वह आसानी से मसल जाती है तो इसका मतलब है कि दाल पूरी तरह पक चुकी है। यदि वह अभी भी सख्त महसूस हो, तो जरूरत के अनुसार थोड़ा गर्म पानी और मिलाकर इसे थोड़ी देर और पका सकते हैं।

## दाल की बनावट और तड़के की तैयारी
पकी हुई दाल को कलछी की मदद से थोड़ा सा हल्का मसल लें। पूरी दाल का एकदम चिकना पेस्ट बना देना बिल्कुल जरूरी नहीं है। जब दाल के कुछ दाने आपस में घुल जाते हैं तो उसका गाढ़ापन और टेक्सचर बहुत अच्छा आता है। अगर आप इसे चावल के साथ खाने की योजना बना रहे हैं, तो इसमें थोड़ा और गर्म पानी मिलाकर इसकी बहने वाली बनावट रख सकते हैं। वहीं, रोटी या फुल्के के साथ परोसने के लिए थोड़ी गाढ़ी दाल भी काफी अच्छी लगती है। पानी मिलाने के बाद इसे एक बार दोबारा हल्का सा उबाल जरूर दें, ताकि सारे स्वाद एक जैसे मिल जाएं। इसी समय आप नमक को भी दोबारा जांच सकते हैं।

## सुगंधित घी और लहसुन का तड़का लगाएं
एक छोटी कड़ाही या पैन में शुद्ध घी गर्म करें। उसमें जीरा डालें और उसे अच्छी तरह चटकने दें। इसके बाद कटे हुए लहसुन को मिलाकर हल्की आंच पर सुनहरा होने तक भूनें। यदि आंच बहुत तेज होगी तो लहसुन बहुत जल्दी जल सकता है और उसका स्वाद कड़वा हो जाएगा, इसलिए तड़का बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें। अब इसमें कटे हुए टमाटर डालें और उनके नरम होने तक पकाएं। यदि टमाटर के टुकड़े बहुत बड़े रहेंगे तो वे दाल में अच्छी तरह घुलेंगे नहीं। जब टमाटर पूरी तरह नरम हो जाएं तब थोड़ी सी लाल मिर्च डालें और तुरंत ही अपनी पकी हुई दाल को इसमें उड़ेल दें। मसाले को खाली गर्म कड़ाही में बहुत देर तक बिल्कुल न छोड़ें।

## धीमी आंच पर दाल को अच्छी तरह पकाएं
कड़ाही में मौजूद सभी चीजों को आपस में अच्छी तरह मिला लें और धीमी आंच पर लगभग पांच से सात मिनट तक पकने दें। बीच-बीच में इसे लगातार चलाते रहें, खासकर तब जब दाल थोड़ी गाढ़ी होने लगे। यदि आपको जरूरत महसूस हो तो थोड़ा सा गर्म पानी और मिला सकते हैं। दाल को इन मसालों के साथ कुछ देर तक धीमी आंच पर उबलने देने से तड़के की सौंधी खुशबू और उसका पूरा स्वाद दाल के अंदर तक अच्छी तरह रच-बस जाता है।

## अपने घर की पसंद के अनुसार स्वाद में करें बदलाव
यदि आपको दाल में हल्का सा खट्टापन पसंद है, तो गैस बंद करने के बाद इसमें ऊपर से थोड़ा सा नींबू का रस मिलाया जा सकता है। अगर आपके इस्तेमाल किए जा रहे टमाटर पहले से ही काफी खट्टे हैं, तो अलग से नींबू डालने की कोई आवश्यकता नहीं है। बच्चों के लिए बनाते समय हरी मिर्च को हटा दें और लाल मिर्च की मात्रा भी कम ही रखें। जिन लोगों को प्याज का स्वाद पसंद है, वे तड़का लगाते समय उसमें एक छोटा बारीक कटा हुआ प्याज भी भून सकते हैं। हालांकि, केवल साधारण जीरे और लहसुन के मेल से भी यह दाल बहुत स्वादिष्ट बनती है। बहुत सारे बाहरी मसाले मिलाने के बजाय दाल के अपने मूल प्राकृतिक स्वाद को ही बनाए रखना सबसे अच्छा रहता है।

