स्क्रीन टाइम से तंग आकर लोगों ने अपनाया नया तरीका, जानें क्या है 'हॉबी-मैक्सिंग' ट्रेंड सोशल मीडिया की अंतहीन स्क्रॉलिंग से बोर हो चुके लोग अब अपनी जिंदगी में 'हॉबी-मैक्सिंग' को अपना रहे हैं। इसके तहत स्क्रीन से दूर रहकर नई कलाएं और शौक सीखे जा रहे हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। सुबह की शुरुआत फोन की स्क्रीन देखने से होती है, खाली वक्त मिलते ही सोशल मीडिया पर उंगलियां फिसलने लगती हैं और रात को बिस्तर पर जाने से पहले रील्स देखने का सिलसिला आम हो चला है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह दिनचर्या लगभग हर दूसरे इंसान की आदत बन चुकी है। लेकिन इस डिजिटल थकान से परेशान होकर अब लोगों ने एक नया रास्ता चुन लिया है। वे अपने खाली समय का इस्तेमाल किसी रचनात्मक शौक को पूरा करने में कर रहे हैं। क्या है यह नया चलन कोई कैनवास पर रंग बिखेर रहा है, तो कोई सलाई और ऊन से बुनाई कर रहा है। इसके अलावा कुकिंग, बागवानी और फोटोग्राफी सीखने का क्रेज भी तेजी से बढ़ रहा है। अपनी पसंद के इन रचनात्मक कामों को अपने जीवन का जरूरी हिस्सा बनाने की इस बढ़ती ललक को ही ‘हॉबी-मैक्सिंग’ नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल समय बिताना नहीं है, बल्कि नीली रोशनी वाली स्क्रीनों से नजरें हटाकर कुछ नया सीखना और मानसिक रूप से हल्का महसूस करना है। इसकी असल परिभाषा हॉबी-मैक्सिंग का सीधा सा अर्थ है कि आप अपने बचे हुए वक्त का सदुपयोग किसी पसंदीदा गतिविधि में महारत हासिल करने या उसे अपनी नियमित जीवनशैली में शामिल करने के लिए करें। इसमें या तो किसी एक खास शौक को पूरी शिद्दत से अपनाया जाता है या फिर अलग-अलग हुनर आजमाए जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई इंसान रोजाना नियम से तीस मिनट पढ़ने के लिए निकालता है, तो कोई हफ्ते के आखिरी दिनों में मिट्टी के बर्तन गढ़ना, गिटार के तार छेड़ना या रसोई में कोई नई डिश बनाना सीखता है। इस ट्रेंड में किसी भी गतिविधि को महज टाइम पास नहीं माना जाता, बल्कि इसे खुद के साथ कुछ सुकून भरे पल बिताने और रोजमर्रा की भारी व्यस्तता से एक छोटा सा विराम पाने का माध्यम समझा जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी भारी-भरकम फीस वाले कोर्स या महंगे उपकरणों की कोई आवश्यकता नहीं होती। व्यक्ति अपनी रुचि और अपनी जेब के हिसाब से बेहद छोटे स्तर पर इसकी शुरुआत कर सकता है। डिजिटल दुनिया से दूरी इंटरनेट पर लगातार नए वीडियो, तस्वीरें और सूचनाएं देखते रहने से कई बार इंसानी दिमाग को भारी थकान या ऊब महसूस होने लगती है। ऐसे माहौल में कोई सृजनात्मक काम करना लोगों को डिजिटल दुनिया से नाता तोड़ने और खुद से जुड़ने का मौका देता है। हालांकि, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि हर इंसान पर इसका प्रभाव अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है। व्यक्तिगत समय का महत्व नौकरी, पढ़ाई, परिवार और अन्य तमाम जिम्मेदारियों के दबाव में लोग अक्सर अपने खुद के शौक और पसंद को पीछे छोड़ देते हैं। हॉबी-मैक्सिंग उन्हें दिनभर की भागदौड़ के बीच से थोड़ा वक्त अपनी व्यक्तिगत खुशी के लिए निकालने की प्रेरणा देता है। कौशल विकास की चाहत कोई नई भाषा पर पकड़ बनाना, रसोई में नए पकवान आजमाना या स्केच बुक पर हाथ आजमाना इंसान को नई दक्षता विकसित करने का अवसर देता है। इस प्रक्रिया में होने वाली धीमी प्रगति व्यक्ति के अंदर का आत्मविश्वास मजबूत करने में भी बड़ी भूमिका निभाती है। मानसिक शांति और सुकून पेड़-पौधों की देखभाल करना, पेंटिंग करना, बुनाई के फंदे बुनना या संगीत के सुरों में खो जाना कुछ लोगों