ठंड के मौसम में घर में गीले कपड़े सुखाने के सुरक्षित उपाय और फंगस से बचाव सर्दियों में खिली धूप न निकलने पर बंद कमरों में कपड़े सुखाने से नमी और सीलन बढ़ जाती है, जिससे दीवारों पर फंगस का खतरा पनपता है। सही वेंटिलेशन और कुछ बुनियादी सावधानियों से घर के भीतर भी बिना परेशानी कपड़े सुखाए जा सकते हैं। सर्दियों के दिनों में रोजमर्रा के कपड़े धोना जितना बड़ा काम लगता है, उससे कहीं अधिक चुनौती उन्हें पूरी तरह सुखाने में आती है। कड़ाके की ठंड में कई बार सुबह से शाम तक घना कोहरा छाया रहता है, आसमान में बादलों का डेरा बना रहता है या फिर घरों की बालकनी तक सूरज की किरणें पहुंच ही नहीं पाती हैं। ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग कपड़ों के स्टैंड को उठाकर सीधे कमरे के अंदर रख लेते हैं। यह तरीका बेहद सुविधाजनक और आसान तो जान पड़ता है, लेकिन अगर कमरा चारों तरफ से पूरी तरह बंद हो और उसमें हवा के निकास का कोई साधन न हो, तो गीले कपड़ों से वाष्पीकृत होने वाला पानी कमरे की हवा में लगातार जमा होने लगता है। बंद वातावरण में इस तरह नमी का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है, जिसके कारण ठंडी खिड़कियों के शीशों और बाहरी दीवारों पर पानी की महीन बूंदें टपकने लगती हैं। यदि यह स्थिति कई दिनों तक बनी रहे, तो कमरे के कोनों और दीवारों पर फंगस यानी फफूंद पनपने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो जाता है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि कमरे के अंदर कपड़े सुखाने पर फंगस लगेगी ही। असल मुद्दा यह है कि कपड़ों से जो नमी निकल रही है, उसे बाहर निकालने की क्या व्यवस्था है और आपका कमरा कितना हवादार है। थोड़ी सी व्यावहारिक समझ, कपड़े टांगने का सही सलीका और घर के भीतर नमी के स्तर की नियमित निगरानी से बिना सीधी धूप के भी कपड़े पूरी सुरक्षा के साथ सुखाए जा सकते हैं। कपड़ों का पानी आखिर कहां चला जाता है जब भी गीले कपड़े सूखने की प्रक्रिया से गुजरते हैं, तो उनके रेशों में फंसा पानी भाप बनकर आसपास की हवा में मिल जाता है। अगर कपड़े खुले आंगन या खुली छत पर फैलाए जाएं, तो यह प्राकृतिक नमी बहती हवा के साथ आसानी से वायुमंडल में बिखर जाती है। इसके विपरीत, किसी बंद कमरे में इस अतिरिक्त नमी के बाहर निकलने के लिए कोई प्राकृतिक निकास उपलब्ध नहीं होता। सर्दियों के मौसम में मकान की बाहरी दीवारें और कांच की खिड़कियां तापमान गिरने से काफी ठंडी हो जाती हैं। कमरे में तैरती गर्म और नम हवा जब इन बर्फीली और ठंडी सतहों से टकराती है, तो वह वापस संघनित होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है। विज्ञान की भाषा में इस भौतिक प्रक्रिया को कंडेनसेशन कहा जाता है। खिड़कियों के कांच पर बार-बार पानी की बूंदें टपकना या दीवारों के कोनों का लगातार भीगा रहना इस बात का साफ इशारा है कि उस कमरे में अतिरिक्त नमी को बाहर निकालने की व्यवस्था में तुरंत सुधार करने की सख्त जरूरत है। घर में फंगस पनपने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर कमरे की सीलन भरी जगहों पर उगने वाली काली या हरी फंगस हवा में अपने बारीक कण छोड़ती है। इन सूक्ष्म कणों के संपर्क में आने से कई व्यक्तियों में नाक बंद होना, लगातार छींकें आना, सूखी खांसी, आंखों में तेज जलन या सांस लेते समय घरघराहट जैसी शारीरिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा की शिकायत है या जिन्हें फंगस और मोल्ड से एलर्जी होती है, वे इस नम वातावरण के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं और उनकी तकलीफ बढ़ सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर इन परिस्थितियों पर अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देता