# रोहित रॉय की टीवी कॉन्सेप्ट पर टिप्पणी से सहमत हुईं चाहत खन्ना, बताया क्यों पीछे छूट रही है क्रिएटिविटी

> टेलीविजन अभिनेत्री चाहत खन्ना ने रोहित रॉय के बयान के क्रिएटिव पहलू से सहमति जताते हुए कहा कि फिल्मों और ओटीटी की तुलना में टीवी अभी काफी पीछे है। उन्होंने बताया कि मास ऑडियंस की मांग के कारण एक जैसे शोज दोहराए जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** टीवी · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/tv/rohit-roy-ki-tivi-konsepta-para-tippani-se-sahamata-huin-chahatt-khanna-bataya-kyon-pichhe-chhuta-rahi-hai-krietiviti-34130 · **Language:** Hindi
**Tags:** चाहत खन्ना, रोहित रॉय, टेलीविजन, ओटीटी, टीवी शोज, नागिन, मनोरंजन

टेलीविजन जगत की जानी-मानी अभिनेत्री चाहत खन्ना ने अभिनेता रोहित रॉय द्वारा टीवी माध्यम की वर्तमान स्थिति पर की गई टिप्पणी पर अपनी बात रखी है। चाहत खन्ना का मानना है कि यदि कहानी कहने की कला और रचनात्मकता के स्तर पर तुलना की जाए, तो छोटे पर्दे का माध्यम इस समय फिल्मों और ओटीटी से काफी पीछे दिखाई देता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट भी किया कि उन्होंने संबंधित बातचीत का पूरा हिस्सा नहीं देखा है, इसलिए वे पूरी टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया नहीं दे रही हैं, बल्कि केवल रचनात्मक पहलू पर अपना दृष्टिकोण रख रही हैं।

## माध्यम के प्रति सम्मान और टीवी इंडस्ट्री की कड़ी मेहनत
चाहत खन्ना ने अपने करियर की शुरुआत और टीवी माध्यम के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि वे खुद इसी मंच से निकलकर आई हैं और इस प्लेटफॉर्म का बेहद आदर करती हैं। उनके अनुसार, टीवी ने उन्हें एक कलाकार के तौर पर बहुत मजबूती दी है क्योंकि यहां कलाकारों को लंबे समय तक लगातार और बिना रुके शूटिंग करनी पड़ती है। टेलीविजन धारावाहिकों के निर्माण में 12 से 15 घंटे तक काम करना एक आम बात बन चुकी है, जिससे एक अभिनेता के काम करने की क्षमता और सहनशीलता काफी बढ़ जाती है।

## फिल्मों, ओटीटी और टेलीविजन के काम करने के अंदाज में अंतर
अभिनेत्री ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के काम करने के तरीके की तुलना करते हुए कहा कि फिल्मों में रचनात्मकता को बिल्कुल अलग अंदाज में पेश किया जाता है। वहां हर दृश्य और भाव पर अलग तरीके से काम होता है। वहीं अगर डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी ओटीटी की बात की जाए, तो वहां भी पटकथा की बारीकियों, कहानी की डिटेलिंग और नवाचार का स्तर टीवी धारावाहिकों से काफी भिन्न होता है। इसी वजह से दोनों माध्यमों में कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक अलग दायरा मिलता है।

## मास ऑडियंस की पसंद और मार्केट डिमांड का खेल
रोहित रॉय की उस बात से सहमति जताते हुए, जिसमें मौजूदा टीवी शो के कॉन्सेप्ट और नवीनता पर उंगली उठाई गई थी, चाहत ने कहा कि टीवी को कहानी और रचनात्मकता के मामले में अभी एक लंबा रास्ता तय करना है। उन्होंने इसके पीछे का मुख्य कारण बताते हुए कहा कि टेलीविजन धारावाहिकों का निर्माण बड़े पैमाने पर मौजूद मास ऑडियंस को ध्यान में रखकर किया जाता है। दर्शक जिस तरह की कहानियां देखना पसंद करते हैं, निर्माता उसी मांग को पूरा करने के लिए कंटेंट तैयार करते हैं। यह पूरी तरह से मनोरंजन जगत के व्यापारिक ढांचे का हिस्सा है, जहां अधिक देखे जाने वाले कंटेंट को बार-बार दोहराया जाता है।

## शोज के ऑफर और व्यक्तिगत जुड़ाव पर चाहत की राय
अपने निजी करियर के अनुभवों को साझा करते हुए चाहत खन्ना ने बताया कि उन्हें अक्सर ऐसे टीवी प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव मिलते हैं, जिनसे वे भावनात्मक या रचनात्मक तौर पर जुड़ाव महसूस नहीं कर पाती हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'नागिन' जैसे काल्पनिक धारावाहिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे इस तरह के विषयों से व्यक्तिगत रूप से खुद को जोड़ नहीं पाती हैं। उनका मानना है कि यदि कोई अभिनेता रचनात्मक स्वतंत्रता और नई सोच की तलाश में रहता है, तो उसके लिए टीवी के मौजूदा घिसे-पिटे कॉन्सेप्ट्स में खुद को ढालना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। चाहत ने यह भी स्वीकार किया कि यदि वे ऐसे प्रचलित शोज का हिस्सा बनतीं तो शायद उनका करियर व्यावसायिक तौर पर और आगे जा सकता था, परंतु वे केवल उसी काम को प्राथमिकता देती हैं जो उन्हें अंदर से संतुष्ट करे।

