वर्ष 2025-26 में त्रिपुरा के प्राथमिक स्कूलों में शून्य हुआ ड्रॉपआउट रेट, मुख्यमंत्री माणिक साहा ने दी जानकारी त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने घोषणा की है कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में राज्य के प्राथमिक स्कूलों का ड्रॉपआउट रेट शून्य हो गया है, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह घटकर 10.40 प्रतिशत पर आ गया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान त्रिपुरा के प्राथमिक विद्यालयों ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए शून्य प्रतिशत ड्रॉपआउट रेट दर्ज किया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस और उल्लास मेला 2026 के अवसर पर राज्य के इन शैक्षणिक आंकड़ों को साझा किया। यह ऐतिहासिक सफलता प्राथमिक स्तर पर बच्चों में पढ़ने और लिखने की बुनियादी क्षमता को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए गए निरंतर अभियानों का नतीजा है। माध्यमिक शिक्षा में सुधार और ड्रॉपआउट में गिरावट प्राथमिक स्तर की सफलता के साथ-साथ त्रिपुरा में माध्यमिक कक्षाओं के छात्रों को स्कूलों से जोड़े रखने में भी बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों में ड्रॉपआउट की दर वर्ष 2013-14 के 25.51 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 10.40 प्रतिशत पर आ गई है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों के भीतर माध्यमिक स्तर के ड्रॉपआउट रेट को कम से कम स्तर पर लाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरे स्कूली तंत्र में छात्रों के एक कक्षा से अगली कक्षा में जाने की दर (ट्रांजिशन रेट) को बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में स्कूलों का विलय और आवासीय विद्यालय दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद कम छात्र संख्या वाले स्कूलों की चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार एक नई रणनीति पर काम कर रही है। जिन विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम है, उनका आपस में विलय किया जाएगा। इसके साथ ही, दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवासीय विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और लंबी दूरी के कारण कोई भी बच्चा प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा अधूरी न छोड़े। उल्लास योजना के तहत वयस्क साक्षरता और जीवनपर्यंत शिक्षा त्रिपुरा में बच्चों की स्कूली शिक्षा के साथ-साथ वयस्कों को साक्षरों से जोड़ने के लिए वर्ष 2022 से उल्लास यानी नव भारत साक्षरता कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के तहत वयस्क शिक्षार्थियों को केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि वित्तीय साक्षरता, बाजार के व्यावहारिक ज्ञान, स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी जानकारी भी दी जाती है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि वर्ष 2026 के दौरान नव-शिक्षार्थियों के लिए कई नए और प्रभावी तौर-तरीके अपनाए गए हैं, जिनसे उनके दैनिक जीवन में बदलाव आ रहा है। वित्तीय साक्षरता, बाजार अध्ययन और स्वच्छता अभियान वयस्क साक्षरता अभियान के तहत नव-शिक्षार्थियों को रोजमर्रा के कामकाज में सक्षम बनाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वित्तीय साक्षरता मॉड्यूल के अंतर्गत वयस्कों को बैंक जमा फॉर्म भरना, चेकबुक का उपयोग करना और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाना सिखाया जा रहा है। इसके अलावा, व्यावहारिक बाजार अध्ययन के माध्यम से दैनिक खरीदारी, बिक्री और कीमतों की तुलना जैसी गतिविधियों के जरिए गणित और पढ़ने का अभ्यास कराया जा रहा है। वहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हाथ धोने के सही तरीकों, व्यक्तिगत सफाई और स्वच्छता पर व्यावहारिक प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इसका आप पर असर त्रिपुरा में प्राथमिक स्कूल ड्रॉपआउट का खत्म होना शिक्षा और साक्षरता सुधार का एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसे देश के अन्य राज्य भी अपना सकते हैं। • भारत में: त्रिपुरा के इस मॉडल से अन्य राज्य सीख लेकर अपने प्राथमिक और प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रमों को बेहतर बना सकते हैं। बुनियादी साक्षरता पर ध्यान देने से देश भर में