छोटे पर्दे को कूड़ादान कहे जाने पर बोले चेतन हंसराज, टीवी अभिनेताओं की क्षमता सिनेमाई कलाकारों से किसी मायने में कम नहीं टेलीविजन को कमतर माध्यम बताने वाली टिप्पणी पर चेतन हंसराज ने असहमति जताते हुए कहा कि छोटे पर्दे के कलाकारों में अभिनय की जबरदस्त समझ होती है। टेलीविजन जगत में लंबे समय से सक्रिय अभिनेता चेतन हंसराज ने अपने साथी कलाकार रोहित रॉय की उस टिप्पणी पर स्पष्ट ऐतराज जताया है, जिसमें छोटे पर्दे को एक तरह से कचरा माध्यम करार दिया गया था। बी आर चोपड़ा के पौराणिक धारावाहिक महाभारत में बाल बलराम की भूमिका से पहचान बनाने वाले चेतन ने साफ शब्दों में कहा कि टीवी कलाकारों की अभिनय क्षमता को सिनेमाई कलाकारों के मुकाबले कमतर आंकना पूरी तरह गलत है। हालांकि उन्होंने दोनों के बीच की मित्रता को स्वीकार किया, लेकिन इस बात पर हैरानी जताई कि रोहित के मन में इस तरह का विचार आखिर क्यों आया। कंटेंट में दोहराव जरूर, पर माध्यम को खारिज करना अनुचित चेतन हंसराज ने रचनात्मक स्तर पर आ रही दिक्कतों को रेखांकित करते हुए माना कि छोटे पर्दे पर नयापन थम सा गया है। उनके अनुसार विभिन्न धारावाहिकों में बार-बार एक ही तरह के विषय और कहानियां परोसी जा रही हैं, जिससे रचनात्मकता का स्तर पहले जैसा नहीं दिख रहा। इसके बावजूद उनका कहना है कि इस वजह से पूरे माध्यम को निरर्थक या बेकार करार नहीं दिया जा सकता, क्योंकि आज भी अनगिनत दर्शक धारावाहिकों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। निर्माताओं और चैनलों को नए प्रयोग करने की जरूरत धारावाहिकों के मौजूदा हाल के लिए चेतन ने सीधे तौर पर टीवी चैनलों और शो निर्माताओं के दृष्टिकोण को जिम्मेदार ठहराया। उनका तर्क है कि दर्शक नई सोच और अलग मिजाज की पटकथाओं को अपनाने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं, लेकिन उन्हें वह विविधता उपलब्ध नहीं कराई जा रही। यदि निर्माता नए विचारों के साथ प्रयोग करने का साहस दिखाएं, तो टीवी के पास आगे बढ़ने और खुद को नए सिरे से स्थापित करने की पूरी संभावना मौजूद है। गरिमा और शालीनता हर मंच पर व्यक्तिगत चुनाव रोहित रॉय की ओर से टीवी कलाकारों में शालीनता और स्तर की कमी का मुद्दा उठाए जाने पर भी चेतन ने कड़ा रुख अपनाया। चेतन के मुताबिक हर पेशे में अलग-अलग मिजाज के लोग होते हैं, जहां कुछ कलाकार चर्चा बटोरने के लिए अजीब हरकतें कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि पूरे समुदाय को उसी नजरिए से देखा जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छोटे पर्दे पर काम करने वाले अधिकांश कलाकार बेहद गरिमा और मर्यादा के साथ काम करते हैं, और उन्होंने स्वयं भी हमेशा इसी गरिमा को बनाए रखा है। दबाव में काम करने से निखरती है टीवी कलाकारों की कला चेतन हंसराज ने टीवी कलाकारों के कौशल का जोरदार बचाव करते हुए कहा कि यदि किसी टीवी अभिनेता और फिल्म अभिनेता को एक जैसी पटकथा दी जाए, तो टीवी कलाकार उसे कहीं अधिक सहजता और गहराई से निभा सकता है। छोटे पर्दे पर कलाकारों को बेहद सीमित समय और लगातार शूटिंग के भारी दबाव में किरदार को जीवंत करना होता है, जो उनकी अभिनय क्षमता को मजबूत बनाता है। इसके अलावा उन्होंने फिल्मों में मिलने वाले व्यापक प्रचार और बड़े बजट की चर्चा करते हुए कहा कि फिल्मी सितारों की चमक के पीछे उनकी बड़ी पीआर मशीनरी का हाथ होता है, जिसे टीवी कलाकारों के वास्तविक हुनर से तुलना करके नहीं देखा जाना चाहिए। आगामी प्रोजेक्ट्स में बड़े कलाकारों के साथ दिखेंगे चेतन अभिनय के मोर्चे पर चेतन हंसराज आने वाले दिनों में निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित फिल्म रामायण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देंगे। इस