त्योहारी सीजन में मैट्रेस, तकिए और कुशन की सही सफाई के आसान घरेलू नुस्खे दीवाली की सफाई के दौरान सिर्फ बेडशीट बदलना काफी नहीं होता, बल्कि मैट्रेस, तकिए और कुशन की गहरी सफाई करना भी जरूरी है। सही तरीकों और सावधानियों का ध्यान रखकर आप इन्हें खराब होने से बचा सकते हैं। त्योहारों के आगमन पर घर के हर हिस्से की गहन सफाई की जाती है, जिसमें फर्श, परदे, सोफा और रसोई की चमक तो वापस आ जाती है, लेकिन सोने का कमरा और बिस्तर अक्सर अनदेखे रह जाते हैं। अधिकांश लोग केवल चादरें और गिलाफ बदलकर यह मान लेते हैं कि बिस्तर पूरी तरह स्वच्छ हो चुका है। वास्तविकता यह है कि हर रात उपयोग में आने वाले गद्दे, सिरहाने के तकिए और बैठने वाले कुशन लंबे समय तक धूल, शरीर के पसीने, मृत त्वचा और बाहरी गंदगी को सोखते रहते हैं। जब तक इन भीतरी चीजों की गहराई से स्वच्छता न की जाए, तब तक पूरे घर का स्वच्छता अभियान अधूरा ही माना जाएगा। बिस्तर के गद्दों की गहरी सफाई करने का व्यवस्थित तरीका गद्दों की सफाई आरंभ करते समय सबसे पहला कदम पुरानी बेडशीट को हटाना और गद्दे की ऊपरी बनावट का बारीकी से निरीक्षण करना है। यदि सतह पर बालों के गुच्छे, धूल की परत या छोटे कण नजर आ रहे हों, तो सामान्य झाड़ू लगाने के बजाय वैक्यूम क्लीनर की मदद से उन्हें खींचकर अलग करना सबसे सुरक्षित माना जाता है। गद्दे के चारों कोनों, सिलाई की परतों और किनारों की विशेष रूप से वैक्यूमिंग करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं संकरे हिस्सों में सबसे अधिक धूल जमा होकर बैठी रहती है। यदि गद्दे पर किसी प्रकार का तरल या खाद्य पदार्थ का दाग लग गया हो, तो कभी भी सीधे पानी उड़ेलने की गलती न करें। गद्दे के भीतर अत्यधिक पानी चले जाने से उसका आंतरिक ढांचा सड़ सकता है। एक साफ सूती कपड़े को हल्का सा गीला करें और दाग वाले हिस्से पर धीरे-धीरे थपथपाएं। दाग पर कपड़े को जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि रगड़ लगाने से दाग रेशों में और गहरा फैल जाता है, जबकि हल्के हाथ से दबाव डालने पर गंदगी कपड़े में समा जाती है। हवा की आवाजाही और गद्दे को सुखाने की अहमियत सफाई प्रक्रिया पूरी होने के बाद गद्दे को कुछ समय के लिए खुली और हवादार जगह पर रखना चाहिए ताकि उसके भीतर की स्वाभाविक नमी पूरी तरह बाहर निकल सके। गद्दे के साथ आने वाले केयर लेबल की जांच करें, और यदि उसमें अनुमति दी गई हो, तो गद्दे को पलटकर उसकी दूसरी सतह की भी इसी प्रक्रिया से सफाई सुनिश्चित करें। एक अत्यंत महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि जब तक गद्दे का एक-एक कोना पूरी तरह सूख न जाए, तब तक उस पर दोबारा नई चादर बिछाने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें, अन्यथा बंद नमी सड़न पैदा कर सकती है। तकियों को धोते समय इन सामान्य गलतियों से बचें तकिए हमारे चेहरे और सिर के निरंतर संपर्क में रहते हैं, जिसके कारण उनमें पसीना, तेल, धूल और अप्रिय गंध बहुत तेजी से समा जाती है। इनकी सफाई की शुरुआत हमेशा बाहरी कवर को उतारकर उसे अलग से धोने के साथ करनी चाहिए। इसके तुरंत बाद तकिए के भीतरी लेबल पर लिखे धुलाई निर्देशों को