# उज्जैन में सिंहस्थ 2028 चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा हटाने पर बढ़ा बवाल, भक्तों ने खोला मोर्चा

> मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के दौरान खड़े हनुमान जी के मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रतिमा स्थानांतरित करने की प्रशासनिक कोशिशें विफल रही हैं, जिसके विरोध में श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/ujjain-men-simhastha-2028-chaurikarana-ke-daurana-khare-hanuman-ji-ki-pratima-hatane-para-barha-bavala-bhakton-ne-khola-morcha-29695 · **Language:** Hindi
**Tags:** उज्जैन, सिंहस्थ 2028, खड़े हनुमान जी, सड़क चौड़ीकरण, प्रशासनिक कार्रवाई, हनुमान चालीसा पाठ

मध्य प्रदेश के उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 के आयोजन को देखते हुए बुनियादी ढांचे में सुधार और सड़कों के चौड़ीकरण का कार्य तेजी से चलाया जा रहा है। इसी विकास कार्य की जद में कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी का मंदिर आ गया है। स्थानीय प्रशासन की टीमों ने मंदिर के बाहरी ढांचे को ध्वस्त कर दिया है, लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को स्थानांतरित करने के सभी प्रयास अब तक निष्फल साबित हुए हैं। प्रतिमा के अपनी जगह से न हिलने को स्थानीय श्रद्धालु और धर्मप्रेमी एक दैवीय चमत्कार मान रहे हैं। वहीं मंदिर की संरचना तोड़े जाने और प्रतिमा को शिफ्ट किए जाने की प्रशासनिक कवायद के खिलाफ हिंदूवादी संगठनों तथा स्थानीय भक्तों ने कड़ा विरोध जताते हुए मोर्चा खोल दिया है।

## सिंहस्थ 2028 के तहत सड़क चौड़ीकरण और मंदिर पर प्रशासनिक कदम
उज्जैन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन द्वारा सिंहस्थ 2028 की भव्य तैयारियों के तहत श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए मुख्य मार्गों का विस्तार किया जा रहा है। इसी कड़ी में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक जाने वाली सड़क को चौड़ा करने का निर्णय लिया गया था। इस मार्ग की सीमा में खड़े हनुमान जी के प्राचीन मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, मुख्य मार्ग को बाधा मुक्त बनाने के उद्देश्य से मंदिर के ऊपरी ढांचे को हटा दिया गया। इसके बाद प्रशासन की योजना खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को बिना किसी क्षति के सुरक्षित रूप से दूसरे स्थान पर स्थापित करने की थी। हालांकि, ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को स्थानांतरित करने में भारी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

## प्रतिमा हटाने के तीन असफल प्रयास और चमत्कार के दावे
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, बीते एक सप्ताह के दौरान प्रशासनिक टीमों ने आधुनिक मशीनरी की मदद से खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कम से कम तीन बार कोशिश की। हर बार प्रशासन के सभी तकनीकी उपाय और प्रयास पूरी तरह से विफल रहे और प्रतिमा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुई। इतना ही नहीं, स्थिति का आकलन करने पहुंची पुरातत्व विभाग की टीम भी बिना किसी सफलता के वापस लौट गई। प्रशासनिक विफलता के बाद क्षेत्र के श्रद्धालुओं, संतों और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों में यह विश्वास दृढ़ हो गया है कि यह हनुमान जी की कृपा और चमत्कार है। वर्तमान में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा खुले स्थान पर एक टेंट के नीचे विराजमान है और सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं।

## टंकी चौराहे पर स्थापना और दक्षिणमुखी दिशा बदलने पर आपत्ति
विरोध कर रहे श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों ने प्रतिमा के नए प्रस्तावित स्थान और उसकी दिशा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन की ओर से प्रतिमा को पास के ही टंकी चौराहे पर निर्मित स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। श्रद्धालुओं का तर्क है कि वर्तमान समय में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए स्थापित है। वहीं टंकी चौराहे पर प्रस्तावित नए मंदिर में प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में देव प्रतिमा के मुख की दिशा बदलने से उसकी आध्यात्मिक चेतना, धार्मिक महत्व और पौराणिक मान्यता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से भक्त प्रतिमा को उसके मूल स्थान से किसी भी स्थिति में न हटाने पर अड़े हुए हैं।

## महाकाल सवारी के बाद जुटी भारी भीड़ और हनुमान चालीसा का पाठ
मंगलवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य राजसी सवारी संपन्न होने के बाद क्षेत्र में यह सूचना तेजी से फैली कि प्रशासन की टीम एक बार फिर भारी पुलिस बल के साथ प्रतिमा को हटाने पहुंच सकती है। इस खबर के आग की तरह फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के प्रतिनिधि और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मौके पर एकत्र हो गए। देखते ही देखते मंदिर स्थल पर विशाल जनसमूह जमा हो गया। आक्रोशित भक्तों ने मंदिर के समक्ष बैठकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि वे किसी भी कीमत पर प्रतिमा को उसके स्थान से हटने नहीं देंगे।