ग्रामीण और शहरी शिक्षा के बीच का अंतर कम करने में मदद मिलेगी। • त्रिपुरा में: राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को आधुनिक आवासीय विद्यालयों की सुविधा मिलेगी। कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के विलय से बच्चों को बेहतर बुनियादी ढांचा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी। • वयस्क शिक्षार्थियों के लिए: उल्लास कार्यक्रम के तहत नए शिक्षार्थियों को वित्तीय साक्षरता और बैंकिंग सेवाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा। इससे वयस्क नागरिक चेकबुक, जमा पर्ची और बाजार में खरीदारी जैसे कार्य खुद आसानी से कर सकेंगे। • स्वास्थ्य और स्वच्छता पर असर: स्वच्छता और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों से ग्रामीण परिवारों में साफ-सफाई की आदतें मजबूत होंगी। हाथ धोने और स्वच्छता के सही तरीकों से संक्रामक बीमारियों को रोकने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ त्रिपुरा में प्राथमिक स्तर पर शून्य प्रतिशत ड्रॉपआउट दर हासिल होना कई वर्षों की रणनीतिक नीतियों और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने के प्रयासों का परिणाम है। राज्य सरकार ने भौगोलिक चुनौतियों और साक्षरता की कमी को दूर करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाए। • बुनियादी साक्षरता पर जोर: सभी प्राथमिक विद्यालयों में बुनियादी पढ़ने और लिखने की क्षमता को मजबूत करने पर निरंतर ध्यान दिया गया। शुरुआती स्तर पर बेहतर समझ विकसित होने से बच्चों ने बीच में पढ़ाई छोड़ना बंद कर दिया। • स्कूलों का विलय और आवासीय व्यवस्था: दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में कम छात्र संख्या वाले प्राथमिक स्कूलों को पुनर्गठित किया गया। बिखरे हुए छोटे स्कूलों को मिलाकर आधुनिक सुविधाओं से लैस आवासीय विद्यालय बनाने की योजना बनाई गई। • उल्लास योजना का क्रियान्वयन: वर्ष 2022 से लागू उल्लास कार्यक्रम के तहत वयस्कों और नए साक्षरों को दैनिक जीवन से जुड़ी साक्षरता दी गई। वित्तीय साक्षरता और बाजार अध्ययन जैसे व्यावहारिक विषयों ने परिवारों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाई। • माध्यमिक स्तर पर निरंतर सुधार: वर्ष 2013-14 में कक्षा 9 और 10 का ड्रॉपआउट रेट 25.51 प्रतिशत था, जो 2025-26 में घटकर 10.40 प्रतिशत रह गया। पिछले दशक में किए गए इन सुधारों ने पूरे स्कूली तंत्र की ट्रांजिशन दर को बेहतर बनाया। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2025-26 में त्रिपुरा के प्राथमिक स्कूलों का ड्रॉपआउट रेट कितना दर्ज किया गया? त्रिपुरा में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दौरान प्राथमिक स्तर पर शून्य प्रतिशत ड्रॉपआउट रेट दर्ज किया गया है। 2. त्रिपुरा में माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) का ड्रॉपआउट रेट कितना कम हुआ है? कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट रेट 2013-14 के 25.51 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 10.40 प्रतिशत पर आ गया है। 3. आगामी वर्षों में माध्यमिक शिक्षा ड्रॉपआउट रेट को लेकर क्या लक्ष्य रखा गया है? राज्य सरकार ने अगले 3 से 4 वर्षों के भीतर माध्यमिक स्तर के ड्रॉपआउट रेट को न्यूनतम स्तर तक लाने का लक्ष्य रखा है। 4. ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के लिए क्या योजना है? सरकार बहुत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का विलय करेगी और दूरदराज के इलाकों में आधुनिक आवासीय विद्यालय स्थापित करेगी। 5. त्रिपुरा में उल्लास कार्यक्रम कब से लागू है और इसका क्या उद्देश्य है? त्रिपुरा में उल्लास (नव भारत साक्षरता कार्यक्रम) 2022 से लागू है, जिसका उद्देश्य वयस्कों को जीवनपर्यंत शिक्षा, वित्तीय साक्षरता और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देना है। 6. उल्लास योजना के तहत नव-शिक्षार्थियों को कौन से व्यावहारिक कौशल सिखाए जा रहे हैं? इसके तहत नव-शिक्षार्थियों को बैंकिंग सेवाओं जैसे चेकबुक का उपयोग, डिपॉजिट फॉर्म भरना, बाजार से खरीदारी और साफ-सफाई के व्यावहारिक तरीके सिखाए जा रहे हैं। https://trendkia.com/tripura/varsha-2025-26-men-tripura-ke-prathamika-skulon-men-shunya-hua-dropaauta-reta-mukhyamntri-manik-saha-ne-di-janakari-30319 TrendKia — Har trend, sabse pehle.