त्रिपुरा में पुलिस ने पकड़ी 40 करोड़ रुपये की अवैध याबा टैबलेट, एक आरोपी गिरफ्तार त्रिपुरा पुलिस ने उत्तर त्रिपुरा जिले में एक बड़े अभियान के दौरान लगभग 50 किलोग्राम याबा टैबलेट जब्त की हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गई है और इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। त्रिपुरा पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान के तहत लगभग 50 किलोग्राम मेथामफेटामाइन टैबलेट बरामद की हैं, जिन्हें आमतौर पर याबा के नाम से जाना जाता है। इस जब्ती का कुल बाजार मूल्य करीब 40 करोड़ रुपये आंका गया है। पुलिस ने इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ की जा रही है। तलाशी अभियान और जब्ती यह बड़ी कार्रवाई बुधवार को उत्तर त्रिपुरा में पानीसागर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा एक विशेष अभियान के दौरान की गई। अधिकारियों ने पुख्ता सूचना के आधार पर यह कदम उठाया, जिससे मादक पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया राज्य के मुख्यमंत्री माणिक साहा, जिनके पास गृह विभाग का जिम्मा भी है, ने इस कार्रवाई को राज्य में अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी सफलता है और यह पुलिस तथा सुरक्षा बलों के प्रयासों को दर्शाता है जो युवाओं की रक्षा करने में जुटे हैं। मादक पदार्थों का रूट और तस्करी पुलिस के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, यह खेप म्यांमार में तैयार हुई थी और मिजोरम के रास्ते त्रिपुरा पहुंचाई गई थी। जांचकर्ताओं को संदेह है कि इस खेप को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके बांग्लादेश में तस्करी के जरिए भेजा जाना था। त्रिपुरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि राज्य की 109 किलोमीटर लंबी सीमा मिजोरम से मिलती है और बांग्लादेश के साथ इसकी 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जिस वजह से यह इलाका नशीली दवाओं की तस्करी के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट बन जाता है। याबा टैबलेट और क्षेत्रीय चिंताएं याबा टैबलेट में मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन और कैफीन जैसे तत्व पाए जाते हैं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में इनका अवैध व्यापार और सेवन बड़े पैमाने पर होता है, जिसमें बांग्लादेश और भारत भी शामिल हैं। यह ताजा जब्ती ऐसे समय में सामने आई है जब पूर्वोत्तर क्षेत्र को म्यांमार से आने वाले या वहां से गुजरने वाले नशीले पदार्थों के गलियारे के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर लगातार चिंताएं बनी हुई हैं। मिजोरम और मणिपुर की म्यांमार के साथ लंबी और ज्यादातर बिना बाड़ वाली सीमाएं हैं, जिन्हें तथाकथित गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र से तस्करी के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। सरकार की नीतियां और नशा मुक्ति केंद्र मुख्यमंत्री माणिक साहा पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी सरकार मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और उन्होंने अवैध कारोबार के खिलाफ कानून प्रवर्तन एजेंसियों को और कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने त्रिपुरा के सभी आठ जिलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की योजना का ऐलान किया है, जिसके तहत प्रत्येक सुविधा केंद्र के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास केंद्रीय मंत्रालय ने सि Sepahijala जिले के बिश्रामगंज में एक विशेष नशा मुक्ति केंद्र के लिए 198 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। आगे की जांच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद की गई इस खेप और गिरफ्तार किए गए आरोपी के तस्करी नेटवर्क के साथ संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए आगे की जांच तेजी से जारी है। इसका आप पर असर पूर्वोत्तर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और अवैध कारोबार पर पड़ेगा। • भारत में: देश भर में सीमावर्ती इलाकों से होने वाली ड्रग्स की तस्करी पर लगाम कसने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं, जिससे युवाओं को नशे के जाल से बचाने के प्रयासों को गति मिलेगी। • त्रिपुरा में: त्रिपुरा और आसपास के जिलों में अवैध ड्रग्स के नेटवर्क पर रोक लगेगी, और सरकार द्वारा चलाए जा रहे नए नशा मुक्ति केंद्रों से प्रभावित युवाओं और उनके परिवारों को इलाज व पुनर्वास में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह जब्ती भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की भौगोलिक स्थिति और म्यांमार से जुड़ी सीमाओं के कारण संभव हुई है, जो अंतरराष्ट्रीय तस्करों के लिए आसान ट्रांजिट रूट का काम करती हैं। • भौगोलिक स्थिति: त्रिपुरा की मिजोरम और बांग्लादेश के साथ लंबी सीमाएं हैं, जिनका उपयोग तस्कर म्यांमार के गोल्डन ट्रायंगल क्षेत्र से आने वाले मादक पदार्थों को आगे भेजने के लिए करते हैं। • सुरक्षा बल की कार्रवाई: पानीसागर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत की गई यह छापेमारी पुलिस और सुरक्षा बलों की उस निरंतर रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत खुफिया इनपुट के आधार पर अवैध नेटवर्क को तोड़ा जा रहा है। • सरकार की नीति: राज्य सरकार की नशीली दवाओं के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति और नए नशा मुक्ति केंद्रों के निर्माण की घोषणा इस समस्या से व्यापक स्तर पर निपटने के प्रयासों को आगे बढ़ाती है। सवाल-जवाब 1. त्रिपुरा में पुलिस ने कुल कितने मूल्य की याबा टैबलेट पकड़ी हैं? पुलिस ने लगभग 50 किलोग्राम याबा टैबलेट पकड़ी हैं, जिनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित मूल्य 40 करोड़ रुपये है। 2. यह जब्ती त्रिपुरा में किस स्थान पर की गई? यह जब्ती उत्तर त्रिपुरा जिले में पानीसागर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में की गई। 3. इस मामले में कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है? इस मामले में पुलिस ने अब तक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है और उससे पूछताछ की जा रही है। 4. याबा टैबलेट्स का मूल स्रोत कहां माना जा रहा है? पुलिस के अनुसार ये टैबलेट्स म्यांमार में उत्पन्न हुई थीं और मिजोरम के रास्ते त्रिपुरा लाई गई थीं। 5. त्रिपुरा सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों के लिए क्या योजना बनाई है? राज्य सरकार ने सभी आठ जिलों में नशा मुक्ति केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है और प्रत्येक सुविधा के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। https://trendkia.com/tripura/tripura-men-pulisa-ne-pakari-40-karora-rupaye-ki-avaidha-yaba-taibaleta-eka-aropi-giraphtara-32747 TrendKia — Har trend, sabse pehle.