छोटे पर्दे का साम्राज्य खड़ा करने दफ्तर में ही सोती थीं एकता कपूर, काम के जुनून में छह महीने नहीं देखा था घर मशहूर टीवी और फिल्म निर्माता एकता कपूर ने अपने शुरुआती संघर्ष पर खुलकर बात करते हुए बताया कि धारावाहिकों के निर्माण के दौरान वह लगातार छह महीने तक घर नहीं लौटी थीं और दफ्तर को ही अपना ठिकाना बना लिया था। भारतीय टेलीविजन जगत पर लंबे समय तक एकतरफा दबदबा कायम रखने वाली मशहूर निर्माता एकता कपूर की सफलता के पीछे एक कड़ा और थका देने वाला संघर्ष छिपा है। दिग्गज अभिनेता जितेंद्र की बेटी होने के बावजूद उन्होंने पारिवारिक शोहरत के सहारे आसान राह चुनने के बजाय खुद जमीन से काम शुरू करने का फैसला किया। फिल्मों की चमक-दमक से अलग हटकर उन्होंने छोटे पर्दे को अपनी प्राथमिक कर्मभूमि बनाया और दिन-रात एक करके टीवी इंडस्ट्री में अपना मजबूत साम्राज्य खड़ा किया। बाद में फिल्मों के निर्माण में भी अपनी अमिट पहचान बनाने वाली निर्माता ने एक हालिया बातचीत के दौरान इस पूरे सफर की अनसुनी चुनौतियों को साझा किया। काम के भारी दबाव के बीच दफ्तर ही बन गया था आशियाना रणवीर अल्लाहबादिया के साथ हुई एक खास बातचीत में एकता कपूर ने खुलासा किया कि जब वह एक साथ कई धारावाहिकों के निर्माण में जुटी थीं, तब उनका जीवन पूरी तरह काम के इर्द-गिर्द सिमट गया था। लोग बाहर से सिर्फ उनकी कामयाबी और रसूख देखते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे की हकीकत बेहद अलग थी। उन्होंने बताया कि काम के चरम दौर में वह लगातार 6 महीने तक अपने घर नहीं जा सकी थीं। दफ्तर ही उनका घर बन गया था और वहीं उनका सारा वक्त बीतता था। उन्होंने दफ्तर में ही अपना टूथब्रश तक रख लिया था ताकि किसी भी बुनियादी जरूरत के लिए काम छोड़कर बाहर न जाना पड़े। हर एपिसोड के संपादन पर खुद रखती थीं पैनी नजर जब उनसे पूछा गया कि एक साथ इतने सारे धारावाहिकों के संचालन और हर शो की गुणवत्ता पर नजर रखना कैसे संभव हो पाता था, तो उन्होंने अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या की दास्तान सुनाई। निर्माता ने बताया कि वह अपने ऑफिस के निचले हिस्से में फर्श पर ही सो जाया करती थीं। जैसे ही टीम किसी शो के नए एपिसोड का संपादन पूरा करती, वह तुरंत ऊपर जाकर खुद पूरा फुटेज देखती थीं। संपादन की बारीकियों को तसल्ली से जांचने के बाद वह वापस नीचे आकर सो जाती थीं। अपने हर शो के एक-एक एपिसोड पर उनकी व्यक्तिगत निगरानी ही उनकी सफलता की मुख्य कुंजी बनी। आधी रात घर लौटने पर मां ने बरसाए थे फूल अपने इसी व्यस्त जीवन का एक बेहद दिलचस्प और भावुक किस्सा साझा करते हुए उन्होंने अपनी मां शोभा कपूर से जुड़ा वाकया सुनाया। महीनों तक दफ्तर में डेरा डाले रहने के बाद एक दिन उन्होंने रात को करीब 11 बजे अपनी मां को फोन किया और बताया कि वह उस रात सोने के लिए घर आ रही हैं। महीनों बाद यह खबर सुनकर उनकी मां ने तंज भरे प्यार से पूछा कि आखिर वह इस सूचना का क्या करें। इस पर एकता ने हंसते हुए अपनी मां से कहा कि वह उनके स्वागत में फूल बरसाएं। जब वह आधी रात घर पहुंचीं, तो वाकई उनकी मां शोभा कपूर ने दरवाजे पर उन पर फूल बरसाकर उनका स्वागत किया। टीवी इतिहास को दिए कई यादगार और लोकप्रिय धारावाहिक सालों की इस अथक साधना और समर्पण का ही परिणाम रहा कि उन्होंने भारतीय टेलीविजन को कई ऐसे धारावाहिक दिए जिन्होंने टीआरपी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। उनके प्रोडक्शन हाउस ने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'कसौटी जिंदगी की', 'कुमकुम भाग्य', 'नागिन', 'जोधा अकबर' और 'बड़े अच्छे लगते हैं' जैसे ऐतिहासिक धारावाहिक घर-घर तक