# फिल्म निर्माण में उतरीं देबीना बनर्जी, मातृत्व और करियर संतुलन पर रखी अपनी बेबाक राय

> दो बेटियों की मां देबीना बनर्जी अभिनय के बाद अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतर चुकी हैं और अपनी आगामी फिल्म 'तुम मेरे हो' की रिलीज की तैयारियों में व्यस्त हैं। उन्होंने हाल ही में एक साक्षात्कार में मातृत्व, करियर और इंडस्ट्री में महिलाओं को कम आंकने की मानसिकता पर खुलकर चर्चा की।

**Type:** article · **Category:** टीवी · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/tv/film-nirman-me-utri-debina-banerjee-matritva-aur-career-santulan-par-rakhi-apni-bebaq-ray-48660 · **Language:** Hindi
**Tags:** देबीना बनर्जी, तुम मेरे हो, फिल्म प्रोडक्शन, मातृत्व, मनोरंजन समाचार, गुरमीत

अभिनय की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के बाद देबीना बनर्जी अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में एक नई शुरुआत को लेकर खासी चर्चा में बनी हुई हैं। दो बेटियों की मां होने की जिम्मेदारी संभालते हुए वह अपनी आने वाली फिल्म 'तुम मेरे हो' की रिलीज की तैयारियों में पूरी शिद्दत से जुटी हुई हैं। हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने मातृत्व और करियर के बीच के तालमेल के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। उनका स्पष्ट रूप से यह मानना है कि मां बनने के बाद महिलाओं की आंतरिक ताकत और अधिक बढ़ जाती है।

## मातृत्व और असीमित क्षमता

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि एक महिला यदि किसी बात को ठान ले, तो वह अपनी जिंदगी में हर उस चीज को हासिल कर सकती है, जिसकी वह इच्छा रखती है। उनके अनुसार उसके लिए कोई भी सीमा तय नहीं की जा सकती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मातृत्व अपनी जगह पर है और काम अपनी जगह पर है, और इन दोनों मोर्चों को साथ लेकर चलना ही एक महिला की असली ताकत को परिभाषित करता है। जब कोई महिला एक बच्चे को जन्म देती है, तब उसे इस गहरी सच्चाई का अहसास होता है कि उसने एक नई जिंदगी का सृजन किया है। इस दुनिया में इससे बड़ी और महत्वपूर्ण बात भला क्या हो सकती है। मां बनने के बाद महिलाओं को यह बात अच्छी तरह समझ आ जाती है कि वे अंदर से कितनी असीमित हैं और वे जीवन की हर चुनौती का सामना बेहद आसानी से कर सकती हैं।

## फिल्म निर्माण के क्षेत्र में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियां

जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या एक महिला प्रोड्यूसर के तौर पर उन्हें इस इंडस्ट्री में किसी तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो उन्होंने बहुत ही व्यावहारिक जवाब दिया। उनका कहना था कि यह केवल हमारी फिल्म इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हर जगह महिलाओं को लोग थोड़ी कम गंभीरता से लेते हैं। समाज में लोगों को अक्सर ऐसा पूर्वाग्रह रहता है कि अहम फैसले केवल पुरुष ही ले सकते हैं। हालांकि, अब धीरे-धीरे ही सही, लेकिन इस दबी हुई सोच में सकारात्मक बदलाव भी आ रहा है। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनके पति गुरमीत हर कदम पर उनका भरपूर साथ निभाते हैं, जिससे उनके लिए राह की मुश्किलें काफी हद तक कम हो जाती हैं। उनकी निर्माण टीम की दूसरी प्रोड्यूसर भी एक महिला ही हैं। उनका यह दृढ़ विश्वास है कि महिलाएं स्वभाव से बहुत मजबूत होती हैं और वे अपनी बात को बहुत ही साफ और स्पष्ट तरीके से रखना बखूबी जानती हैं।

## छोटी फिल्मों को सिनेमाघर मिलने का कड़ा संघर्ष

फिल्मों की रिलीज और थिएटर्स में मिलने वाली स्पेस के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब कोई छोटी फिल्म किसी बड़ी फिल्म के साथ बॉक्स ऑफिस पर आती है, तो सिनेमाघरों की स्क्रीन मिलना थोड़ा मुश्किल जरूर हो जाता है। जब तक आप अपनी जमीन को मजबूत नहीं करते और अपनी काबिलियत को साबित नहीं कर दिखाते, तब तक आपको संघर्ष का सामना करना ही पड़ता है। बड़ी बजट की फिल्में अक्सर मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन के बहुत सारे शोज और थिएटर्स को ब्लॉक कर लेती हैं। ऐसी कठिन परिस्थितियों में आपको बहुत सूझबूझ और समझदारी से बात करनी पड़ती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपकी फिल्म को अच्छे थिएटर्स में सही समय पर सही शोज मिल सकें। उन्होंने अंत में यह भी जोड़ा कि कम बजट के दायरे में रहकर काम करते वक्त कई छोटी-बड़ी बातों का बहुत बारीकी से ध्यान रखना पड़ता है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह काम नामुमकिन है।

## सवाल-जवाब

### 1. देबीना बनर्जी किस नई भूमिका को लेकर चर्चा में हैं?
देबीना बनर्जी अभिनय के बाद अब बतौर प्रोड्यूसर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में उतर चुकी हैं।

### 2. देबीना बनर्जी की आने वाली फिल्म का नाम क्या है?
उनकी आने वाली फिल्म का नाम 'तुम मेरे हो' है।

### 3. फिल्म निर्माण में उनके साथ और कौन है?
उनकी टीम की दूसरी प्रोड्यूसर भी एक महिला ही हैं।

### 4. छोटी फिल्मों को थिएटर मिलने में क्या परेशानी आती है?
बड़ी फिल्में कई बार अधिकांश थिएटर्स ब्लॉक कर लेती हैं, जिससे छोटी फिल्मों को अच्छी स्क्रीन और शोज पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

## प्रेरणा और सबक
देबीना बनर्जी की यह यात्रा उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो परिवार और करियर दोनों मोर्चों पर एक साथ सफलता हासिल करना चाहती हैं। उनकी यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और अपनों के सहयोग से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।

- **दृढ़ संकल्प:** यदि आप किसी लक्ष्य को ठान लें, तो कोई भी सीमा आपको रोक नहीं सकती है।
- **संतुलन:** मातृत्व और करियर दोनों को साथ लेकर चलना एक महिला की सबसे बड़ी ताकत है।
- **परिवार का सहयोग:** जीवनसाथी का साथ मिलने से करियर की राह की कई मुश्किलें आसान हो जाती हैं।
- **आत्मविश्वास:** महिला अपने अंदर असीमित क्षमता रखती है और हर चुनौती का सामना कर सकती है।

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