त्रिपुरा में आदिवासी छात्रों के लिए नवंबर तक शुरू होंगे छह नए एकलव्य आवासीय स्कूल त्रिपुरा में जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों के लिए छह नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय नवंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। प्रवेश परीक्षा संपन्न हो चुकी है और कर्मचारियों की अस्थायी तैनाती को मंजूरी मिल गई है। पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए आवासीय शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य में छह नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय आगामी नवंबर महीने तक शुरू होने की पूरी संभावना है। इन नए परिसरों के शुरू होने के साथ ही राज्य में आदिवासी बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों को नई गति मिलेगी। वर्तमान में संचालित स्कूलों के अतिरिक्त मिलेंगी नई सीटें त्रिपुरा में पहले से ही 12 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय पूरी तरह से कार्यरत हैं। नए छह संस्थानों के जुड़ने के बाद राज्य में ऐसे विशेष आवासीय विद्यालयों की कुल संख्या बढ़कर 18 हो जाएगी। इन सभी संस्थानों का मुख्य उद्देश्य सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के छात्र-छात्राओं को बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ निःशुल्क और मानक आवासीय शिक्षा मुहैया कराना है। निर्माण कार्य लगभग पूरा और कर्मचारियों की अस्थायी व्यवस्था जनजातीय कल्याण निदेशक शुभाशीष दास के अनुसार, इन सभी छह नए परिसरों का मुख्य निर्माण कार्य समाप्त हो चुका है और केवल कुछ छोटे स्तर के अंतिम फिनिशिंग कार्य ही शेष बचे हैं। नए स्कूलों में नियमित नियुक्तियां पूरी होने तक शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए जनजातीय कल्याण विभाग ने एक व्यावहारिक समाधान निकाला है। विभाग ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन कार्यरत नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स से मौजूदा स्कूलों के शिक्षकों और अन्य कर्मियों को नए परिसरों में अस्थायी रूप से तैनात करने की अनुमति मांगी थी। इस प्रस्ताव को संबंधित प्राधिकरण से औपचारिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। जब तक नए पदों पर नियमित भर्तियां पूरी नहीं हो जातीं, तब तक प्रतिनियुक्ति की यह व्यवस्था लागू रहेगी। प्रवेश परीक्षा पूरी, नवंबर से कक्षाएं शुरू करने की तैयारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति व्यवस्था को हरी झंडी मिलने के बाद अब नवंबर तक सभी छह नए परिसरों में पढ़ाई शुरू कराने की योजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। आगामी सत्र के लिए छात्रों के चयन से जुड़ी प्रवेश परीक्षा पहले ही संपन्न कराई जा चुकी है, जिससे शैक्षणिक प्रक्रिया बिना किसी विलंब के शुरू हो सके। निर्माण लागत को लेकर नई निर्माण एजेंसियों को मंजूरी भविष्य के नए परिसरों के निर्माण को लेकर भी एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला हुआ है। सामान्य तौर पर ऐसे आवासीय परिसरों के निर्माण की जिम्मेदारी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी संभालता रहा है। हालांकि, निर्माण लागत में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए राज्य प्रशासन ने अन्य स्थापित निर्माण एजेंसियों को जोड़ने का विकल्प तलाशा। प्राधिकरण ने त्रिपुरा हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन बोर्ड जैसी एजेंसियों को आगामी परियोजनाओं के निर्माण कार्य में शामिल करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। शुभाशीष दास ने स्पष्ट किया कि जहां केंद्रीय एजेंसी का अनुमानित खर्च प्रति स्कूल 70 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है, वहीं संबंधित राष्ट्रीय संस्था प्रत्येक स्कूल के लिए 50 करोड़ रुपये मंजूर करती है। दूसरी ओर, स्थानीय आवास और निर्माण बोर्ड ने इसी स्तर के निर्माण को लगभग 54 करोड़ रुपये में पूरा करने का अनुमान लगाया है। मुंगियाकामी और दासदा में नए परिसरों के लिए 100 करोड़ का बजट आगामी विस्तार योजना के तहत खोवाई जिले के मुंगियाकामी और उत्तर त्रिपुरा जिले के दासदा में दो नए एकलव्य आवासीय परिसरों के लिए कुल 100 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी गई है। इसमें से प्रत्येक स्कूल के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इस