त्रिपुरा के सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में कनेक्टिविटी मजबूत करे BSNL, सांसद बिप्लब कुमार देब की मांग सांसद बिप्लब कुमार देब ने बीएसएनएल से त्रिपुरा के सीमावर्ती और पहाड़ी इलाकों में टेलीकॉम नेटवर्क सुधारने को कहा है। उन्होंने कहा कि सीमा पर भारतीय सिम काम नहीं करते और पड़ोसी देश के सिग्नल अंदर तक आते हैं। पश्चिम त्रिपुरा लोकसभा क्षेत्र के सांसद बिप्लब कुमार देब ने भारत संचार निगम लिमिटेड से त्रिपुरा के दूरदराज के पहाड़ी और सीमावर्ती इलाकों में अपने टेलीकॉम ढांचे को बेहतर बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय निवासियों के रोजमर्रा के जीवन और देश की सुरक्षा दोनों दृष्टियों से एक मजबूत और भरोसेमंद नेटवर्क का होना बेहद जरूरी है। अगरतला में हुई महत्वपूर्ण टेलीकॉम एडवाइजरी कमेटी की बैठक यह पूरा मामला अगरतला के कमान चौमुहानी स्थित बीएसएनएल मुख्यालय में आयोजित एक टेलीकॉम एडवाइजरी कमेटी यानी टीएसी की बैठक के दौरान उठाया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में नेटवर्क कवरेज, बुनियादी ढांचे के विस्तार और पिछली बैठकों में उठाए गए विभिन्न मामलों पर विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में इस बात पर मंथन हुआ कि आम जनता को मिलने वाली टेलीकॉम सेवाओं में किस तरह की कमियां आ रही हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। सीमावर्ती इलाकों में भारतीय नेटवर्क की पहुंच और सुरक्षा चिंताएं चर्चा के दौरान सांसद ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास मौजूद गंभीर कनेक्टिविटी अंतरालों का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सीमा से सटे कई ऐसे हिस्से हैं जहां लगभग 10 किलोमीटर के दायरे तक भारतीय मोबाइल सिम कार्ड काम ही नहीं करते हैं। इसके विपरीत, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बांग्लादेशी नेटवर्क के सिग्नल भारतीय सीमा के अंदर लगभग 15 किलोमीटर की गहराई तक आसानी से पहुंच जाते हैं। बिप्लब कुमार देब ने कहा कि घरेलू नेटवर्क की इस नाकाफी पहुंच के कारण सीमावर्ती गांवों में रहने वाले आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, यह स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है। कमजोर और संवेदनशील पटरियों पर बीएसएनएल के सिग्नल मजबूत करने और नए टावर लगाने से न केवल स्थानीय लोगों का संवाद बेहतर होगा, बल्कि किसी भी तरह की जांच या घटना के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को भी बड़ी मदद मिलेगी। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि त्रिपुरा का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी 80 प्रतिशत क्षेत्र सीमा से जुड़ा हुआ है। इन इलाकों में ऐसी स्थिति बनी रहती है जहां हमारे सिम काम नहीं करते और पड़ोसी देश के नेटवर्क का दखल अंदर तक होता है, जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। पुरानी शिकायतों की समीक्षा और 5G रोलआउट पर सवाल बैठक में केवल सीमावर्ती नेटवर्क तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि अतीत में टीएसी की बैठकों में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं की भी गहन समीक्षा की गई। इनमें बीएसएनएल की अधोसंरचना, ग्राहक सेवा की गुणवत्ता, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और नेटवर्क के विस्तार से जुड़ी बातें शामिल थीं। सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक का मकसद उन मामलों की प्रगति का आकलन करना है जिन पर काम चल रहा है तथा उन मुद्दों की पहचान करना है जिन्हें केंद्र सरकार के स्तर पर उठाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, उन्होंने त्रिपुरा में 5G सेवाओं की शुरुआत की धीमी गति पर भी सवाल खड़े किए। हालांकि उन्होंने राज्य भर में बीएसएनएल द्वारा 4G सेवाओं के विस्तार किए जाने की बात को स्वीकार किया, लेकिन अधिकारियों से यह जानना चाहा कि 5G डिप्लॉयमेंट की वर्तमान स्थिति क्या है और इसकी गति तथा कवरेज को लेकर क्या योजना है। उन्होंने पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय रोमिंग पर सुरक्षा कारणों से लगी पुरानी पाबंदियों को भी याद किया और बताया कि हालांकि वे पाबंदियां बाद में हटा ली गईं, लेकिन उन्हें लागू होने में लंबा समय लग गया था। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्य के अलावा बीएसएनएल के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने सभी बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया। इसका आप पर असर त्रिपुरा के सीमावर्ती और पहाड़ी क्षेत्रों में बीएसएनएल नेटवर्क मजबूत होने से स्थानीय निवासियों को बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी मिलेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं दूर होंगी। • भारत में: देश के सीमावर्ती राज्यों में टेलीकॉम ढांचे के सुदृढ़ होने से सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी रखने में आसानी होती है। इससे सामरिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में सूचनाओं का आदान-प्रदान और अधिक सुरक्षित हो जाता है। • त्रिपुरा में: त्रिपुरा के 80 प्रतिशत सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को अब नेटवर्क गायब होने की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं और व्यापारियों को भी सुचारू डिजिटल सेवाओं का लाभ मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ सीमावर्ती क्षेत्रों में लंबे समय से घरेलू नेटवर्क की कमी और विदेशी सिग्नलों के प्रभाव के कारण यह मामला उठाया गया है। बुनियादी ढांचे की सुस्ती और भौगोलिक दूरियां इसके मुख्य कारण हैं। • भौगोलिक स्थितियां: त्रिपुरा का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है, जहां दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण निजी और सरकारी दोनों कंपनियों के लिए टावर लगाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है। • सिग्नल का अंतर: भारतीय टावरों की कम संख्या के कारण सीमा के उस पार से आने वाले मजबूत ट्रांसमिशन सिग्नल भारतीय भूभाग के अंदर तक आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। • पुरानी नीतियां: पूर्वोत्तर क्षेत्र में अतीत में सुरक्षा कारणों से कई प्रकार की टेलीकॉम और रोमिंग संबंधी पाबंदियां थीं, जिसके कारण नेटवर्क विस्तार की गति प्रभावित हुई थी। सवाल-जवाब 1. यह बैठक कहाँ आयोजित की गई थी? यह टेलीकॉम एडवाइजरी कमेटी की बैठक अगरतला के कमान चौमुहानी स्थित बीएसएनएल मुख्यालय में आयोजित की गई थी। 2. सांसद बिप्लब कुमार देब ने मुख्य रूप से क्या समस्या उठाई? उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में 10 किलोमीटर के दायरे तक भारतीय सिम काम नहीं करते जबकि विदेशी नेटवर्क सिग्नल 15 किलोमीटर अंदर तक आते हैं। 3. बैठक में कौन-कौन से सांसद शामिल हुए? इस बैठक में लोकसभा सांसद बिप्लब कुमार देब और राज्यसभा सांसद राजीव भट्टाचार्य ने हिस्सा लिया। 4. बीएसएनएल की किस सेवा के विस्तार पर सवाल उठाए गए? सांसद ने 4G विस्तार की सराहना करते हुए त्रिपुरा में 5G सेवाओं की शुरुआत और उसकी गति को लेकर अधिकारियों से स्पष्टता मांगी। https://trendkia.com/tripura/mp-biplab-deb-urges-bsnl-to-strengthen-connectivity-in-tripura-s-border-hilly-areas-39154 TrendKia — Har trend, sabse pehle.