# उपवास के भोजन में नया ट्विस्ट: समा के चावल और साबूदाने से बनाएं कुरकुरा फराली हांडवो

> व्रत के दौरान अगर साबूदाना खिचड़ी से बोरियत महसूस हो रही हो, तो समा के चावल, साबूदाना, गाजर और आलू से तैयार यह कुरकुरा फराली हांडवो एक शानदार और लजीज विकल्प है।

**Type:** article · **Category:** ट्रेंड्स · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/trends/upavasa-ke-bhojana-men-naya-tvista-sama-ke-chavala-aura-sabudana-se-banaen-kurakura-farali-handvo-40784 · **Language:** Hindi
**Tags:** फराली रेसिपी, हांडवो, समा के चावल, साबूदाना रेसिपी, व्रत का खाना, उपवास व्यंजन, हेल्दी ब्रेकफास्ट

धार्मिक व्रतों और उपवास के दिनों में अक्सर खान-पान के सीमित विकल्प सामने आते हैं। बार-बार साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा अथवा उबले आलू के व्यंजन खाकर खाने का स्वाद फीका लगने लगता है। ऐसी स्थिति में अगर उपवास के नियमों के अनुकूल कोई ऐसी डिश मिल जाए, जो बाहर से बेहद कुरकुरी और अंदर से स्पंजी व नरम हो, तो व्रत के खाने का मजा दोगुना हो जाता है। गुजरात का पारंपरिक हांडवो आमतौर पर दालों और चावल के किण्वित घोल से बनता है, लेकिन उपवास के लिए इसका फराली रूपांतरण आसानी से रसोई में तैयार किया जा सकता है। इसमें समा के चावल और साबूदाने का तालमेल मुख्य आधार का काम करता है, जिसे विभिन्न सब्जियों और तिल-जीरे के बघार से खास बनाया जाता है।

## समा के चावल और साबूदाने का संतुलित दानेदार आधार तैयार करना
फराली हांडवो का आधार तैयार करने के लिए सामग्री के अनुपात और उसकी पिसाई की बनावट पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। सबसे पहले एक बर्तन में 1 कप समा के चावल और 1/4 कप साबूदाना लें। दोनों सूखी सामग्रियों को ग्राइंडर जार में डालकर दरदरा पीस लें। इस मिश्रण को बिल्कुल बारीक या मैदे जैसा महीन पाउडर नहीं बनाना है, बल्कि इसका टेक्सचर सूजी के दानों जैसा खुरदरा रहना चाहिए। यही दानेदार बनावट सिकने के बाद हांडवो को अंदर से हल्का और बाहर से कुरकुरा बनाती है।

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पिसे हुए इस मिश्रण को एक गहरे बर्तन में निकालें। अब इसमें 1 कप ताजा दही मिलाएं और स्वादानुसार सेंधा नमक डालें। दही की प्राकृतिक खटास और नमी घोल को फूलने में मदद करती है। चम्मच की सहायता से पूरे मिश्रण को अच्छी तरह फेंट लें ताकि कोई गांठ न बचे। इसके बाद इस घोल को कुछ मिनट के लिए एक तरफ ढककर रख दें। इस दौरान पिसा हुआ साबूदाना और समा के चावल दही की नमी को पूरी तरह सोख लेते हैं, जिससे घोल गाढ़ा होकर अच्छी तरह सेट हो जाता है।

## साथ परोसने के लिए स्पेशल फराली हरी चटनी
हांडवो के गरम और कुरकुरे स्वाद को पूरा करने के लिए एक तीखी और जायकेदार हरी चटनी का होना बेहद जरूरी है। इसके लिए मिक्सी के छोटे जार में ताजी हरी धनिया पत्तियां, 2 से 3 हरी मिर्च, 2 चम्मच भुनी हुई मूंगफली के दाने, 1 चम्मच ताजा दही और स्वादानुसार सेंधा नमक डालें। आवश्यकतानुसार थोड़ा सा पानी मिलाकर इन सभी सामग्रियों को महीन पीस लें।

