# अखिलेश यादव के कोर वोट बैंक पर असदुद्दीन ओवैसी की नजर, गठबंधन ठुकराए जाने के बाद सपा के खिलाफ छेड़ा सियासी अभियान

> विपक्षी गठबंधन में जगह न मिलने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। श्रावस्ती से शुरुआत कर वह आजमगढ़ और पश्चिमी यूपी तक रैलियां कर मुस्लिम मतदाताओं को साधने में जुटे हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तर प्रदेश · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-ke-kora-vota-bainka-para-asaduddin-owaisi-ki-najara-gathabndhana-thukarae-jane-ke-bada-sp-ke-khilapha-chhera-siyasi-42929 · **Language:** Hindi
**Tags:** असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी, उत्तर प्रदेश राजनीति, एआईएमआईएम, मुस्लिम वोट बैंक

उत्तर प्रदेश के चुनावी अखाड़े में असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी रणनीति बदलते हुए मुख्य विपक्षी दल पर तीखे राजनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं। अयोध्या से करीब 100 किलोमीटर के फासले पर स्थित श्रावस्ती में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख ने सत्ताधारी दल के बजाय समाजवादी पार्टी को अपने निशाने पर रखा। उनका सीधा आरोप है कि अखिलेश यादव अल्पसंख्यक समुदाय से पूरा समर्थन तो ले लेते हैं, मगर उनके बुनियादी मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं। मदरसों की तालाबंदी और घरों पर चलने वाली प्रशासनिक बुलडोजर कार्रवाई जैसे गंभीर मामलों में भी सपा नेतृत्व कोई कड़ा विरोध दर्ज नहीं कराता।

## दरकिनार किए जाने के बाद ओवैसी की नई रणनीति

इस तीखे राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि विपक्षी खेमे में सीट बंटवारे और साझेदारी से जुड़ी हुई है। ओवैसी ने विपक्षी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनने की इच्छा जताई थी और इसके लिए औपचारिक आग्रह करते हुए 2 अक्टूबर तक की समयसीमा तय की थी। यह मियाद पूरी होने के बावजूद अखिलेश यादव की ओर से कोई संवाद स्थापित नहीं किया गया। गठबंधन के दरवाजे बंद होने के बाद अब मजलिस प्रमुख ने सीधे मैदान में उतरकर सपा के पारंपरिक जनाधार में सेंध लगाने का फैसला किया है।

## अवध से पूर्वांचल और पश्चिम तक रैलियों का खाका

राज्य के अलग-अलग अंचलों में पकड़ बनाने के लिए ओवैसी ने सघन प्रचार अभियान तैयार किया है। अवध के श्रावस्ती से इस दौरे की शुरुआत हो चुकी है और आगामी रविवार को उनका अगला पड़ाव पूर्वांचल का आजमगढ़ होगा। इसके तुरंत बाद वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों का रुख करेंगे, जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की तादाद चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। राज्य के चुनावी गणित में यह वर्ग बेहद निर्णायक माना जाता है, इसलिए ओवैसी की सक्रियता सपा खेमे में भारी असहजता पैदा कर रही है।

## आंकड़ों का खेल और सपा की बढ़ती चिंता

सपा की इस घबराहट की मुख्य वजह हालिया चुनावों के आंकड़े हैं, जिनमें अल्पसंख्यक समुदाय का एकतरफा झुकाव दिखा था। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा गठबंधन को 79 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं का साथ मिला था, जबकि 2024 के आम चुनाव में कांग्रेस और सपा के संयुक्त मोर्चे को यह समर्थन बढ़कर 92 फीसदी तक पहुंच गया था। यदि ओवैसी इस मजबूत वोट बैंक से वोटों का एक छोटा हिस्सा भी अपनी ओर खींचने में सफल रहते हैं, तो सत्ता में वापसी की उम्मीद पाले अखिलेश यादव का चुनावी समीकरण पूरी तरह बिखर सकता है।

## हिंदुत्व और सांस्कृतिक मुद्दों पर योगी आदित्यनाथ की किलेबंदी

विपक्षी दलों के बीच मुस्लिम मतों की इस खींचतान के समानांतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुसंख्यक मतदाताओं को एकजुट रखने की पिच मजबूत कर रहे हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आगाह किया कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर विभाजनकारी ताकतें सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक फैसलों के जरिए सांस्कृतिक अस्मिता को उभारने की कड़ी में उन्होंने भदोही जनपद का नाम बदलकर सद्गुरु संत रविदास के नाम पर समर्पित करने की घोषणा भी की है।

