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  "type": "article",
  "title": "त्रिपुरा में पूर्व उग्रवादियों की नाकेबंदी से दूसरे दिन भी ठप रहा रेल-सड़क यातायात",
  "summary": "पूर्व उग्रवादियों के संगठन की 72 घंटे की नाकेबंदी शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही, जिससे त्रिपुरा को देश से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग जाम हो गया और कई ट्रेनें रद्द या पुनर्निर्धारित करनी पड़ीं।",
  "content": "त्रिपुरा में शनिवार को लगातार दूसरे दिन भी सड़क और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। पूर्व उग्रवादियों के एक संगठन के आह्वान पर शुरू हुई 72 घंटे की नाकेबंदी थमने का नाम नहीं ले रही, जिससे राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य राजमार्ग जाम हो गया है और रेलवे को कई ट्रेनें रद्द, आंशिक रूप से बंद या पुनर्निर्धारित करनी पड़ी हैं।\n\nपश्चिम त्रिपुरा के तीन ठिकानों पर नाकेबंदी\nएक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, ऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी के बैनर तले सैकड़ों पूर्व उग्रवादियों ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के तीन अलग-अलग स्थानों हटाईकोटर, ब्रिगुदासबाड़ी और खोवाई चौमुहनी पर नाकेबंदी कर रखी है। सड़क और रेल यातायात पर भारी असर के बावजूद पुलिस का कहना है कि विरोध प्रदर्शन अब तक शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है।\n\nत्रिपुरा की जीवनरेखा माने जाने वाले राजमार्ग पर सबसे ज्यादा मार\nहटाईकोटर की नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ा है, जो त्रिपुरा को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग है। यह मार्ग व्यावहारिक रूप से बंद होने से पूर्वोत्तर का यह राज्य अपने प्रमुख सड़क संपर्क के जरिए मुख्य भूमि से कटा हुआ है।\n\nपटरियों पर कब्जे के बाद कई ट्रेनें रद्द\nब्रिगुदासबाड़ी में प्रदर्शनकारी सीधे रेलवे पटरियों पर उतर आए, जिससे राज्य में ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया। नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे (एनएफआर) ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया कि पटरियों पर कब्जे को देखते हुए उसने कई ट्रेनों को बीच रास्ते में ही समाप्त कर दिया, कुछ को रद्द किया और लंबी दूरी की ट्रेनों समेत कई सेवाओं का समय बदल दिया।\n\nजड़ में 2024 का शांति समझौता\nऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी सात आत्मसमर्पित उग्रवादी संगठनों के सदस्यों का प्रतिनिधित्व करती है और उसने शुक्रवार से यह 72 घंटे का आंदोलन शुरू किया। संगठन की मुख्य मांग 11 सूत्री चार्टर को पूरी तरह लागू करने की है, जिसके केंद्र में 2024 में हुआ त्रिपक्षीय शांति समझौता है। इसी समझौते के तहत उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री मणिक साहा की मौजूदगी में हथियार डाले थे। चार्टर की अन्य प्रमुख मांगों में आदिवासी समुदायों के लिए भूमि अधिकार और आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के खिलाफ दर्ज सभी लंबित मामलों को वापस लेना शामिल है।\n\nप्रशासन ने हटाईकोटर में की बातचीत\nपश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार ने बताया कि प्रशासन ने शुक्रवार को हटाईकोटर में पूर्व विद्रोही नेताओं के साथ शांति समझौते के लंबित बिंदुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगों पर सरकार काम करने को तैयार है और आगे जोड़ा, \"सरकार समयबद्ध तरीके से समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।\" कुमार ने बताया कि पूर्व उग्रवादी नेता सरकार के प्रस्तावों को अपने काडर के सामने रखने पर सहमत हुए हैं और जल्द ही प्रशासन को अपना जवाब देंगे।\n\n72 घंटे की यह नाकेबंदी अभी जारी है, ऐसे में त्रिपुरा के लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शुक्रवार की बातचीत किसी हल तक पहुंचती है या नहीं, ताकि राज्य के सड़क और रेल मार्गों पर सामान्य आवाजाही बहाल हो सके।\n\nइसका आप पर असर\nसबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है जो फिलहाल सड़क या रेल मार्ग से त्रिपुरा आ-जा रहे हैं, क्योंकि कई ट्रेनें रद्द हैं और राज्य का मुख्य राजमार्ग व्यावहारिक रूप से बंद है।\n\n• भारत में: नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे नेटवर्क से गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों को बीच में समाप्त, रद्द या पुनर्निर्धारित किया गया है, इसलिए प्रभावित रूट पर बुकिंग करा चुके यात्रियों को स्टेशन जाने से पहले ट्रेन की स्थिति जरूर देख लेनी चाहिए।\n• त्रिपुरा में: हटाईकोटर पर असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से राज्य सड़क मार्ग से देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है, इसलिए बाहर जाने की योजना बना रहे या सड़क मार्ग से सामान की आपूर्ति की उम्मीद कर रहे लोगों को 72 घंटे की नाकेबंदी खत्म होने तक देरी के लिए तैयार रहना चाहिए।\n• रोजाना आने-जाने वालों के लिए: खोवाई चौमुहनी और ब्रिगुदासबाड़ी से रोजाना गुजरने वाले लोगों को घूम कर जाना पड़ सकता है या देरी झेलनी पड़ सकती है।\n• कारोबारियों के लिए: राज्य में माल की आवाजाही काफी हद तक इसी राजमार्ग पर निर्भर है, इसलिए ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों को नाकेबंदी जारी रहने तक डिलीवरी में देरी का हिसाब रखना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. त्रिपुरा में यातायात क्यों बाधित है?\nऑल रिटर्नीज़ रिहैबिलिटेशन कमेटी की 72 घंटे की नाकेबंदी के तहत शुक्रवार से सड़कों और रेलवे पटरियों को जाम किया गया है।\n\n2. नाकेबंदी किन जगहों पर की गई है?\nपश्चिम त्रिपुरा जिले के हटाईकोटर, ब्रिगुदासबाड़ी और खोवाई चौमुहनी में नाकेबंदी की गई है।\n\n3. ट्रेनों पर क्या असर पड़ा है?\nब्रिगुदासबाड़ी में पटरियों पर कब्जे के बाद नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे ने कई ट्रेनें रद्द, बीच में समाप्त या पुनर्निर्धारित कर दी हैं, जिनमें लंबी दूरी की ट्रेनें भी शामिल हैं।\n\n4. प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे हैं?\nवे 11 सूत्री चार्टर को लागू करने की मांग कर रहे हैं, जिसमें 2024 का शांति समझौता, आदिवासी समुदायों के लिए भूमि अधिकार और लंबित मामलों की वापसी शामिल है।\n\n5. क्या सरकार ने कोई जवाब दिया है?\nपश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार ने शुक्रवार को हटाईकोटर में पूर्व विद्रोही नेताओं से बातचीत की और कहा कि सरकार कुछ मांगों पर काम करने को तैयार है।\n\n6. क्या असम-अगरतला राजमार्ग पूरी तरह बंद है?\nहटाईकोटर की नाकेबंदी से त्रिपुरा को देश से जोड़ने वाला यह मुख्य राजमार्ग बुरी तरह प्रभावित है।",
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  "category": "त्रिपुरा",
  "publishedAt": "2026-09-05",
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    "त्रिपुरा नाकेबंदी",
    "पूर्व उग्रवादी",
    "असम-अगरतला हाईवे",
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