के लिए मानसिक तनाव को कम करने का बेहतरीन जरिया बन गया है। किसी एक काम में पूरी तरह तल्लीन हो जाने से रोजमर्रा की तमाम चिंताओं से कुछ पलों के लिए राहत मिल जाती है। कैसे करें इसकी शुरुआत इसकी शुरुआत करने के लिए आपको अपने दिनभर के रूटीन से घंटों का समय निकालने की कोई जरूरत नहीं है। सबसे पहले एक ऐसी गतिविधि की तलाश करें जिसमें आपकी दिल से दिलचस्पी हो। आप चाहें तो इसकी शुरुआत दिन में केवल पंद्रह से बीस मिनट निकालकर कर सकते हैं। अपनी प्रगति की तुलना किसी और से करने के बजाय इस बात पर गौर करें कि आप क्या नया सीख रहे हैं और उस प्रक्रिया में आपको कितना आनंद मिल रहा है। इसका आप पर असर हॉबी-मैक्सिंग ट्रेंड आपके दैनिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव डालता है। • मानसिक तनाव में कमी: स्क्रीन से दूरी बनाने और रचनात्मक कामों में समय बिताने से रोजमर्रा का मानसिक तनाव कम होता है। इससे मस्तिष्क को जरूरी विश्राम मिलता है और मूड बेहतर होता है। • उत्पादकता में वृद्धि: खाली समय का सही इस्तेमाल करने से नई स्किल्स विकसित होती हैं। यह छोटे प्रयास लंबे समय में आपके आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। • बेहतर नींद: रात को सोने से पहले फोन या रील्स देखने की आदत छूटने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है। इससे अगले दिन ऊर्जा का स्तर ऊंचा रहता है। • आसान शुरुआत: इसके लिए किसी महंगे सामान या कोर्स की जरूरत नहीं होती है। आप रोजाना केवल 15 से 20 मिनट निकालकर इसकी शुरुआत कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ डिजिटल युग में लोग लगातार वर्चुअल दुनिया से जुड़े रहने के कारण मानसिक थकान और ऊब का शिकार हो रहे हैं, जिसके समाधान के रूप में इस ट्रेंड ने जन्म लिया है। • स्क्रीन की अति: सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक इस्तेमाल मानसिक शांति छीन रहा है। इससे उपजी झुंझलाहट लोगों को वास्तविक गतिविधियों की ओर धकेल रही है। • रचनात्मकता की आवश्यकता: आधुनिक जीवनशैली की व्यस्तता ने लोगों को उनके पुराने और मनपसंद शौक से दूर कर दिया है। भीतर की सृजनात्मकता को बाहर निकालने के लिए एक नए माध्यम की जरूरत महसूस हो रही थी। • तनाव से बचाव: लगातार काम और सोशल मीडिया की सूचनाओं से भरा माहौल लोगों में एंग्जायटी बढ़ा रहा है। पेंटिंग या बागवानी जैसे शांत करने वाले काम इस मानसिक दबाव का प्राकृतिक विकल्प बनते हैं। सवाल-जवाब 1. हॉबी-मैक्सिंग क्या है? हॉबी-मैक्सिंग का अर्थ अपने खाली समय का उपयोग किसी पसंदीदा रचनात्मक गतिविधि को सीखने और उसे अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाने में करना है। 2. इसके लिए दिन में कितना समय निकालना चाहिए? आप इसकी शुरुआत रोजाना केवल 15 से 20 मिनट का समय निकालकर कर सकते हैं। 3. इस ट्रेंड को अपनाने के लिए किन चीजों की जरूरत होती है? इसके लिए किसी महंगे कोर्स या बड़े सेटअप की कोई आवश्यकता नहीं होती, आप अपनी पसंद और बजट के अनुसार छोटी शुरुआत कर सकते हैं। 4. यह ट्रेंड किस समस्या का समाधान करता है? यह लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करने से होने वाली मानसिक थकान, ऊब और स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से राहत दिलाता है। 5. इसमें किस तरह की गतिविधियां शामिल की जा सकती हैं? इसमें पेंटिंग, बुनाई, कुकिंग, बागवानी, फोटोग्राफी, गिटार बजाना या किताबें पढ़ना जैसी गतिविधियां शामिल हैं। https://trendkia.com/trends/tired-of-endless-scrolling-people-embrace-hobby-maxing-to-disconnect-from-screens-50934 TrendKia — Har trend, sabse pehle.