इस चटनी में भुनी मूंगफली डालने से न केवल इसका तीखापन संतुलित होता है, बल्कि चटनी को एक गाढ़ी और क्रीमी बनावट भी मिलती है। दही का हल्का खट्टापन धनिया और मिर्च के साथ मिलकर व्रत के भोजन को एक ताजगी भरा स्वाद देता है। यह चटनी तैयार होते ही तुरंत परोसने के लिए उपलब्ध रहती है।

## बैटर में ताजी सब्जियों और मूंगफली का समावेश
दही सोख चुके गाढ़े बैटर को ढक्कन हटाकर दोबारा अच्छी तरह चलाएं। अब इसमें पौष्टिकता और स्वाद बढ़ाने वाली फराली सामग्रियां मिलानी हैं। इसमें 1 कद्दूकस किया हुआ कच्चा आलू और 1 कद्दूकस की गई गाजर डालें। इसके साथ ही बारीक कटी हुई हरी धनिया पत्ती, अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट तथा दरदरी कुटी हुई भुनी मूंगफली शामिल करें। मूंगफली हर निवाले में एक बढ़िया क्रंच जोड़ती है, जबकि आलू और गाजर अंदर की नमी बनाए रखते हैं।

सभी सामग्रियों को बैटर के साथ एकसार होने तक मिलाएं। जब मिश्रण पूरी तरह मिल जाए, तब पकाने से ठीक पहले इसमें एक चुटकी बेकिंग सोडा डालें और हल्के हाथों से एक ही दिशा में चलाएं। बेकिंग सोडा दही के साथ मिलकर बैटर को अंदर से स्पंजी बनाता है। बैटर का गाढ़ापन पकोड़े के घोल जैसा होना चाहिए; यदि मिश्रण बहुत सख्त लग रहा हो तो थोड़ा सा पानी डालकर इसकी सही कंसिस्टेंसी बना लें।

## तिल और जीरे का तड़का और धीमी आंच पर पकाने की विधि
हांडवो की असली पहचान उसकी ऊपरी और निचली सतह पर मौजूद कुरकुरा तड़का होता है। इसे पकाने के लिए गैस पर एक नॉन-स्टिक पैन चढ़ाएं और उसमें आवश्यकतानुसार थोड़ा सा तेल या देसी घी गर्म करें। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए, तब इसमें लगभग आधा छोटा चम्मच जीरा और 1 चम्मच सफेद तिल डालें। जैसे ही तिल और जीरा चटकने लगें, तुरंत आंच धीमी कर दें और तैयार बैटर का एक हिस्सा पैन के बीच में डालकर चम्मच से गोल पैनकेक की तरह फैला दें।

पैन को एक ढक्कन से ढक दें और बिल्कुल धीमी आंच पर लगभग 2 से 3 मिनट तक पकने दें। धीमी आंच पर पकाना इसलिए जरूरी है ताकि बैटर के अंदर मौजूद कच्चा आलू, गाजर और समा का दाना पूरी तरह भाप में पक सके। यदि आंच तेज रखी गई, तो निचली सतह का तिल और जीरा जलकर काला पड़ जाएगा और अंदर से बैटर कच्चा रह जाएगा।

## पलटने की तकनीक और गरमा-गरम परोसना
लगभग दो से तीन मिनट बाद पैन का ढक्कन हटाएं। जब हांडवो के किनारे पैन छोड़ने लगें, नीचे की सतह सुनहरी व क्रिस्पी दिखने लगे और ऊपर की परत हल्की सूखी नजर आए, तो एक चौड़े स्पैटुला की मदद से इसे सावधानीपूर्वक पलट दें। दूसरी तरफ से भी लगभग 1 मिनट तक खुला या हल्का ढककर पकाएं।

दोनों तरफ से सिकने के बाद जीरे और तिल की बाहरी परत सुनहरी और कुरकुरी हो जाएगी, जबकि अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह पककर मुलायम बना रहेगा। तैयार फराली हांडवो को पैन से निकालकर सर्विंग प्लेट में रखें। इसे मनचाहे चौकोर या तिकोने टुकड़ों में काटकर तैयार की गई ठंडी फराली हरी चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें।

## इसका आप पर असर
यह रेसिपी उपवास रखने वाले लोगों को साबूदाना खिचड़ी के पारंपरिक भारीपन से बचाकर एक हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराती है।