है और हर किसी पर इसका एक समान बुरा असर नहीं पड़ता। केवल कमरे में गीले कपड़े टंगे होने से यह निष्कर्ष निकाल लेना बिल्कुल गलत होगा कि किसी व्यक्ति को तुरंत कोई गंभीर संक्रमण हो ही जाएगा। मूल प्राथमिकता हमेशा कमरे में लगातार टिकने वाली नमी को खत्म करने और नजर आ रही फंगस को पनपने से रोकने पर होनी चाहिए। अगर घर में किसी सदस्य को सांस लेने में लगातार परेशानी महसूस हो या लक्षण बिगड़ने लगें, तो बिना किसी देरी के योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। फैलाने से पूर्व कपड़ों से अतिरिक्त पानी कैसे निचोड़ें कपड़ों को स्टैंड पर टांगने से पहले यदि उनमें से पानी की मात्रा घटा दी जाए, तो उन्हें सुखाने का काम आधा रह जाता है। अगर आप कपड़ों की धुलाई के लिए वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो मशीन से कपड़े बाहर निकालने से पहले उन पर लगे केयर लेबल के निर्देशों के अनुसार स्पिन साइकिल का सही प्रयोग करें। यदि कपड़े का फैब्रिक इजाजत देता है, तो एक अतिरिक्त स्पिन चक्र चलाकर रेशों में बचा हुआ अतिरिक्त पानी भी आसानी से निकाला जा सकता है। हालांकि, ऊनी स्वेटर, शॉल या नाजुक रेशमी कपड़ों पर तेज स्पिन चलाने से पहले उनके टैग पर लिखे नियम जरूर देख लें, ताकि उनकी बनावट खराब न हो। इसी तरह, जो कपड़े हाथों से बाल्टी में धोए जाते हैं, उन्हें सीधे पानी टपकती हालत में कभी भी इनडोर स्टैंड पर न डालें। कपड़ों को जोर से मरोड़ने और ऐंठने के बजाय, फैब्रिक की मजबूती को ध्यान में रखते हुए हल्के और संतुलित हाथों से दबाकर अतिरिक्त पानी निकाल लें। स्टैंड पर कपड़े फैलाते समय रखें पर्याप्त दूरी अक्सर लोग एक ही ड्राइंग स्टैंड पर ढेर सारे कपड़े एक के ऊपर एक ठूंसकर फैला देते हैं। स्टैंड पर बहुत ज्यादा कपड़े भर देने से उनके बीच से हवा की आवाजाही पूरी तरह रुक जाती है, जिससे कपड़े घंटों तक नम बने रहते हैं। इसलिए कपड़ों को हमेशा थोड़ी दूरी बनाकर फैलाएं और उन्हें जितना मुमकिन हो, पूरा खोलकर डालें। अपनी औपचारिक शर्ट और टीशर्ट को सीधे हैंगर पर टांगकर स्टैंड की रॉड पर लटकाया जा सकता है, जिससे वे कम जगह घेरते हैं और हवा भी चारों तरफ से लगती है। भारी पैंट, जींस और मोटे कपड़ों को सूखने के लिए पर्याप्त खुली जगह दें। सुखाने के दौरान जेबों के अंदरूनी हिस्से, कॉलर और मोटी सिलाई वाली जगहों को बीच-बीच में पलटकर जांचते रहें, क्योंकि यही हिस्से सबसे देर से सूखते हैं। एक ही दिन में कपड़ों का पहाड़ धोने के बजाय, अपने कमरे और स्टैंड की सुखाने की वास्तविक क्षमता के अनुसार ही कपड़े धोना समझदारी भरा कदम है। कपड़े सुखाने के लिए सही कमरे का चयन गीले कपड़ों को सुखाने के लिए घर का ऐसा कमरा चुनना चाहिए जहां से नमी को सीधे बाहर धकेला जा सके। ऐसा कमरा सबसे मुफीद होता है जिसमें बाहर की ओर खुलने वाली खिड़की हो या फिर दीवार पर हवा बाहर फेंकने वाला एग्जॉस्ट लगा हो। यदि आपके बाथरूम में पर्याप्त जगह है और वहां का एग्जॉस्ट सही ढंग से काम कर रहा है, तो कपड़ों के स्टैंड को वहां भी आसानी से रखा जा सकता है। कपड़े सुखाते समय उस खास कमरे का दरवाजा बंद रखने से फायदा यह होता है कि वहां पैदा होने वाली भारी नमी घर के बाकी कमरों और बेडरूम में नहीं फैलती। लेकिन केवल दरवाजा बंद कर देना ही काफी नहीं है, कमरे की खिड़की को हल्का खुला रखना या एग्जॉस्ट पंखा चलाकर नमी को बाहर निकालना अनिवार्य है। जिस कमरे में पहले से ही सीलन की बदबू आती हो या जिसकी खिड़कियां दिन-रात भीगी रहती हों, वहां कभी भी गीले कपड़े सुखाने की गलती न करें। पंखे का सही इस्तेमाल और डीह्यूमिडिफायर की भूमिका हल्की गति से चलने वाला पंखा कपड़ों के आसपास जमा ठंडी और नम हवा के आवरण को हटाने में बड़ी मदद