## गरमागरम परोसने का सही तरीका
गैस की आंच पूरी तरह बंद करने के बाद इसके ऊपर से बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया छिड़क दें। अब इस तैयार अरहर दाल को गरमागरम चावल, फुल्के या फिर जीरा चावल के साथ प्लेट में परोसें। इसके साथ खाने के लिए कोई भी मनपसंद मौसमी सब्जी और अपनी पसंद का कोई बढ़िया सा अचार रख सकते हैं। परोसने के समय तक यदि दाल कुछ ज्यादा ही गाढ़ी हो गई हो, तो उसमें थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर उसे दोबारा गर्म कर लें। घी की मात्रा आप अपनी व्यक्तिगत पसंद के अनुसार कम या ज्यादा रख सकते हैं। रोजमर्रा की इस साधारण सी दाल में अच्छी नरमी, संतुलित नमक और सही समय पर लगा तड़का ही इसके असली स्वाद को बाहर लाने के लिए पूरी तरह काफी होता है।

## इसका आप पर असर
पारंपरिक और घरेलू खानपान से जुड़ी यह जानकारी पाठकों को अपने दैनिक भोजन में सरल और पौष्टिक विकल्पों को अपनाने की प्रेरणा देती है।

- **दैनिक खानपान:** **यह पाठकों को घर पर आसानी से उपलब्ध सामग्री से संतुलित और पौष्टिक भोजन तैयार करने में मदद करता है।** इससे रोजमर्रा के भोजन में पारंपरिक स्वाद बनाए रखना आसान होता है।
- **स्वास्थ्य लाभ:** **अरहर दाल प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत मानी जाती है।** इसे नियमित आहार में शामिल करने से शरीर को जरूरी पोषण और ऊर्जा मिलती है।
- **खाना बनाने का तरीका:** **तड़के और पकाने की सही विधि से साधारण दाल का स्वाद भी काफी बढ़ जाता है।** इससे बिना किसी महंगे या जटिल मसाले के स्वादिष्ट भोजन तैयार किया जा सकता है।
- **पारिवारिक परंपरा:** **पारिवारिक व्यंजनों से जुड़ी यादें लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ती हैं।** यह सादा खाना घर के सभी सदस्यों के लिए स्वास्थ्यवर्धक और पचने में आसान होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक व्यंजनों और घरेलू खानपान से जुड़ी यादों को आत्मकथाओं में स्थान मिलने के पीछे पाठकों की निजी जीवन शैली और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना होती है। प्रसिद्ध हस्तियों के दैनिक जीवन से जुड़ी छोटी बातें हमेशा लोगों में जिज्ञासा पैदा करती हैं।

- **सांस्कृतिक जुड़ाव:** **पारिवारिक भोजन और पुरानी यादें पाठकों को उनके अपने अतीत से जोड़ती हैं।** यह दिखाता है कि सादा खाना कैसे जीवन का अहम हिस्सा बनता है।
- **किताबों का संदर्भ:** **आत्मकथाओं में इस तरह के व्यक्तिगत संस्मरण पाठकों को उनके जीवन के अनछुए पहलुओं से अवगत कराते हैं।** इससे सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों के निजी खानपान की झलक मिलती है।
- **घरेलू व्यंजनों का आकर्षण:** **साधारण दाल और तड़के जैसी चीजें हर भारतीय घर की पहचान होती हैं।** यही कारण है कि इस तरह की घरेलू रेसिपी पाठकों के बीच तुरंत लोकप्रिय हो जाती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सोनिया गांधी की किस किताब में खाने की यादों का जिक्र है?
उनकी आने वाली किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ में खानपान की यादों का जिक्र किया गया है।

### 2. परिवार के भोजन में कौन सी दाल रोज शामिल होती थी?
परिवार के नियमित भोजन में अरहर की दाल रोज शामिल होती थी।

### 3. चार लोगों के लिए कितनी अरहर दाल की आवश्यकता होती है?
लगभग चार लोगों के लिए एक कप अरहर दाल की जरूरत होती है।

### 4. दाल में तड़के के लिए किन चीजों का उपयोग किया जाता है?
तड़के के लिए शुद्ध घी, जीरा, लहसुन, अदरक, हरी मिर्च और टमाटर का उपयोग किया जाता है।

### 5. क्या इस रेसिपी में लहसुन को छोड़ा जा सकता है?
हाँ, यदि आप लहसुन नहीं खाते हैं तो इसे छोड़कर केवल जीरे और हींग का तड़का लगा सकते हैं।

### 6. पकाने से पहले दाल को कितने समय तक भिगोना चाहिए?
दाल को पकाने से पहले लगभग 20 से 30 मिनट तक पानी में भिगोकर रखना मददगार होता है।

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