स्वीकृत बजटीय सीमा से ऊपर होने वाले किसी भी अतिरिक्त खर्च को त्रिपुरा की राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। इसका आप पर असर त्रिपुरा में छह नए एकलव्य स्कूलों के शुरू होने से जनजातीय समुदाय के परिवारों और विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलेगा। • त्रिपुरा में: राज्य भर में सैकड़ों जनजातीय छात्रों को अपने गृह राज्य में ही गुणवत्तापूर्ण और मुफ्त आवासीय शिक्षा की सुविधा मिलेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूर-दराज के निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। • अभिभावकों पर प्रभाव: इन आवासीय स्कूलों में भोजन, आवास और शिक्षण सामग्री की व्यवस्था होने से परिवारों पर आर्थिक बोझ घटेगा। माता-पिता अपने बच्चों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के बेहतर शैक्षणिक माहौल दे सकेंगे। • आगामी सत्र की तैयारी: प्रवेश परीक्षा पहले ही हो चुकी है, जिससे चयनित विद्यार्थियों की कक्षाएं नवंबर से शुरू हो सकेंगी। जिन छात्रों ने परीक्षा दी है, वे जल्द ही परिणाम और दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। • बुनियादी ढांचे का विकास: खोवाई और उत्तर त्रिपुरा के सुदूर क्षेत्रों में नए स्कूल बनने से स्थानीय स्तर पर ढांचागत विकास तेज होगा। स्थानीय लोगों को रोजगार और सहयोगी सेवाओं के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे। ऐसा क्यों हुआ त्रिपुरा में एकलव्य स्कूलों के तेजी से विस्तार और निर्माण एजेंसियों में बदलाव के पीछे प्रशासनिक और वित्तीय कारण रहे हैं। • स्टाफ की तात्कालिक जरूरत: नए परिसरों का ढांचा तैयार होने के बाद नियमित भर्ती में समय लगने की संभावना थी, जिससे शैक्षणिक सत्र टल सकता था। इसी कारण प्रशासनिक स्तर पर मौजूदा स्कूलों से कर्मियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने का रास्ता चुना गया ताकि नवंबर से पढ़ाई शुरू हो सके। • बजट और निर्माण लागत का अंतर: राष्ट्रीय संस्था से प्रति स्कूल केवल 50 करोड़ रुपये का आवंटन मिलता है, जबकि केंद्रीय निर्माण एजेंसी का खर्च 70 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच रहा था। इस भारी अंतर की वजह से राज्य ने त्रिपुरा हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन बोर्ड जैसी स्थानीय संस्थाओं को विकल्प के रूप में शामिल करने का फैसला किया। • जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का अभाव: पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में रहने वाले आदिवासी समुदायों तक आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं पहुंचाना लंबे समय से प्राथमिकता रही है। राज्य के 12 मौजूदा स्कूलों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए नए परिसरों की स्थापना को जरूरी माना गया। सवाल-जवाब 1. त्रिपुरा में कितने नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं? त्रिपुरा में छह नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं, जिनके नवंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। 2. वर्तमान में त्रिपुरा में कितने एकलव्य स्कूल पहले से संचालित हैं? राज्य में पहले से ही 12 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय सुचारू रूप से चल रहे हैं। 3. नए स्कूलों के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की व्यवस्था कैसे की जाएगी? नियमित नियुक्तियां पूरी होने तक मौजूदा संचालित स्कूलों से शिक्षकों और सहायक कर्मियों को प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया जाएगा। 4. खोवाई और उत्तर त्रिपुरा में नए परिसरों के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई है? मुंगियाकामी और दासदा में बनने वाले दो परिसरों के लिए 50-50 करोड़ रुपये के हिसाब से कुल 100 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। 5. भविष्य के निर्माण कार्यों के लिए किस स्थानीय एजेंसी को शामिल करने की मंजूरी मिली है? भविष्य के एकलव्य स्कूलों के निर्माण कार्य के लिए त्रिपुरा हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन बोर्ड को शामिल करने की अनुमति दी गई है। https://trendkia.com/tripura/tripura-men-adivasi-chhatron-ke-lie-navnbara-taka-shuru-honge-chhaha-nae-eklavya-avasiya-skula-33848 TrendKia — Har trend, sabse pehle.