- **खान-पान में विविधता:** उपवास के दौरान बार-बार एक जैसे तले हुए व्यंजन खाने की बोरियत खत्म होती है। साबूदाने और समा के चावल का यह संयोजन आहार में नया स्वाद और बनावट जोड़ता है।
- **कम तेल का उपयोग:** डीप फ्राई किए जाने वाले साबूदाना वड़ों की तुलना में यह पैन में सिकने वाला बेहद कम तेल या घी का व्यंजन है। जो लोग व्रत में वजन या वसा पर नियंत्रण रखना चाहते हैं, उनके लिए यह विशेष लाभकारी है।
- **सब्जियों और पोषक तत्वों की पूर्ति:** गाजर, आलू और मूंगफली का उपयोग करने से शरीर को फाइबर और आवश्यक ऊर्जा मिलती है। दिनभर भूखे रहने के दौरान यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है।
- **सरल और त्वरित तैयारी:** सामग्री को बिना लंबे समय तक भिगोए या किण्वित किए तुरंत तैयार किया जा सकता है। व्यस्त दिनचर्या में कम बर्तनों और न्यूनतम तैयारी के साथ पूरा भोजन तैयार हो जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक हांडवो चावल और दालों के किण्वन से बनता है जिनका सेवन उपवास में वर्जित होता है, इसलिए व्रत-अनुकूल अनाज और बिना किण्वन वाली सामग्री का उपयोग करके यह विशेष फराली रूपांतरण तैयार किया गया है।

- **अनाज का विकल्प:** नियमित दाल और चावल उपवास के धार्मिक नियमों के तहत निषिद्ध माने जाते हैं। समा के चावल और साबूदाना व्रत में पूरी तरह स्वीकार्य होते हैं, इसलिए उन्हें मुख्य आधार बनाया गया है।
- **किण्वन का अभाव:** पारंपरिक हांडवो को स्पंजी बनाने के लिए रातभर खमीर उठाना पड़ता है, जो उपवास में नहीं किया जाता। दही और चुटकी भर बेकिंग सोडा का त्वरित रासायनिक प्रभाव बैटर को बिना इंतजार किए तुरंत स्पंजी बना देता है।
- **संरचना और बनावट का संतुलन:** केवल साबूदाना पीसने पर वह चिपचिपा हो सकता है, जबकि समा का चावल सूखा रहता है। दोनों को एक साथ दरदरा पीसने से सूजी जैसा दानेदार टेक्सचर मिलता है जो बाहर से सिकने पर क्रिस्पी रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. फराली हांडवो बनाने के लिए समा के चावल और साबूदाने का क्या अनुपात होना चाहिए?
इस रेसिपी के लिए 1 कप समा के चावल के साथ 1/4 कप साबूदाना लिया जाता है।

### 2. समा के चावल और साबूदाने को किस तरह पीसना चाहिए?
दोनों को मिक्सी में महीन आटे की तरह नहीं, बल्कि सूजी जैसा दरदरा और दानेदार पीसना चाहिए।

### 3. बैटर को नरम और स्पंजी बनाने के लिए क्या मिलाया जाता है?
बैटर में 1 कप ताजा दही और पकाने से ठीक पहले एक चुटकी बेकिंग सोडा मिलाया जाता है।

### 4. हांडवो के बैटर में कौन सी सब्जियां डाली जाती हैं?
बैटर में 1 कद्दूकस किया हुआ कच्चा आलू और 1 कद्दूकस की गई गाजर मिलाई जाती है।

### 5. हांडवो के तड़के में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
पैन में तेल या घी गर्म करके आधा छोटा चम्मच जीरा और 1 चम्मच सफेद तिल का तड़का लगाया जाता है।

### 6. फराली हरी चटनी को गाढ़ा और क्रीमी बनाने के लिए क्या डाला जाता है?
हरी चटनी में 2 चम्मच भुनी हुई मूंगफली और 1 चम्मच दही मिलाने से वह गाढ़ी और क्रीमी बनती है।

### 7. हांडवो को धीमी आंच पर ढककर कितनी देर पकाना चाहिए?
हांडवो को ढककर धीमी आंच पर पहली तरफ 2 से 3 मिनट और पलटने के बाद दूसरी तरफ लगभग 1 मिनट पकाना चाहिए।

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