सड़क हादसों में होने वाली मौतों पर त्रिपुरा में लगी लगाम, सुशांत चौधरी ने साझा किए ताजा आंकड़े त्रिपुरा में सड़क दुर्घटनाओं के चलते जान गंवाने वाले नागरिकों की संख्या में निरंतर कमी दर्ज की जा रही है, जहां वर्ष 2025 में यह आंकड़ा घटकर 157 रह गया। पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में आवागमन को सुरक्षित बनाने की दिशा में चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। बीते तीन वर्षों के दौरान राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। परिवहन मंत्री सुशांत चौधरी ने स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित एक विशेष सड़क सुरक्षा जागरूकता एवं संवेदीकरण कार्यक्रम में इन आंकड़ों का ब्योरा सामने रखा। उनके अनुसार, परिवहन विभाग और राज्य पुलिस के बीच बेहतर तालमेल, सघन चेकिंग अभियान और सुरक्षा नियमों की निरंतर निगरानी से यह सुधार संभव हुआ है। तीन वर्षों के दौरान हादसों और मौतों का लेखा-जोखा विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में त्रिपुरा की सड़कों पर कुल 577 दुर्घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिनमें 261 लोगों की जान गई थी। इसके अगले साल 2024 में हादसों का आंकड़ा 578 रहा, जबकि जान गंवाने वालों की संख्या गिरकर 226 पर आ गई। सुधार का यह सिलसिला वर्ष 2025 में भी बना रहा, जब पूरे राज्य में सड़क हादसों की संख्या घटकर 527 हो गई और इनमें जान गंवाने वालों की तादाद सिमटकर 157 रह गई। चालू वर्ष की स्थिति स्पष्ट करते हुए परिवहन मंत्री ने बताया कि इस साल अगस्त महीने तक सड़क दुर्घटनाओं में 134 लोगों की मृत्यु दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि केवल दुर्घटनाएं रोकना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि संकट के समय पीड़ितों को तुरंत राहत और उचित इलाज दिलाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के जरिए घायलों और प्रभावित परिवारों की हरसंभव मदद की जा रही है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई सड़कों पर मनमानी और नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ भी प्रशासनिक शिकंजा कसा गया है। विभागीय जांच के दौरान 524 ऐसे वाहन चिन्हित किए गए जिन पर गैर-मानक नंबर प्लेट लगी हुई थीं। इनमें से 485 मामलों में तुरंत चालान काटे गए, जिससे 2 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा, निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले अन्य 39 वाहन स्वामियों को औपचारिक नोटिस जारी किए गए हैं। संकट में जीवन बचाने वाली तीन प्रमुख केंद्रीय योजनाएं जागरूकता सत्र के दौरान केंद्र सरकार की तीन महत्वपूर्ण पहलों पर विस्तृत चर्चा हुई, जिनमें राह-वीर, पीएम-राहत और हिट-एंड-रन मुआवजा योजना शामिल हैं। पूर्व में 'गुड सेमेरिटन' नाम से जानी जाने वाली राह-वीर योजना के तहत, यदि कोई नागरिक सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अत्यंत नाजुक यानी गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंचाता है, तो उसे 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया जाता है। नियमों के तहत ऐसे मददगारों को पुलिस की अनावश्यक पूछताछ या परेशानी से भी कानूनी संरक्षण प्राप्त है। दूसरी ओर, पीएम-राहत योजना के जरिए सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को निर्धारित शर्तों के तहत 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। वहीं हिट-एंड-रन मुआवजा योजना के अंतर्गत अज्ञात वाहन की टक्कर से प्रभावित पीड़ितों अथवा उनके परिजनों को वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसकी राशि मृत्यु या गंभीर चोट की गंभीरता के आधार पर तय होती है। जन भागीदारी से स्थायी बदलाव की अपील योजनाओं के बावजूद मदद के लिए आगे आने वाले नागरिकों की संख्या पर चिंता जताते हुए सुशांत चौधरी ने कहा कि हादसों के अनुपात में अब भी काफी कम लोग मदद के लिए सामने आ रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि केवल वर्ष 2026 के जुलाई और अगस्त महीनों में ही 413 हादसे दर्ज किए गए, जो समाज में बड़े पैमाने पर सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करते हैं। उन्होंने पंचायत समिति अध्यक्षों, जिला परिषद सदस्यों और नगर निकायों के अध्यक्षों तथा उपाध्यक्षों से आग्रह किया कि वे इन जीवनरक्षक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी अपने-अपने क्षेत्रों के हर नागरिक तक पहुंचाएं। उनका कहना था कि सड़क सुरक्षा का संदेश किसी वार्षिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि जन भागीदारी के जरिए इसे एक निरंतर चलने वाले जन आंदोलन में बदला जाना चाहिए। इसका आप