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  "title": "त्रिपुरा में बढ़ेगा दूध का उत्पादन, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन जोड़ेगी 10,000 किसान",
  "summary": "त्रिपुरा सरकार राज्य में दूध की किल्लत दूर करने और सप्लाई चेन सुधारने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की तकनीकी मदद ले रही है। गोमती सहकारी मिल्क यूनियन से 10,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।",
  "content": "त्रिपुरा में स्थानीय दुग्ध उत्पादन को नई गति देने और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए राज्य प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया है। वर्तमान में राज्य के भीतर दूध का उत्पादन उपभोक्ताओं की कुल जरूरतों से कम है, जिसके चलते डेयरी बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर उन्नत करने की योजना बनाई गई है। पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) के मंत्री सुधांशु दास ने गोमती सहकारी मिल्क यूनियन की बोर्ड बैठक के दौरान इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी, जहां दुग्ध आपूर्ति और प्रसंस्कृत उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।\n\nराष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड देगा तकनीकी सहयोग\nराज्य सरकार ने दुग्ध प्रसंस्करण, संग्रह और आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से तकनीकी सहायता मांगी है। इस पहल को संस्थागत रूप देने के लिए कुछ महीने पहले एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता त्रिपुरा सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुआ है। इस साझेदारी के माध्यम से वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी प्रबंधन और दूध संकलन की क्षमता को विस्तार दिया जा रहा है।\n\nमंत्री सुधांशु दास ने इस रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि त्रिपुरा में दूध और उससे जुड़े उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है क्योंकि राज्य में खपत मौजूदा उत्पादन से काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद और एनडीडीबी जैसी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं का मार्गदर्शन इस क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एनडीडीबी द्वारा उन्नत तकनीक, बुनियादी ढांचे और वितरण नेटवर्क के लिए संस्थागत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। हितधारकों से प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों को मिलाकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है ताकि पूरे राज्य में दूध की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।\n\nगोमती यूनियन का नेटवर्क होगा 10,000 किसानों तक विस्तृत\nदुग्ध आपूर्ति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए गोमती सहकारी मिल्क यूनियन ने अपने संगठनात्मक ढांचे को बड़ा करने की योजना बनाई है। गोमती सहकारी मिल्क यूनियन के अध्यक्ष रतन घोष ने बताया कि वर्तमान में 6,642 दुग्ध उत्पादक किसान यूनियन से सीधे जुड़े हुए हैं। संस्था ने इस संख्या को बढ़ाकर 10,000 किसानों तक पहुंचाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।\n\nग्रामीण स्तर पर दूध संकलन तंत्र को मजबूत करने के लिए बोर्ड 52 अतिरिक्त दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है। रतन घोष के अनुसार, यूनियन का प्राथमिक ध्यान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों और डेयरी किसानों को वित्तीय व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nत्रिपुरा में डेयरी क्षेत्र के विस्तार से राज्य के उपभोक्ताओं को ताजा दूध मिलेगा और हजारों ग्रामीण पशुपालकों को नियमित आय का सीधा साधन प्राप्त होगा।\n\n• त्रिपुरा में: राज्य के शहरी और ग्रामीण बाजारों में स्थानीय दूध और दुग्ध उत्पादों की कमी दूर होगी। उपभोक्ताओं को पैकेज्ड और प्रसंस्कृत डेयरी उत्पादों की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।\n• किसानों के लिए: गोमती मिल्क यूनियन से 10,000 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लगभग 3,358 नए डेयरी किसानों को संगठित बाजार और दूध का तय मूल्य मिल सकेगा।\n• नई समितियों का लाभ: ग्रामीण इलाकों में 52 नई दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां स्थापित की जाएंगी। गांव के पशुपालक अपने घर के पास ही दूध बेचकर बिचौलियों से बच सकेंगे।\n• सरकारी योजनाओं का फायदा: पशुपालकों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं सुचारू रूप से लागू की जाएंगी। पात्र किसानों को पशुपालन और चारे से जुड़ी सहायता आसानी से मिल सकेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nत्रिपुरा में उपभोक्ताओं द्वारा दूध और दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग के मुकाबले राज्य का आंतरिक उत्पादन काफी कम बना हुआ है। इस मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने संस्थागत और तकनीकी सुधारों की शुरुआत की है।\n\n• उत्पादन में कमी: राज्य की वर्तमान जनसंख्या और बाजार की आवश्यकताएं मौजूदा स्थानीय दुग्ध उत्पादन से काफी अधिक हैं। इसी अंतर को समाप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन बढ़ाने की योजना बनाई गई है।\n• तकनीकी और संस्थागत समर्थन: डेयरी क्षेत्र के आधुनिक प्रबंधन, प्रोसेसिंग और वितरण के लिए राज्य के पास पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत थी। इसी कारण राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ त्रिपक्षीय एमओयू किया गया है।\n• सहकारी ढांचे का विस्तार: मौजूदा समय में केवल 6,642 किसान संगठित सहकारी तंत्र का हिस्सा हैं, जो पर्याप्त आपूर्ति के लिए कम है। अधिक किसानों को जोड़ने और 52 नई समितियां बनाने से दूध संकलन का दायरा पूरे राज्य में बढ़ सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. त्रिपुरा सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसकी मदद ले रही है?\nत्रिपुरा सरकार ने दुग्ध उत्पादन, प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखला को सुधारने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से तकनीकी सहायता मांगी है।\n\n2. डेयरी विकास के लिए किस त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं?\nयह समझौता त्रिपुरा सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुआ है।\n\n3. गोमती सहकारी मिल्क यूनियन में वर्तमान में कितने किसान जुड़े हैं?\nयूनियन के अध्यक्ष रतन घोष के अनुसार, वर्तमान में 6,642 दुग्ध उत्पादक किसान इससे जुड़े हुए हैं।\n\n4. गोमती मिल्क यूनियन ने किसानों को जोड़ने का क्या लक्ष्य तय किया है?\nयूनियन ने अपने साथ जुड़े किसानों की संख्या को बढ़ाकर 10,000 करने का लक्ष्य रखा है।\n\n5. राज्य में कितनी नई दुग्ध सहकारी समितियां बनाने की योजना है?\nगोमती सहकारी मिल्क यूनियन के बोर्ड में 52 अतिरिक्त दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन पर चर्चा की जा रही है।",
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  "category": "त्रिपुरा",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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