ध्यान से पढ़ें। आमतौर पर साधारण रुई यानी कॉटन और पॉलिएस्टर फाइबर भराव वाले तकियों को वॉशिंग मशीन में धोया जा सकता है, लेकिन हर किस्म के तकिए के साथ यह प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। विशेष रूप से मेमोरी फोम से तैयार किए गए तकियों को कभी भी सामान्य वाशिंग मशीन के चक्र में नहीं घुमाना चाहिए, क्योंकि तेज घुमाव से उनका ढांचा टूटकर बिखर सकता है। इनके लिए निर्माता द्वारा दिए गए विशेष सफाई निर्देशों का ही पालन करना अनिवार्य होता है। तकिए की धुलाई के बाद उसे धूप अथवा हवा में पूरी तरह सुखाना बेहद आवश्यक है, क्योंकि भीतरी भराव में जरा सी भी नमी बाकी रह जाने पर उसमें से दुर्गंध आने लगती है और फफूंद पनपने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। सोफे और दीवान के कुशन की सुरक्षा एवं स्वच्छता बैठक और शयनकक्ष में सजावट व आराम के लिए रखे गए कुशन दिन भर उड़ने वाली धूल और पारिवारिक उपयोग के सीधे संपर्क में आते हैं। इनकी देखभाल के लिए सबसे पहले इनके आवरण हटाकर केयर लेबल के अनुसार नियमित रूप से धो लें। यदि कुशन का भीतरी हिस्सा धोने योग्य नहीं बताया गया है, तो उसे मशीन में डालकर खराब करने से बचना ही समझदारी है। कुशन की बाहरी सतह से जमी हुई धूल साफ करने के लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल सबसे प्रभावी तरीका है। यदि कभी नाश्ता करते समय किसी कुशन पर चाय, कॉफी या खाने का दाग लग जाए, तो उसे सूखने के लिए छोड़ने के बजाय तत्काल गीले कपड़े से साफ करने का प्रयास करें। सफाई का कार्य पूरा होने पर कुशन के आंतरिक हिस्से और उसके बाहरी कवर, दोनों को अच्छी तरह सुखाकर ही दोबारा उपयोग में लाएं। लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने के लिए जरूरी आदतें एक बार गहन सफाई पूरी हो जाने के बाद कुछ आसान घरेलू नियम अपनाकर बिस्तर और बैठने की जगह को महीनों तक स्वच्छ रखा जा सकता है • नियमित धुलाई: बेडशीट और तकियों के गिलाफ को समय पर बदलते हुए गर्म या सामान्य पानी में धोते रहें। • आवधिक वैक्यूमिंग: गद्दों और कुशनों पर समय-समय पर वैक्यूम क्लीनर चलाएं ताकि धूल की मोटी परत न जमने पाए। • गीलेपन से बचाव: कभी भी बिस्तर पर गीले तौलिए, नम कपड़े या नहाने के बाद के वस्त्र न छोड़ें। • व्यवस्थित रखरखाव: तकियों और कुशनों को इस्तेमाल के बाद ठीक से थपथपाकर व्यवस्थित रखें। • सुरक्षात्मक आवरण: गद्दों को सुरक्षित रखने के लिए एक अच्छे मैट्रेस प्रोटेक्टर का उपयोग करें ताकि सीधे दाग न लगें। • रसायनों से दूरी: सफाई के दौरान ब्लीच अथवा बिना परखे कड़े रासायनिक क्लीनर का छिड़काव करने से पूरी तरह परहेज करें। इसका आप पर असर बेडरूम के गद्दों, तकियों और कुशनों की सही सफाई से घर में धूल, एलर्जी और दुर्गंध से बचाव होता है जिससे परिवार का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है। • एलर्जी से राहत: गद्दे और तकियों से धूल और सूक्ष्म कण हटने से सांस संबंधी समस्याएं कम होती हैं। नियमित सफाई से अस्थमा और त्वचा के संक्रमण का खतरा काफी घट जाता है। • सामान की लंबी उम्र: सही विधि से सफाई करने से गद्दे और मेमोरी फोम के कुशन सालों-साल