पर असर त्रिपुरा में सड़क सुरक्षा उपायों की सख्ती और दुर्घटना राहत योजनाओं के प्रसार से आम नागरिकों को बेहतर सुरक्षा और त्वरित चिकित्सा सहायता प्राप्त हो सकेगी। • भारत में: केंद्र सरकार की राह-वीर योजना सड़क हादसे में घायल किसी भी व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार को 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार और कानूनी सुरक्षा देती है। इसके साथ ही पीएम-राहत के तहत गंभीर रूप से घायल व्यक्ति 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार का लाभ उठा सकते हैं। • त्रिपुरा में: राज्य में नंबर प्लेट और वाहन मानकों की सघन जांच के चलते चालकों को अपने वाहनों पर नियमसम्मत नंबर प्लेट सुनिश्चित करनी होगी, अन्यथा उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। स्थानीय निवासियों के लिए दुर्घटना के समय त्वरित अस्पताल पहुंचाने और मुआवजे के नए नियमों की जानकारी होना जीवनरक्षक साबित होगा। • वाहन चालकों के लिए: ट्रैफिक पुलिस द्वारा गैर-मानक नंबर प्लेटों पर 2 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है, इसलिए नियमों की अनदेखी पर भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। समय रहते वाहनों के दस्तावेज और नंबर प्लेट दुरुस्त रखने से अनावश्यक चालान से बचा जा सकता है। • अज्ञात वाहन हादसों के पीड़ितों के लिए: हिट-एंड-रन के मामलों में घायल होने या मृत्यु की स्थिति में पीड़ित अथवा उनके आश्रित सरकारी मुआवजे का दावा कर सकते हैं। इसके लिए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय निकायों से संपर्क कर आवेदन किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ त्रिपुरा में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों के आंकड़ों में आई कमी कई विभागों के संयुक्त प्रयासों और सख्त निगरानी तंत्र का परिणाम है। • प्रशासनिक समन्वय और निगरानी: परिवहन विभाग और राज्य पुलिस के बीच संयुक्त अभियानों ने प्रमुख सड़कों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया। नियमों की अनदेखी पर त्वरित चालान और नोटिस जारी करने से वाहन चालकों में अनुशासन बढ़ा। • कल्याणकारी और प्रोत्साहन योजनाएं: राह-वीर और पीएम-राहत जैसी योजनाओं ने सड़क पर घायल व्यक्तियों को शुरुआती अहम पलों में चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए नागरिकों और अस्पतालों को प्रेरित किया। कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने से समय पर जान बचाना संभव हुआ। • सार्वजनिक जागरूकता की निरंतरता: प्रशासन ने सड़क सुरक्षा अभियानों को केवल औपचारिक मंचों तक सीमित न रखकर पंचायतों और स्थानीय निकायों के जरिए जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। हालांकि, जुलाई और अगस्त 2026 में 413 हादसे दर्ज होने से साफ है कि जागरूकता के स्तर को अभी और व्यापक बनाने की आवश्यकता बनी हुई है। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2025 में त्रिपुरा में सड़क हादसों में कितने लोगों की जान गई? वर्ष 2025 के दौरान राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 157 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई, जो कि 2023 के 261 और 2024 के 226 से काफी कम है। 2. चालू वर्ष में अगस्त महीने तक सड़क दुर्घटनाओं में कितनी मौतें हुई हैं? परिवहन मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अगस्त माह तक सड़क हादसों में कुल 134 लोगों की जान जा चुकी है। 3. राह-वीर योजना के तहत मददगार व्यक्ति को क्या लाभ मिलता है? सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले नागरिक को 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार और अनावश्यक पुलिस पूछताछ से संरक्षण मिलता है। 4. पीएम-राहत योजना के तहत इलाज के लिए कितनी सहायता राशि निर्धारित है? इस योजना की निर्धारित शर्तों के तहत सड़क दुर्घटना में घायल पात्र व्यक्तियों को 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। 5. गैर-मानक नंबर प्लेटों के खिलाफ विभाग ने क्या कार्रवाई की है? परिवहन विभाग ने 524 गैर-मानक नंबर प्लेटें पकड़ीं, जिनमें 485 मामलों में चालान काटकर 2 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया और 39 को नोटिस भेजे गए। 6. जुलाई और अगस्त 2026 में त्रिपुरा में कुल कितने सड़क हादसे दर्ज हुए? मंत्री सुशांत चौधरी के अनुसार, वर्ष 2026 के जुलाई और अगस्त महीनों के दौरान ही राज्य में 413 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। https://trendkia.com/tripura/tripura-sees-decline-in-road-accident-fatalities-over-years-sushanta-chowdhury-36519 TrendKia — Har trend, sabse pehle.