## रोहित रॉय की मूल टिप्पणी और विवाद की पृष्ठभूमि
इस पूरे मामले की शुरुआत रोहित रॉय के उस साक्षात्कार से हुई थी जिसमें उन्होंने टेलीविजन धारावाहिकों की गुणवत्ता और फिल्मों के अंतर पर अपनी बेबाक राय रखी थी। टीवी के चर्चित चेहरों में गिने जाने वाले रोहित रॉय ने कहा था कि इस समय टीवी पर आने वाला ज्यादातर कंटेंट बहुत जल्दी भुला दिया जाता है और कई धारावाहिकों में एक ही तरह के विषयों की पुनरावृत्ति होती है। उन्होंने टेलीविजन को एक 'डस्टबिन मीडियम' करार देते हुए इसकी रचनात्मक गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

## इसका आप पर असर
दर्शकों और कलाकारों के लिए इस पूरे विवाद का सीधा संबंध टेलीविजन पर परोसे जाने वाले कंटेंट की गुणवत्ता और उसके भविष्य से है।

- **दर्शकों के लिए:** जब तक दर्शक नए प्रयोगों को नहीं अपनाएंगे, टीवी पर सास-बहू और सुपरनेचुरल कहानियां ही दोहराई जाती रहेंगी। बेहतर कंटेंट देखने के लिए दर्शकों का रुझान लगातार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ रहा है।
- **टीवी एक्टर्स के लिए:** टीवी कलाकारों को काम करने के लिए 12 से 15 घंटे की लंबी शिफ्ट्स करनी पड़ती हैं, जिससे उन पर शारीरिक और मानसिक दबाव रहता है। क्रिएटिव संतुष्टि चाहने वाले एक्टर्स के लिए टीवी में सीमित विकल्प रह जाते हैं।
- **कंटेंट मेकर्स के लिए:** मेकर्स टीआरपी और बिजनेस मॉडल के दबाव में आकर सुरक्षित और आजमाए हुए फॉर्मूलों पर काम करते हैं। इसका सीधा असर टीवी इंडस्ट्री की वैश्विक और रचनात्मक साख पर पड़ता है।
- **मनोरंजन उद्योग में:** फिल्मों और ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच टीवी को अपने अस्तित्व के लिए नए विषयों पर सोचना होगा। यदि बदलाव नहीं हुआ, तो युवा दर्शक पूरी तरह से टीवी से दूरी बना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
रोहित रॉय और चाहत खन्ना के बयानों ने टेलीविजन उद्योग के भीतर लंबे समय से चल रहे क्रिएटिव असंतोष और व्यावसायिक दबाव को उजागर किया है।

- **कमर्शियल दबाव और टीआरपी की दौड़:** टेलीविजन चैनल पूरी तरह से विज्ञापनों और रेटिंग्स पर निर्भर होते हैं, जिसके कारण मेकर्स वही कहानियां दिखाते हैं जिन्हें बड़े पैमाने पर देखा जाता है। जोखिम उठाने से बचने के लिए सफल फॉर्मूलों को बार-बार दोहराया जाता है।
- **ओटीटी और सिनेमा की बढ़ती गुणवत्ता:** डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर कहानियों की डिटेलिंग और वैरायटी ने दर्शकों और कलाकारों दोनों के सोचने का नजरिया बदला है। इसकी तुलना में टीवी का कंटेंट पुराना और सीमित लगने लगा है।
- **हेक्टिक शूटिंग शेड्यूल:** रोजाना एपिसोड प्रसारित करने के दबाव के चलते 12 से 15 घंटे की लगातार शूटिंग करनी पड़ती है। इतने कम समय में क्रिएटिविटी और बारीकियों पर ध्यान देने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. चाहत खन्ना ने रोहित रॉय के किस बयान का समर्थन किया है?
चाहत खन्ना ने रोहित रॉय की इस बात से सहमति जताई है कि कहानी और क्रिएटिविटी के मामले में टीवी अभी फिल्मों और ओटीटी से काफी पीछे है।

### 2. रोहित रॉय ने टीवी को लेकर क्या टिप्पणी की थी?
रोहित रॉय ने टीवी को एक 'डस्टबिन मीडियम' करार दिया था और कहा था कि इसका अधिकांश कंटेंट आसानी से भुला दिया जाता है और दोहराया जाता है।

### 3. टीवी धारावाहिकों में कलाकार रोजाना कितने घंटे काम करते हैं?
चाहत खन्ना के अनुसार टीवी में 12 से 15 घंटे तक लगातार शूटिंग करना एक सामान्य बात बन चुकी है।

### 4. चाहत खन्ना ने किस तरह के शोज से जुड़ने में असमर्थता जताई?
उन्होंने 'नागिन' जैसे काल्पनिक और सुपरनेचुरल धारावाहिकों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे ऐसे कॉन्सेप्ट्स से व्यक्तिगत रूप से कनेक्ट नहीं कर पाती हैं।

### 5. टीवी पर एक ही तरह के शोज बार-बार क्यों बनाए जाते हैं?
चाहत खन्ना के मुताबिक टीवी का कंटेंट बड़े पैमाने पर मास ऑडियंस की मांग के आधार पर तैयार होता है, जो पूरी तरह बिजनेस का हिस्सा है।

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