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  "type": "article",
  "title": "नवी मुंबई में हाउस हेल्प की बहन को बंधक बनाकर टॉर्चर करने का मामला, संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी ने कराया रेस्क्यू",
  "summary": "संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी ने नवी मुंबई के खारघर में बंधक बनाई गई अपनी हाउस हेल्प की बहन को रेस्क्यू कराया है। पीड़ित महिला को जबरन काम कराने के साथ भूखा रखा जा रहा था।",
  "content": "टीवी अभिनेत्री और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर संभावना सेठ तथा उनके पति अविनाश द्विवेदी ने नवी मुंबई के खारघर क्षेत्र में फंसी अपनी हाउस हेल्प की बहन को सुरक्षित बाहर निकाला है। पीड़ित महिला को एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया था, जहां उससे जबरन काम कराया जा रहा था और शारीरिक व मानसिक टॉर्चर दिया जा रहा था। इस पूरी घटना की जानकारी और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया है।\n\nखारघर में कैसे शुरू हुई प्रताड़ना की घटना\nयह पूरा मामला तब सामने आया जब संभावना और अविनाश के घर काम करने वाली गुड़िया अचानक काम के दौरान रोने लगी। पूछने पर गुड़िया ने रोते हुए बताया कि उसकी बड़ी बहन नवी मुंबई के खारघर में बेहद गंभीर मुसीबत में फंसी हुई है। गुड़िया की बहन को एक एजेंसी के माध्यम से काम पर रखा गया था। अनुबंध के अनुसार उसे केवल 13 बिल्लियों और 5 कुत्तों की देखभाल करने की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, मकान में पहुंचते ही उससे पूरा घरेलू काम, खाना बनाना और साफ-सफाई जबरदस्ती करवाया जाने लगा।\n\nमहिला की कुछ समय पहले ही एक सर्जरी हुई थी, जिसके कारण वह भारी काम करने की स्थिति में बिल्कुल नहीं थी। जब उसने अपनी सेहत का हवाला देते हुए काम छोड़ने की बात कही, तो मकान मालिकों ने उसे जाने देने से साफ इनकार कर दिया। संभावना सेठ ने बताया कि फोन पर बात करते हुए पीड़िता रोने लगी और उसने बताया कि उसे कई दिनों से खाना तक नहीं दिया गया है, जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी।\n\nआईडी कार्ड जब्त और भागने से रोकने की साजिश\nमामले की गंभीरता को देखते हुए संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी ने खुद फोन पर मकान मालिकों से संपर्क किया। उन्होंने पैसों से जुड़े किसी भी विवाद को सुलझाने का आश्वासन दिया और महिला को छोड़ने की प्रार्थना की, लेकिन मकान मालिक नहीं माने। महिला वहां से भाग न सके, इसके लिए उसके पहचान पत्र जब्त कर लिए गए और उसके कपड़े छिपा दिए गए। इसके साथ ही उसे लगातार धमकियां भी दी जा रही थीं।\n\nरेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की कार्रवाई\nस्थिति बिगड़ती देख संभावना और अविनाश ने एक एनजीओ, एजेंसी के प्रतिनिधियों और उस सोसाइटी की एक महिला निवासी के सहयोग से रेस्क्यू की योजना बनाई। सभी लोगों ने मिलकर महिला को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान जब महिला बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी, तब मकान मालिकों ने उसके साथ हाथापाई और मारपीट की, जिससे उसे चोटें भी आईं।\n\nइस घटना के बाद संभावना और अविनाश ने स्थानीय खारघर पुलिस के ढीले रवैये पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि अगर खारघर पुलिस ने समय पर त्वरित कार्रवाई की होती तो महिला के साथ मारपीट की नौबत न आती। इसके बाद कपल ने मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई। बांगुर नगर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए प्राथमिकी (FIR) दर्ज की और सबूत जुटाने शुरू कर दिए। वहीं, गुड़िया ने रोते हुए संभावना और अविनाश का आभार व्यक्त किया और आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।\n\nइसका आप पर असर\nपाठकों के लिए प्रभाव:\n\n• भारत भर में: प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से घरेलू सहायकों को रखते समय स्पष्ट अनुबंध और पुलिस सत्यापन के महत्व को उजागर करता है।\n• मुंबई और नवी मुंबई में: घरेलू कर्मचारियों के अधिकारों के संरक्षण और श्रम शोषण के खिलाफ त्वरित पुलिस कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खारघर में पीड़ित महिला के साथ क्या हुआ था?\nमहिला को नवी मुंबई के खारघर स्थित एक घर में बंधक बनाकर रखा गया था और सर्जरी के बावजूद उससे जबरन पूरा घरेलू काम कराया जा रहा था।\n\n2. संभावना सेठ और अविनाश द्विवेदी ने इस मामले में क्या मदद की?\nउन्होंने अपनी हाउस हेल्प गुड़िया की बहन को बचाने के लिए एनजीओ व स्थानीय लोगों के सहयोग से रेस्क्यू कराया और पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज कराई।\n\n3. पीड़ित महिला को काम पर किस शर्त पर रखा गया था?\nमहिला को शुरुआत में केवल 13 बिल्लियों और 5 कुत्तों की देखभाल करने के लिए रखा गया था, लेकिन बाद में उससे जबरन खाना बनवाया गया और सफाई कराई गई।\n\n4. इस मामले की एफआईआर किस पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई है?\nइस मामले की आधिकारिक प्राथमिकी (FIR) मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणादायक पहलू और सीख:\n\n• कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता: अपने घर या ऑफिस में काम करने वाले सहायकों की व्यक्तिगत परेशानियों को सुनना और सही समय पर मदद करना जीवन बचा सकता है।\n• अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना: अवैध बंधक या शोषण के मामलों में बिना डरे तुरंत पुलिस और एनजीओ की मदद लेनी चाहिए।\n• कानूनी प्रक्रिया का पालन: उत्पीड़न के खिलाफ बांगुर नगर पुलिस स्टेशन जैसी सक्षम जगह पर एफआईआर दर्ज कराना कानूनी न्याय की कुंजी है।",
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  "category": "टीवी",
  "publishedAt": "2026-07-31",
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