बड़े बजट की पौराणिक फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे प्रमुख सितारे मुख्य किरदारों में नजर आने वाले हैं। इसका आप पर असर छोटे पर्दे और सिनेमाई कलाकारों के बीच की इस रचनात्मक बहस से आम दर्शकों और उभरते कलाकारों पर सीधा असर पड़ता है। • दर्शकों के नजरिए पर: यह बहस टीवी धारावाहिकों में नए और बेहतर कंटेंट की मांग को तेज करती है। दर्शक अब पुराने ढर्रे के शोज की जगह अर्थपूर्ण कहानियों की उम्मीद कर रहे हैं। • उभरते अभिनेताओं पर: छोटे पर्दे पर संघर्ष कर रहे कलाकारों का मनोबल बढ़ता है। उन्हें यह भरोसा मिलता है कि टीवी पर की गई कड़ी मेहनत किसी भी बड़े सिनेमाई प्रोजेक्ट से कम नहीं है। • कंटेंट निर्माण पर: प्रोडक्शन हाउस और चैनल अब पटकथाओं में विविधता लाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। इससे आने वाले समय में टीवी पर अधिक आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शोज देखने को मिल सकते हैं। • कलाकारों के मूल्यांकन पर: यह चर्चा यह स्पष्ट करती है कि पीआर और प्रचार से परे असली अभिनय कला का मूल्य क्या है। दर्शक अब पर्दे के पीछे की मेहनत और प्रस्तुति को ज्यादा गंभीरता से आंकने लगे हैं। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद तब शुरू हुआ जब अभिनेता रोहित रॉय ने एक बातचीत में टेलीविजन को डस्टबिन माध्यम कहा और टीवी कलाकारों के स्तर पर सवाल उठाए। इसके जवाब में उद्योग में दशकों का अनुभव रखने वाले चेतन हंसराज ने अपने माध्यम और साथी कलाकारों के पक्ष में अपना दृष्टिकोण साझा किया। • मूल बयान की प्रतिक्रिया: रोहित रॉय ने छोटे पर्दे की रचनात्मकता और वहां काम करने वाले कलाकारों के तौर-तरीकों की तीखी आलोचना की थी। चेतन हंसराज ने इस सामान्यीकरण पर कड़ी असहमति जताते हुए अपना रुख साफ किया। • कंटेंट का दोहराव: चेतन ने स्वीकार किया कि टीवी चैनलों और निर्माताओं द्वारा एक ही जैसी कहानियां दिखाने से रचनात्मकता में रुकावट आई है। यही ठहराव इस तरह की बहसों और आलोचनाओं की मुख्य वजह बनता है। • पीआर बनाम असली हुनर: चेतन के अनुसार फिल्मों को बड़े बजट और भारी प्रचार का सहारा मिलता है, जिससे उनकी चमक अधिक दिखती है। इसके विपरीत टीवी कलाकार सीमित साधनों और भारी समय के दबाव में लगातार काम करते हैं। सवाल-जवाब 1. रोहित रॉय के बयान पर चेतन हंसराज ने क्या कहा? चेतन हंसराज ने कहा कि टीवी कोई डस्टबिन माध्यम नहीं है और टीवी कलाकारों की अभिनय क्षमता किसी भी फिल्म कलाकार से कम नहीं होती। 2. चेतन हंसराज ने टीवी पर रचनात्मकता में कमी का क्या कारण बताया? उन्होंने इसका जिम्मेदार शो निर्माताओं और चैनलों को बताया, जो दर्शकों को नया कंटेंट देने और प्रयोग करने से बचते हैं। 3. चेतन हंसराज ने टीवी कलाकारों की तुलना फिल्म स्टार्स से कैसे की? उन्होंने कहा कि एक जैसी लाइनों पर टीवी कलाकार अधिक दबाव और कम समय में काम करने की आदत के कारण बेहतर परफॉर्मेंस दे सकते हैं। 4. चेतन हंसराज का अभिनय सफर कहां से शुरू हुआ था? चेतन हंसराज ने अपने करियर की शुरुआत बी आर चोपड़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक महाभारत में बाल बलराम का किरदार निभाकर की थी। 5. चेतन हंसराज किस आगामी फिल्म में नजर आने वाले हैं? वह नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में दिखाई देंगे, जिसमें रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश मुख्य भूमिकाओं में हैं। https://trendkia.com/tv/chhote-parde-ko-kuradana-kahe-jane-para-bole-chetan-hansraj-tivi-abhinetaon-ki-kshamata-sinemai-kalakaron-se-kisi-mayane-men-kama--34977 TrendKia — Har trend, sabse pehle.