## 60 मंदिरों की कार्रवाई का हवाला और जनप्रतिनिधियों के इस्तीफे की मांग
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने प्रशासनिक नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर सरकार अब तक शहर के लगभग 60 धार्मिक स्थलों और मंदिरों को हटा चुकी है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के कथन को याद करते हुए कहा कि पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि श्री राम जी से मत उलझो मिट जाओगे, और आज हम यह स्पष्ट कहना चाहते हैं कि हनुमान जी से मत उलझो, मिट जाओगे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उज्जैन के महापौर और स्थानीय पार्षद से तत्काल इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने अपनी जिद नहीं छोड़ी, तो इस आंदोलन को और अधिक तीव्र तथा व्यापक बनाया जाएगा।

## बढ़ते जनआक्रोश के बीच तकनीकी जांच कराने की तैयारी
मंदिर हटाने के मुद्दे पर लगातार बढ़ते जनआक्रोश और भक्तों के कड़े रुख को देखते हुए स्थानीय प्रशासन रक्षात्मक मुद्रा में आ गया है। प्रशासनिक अधिकारी फिलहाल किसी भी तरह के सीधे टकराव या कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से बचना चाहते हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन प्रतिमा को पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ शिफ्ट करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। प्रतिमा के लगातार न हटने और सोशल मीडिया पर राष्ट्रीय स्तर पर मामला गर्माने के बाद अब प्रशासन की ओर से प्रतिमा की विस्तृत तकनीकी जांच कराने की बात कही जा रही है। विशेषज्ञ टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रतिमा की नींव और संरचनात्मक स्थिति क्या है, ताकि आगे का निर्णय सुरक्षित तरीके से लिया जा सके।

## इसका आप पर असर
यह मामला धार्मिक आस्था और शहरी विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन से जुड़ा हुआ है।

- **भारत में:** आगामी सिंहस्थ और महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों से जुड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यों में स्थानीय मंदिरों के स्थानांतरण को लेकर नए मानक तय हो सकते हैं। प्रशासन को धार्मिक धरोहरों के पुनर्विकास में अधिक पारदर्शिता और तकनीकी सतर्कता अपनानी होगी।
- **उज्जैन में:** कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर मार्ग पर जारी सड़क चौड़ीकरण कार्य के प्रभावित होने से यातायात सुगमता में देरी हो सकती है। स्थानीय नागरिकों और सिंहस्थ 2028 के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को निर्माण कार्य पूरा होने तक इस मार्ग पर परिवर्तित मार्गों का उपयोग करना पड़ सकता है।
- **भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए:** टंकी चौराहे पर प्रस्तावित नए मंदिर स्थल की दिशा पर सवाल उठने के कारण प्रशासनिक सहमति बनने तक दर्शन व्यवस्था प्रभावित रह सकती है। श्रद्धालुओं को फिलहाल टेंट में विराजमान प्रतिमा के दर्शन ही करने होंगे।
- **प्रशासन और स्थानीय निकाय के लिए:** धार्मिक संस्थाओं और हिंदू संगठनों के विरोध के कारण अब हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा। बिना जनसहमति और तकनीकी जांच के किसी भी धार्मिक ढांचे को हटाने से बचना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
उज्जैन में खड़े हनुमान जी मंदिर को हटाने की कोशिश और उसके बाद शुरू हुए विवाद के मुख्य कारण बुनियादी ढांचे का विकास और धार्मिक मान्यताएं हैं।

- **सिंहस्थ 2028 का आयोजन:** उज्जैन में 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक की सड़क को चौड़ा किया जा रहा था, जिसकी जद में मंदिर आ गया।
- **प्रतिमा का न हिलना:** प्रशासन द्वारा मंदिर का ढांचा गिराए जाने के बाद जब प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई, तो तीन बार की कोशिशों और पुरातत्व टीम के निरीक्षण के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हटी, जिसे लोगों ने चमत्कार माना।
- **दिशा परिवर्तन पर आपत्ति:** प्रशासन प्रतिमा को टंकी चौराहे पर उत्तरमुखी दिशा में स्थापित करना चाहता है, जबकि वर्तमान में प्रतिमा दक्षिणमुखी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिशा बदलने से मंदिर का महत्व प्रभावित होने की आशंका के कारण विरोध बढ़ा है।

## सवाल-जवाब

### 1. उज्जैन में खड़े हनुमान जी का मंदिर किस वजह से हटाया जा रहा है?
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है, जिसकी जद में यह मंदिर आ गया है।

### 2. प्रशासन द्वारा प्रतिमा हटाने के प्रयासों का क्या परिणाम रहा?
बीते एक हफ्ते में प्रशासन ने तीन बार प्रतिमा हटाने की कोशिश की, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली और पुरातत्व टीम भी लौट गई।

### 3. भक्त और हिंदू संगठन प्रतिमा स्थानांतरित करने का विरोध क्यों कर रहे हैं?
वर्तमान में प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जबकि नए प्रस्तावित स्थल टंकी चौराहे पर यह उत्तरमुखी हो जाएगी। भक्तों का मानना है कि दिशा बदलने से मंदिर का धार्मिक महत्व प्रभावित होगा।

### 4. मंगलवार को मंदिर स्थल पर क्या हुआ?
बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद प्रशासनिक कार्रवाई की अफवाह पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने जमा होकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और प्रदर्शन किया।

### 5. आगे प्रशासन की क्या योजना है?
बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए प्रशासन अब प्रतिमा की तकनीकी जांच कराने की बात कह रहा है ताकि सुरक्षित स्थानांतरण का रास्ता खोजा जा सके।

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