## इसका आप पर असर
विपक्षी दलों में मतभेदों और नए चुनावी गठजोड़ से उत्तर प्रदेश की चुनावी दिशा पर सीधा असर पड़ेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन में बिखराव से अन्य राज्यों में भी साझेदारों के बीच सीट बंटवारे पर दबाव बढ़ सकता है। मतदाता विभिन्न दलों के रुख के आधार पर अपने स्थानीय विकल्प तय कर सकते हैं।
- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य के अल्पसंख्यक और क्षेत्रीय मतदाताओं के सामने अब सपा के अलावा अन्य विकल्प भी सक्रिय रूप से सामने आ रहे हैं। इससे आगामी चुनावों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है।
- **चुनावी समीकरण:** मतों के संभावित विभाजन से कई संवेदनशील विधानसभा सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम रह सकता है। आम जनता के स्थानीय मुद्दे अब राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं में अधिक प्रमुखता पा सकते हैं।
- **सामाजिक विमर्श:** विभिन्न नेताओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों से राज्य में विकास, न्याय और सांस्कृतिक अस्मिता पर सार्वजनिक बहस तेज होगी। नागरिक अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार राजनीतिक वादों का मूल्यांकन कर सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
विपक्षी गठबंधन में शामिल होने की मियाद समाप्त होने के बाद यह सियासी तनातनी पैदा हुई है।

- **सीट साझेदारी की विफलता:** ओवैसी ने विपक्षी मोर्चे का हिस्सा बनने के लिए 2 अक्टूबर की समयसीमा रखी थी, जिस पर सपा की ओर से कोई पहल नहीं की गई। संवाद न बनने के चलते एआईएमआईएम ने स्वतंत्र रूप से रैलियां करने का फैसला किया।
- **वोट बैंक पर निर्भरता:** वर्ष 2022 और 2024 के चुनावों में सपा को भारी अल्पसंख्यक समर्थन मिला था, जिससे उस पर निर्भरता बढ़ गई थी। ओवैसी इसी वर्ग के असंतोष और उपेक्षा के मुद्दों को अपनी राजनीति का केंद्र बना रहे हैं।
- **समानांतर रणनीतियां:** सत्ताधारी दल अपनी बहुसंख्यक और सांस्कृतिक पिच को मजबूत कर रहा है, जिससे विपक्ष में मतों के ध्रुवीकरण की होड़ तेज हो गई है। आगामी दिनों में अन्य अंचलों में प्रचार तेज होने से यह तनातनी और बढ़ने की संभावना है।

## सवाल-जवाब

### 1. असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपना प्रचार अभियान कहां से शुरू किया?
उन्होंने अयोध्या से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित श्रावस्ती में जनसभा करके अपने प्रचार अभियान की शुरुआत की।

### 2. ओवैसी ने समाजवादी पार्टी पर क्या प्रमुख आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अल्पसंख्यक वोट लेने के बाद खामोश हो जाती है और बुलडोजर कार्रवाई तथा मदरसे बंद होने जैसे मुद्दों पर कड़ा विरोध नहीं करती।

### 3. विपक्षी गठबंधन को लेकर ओवैसी ने क्या समयसीमा तय की थी?
ओवैसी ने विपक्षी गठबंधन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से 2 अक्टूबर तक की समयसीमा निर्धारित की थी।

### 4. आगामी रविवार को ओवैसी का अगला चुनावी कार्यक्रम कहां तय है?
आगामी रविवार को ओवैसी पूर्वांचल के आजमगढ़ जिले का दौरा करेंगे और उसके बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश जाएंगे।

### 5. हालिया चुनावों में सपा को कितना मुस्लिम समर्थन मिला था?
सपा गठबंधन को 2022 के विधानसभा चुनाव में 79 प्रतिशत और 2024 के आम चुनाव में 92 प्रतिशत मुस्लिम मत मिले थे।

### 6. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस जिले का नाम बदलने की घोषणा की है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम बदलकर सद्गुरु संत रविदास के नाम पर रखने का ऐलान किया है।

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