करता है। इसके लिए कपड़ों के स्टैंड से सुरक्षित फासले पर एक स्टैंड फैन या सीलिंग फैन धीमी गति पर चलाना उपयोगी सिद्ध होता है। लेकिन इस बात को अच्छी तरह समझ लें कि पंखा केवल कमरे की मौजूदा हवा को चारों तरफ घुमाता है, वह हवा में तैर रहे पानी को अपने आप बाहर नहीं निकाल सकता। इसलिए पंखा चलाते समय खिड़की या एग्जॉस्ट के जरिए हवा के बाहर निकलने का खुला रास्ता होना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, जिन घरों में पोर्टेबल डीह्यूमिडिफायर मौजूद है, वे निर्माता के निर्देशों के अनुसार उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। यह उपकरण कमरे की हवा को खींचकर उसमें घुली अतिरिक्त नमी को सोख लेता है और वातावरण को सूखा बनाता है। ध्यान रहे कि इसे किसी सामान्य एयर प्यूरीफायर जैसा बिल्कुल न समझें, क्योंकि बाजार में मिलने वाले हर एयर प्यूरीफायर में हवा से नमी घटाने का सिस्टम नहीं होता। घर के अंदर नमी का आदर्श स्तर कितना होना चाहिए कमरे के वातावरण में नमी की वास्तविक स्थिति का सटीक पता लगाने के लिए हाइग्रोमीटर नाम का एक छोटा डिजिटल या एनालॉग मीटर इस्तेमाल किया जा सकता है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी यानी ईपीए के तय मानकों के मुताबिक, घर के भीतर की नमी का स्तर 30 से 50 प्रतिशत के बीच बनाए रखना चाहिए और इसे किसी भी सूरत में 60 प्रतिशत से ऊपर नहीं जाने देना चाहिए। यदि इनडोर कपड़े सुखाते समय कमरे का हाइग्रोमीटर 60 प्रतिशत से ऊपर की रीडिंग दिखाने लगे, तो तुरंत खिड़कियां खोलकर वेंटिलेशन बढ़ाएं या नमी सोखने के अन्य उपाय अमल में लाएं। इसके साथ ही, कमरे की खिड़कियों और दीवारों पर जमा होने वाली पानी की बूंदों को सूखे सूती कपड़े से पोंछकर सतहों को सूखा बनाए रखें। केवल मनमाने अंदाज लगाने के बजाय हाइग्रोमीटर की मदद से कमरे के सही हालात को समझना बहुत आसान हो जाता है। पोर्टेबल रूम हीटर पर कपड़े सुखाने की भूल न करें सर्दियों में गीले कपड़ों को जल्दी सुखाने की जल्दबाजी में कई लोग उन्हें सीधे पोर्टेबल हीटर की जाली पर रख देते हैं या हीटर के बेहद करीब टांग देते हैं। ऐसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि इससे आग लगने का भारी जोखिम पैदा होता है। अपने कपड़ों, खिड़की के पर्दों और ड्राइंग स्टैंड को किसी भी हीटर से हमेशा एक सुरक्षित और उचित दूरी पर ही रखें। हीटर का इस्तेमाल करते समय उसके डिब्बे पर लिखे सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें। अगर आप घर में कपड़े सुखाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया कोई हीटिंग उपकरण इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसमें भी तय की गई अधिकतम सीमा से अधिक कपड़े न ठूंसें। सामान्य रूम हीटर का उपयोग कभी भी कपड़े सुखाने वाले ड्रायर की तरह नहीं किया जाना चाहिए। दीवारों पर फंगस लौटने के बुनियादी कारणों की पहचान यदि आपके कमरे की दीवारों पर काले या हरे रंग के चकत्ते दिखने लगें, कमरे में लगातार सीलन की दुर्गंध बनी रहे या सतहें बार-बार गीली होने लगें, तो इसके लिए सिर्फ इनडोर कपड़े सुखाने की आदत को ही एकमात्र कारण न मानें। कई बार छत में पानी का रिसाव, दीवारों के भीतर से गुजरने वाले पाइपों में लीकेज, अत्यधिक ठंडी दीवारें और खराब वेंटिलेशन भी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। जब तक नमी के मुख्य स्रोत को ठीक नहीं किया जाता, तब तक केवल ऊपर से नया पेंट या पुट्टी करा देने से यह समस्या हल नहीं होगी और फंगस बार-बार लौट आएगी। यदि फंगस बहुत बड़े इलाके में फैल चुकी हो, तो सही समय पर विशेषज्ञ की मदद लेकर संरचनात्मक लीकेज को ठीक कराना ही स्थायी समाधान है। इसका आप पर असर सर्दियों में घर के भीतर सही