पहुंचाए। टीवी पर आने वाले ज्यादातर ब्लॉकबस्टर धारावाहिकों की कमान उनके हाथों में रही, जिसने उन्हें इंडस्ट्री में निर्विवाद रूप से अग्रणी स्थान दिलाया। ऐसा क्यों हुआ एकता कपूर के इस कड़े संघर्ष और दफ्तर में लंबे समय तक रुकने की मुख्य वजह एक साथ कई दैनिक धारावाहिकों का निर्माण और प्रसारण संभालना था। उस दौर में टेलीविजन उद्योग में अत्यधिक प्रतिस्पर्धा थी और हर शो की गुणवत्ता बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती थी। • दैनिक धारावाहिकों का भारी काम: टीवी पर हर दिन नए एपिसोड का प्रसारण होना होता था, जिसके चलते संपादन और निर्माण की समयसीमा बेहद सख्त थी। एकता कपूर अपने हर शो के संपादन पर खुद नजर रखती थीं, जिससे समय बचाने के लिए दफ्तर में ही रहना जरूरी हो गया था। • पारिवारिक पहचान से अलग राह: अभिनेता जितेंद्र की बेटी होने के बावजूद उन्होंने फिल्मी मदद लेने के बजाय छोटे पर्दे पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की ठानी थी। इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए उन्हें साधारण से कहीं अधिक मेहनत झोंकनी पड़ी। • गुणवत्ता पर व्यक्तिगत नियंत्रण: उन्होंने अपने किसी भी शो के एपिसोड को बिना खुद देखे ऑन-एयर जाने की अनुमति नहीं दी। देर रात होने वाले संपादन के कारण घर जाने और आने का समय बचाने के लिए उन्होंने वहीं रातें बिताने का रास्ता चुना। सवाल-जवाब 1. एकता कपूर लगातार 6 महीने तक घर क्यों नहीं गई थीं? वह एक साथ कई धारावाहिकों के निर्माण में जुटी थीं और समय बचाने के लिए उन्होंने दफ्तर में ही रहना और सोना शुरू कर दिया था। 2. दफ्तर में एकता कपूर की रातें कैसे बीतती थीं? वह ऑफिस के निचले हिस्से में सोती थीं और जैसे ही किसी एपिसोड का एडिट खत्म होता, ऊपर जाकर उसे देखकर वापस सोने चली जाती थीं। 3. एकता कपूर ने इस संघर्ष का खुलासा किस मंच पर किया? उन्होंने यह बात रणवीर अल्लाहबादिया के शो पर बातचीत के दौरान साझा की। 4. घर लौटने पर उनकी मां शोभा कपूर ने क्या किया था? जब एकता कपूर ने मजाक में अपनी मां से फूल बरसाने को कहा, तो देर रात घर पहुंचने पर शोभा कपूर ने वास्तव में उन पर फूल बरसाए थे। 5. एकता कपूर के प्रमुख लोकप्रिय टीवी धारावाहिक कौन से रहे हैं? उनके प्रसिद्ध शोज में 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी', 'कसौटी जिंदगी की', 'कुमकुम भाग्य', 'नागिन', 'जोधा अकबर' और 'बड़े अच्छे लगते हैं' शामिल हैं। प्रेरणा और सबक एकता कपूर का यह सफर दर्शाता है कि विशेषाधिकार प्राप्त पृष्ठभूमि से आने के बावजूद बिना वास्तविक मेहनत और समर्पण के कोई भी व्यक्ति अपनी स्वतंत्र पहचान नहीं बना सकता। • काम के प्रति पूर्ण समर्पण: किसी भी क्षेत्र में शीर्ष पर पहुंचने के लिए बुनियादी स्तर पर अत्यधिक पसीना बहाना पड़ता है। उन्होंने काम में समय बचाने के लिए दफ्तर में ही रहने का कठोर फैसला किया, जो उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है। • विशेषाधिकार पर निर्भर न होना: मशहूर अभिनेता की संतान होने के बाद भी उन्होंने खुद अपनी अलग राह बनाई। किसी पहचान की छाया में रहने के बजाय अपनी नई पहचान स्थापित करना सबसे बड़ी सीख है। • हर बारीकी पर खुद नजर रखना: बड़े प्रोजेक्ट्स संभालते हुए भी उन्होंने हर एपिसोड के संपादन को खुद देखा। सफलता पाने और उसे बनाए रखने के लिए काम की छोटी से छोटी बारीकी पर व्यक्तिगत ध्यान देना जरूरी है। https://trendkia.com/tv/chhote-parde-ka-samrajya-khara-karane-daphtara-men-hi-soti-thin-ekta-kapoor-kama-ke-jununa-men-chhaha-mahine-nahin-dekha-tha-ghara-46200 TrendKia — Har trend, sabse pehle.