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  "type": "article",
  "title": "मध्य प्रदेश के उज्जैन में नहीं हट पाई खड़े हनुमान जी की प्रतिमा, तीन दिन की कोशिशें रहीं नाकाम",
  "summary": "मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान 'खड़े हनुमान' की प्राचीन प्रतिमा को हटाने के प्रशासनिक प्रयास लगातार तीसरे दिन भी असफल रहे। इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और धार्मिक संगठनों में भारी चर्चा है, जबकि विशेषज्ञ इसे राजा भोज के काल की ऐतिहासिक धरोहर मान रहे हैं।",
  "content": "मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में प्राचीन 'खड़े हनुमान' मंदिर की मूर्ति को हटाने का अभियान बीते तीन दिनों से लगातार जारी है, लेकिन तमाम प्रशासनिक प्रयासों और आधुनिक क्रेन के इस्तेमाल के बावजूद इसे अपनी जगह से हिलाया तक नहीं जा सका है। इस अनूठी स्थिति ने अब स्थानीय निवासियों और अधिकारियों दोनों को ही हैरानी में डाल दिया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आगामी महाकुम्भ सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क का चौड़ीकरण करना और महाकाल की सवारी के मार्ग को सुगम बनाना है। इसी योजना के अंतर्गत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक के हिस्से में आ रही इस पुरानी धार्मिक संरचना को सुरक्षित रूप से दूसरी जगह विस्थापित करने की कवायद पिछले पांच दिनों से की जा रही है, जबकि मूर्ति हटाने का मैदानी काम गुरुवार से शुरू हुआ था।\n\nप्रशासनिक कोशिशें और क्रेन का असफल होना\nनगर निगम के अमले ने मूर्ति को हटाने के लिए भारी-भरकम क्रेन का सहारा लिया, लेकिन वह इस प्राचीन प्रतिमा को टस से मस करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इस दौरान मंदिर के बाकी भवन को पहले ही तोड़ा जा चुका है, और हनुमान जी की मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए ऊपर कैनोपी टेंट भी लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि छोटा सराफा, बड़ा सराफा, नमक मंडी, गोपाल मंदिर, दानी गेट और शिप्रा नदी के आसपास का यह पूरा इलाका प्राचीन उज्जयिनी का बेहद अहम हिस्सा रहा है। यह क्षेत्र सिंधिया राजवंश के करीब 300 साल पुराने इतिहास के साथ-साथ राजा भोज के काल के चौबीस खंभा क्षेत्र और बाद के दौर के सती गेट की गौरवशाली विरासत से गहराई से जुड़ा हुआ है।\n\nस्थानीय विरोध और लोगों की धार्मिक मान्यताएं\nप्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ हिंदूवादी संगठनों, युवक कांग्रेस और स्थानीय जनता ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा को हटाने के इस कदम का कड़ा विरोध किया। स्थानीय लोगों का ऐसा मानना है कि भगवान स्वयं इस स्थान को छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं। इस बीच एक दिलचस्प वाकया भी सामने आया कि जब रात के समय मूर्ति हटाने वाले स्थल को प्लास्टिक से ढंका जा रहा था, ठीक उसी वक्त पास के बिजली के पोल पर स्पार्किंग के कारण एक तेज धमाका हुआ और पूरे इलाके की बत्ती गुल हो गई। इस अजीब घटना के बाद शहर में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है और कई लोग इसे किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से भी जोड़कर देख रहे हैं। दूसरी ओर, संत समाज का कहना है कि सनातन परंपरा में प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति का बहुत ऊंचा धार्मिक महत्व होता है, इसलिए भक्तों की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।\n\nपुरातत्व विशेषज्ञों की राय और ऐतिहासिक महत्व\nइस पूरे मामले पर विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्ववेत्ता प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने अपने विचार रखते हुए बताया कि यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र के मजबूत बेसाल्ट पत्थर से गढ़ी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मूर्ति लगभग एक हजार साल पुरानी राजा भोज के समय की मूर्तिकला परंपरा का हिस्सा हो सकती है और यह एक अत्यंत मूल्यवान ऐतिहासिक धरोहर है। परमार राजवंश और राजा भोज के कार्यकाल के दौरान इस प्रकार के कठोर पत्थरों पर कलाकृतियां तराशने की परंपरा काफी प्रचलित थी। डॉ. सोलंकी ने यह भी रेखांकित किया कि मंदिर की यह जगह पुरातत्व की दृष्टि से भी बहुत खास है। मूर्ति की सटीक आयु और इसके स्थापना काल का पुख्ता पता लगाने के लिए वैज्ञानिक परीक्षण और विशेषज्ञ जांच की बेहद आवश्यकता है।\n\nवैज्ञानिक तरीके से स्थानांतरण की संभावना\nमूर्ति को हटाने में आ रही भारी दिक्कतों पर चर्चा करते हुए पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. सोलंकी ने सुझाव दिया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग के पास इस तरह की प्राचीन और संवेदनशील संरचनाओं को पूरी सुरक्षा के साथ दूसरी जगह स्थानांतरित करने की विशेष महारत है। यदि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक तौर-तरीकों का सही इस्तेमाल किया जाए, तो इस प्राचीन मूर्ति को बिना किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाए सफलताપૂર્વક दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मंगलवार को इस मंदिर को हटाने की एक और नई कोशिश की जाएगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।\n\nइसका आप पर असर\nउज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और मंदिर विस्थापन से जुड़े इस घटनाक्रम का सीधा असर स्थानीय यातायात, धार्मिक आयोजनों और प्रशासनिक योजनाओं पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विकास और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की स्थानीय स्तर की चुनौतियां देश भर के ऐतिहासिक शहरों में नगर निगमों के सामने अक्सर आती हैं। इस तरह के मामलों में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अक्सर लंबी खिंच जाती हैं।\n• उज्जैन में: महाकुम्भ सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहा से छत्री चौक तक के मार्ग पर आवागमन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को मंदिर हटाने के अगले प्रयासों के दिन यानी मंगलवार को रूट डायवर्जन और ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उज्जैन में किस मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है?\nउज्जैन में सड़क चौड़ीकरण की जद में आए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की जा रही है।\n\n2. मूर्ति को हटाने का अभियान क्यों चलाया जा रहा है?\nमहाकुम्भ सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण और महाकाल की सवारी के मार्ग को सुगम बनाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।\n\n3. मूर्ति क्यों नहीं हट पा रही है?\nक्रेन लगाने के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से बिल्कुल नहीं हिल रही है, क्योंकि यह मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी ऐतिहासिक मूर्ति है।\n\n4. इस कार्रवाई का विरोध कौन कर रहा है?\nहिंदूवादी संगठनों, युवक कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर प्रतिमा को हटाने का विरोध किया है।\n\n5. यह मूर्ति किस काल की हो सकती है?\nपुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रतिमा लगभग एक हजार साल पुरानी राजा भोज काल की हो सकती है।\n\n6. प्रशासन अब अगली कोशिश कब करेगा?\nअधिकारियों के अनुसार मंदिर और प्रतिमा को हटाने की अगली कोशिश अब मंगलवार को की जाएगी।",
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  "category": "ट्रेंड्स",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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