खराब नहीं होते। अत्यधिक पानी या कड़े रसायनों से बचकर आप नए सामान की समय पूर्व खरीद के खर्च को बचा सकते हैं। • ताजगी और बेहतर नींद: पसीने और बदबू से मुक्त बिस्तर पर सोने से नींद की गुणवत्ता में तुरंत सुधार होता है। स्वच्छ बिस्तर पर सोने से मानसिक तनाव कम होता है और सुबह ताजगी महसूस होती है। • आसान रखरखाव: मैट्रेस प्रोटेक्टर और समय पर वैक्यूम करने की आदत से बार-बार गहरी धुलाई की मशक्कत नहीं करनी पड़ती। हफ्ते में एक बार थोड़ी सी देखभाल से त्योहारों के दौरान भारी काम का बोझ नहीं पड़ता। ऐसा क्यों हुआ नियमित इस्तेमाल के दौरान बिस्तर पर शारीरिक पसीना, मृत त्वचा और कमरे की धूल लगातार जमती रहती है, जिसे सिर्फ चादर बदलकर साफ नहीं किया जा सकता। उचित जानकारी के बिना धुलाई करने पर गद्दे और फोम के अंदर नमी फंस जाती है, जिससे फफूंद और बदबू की समस्या बढ़ जाती है। • गहरी गंदगी का संचय: रोजाना घंटों इस्तेमाल होने के कारण पसीना और सूक्ष्म कण चादर पार करके गद्दे और तकियों के अंदर समा जाते हैं। ऊपरी कवर बदलने से यह भीतरी गंदगी नहीं निकलती, जिसके लिए वैक्यूमिंग और धूप की जरूरत होती है। • सामग्रियों की भिन्न प्रकृति: कॉटन, पॉलिएस्टर और मेमोरी फोम के तंतु पानी और यांत्रिक घुमाव के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। फोम को मशीन में डालने या गद्दे पर ज्यादा पानी डालने से उनका आंतरिक ढांचा कमजोर पड़ जाता है। • फफूंद और दुर्गंध का खतरा: सफाई के बाद यदि तकिए या गद्दे को पूरी तरह सुखाए बिना पैक कर दिया जाए, तो बंद नमी में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यही कारण है कि धूप और हवा में पूरी तरह सुखाना अनिवार्य कदम माना जाता है। सवाल-जवाब 1. क्या सभी प्रकार के तकियों को वॉशिंग मशीन में धोया जा सकता है? नहीं, केवल कॉटन और पॉलिएस्टर भराव वाले कुछ तकिए मशीन में धोए जा सकते हैं। मेमोरी फोम वाले तकियों को मशीन में धोने से उनका ढांचा खराब हो सकता है। 2. मैट्रेस पर लगे जिद्दी दाग को साफ करने का सबसे सुरक्षित तरीका क्या है? दाग पर ज्यादा पानी डालने के बजाय हल्के गीले कपड़े से धीरे-धीरे थपथपाकर साफ करना चाहिए। कपड़े को रगड़ने से दाग और फैल सकता है। 3. कुशन और गद्दे की सतह से धूल हटाने के लिए किसका इस्तेमाल करना चाहिए? धूल, बाल और महीन कणों को सुरक्षित रूप से खींचकर साफ करने के लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा तरीका है। 4. सफाई के तुरंत बाद गद्दे पर बेडशीट क्यों नहीं बिछानी चाहिए? यदि गद्दे के अंदर थोड़ी भी नमी रह जाए, तो बंद चादर के नीचे उसमें फफूंद और दुर्गंध पैदा हो सकती है। इसलिए पूरी तरह सूखने के बाद ही चादर बिछाएं। 5. मैट्रेस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए क्या उपाय करना चाहिए? गद्दे पर प्रोटेक्टिव कवर यानी मैट्रेस प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करें और समय-समय पर वैक्यूम क्लीनर से उसकी धूल साफ करते रहें। https://trendkia.com/trends/tyohari-sijana-men-mattress-takie-aura-cushion-ki-sahi-saphai-ke-asana-gharelu-nuskhe-54806 TrendKia — Har trend, sabse pehle.