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  "title": "अगरतला में बिजली नेटवर्क का कायाकल्प: 1,437 करोड़ रुपये की अंडरग्राउंड केबलिंग परियोजना की शुरुआत",
  "summary": "त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला में 1,437 करोड़ रुपये के भूमिगत विद्युत केबल नेटवर्क और रूफटॉप सोलर से जुड़ी नई योजना की आधारशिला रखी है।",
  "content": "अगरतला नगर निगम क्षेत्र में बिजली वितरण प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने गुरुवार को 1,437 करोड़ रुपये की लागत वाली अगरतला भूमिगत केबलिंग परियोजना का शिलान्यास किया। बड़दोवाली हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान में आयोजित समारोह के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए पारंपरिक भूमि पूजन किया गया। इसके साथ ही रूफटॉप सोलर पहल के अंतर्गत यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन यानी यूएलए परियोजना की भी औपचारिक शुरुआत की गई।\n\n2028 तक पूरा करने का लक्ष्य, तीन एजेंसियों को जिम्मा\nइस पूरी परियोजना का मुख्य मकसद अगरतला नगर निगम क्षेत्र से बिजली के लटकते ओवरहेड तारों को पूरी तरह हटाकर उन्हें जमीन के नीचे केबलों में बदलना है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने जानकारी दी कि इस व्यापक बुनियादी ढांचा परियोजना को 2028 तक पूरा करने की समयसीमा निर्धारित की गई है। जमीनी स्तर पर कार्यों को तेजी से और सुचारू रूप से लागू करने के लिए तीन अलग-अलग एजेंसियों को क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।\n\n \n\nआंधी-तूफान में बिजली गुल होने और दुर्घटनाओं से राहत\nअंडरग्राउंड केबल बिछने से अगरतला के निवासियों को बिजली कटौती की पुरानी समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर तेज आंधी और बारिश के दौरान पेड़ों के गिरने या शाखाओं के टूटने से ओवरहेड तार क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। जमीन के नीचे सुरक्षित केबल होने से इस तरह के व्यवधान समाप्त हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त, यह नया नेटवर्क बिजली चोरी रोकने, आग लगने के खतरों को कम करने और सड़कों पर आम नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत करने में भी सहायक साबित होगा। शहर के खुले आसमान में फैले बिजली के तारों का जाल हटने से अगरतला का शहरी स्वरूप भी बेहद सुंदर और साफ नजर आएगा।\n\nस्मार्ट ग्रिड और सड़क खुदाई रोकने के लिए आधुनिक तकनीक\nइस विद्युत नेटवर्क की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा। पूरे सिस्टम पर चौबीसों घंटे रीयल-टाइम नजर रखने के लिए स्मार्ट ग्रिड तकनीक और एक केंद्रीय स्मार्ट कंट्रोल रूम तैयार किया जाएगा। इसके अलावा, परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान शहरवासियों और सड़क यातायात को परेशानी से बचाने के लिए हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग तकनीक अपनाई जाएगी। इस उन्नत प्रणाली के जरिए बिना बड़े पैमाने पर सड़कें खोदे केबल बिछाने का काम किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n\nसमन्वित विकास के लिए यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन\nकेबलिंग कार्य के समानांतर शुरू की गई यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन योजना का मकसद शहर के अन्य उपयोगिता बुनियादी ढांचे के विकास में तालमेल बनाना है। रूफटॉप सौर ऊर्जा कार्यक्रम के तहत पेश की गई यह पहल विभिन्न नागरिक सेवाओं को बेहतर ढंग से जोड़ने में मदद करेगी। X पर लिखे संदेश में मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भूमिगत केबलिंग से बिजली आपूर्ति में रुकावटें घटेंगी, बिजली चोरी थमेगी और शहर के सौंदर्यीकरण को बढ़ावा मिलेगा।\n\nइसका आप पर असर\nअगरतला में रहने वाले नागरिकों को आंधी-तूफान के दौरान लगातार होने वाली बिजली कटौती और सड़क सुरक्षा खतरों से स्थाई मुक्ति मिलेगी।\n\n• भारत में: देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली वितरण को मौसम प्रतिरोधी और स्मार्ट ग्रिड आधारित बनाने के राष्ट्रीय प्रयासों को गति मिलेगी। अन्य राज्य भी सड़कों की खुदाई कम करने वाली ड्रिलिंग तकनीक और अंडरग्राउंड केबलिंग के मॉडल को अपना सकते हैं।\n• अगरतला में: अगरतला नगर निगम के निवासियों को आंधी में पेड़ गिरने से होने वाले घंटों के पावर कट से निजात मिलेगी। सड़कों पर झूलते नंगे तारों से आग और करंट लगने का खतरा खत्म होगा, जिससे पैदल यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी।\n• शहरी सुंदरता पर: शहर की मुख्य गलियों और बाजारों से तारों का फैला हुआ जाल हटने से अगरतला का दृश्य बदल जाएगा। पूरे इलाके का रूप अधिक साफ और व्यवस्थित नजर आएगा।\n• यातायात पर: हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग तकनीक के उपयोग से केबल बिछाने के दौरान सड़कों को पूरी तरह खोदा नहीं जाएगा। इससे दैनिक यात्रियों को भारी जाम या टूटी सड़कों की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपारंपरिक ओवरहेड बिजली तारों के कारण होने वाले भारी नुकसान, मौसम संबंधी रुकावटों और शहरी सुरक्षा चिंताओं के समाधान के लिए इस परियोजना को शुरू किया गया है।\n\n• मौसम से होने वाला व्यवधान: पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश और आंधी के दौरान पेड़ों की शाखाएं टूटने से खुले बिजली तार बार-बार क्षतिग्रस्त हो जाते थे। जमीन के नीचे केबल जाने से मौसम की मार से बिजली ग्रिड पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है।\n• सुरक्षा और विद्युत हानि: खुले ओवरहेड तारों के कारण शॉर्ट सर्किट, आग लगने और सीधे बिजली चोरी की घटनाएं आम थीं। अंडरग्राउंड केबलिंग इन अवैध कनेक्शनों को रोकती है और सार्वजनिक दुर्घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम करती है।\n• शहरी आधुनिकीकरण की आवश्यकता: अगरतला नगर निगम क्षेत्र में आधुनिक स्मार्ट ग्रिड और केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली की दरकार थी ताकि रियल-टाइम निगरानी हो सके। इस आधारभूत ढांचे को 2028 तक पूरा करने के लिए तीन जिम्मेदार एजेंसियों को लगाया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अगरतला अंडरग्राउंड केबलिंग प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है?\nइस परियोजना के लिए कुल 1,437 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।\n\n2. इस भूमिगत केबल परियोजना को पूरा करने की समयसीमा क्या है?\nमुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार इस पूरी परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।\n\n3. यह परियोजना किस क्षेत्र में लागू की जा रही है?\nयह योजना पूरे अगरतला नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले इलाकों में लागू की जा रही है।\n\n4. केबल बिछाने के दौरान सड़कों को नुकसान से कैसे बचाया जाएगा?\nसड़कों की व्यापक खुदाई से बचने और आवागमन को सुगम रखने के लिए हॉरिजॉन्टल डायरेक्शनल ड्रिलिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।\n\n5. केबलिंग परियोजना के साथ अन्य किस पहल की शुरुआत की गई है?\nरूफटॉप सौर ऊर्जा कार्यक्रम के तहत यूटिलिटी लेड एग्रीगेशन यानी यूएलए पहल की भी शुरुआत की गई है।",
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  "publishedAt": "2026-10-29",
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