तरीके से कपड़े सुखाने से कमरों में फफूंद और सीलन का खतरा टलता है तथा बिजली व आग से जुड़े हादसों से बचाव होता है। • सेहत की सुरक्षा: बंद कमरों में नमी नियंत्रित रहने से फंगस के बीजाणु हवा में नहीं फैलते हैं। इससे अस्थमा, एलर्जी और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बंद नाक और खांसी जैसी तकलीफों से राहत मिलती है। • मकान की देखभाल: दीवारों और खिड़कियों पर कंडेनसेशन रोकने से कमरों का पेंट और पुट्टी खराब नहीं होती है। इससे दीवारों में सीलन की दरारें नहीं पड़तीं और बार-बार महंगे मरम्मत कार्य की जरूरत नहीं पड़ती। • घरेलू सुरक्षा: रूम हीटर पर गीले कपड़े डालने की आदत बंद करने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने का गंभीर खतरा टल जाता है। कपड़ों और हीटर के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने से उपकरण भी सुरक्षित रहता है। • लागत और बचत: एक सामान्य हाइग्रोमीटर का इस्तेमाल करके कमरे में 30 से 50 प्रतिशत की नमी बनाए रखना आसान हो जाता है। सही वेंटिलेशन और अतिरिक्त स्पिन के इस्तेमाल से बिना किसी महंगे ड्रायर के कपड़े आसानी से सूख जाते हैं। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों में धूप की कमी के कारण लोग कपड़े बंद कमरों में फैलाते हैं, जहां वेंटिलेशन न होने से नमी बाहर नहीं निकल पाती और ठंडी दीवारों पर पानी बनकर जमने लगती है। • धूप और तापमान में गिरावट: सर्दियों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण बालकनी या छतों पर पर्याप्त धूप नहीं पहुंचती है। इस वजह से लोग मजबूरी में कपड़ों के स्टैंड को बंद कमरों के अंदर रख देते हैं। • संघनित नमी और कंडेनसेशन: बंद कमरों से हवा बाहर न निकलने के कारण वाष्पीकृत पानी कमरे के भीतर ही कैद हो जाता है। यह नम हवा जब बाहर की ठंडी दीवारों और खिड़कियों के शीशों से टकराती है, तो पानी की बूंदों के रूप में जम जाती है। • वेंटिलेशन की कमी और फंगस: जब खिड़कियां और दरवाजे लगातार बंद रहते हैं, तो नमी सूख नहीं पाती और सतहें भीगी रहती हैं। लंबे समय तक यही गीलापन बने रहने से दीवारों पर काली और हरी फंगस के फैलने की आदर्श परिस्थितियां बन जाती हैं। सवाल-जवाब 1. सर्दियों में कमरे के अंदर कपड़े सुखाने से फंगस क्यों पनपती है? बंद कमरे में कपड़ों से वाष्पीकृत होने वाला पानी बाहर नहीं निकल पाता और ठंडी दीवारों पर कंडेनसेशन बनकर जमता है, जिससे फंगस पनपने लगती है। 2. कमरे में नमी का आदर्श स्तर कितना होना चाहिए? पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के अनुसार घर के अंदर नमी 30 से 50 प्रतिशत के बीच रहनी चाहिए और इसे 60 प्रतिशत से नीचे रखना चाहिए। 3. क्या पंखा चलाने से कमरे की नमी पूरी तरह बाहर निकल जाती है? पंखा केवल कपड़ों के आसपास की हवा को घुमाता है, नमी को बाहर निकालने के लिए खिड़की खुली रखना या एग्जॉस्ट पंखा चलाना जरूरी है। 4. क्या रूम हीटर के ऊपर कपड़े रखकर सुखाना सुरक्षित है? हीटर पर सीधे कपड़े रखना या उन्हें बहुत करीब टांगना खतरनाक है, क्योंकि इससे आग लगने का भारी जोखिम रहता है। 5. कमरे में नमी जांचने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है? घर के अंदर नमी का सटीक स्तर मापने के लिए हाइग्रोमीटर नामक छोटे मीटर का उपयोग किया जाता है। 6. कपड़ों को जल्दी सुखाने के लिए धोने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए? फैब्रिक लेबल के अनुसार वॉशिंग मशीन में अतिरिक्त स्पिन साइकिल चलाएं या हाथ से हल्के दबाव से अतिरिक्त पानी निकाल लें। https://trendkia.com/trends/thnda-ke-mausama-men-ghara-men-gile-kapare-sukhane-ke-surakshita-upaya-aura-fungus-se-bachava-55093 TrendKia — Har trend, sabse pehle.